( मंत्र Whatsapp पर दिया जाएगा no. है +918421522368 )
1-मनोकामना पूर्ति
2-रोग निवारण
3-वशीकरण
4-विवाह होता है
5-नॉकरी प्राप्त होती है
6-भगवती की कृपा
7-धनलाभ.
जीवन की प्रत्येक क्रिया तन्त्रोक्त क्रिया है॰यह प्रकृति,यह तारा मण्डल,मनुष्य का संबंध,चरित्र,विचार,भावनाये सब कुछ तो तंत्र से ही चल रहा है;जिसे हम जीवन तंत्र कहेते है॰जीवन मे कोई घटना आपको सूचना देकर नहीं आता है,क्योके सामान्य व्यक्ति मे इतना अधिक सामर्थ्य नहीं होता है के वह काल के गति को पहेचान सके,भविष्य का उसको ज्ञान हो,समय चक्र उसके अधीन हो ये बाते संभव ही नहीं,इसलिये हमे तंत्र की शक्ति को समजना आवश्यक है यही इस ब्लॉग का उद्देश्य है.
आज का ये पोस्ट उन सभी के लिए है जो अपना भविष्य बेहतर बनाना चाहते है । सभी को स्वयं के भविष्य का चिंता होना चाहिए ताकि जीवन मे दुख और दर्द कम हो । मैने जीवन मे ऐसे कई बेकार साधक देखे है जो सिर्फ निंदा करने में तो कोई बुराइया करने में अपना समय बर्बाद कर देता है और ये सब कुछ एक अच्छे साधक के लक्षण नही होते है । कुछ मूर्ख किसी अच्छे गुरु से दीक्षा प्राप्त करके स्वयं को विशेष समझने लगते है और दूसरों की बुराइया करने में अपने गुरु के महानता को दाग लगा देते है । मैं ये बात अच्छेसे जानता हूं व्हाट्सएप जैसे तांत्रिक ग्रुपो में मेरे आर्टिकल लोग अपने नाम से चला रहे है,कोई बात नही । ये भी एक अच्छा ही कार्य है परंतु कम से कम इतना तो याद रखो "जिस दिन उस आर्टिकल पर तुमसे कोई सवाल पूछे तो उसे क्या जवाब दोगे?",इतना तुम्हे समझ होता तो तुम लोग चोरी ही क्यों करते ।
मेरे ईमेल आई.डी. में "निखिल" नाम लिखा हुआ है तो इसमें भी लोगो को समस्या है । आज तक इसका जवाब मुझे किसी से नही मिला के इन लोगो को निखिल नाम ईमेल आई.डी. में रखने में क्या समस्या है । यहां पर निखिल नाम से कुछ भी नही लिखा जाता है और नाही इस ब्लॉग पर निखिल नाम के प्रोडक्ट बेचे जाते है । निखिल नाम के प्रोडक्ट फेसबुक पर बेचने वालों की कोई कमी नहीं है और निखिल नाम पर दीक्षा देने वाले भी फेसबुक पर आझाद घूम रहे है,आजकल तो कुछ लोग निखिल नाम पर साधना शिबिर भी ले रहे है । शिबिर लेने का हक सिर्फ जोधपुर में सुरक्षित है परंतु आज उनके शिष्य ही गुरु बन गए है,मैं आज फिर से एक बार इस ब्लॉग के माध्यम से लिखना चाहता हूँ "बुरी नजर वाले तेरा मुह काला",वैसे तो ये ट्रक पर ज्यादा लिखा जाता है परंतु कुछ मूर्खो ने अपने नाम को इज्जत देने के लिये मेरे नाम का इस्तेमाल करके बुराइया करने का संकल्प लिया है । माताराणी से प्रार्थना करता हु के तुम्हारा संकल्प पूर्ण होता रहे और तुम्हे इतनी तो बुद्धि मीले के तुम लोग मेरा चिंतन भगवान से ज्यादा ना करो ।
