21 Dec 2015

हनुमंत विद्या,भाग-1.

1.हनुमानजी इस धरती पर अजर और अमर हैं। हर दिन हर पल अपने भक्तों के प्राण हैं।

2. श्री हनुमाजी की लीला एवं शक्ति अपरम्पार है। हनुमान जी ऐसे देवता हैं जिनको यह वरदान प्राप्त है जो भी भक्त हनुमान जी ऐसे देवता हैं जिनको यह वरदान प्राप्त हैं जो भी भक्त हनुमान जी की शरण में आयेगा उसका कलियुग कुछ भी नहीं बिगाड़ पायेगा।

3. आज यदि कोई शीघ्रता से प्रसन्न होने वाला है तो व हनुमान जी ही हैं जिन भक्तों ने पूर्ण भाव एवं निष्ठा से हनुमान जी की भक्ति की है, उनके कष्टों को हनुमान जी ने शीघ्र ही दूर किया है। ऐसे भक्तों को जीवन में कभी भी कठिनाइयों का सामना नहीं करना पड़ता उनके संकटों को हनुमान जी स्वयं हर लेते हैं।

4. गोस्वामी तुलसीदास जी महाराज के कथानुसार उनकी सेवा में कोई विशेष प्रयास करना नहीं पड़ता। ये गुणगान करने, नमस्कार करने, स्मरण करने तथा नाम जपने मात्र से प्रसन्न होकर सेवकों का अभीष्ट हितसाधन सम्पन्न करने को सदैव तत्पर रहते हैं। जिसके हृदय में इनकी विकराल मूर्ति निवास कर लेती है, स्वप्न में भी उसकी छाया के पास भी संताप-पाप निकट नहीं आ सकते।

हनुमान जी की उपासना भारत में कोने-कोने से लेकर सम्पूर्ण एशिया (जावा-सुमित्रा’ लंका, थाई, मारीशस, बर्मा अफगानिस्तान, जापान आदि) से लेकर यूरोप व समस्त विश्व में होती है।सप्तऋषि जिन्हें वरदान प्राप्त है कि चिरंजीवी रहेंगे- (अश्ववत्थामा, बलि, व्यास, हनुमान, विभीषण, शक, कृपाचार्य परशुराम) इनमें से एक हनुमान है। तंत्र शास्त्र के अनुसार सात करोड़ राम मंत्रों का जाप करने के बाद कहीं साधकों को हनुमान दिखाई देते हैं। हनुमान वेग में वायु देवता तथा गति में गरुड़ देवता के सक्षम हैं। भगवान के उत्तर दिशा के पार्षद कुबेर की गदा इन पर रहती है जिसमें अधर्म करने को दण्ड देने के अधिकारी हैं। इनकी गदा संग्राम में विजय दिलाने वाली हैं अतः साधकों को धर्मच्युत व्यवहार के लिए मारुति की गदा का भी ध्यान व पूजन अभीष्ट है। यदि साधक स्वयं (अनुचित) मार्ग से हनुमान की प्रार्थना करता है तो कभी साधना सफल नहीं होगी। यदि साधक मृत्युतुल्य कष्ट से ग्रस्त हो, तो मंगलमूर्ति का ध्यान हाथ में संजीवनी का पहाड़ लिये, साथ में सुषेण वैद्य का भी ध्यान करना चाहिये।


आज का यह साधना उन व्यक्तियों के लिये है जिन्हे बार बार रोगो से ग्रसीत होना पड़ता है,जिनको व्यापार मे घाटा हो रहा है,जिनके घर मे कलह हो,जिनको शिक्षा मे समस्या हो,किसी पर टोना-टोटका किया हुआ हो तो इस मंत्र साधना से दिये हुए परेशानी से मुक्ति प्राप्त होता है। यह साधना अनुभूत है और शिघ्र फलदायक है।




साधना विधान-

ग्यारह गेहु के आटे के दिपक बनाये जिसमें चार बत्तीया एक ही दिपक मे प्रज्वलित किया जा सके और सरसो का तेल होना चाहिये।अब हनुमानजी के चित्र/विग्रह के सामने ग्यारह दिपक प्रज्वलित करे,सुगंधित धूप जलाये और एक नारियल चढाये।अब मंत्र को 108 बार बोलकर तेल और सिंदुर का तिलक स्वयं करें। साधना शनिवार/मंगलवार को करे,समय आसन वस्त्र दिशा का कोई बंधन नही है। साधना पुर्ण होने के बाद नारियल को तोड़कर प्रसाद स्वरुप मे हनुमानजी को भोग लगाये और कुछ नारियल बाट दे ।

साधना पुर्ण होने के बाद धिरे-धिरे आपको अनुभूतियाँ होगा और यह विधान 3-4 बार करने का प्रयास करे तो आपके सभी काम हो सकते है।

मंत्र फोटो मे दिया हुआ है।



आदेश.......