कई लोग मुझे कहते है,हमे आपसे गुरुदीक्षा लेना है परंतु साधक मित्रो मैं यह बात आज साफ साफ लिख देता हूं "मैं गुरुदीक्षा नही देता हूँ,मुझे गुरु बनने का कोई लालच नही है" । मेरा आज तक कोई भी एक शिष्य नही है,जब भी मुझे दीक्षा हेतु फोन आते है तो मैं उन्हें यही कहेता हु "ये रहा गुरुमंत्र और आज से तुम्हारे गुरु जो है वह गोरखनाथ जी है" , यह कार्य निशुल्क होता है । मेरे बारे में मूर्खो ने कही सारे वहम पाल के रखे है जो सही नही है,ये बात मैं उन लोगो को समझा रहा हु जो गलत सोच रखते है और सुबह-शाम फेसबुक की सेवा करते है । कुछ पालना ही है तो मेरे नाम से कुत्ता ही पालो,मुझे सही में अच्छा महसूस होगा परंतु वहम मत पालो । ये वहम पालने वाले लोग हाथ मे चूड़ियां पहनकर चुगलियां करते रहते है और स्वयं को तंत्र की कुछ किताबे पढकर प्रकांड तांत्रिक समजते है । चलिये अब गधो पर बात करने से अच्छा आगे बढ़ते हुए हम लोग साधना पर बात करते है ।
यह साधना ग्रहण काल मे शुरू करने से सफलता निच्छित मानी जाती है । इस साधना को प्रामाणिकता से करो तो तुम्हारा जीवन वर्तमान जीवन से बेहतर हो जाएगा, आज मैं सभी को चुनौती देकर बोल रहा हु "यह सरस्वती साधना है,इसको संपन्न कर ही लो तो बहोत कुछ अच्छा होगा " ।
साधना के फायदे भी लिख देता हूं,नही तो चंद्रग्रहण के अवसर पर यह साधना आप लोग नही करोगे । इस साधना से स्मरणशक्ति बढ़ती है,व्यवसाय में वृद्धि होती है,जिन्हें सरकारी नोकरी चाहिए उनके लिये यह साधना अमृत है,इस साधना से स्वयं का भूत-भविष्य-वर्तमान भी देखा जा सकता है और माताराणी ने चाहा तो दूसरो का भी देख सकते हो । यह साधना मैं अपने मानसपुत्र सागर मशरू से करवाना चाहता था परंतु वो अभी बच्चा है 16 वर्ष का और चमत्कार के पीछे पागल है । जब के इसी साधना के भरोसे उसने दसवीं कक्षा में अच्छे अंक प्राप्त किये परंतु वह इस साधना के फायदों से अब तक अनजान था,अब नही रहेगा और साथ मे एक और व्यक्ति वीर राजपूत ये साधना कर ले तो अपने जीवन के लक्ष्य को प्राप्त कर लेगा । शायद ये दोनों यह साधना पढ़े तो मुझे खुशी होगी,इन दोनों के साथ-साथ आप सभी यह साधना संपन्न करें ।
मैं गारंटी के साथ बोल रहा हूं,यह साधना जो भी करेगा उसको फायदा ही हो सकता है और किसी भी प्रकार का कोई नुकसान नही हो सकता है । इस साधना से इच्छाएं भी पुर्ण हो सकती है साथ मे वशिकरण क्रिया भी संभव है मेरे प्यारे प्रेम के रोगियों । वैसे तो मैं वशिकरण क्रिया के खिलाफ हु परंतु क्या करे प्रेमवीरो का दिल भी रखना पड़ता है,जिस दिन आज ये प्रेम के रोगी किसी को वश में करके विवाह करना चाहते है,भविष्य में इनके ही लड़की/लड़के को कोई भी वश कर सकता है और वह लड़का/लड़की बुरे भी हो सकते है । शायद इन्हें तब ये क्रिया बुरी लग सकती है,आज तो सभी प्रेमरोगी/प्रेमवीर प्यार के नशे में पागल हो चुके है तो कुछ लोग अपने अय्याशी के लिए किसी को वश में करना चाहते है । ये सब कुछ अच्छा नही है,सबके पास निर्णय लेने का हक है अब अगर आपका पार्टनर ब्रेक अप कर रहा है तो ये उसकी आझादी है । आप उसको वशिकरण क्रिया से बंदी बनाकर क्या करोगे,कोई इससे ख़ुश नही रह सकता है । हा, मैं मानता हूं "आपको इसमे दर्द हुआ तकलीफ हुई परंतु जबरदस्ती करके क्या हासिल करोगे,प्यार?",जबरदस्ती प्रेम को प्राप्त करना फायदेमंद साबित नही होता है । अगर आपका पार्टनर आपसे भटक गया होतो वशिकरण क्रिया अवश्य करना ही चाहिए,यह अच्छी बात है ।
शायद अब ज्ञान की बाते बहोत हो गयी,अब सिर्फ साधानात्मक चिंतन होना चाहिए और मेरा भी चिंतन ना करो । 7 ऑगस्ट को चंद्र ग्रहण है जो हमारे देश मे दिखेगा,यह खंडच्छाया युक्त ग्रहण है परन्तु इसका भी महत्व माना जायेगा । ग्रहण रात्रि में 9.20 मिनट पर शुरू होगा और 2.20 मिनट पर समाप्त होगा,मतलब यह ग्रहण 5 घंटे तक का है । चंद्रग्रहण पर एक बार मंत्र जाप करने का अर्थ है एक लाख बार जाप करना,तो इसीलिए हम जो भी मंत्र साधना का आवश्यकता हो वह मंत्र जाप कर लेना चाहिए ।
मंत्र:-
।। ॐ श्रीं ह्रीं हसौ: हूं फट निलसरस्वत्यै स्वाहा ।।
Om shreem hreem hasouh hoom phat nilasaraswatyai swaahaa
ग्रहण काल मे मंत्र का ज्यादा से ज्यादा जाप करे,दिशा उत्तर,आसन-वस्त्र सफेद या नीले रंग के हो,माला स्फटिक या नीले हकीक का हो और माला नही हो तो भी बिना गिनती किये जाप कर सकते हो ।
ग्रहण साधना के बाद नित्य 21 दिनों तक रात्री में 9 बजे के बाद 11 माला जाप या फिर 30 मिनट जाप किया करे ।
हो सके तो इस आर्टिकल के लिंक को अपने व्हाट्सएप ग्रुप और फेसबुक ग्रुप या प्रोफाइल पर शेयर करे ताकि चंद्रग्रहण के उच्चतम समय का और इस साधना का सभी लाभ उठा सके । यह आर्टिकल जनकल्याण हेतु है और इसको आप शेयर करके सभी लोगो की मदत करेगे यही मैं आप सभी से उम्मीद रखता हूं । जिन लोगो को लिंक शेयर करने में शर्म आता है वह इसमें ना पड़े,आगे आपकी मर्जी.......
आदेश.........
ग्रहण का धार्मिक महत्व:-
ग्रहण काल में सूतक के नियम लगने के कारण ग्रहण के बाद ही शुभ कर्म जेसे पूजा, अनुष्ठान, दान आदि कार्य करने लाभदायक होते हैं। सूतक काल की अवधि में मंत्र , जप, तप इत्यादी सिद्धि के कार्य किये जाते हैं। परंतु आजके भौतिकता वादी वैज्ञानिक युग में आधुनिकता कि दौड में अंधि दौड लगाने वाले व्यक्ति ग्रहण काल के प्रभाव को नकार देते हैं।ग्रहण काल मे मंत्र जाप करने से निच्शित सिद्धियां प्राप्त होती है क्युके ग्रहण काल मे किये जाने वाले मंत्र जाप का फल कम से कम 100 गुणा ज्यादा प्राप्त होता है।
कोइ भी शाबर मंत्र जगाना हो या सिद्ध् करना हो तो ग्रहण काल से अधिक शुभ सिद्धिप्रद समय दुसरा कोइ नही होता है। जो साधक ग्रहण काल मे साधना नही करता है उसे स्वयं को साधक नही मानना चाहिये।हम जितने भी मंत्रो का जाप एक वर्ष मे करते है और उनमे सफलता प्राप्त करते है,उन मंत्रो का जाप ग्रहण काल मे किया जाये तो वह मंत्र कइ वर्षों तक चैतन्य रहेते है।
मैने 15 वर्षों मे ग्रहण काल मे अब तक 70 से ज्यादा मंत्रो को सिद्ध किया है और उनका अचुक प्रभाव भी मैने कइ बार देखा है।ग्रहण काल मे किये जानेवाला मंत्रसिद्धि कभी विफल नही होता है और शिघ्र लाभप्रद होता है।यह अवसर बहोत कम आता है इसलिये येसे महान अवसर का सभी को लाभ उठाना आवश्यक है।
यहा पर 2016 मे होनेवाले ग्रहण काल का समय दे रहा हु जिसे जानना आपके लिये आवश्यक है।
सुर्यग्रहण-9 मार्च 2016
8/9 मार्च 2016 को सूर्य ग्रहण भारत में समेत यह ग्रह दक्षिणी पूर्वी एशिया, थाइलैण्ड, इण्डोनेशिया, दक्षीणी कोरिया, जपान, सिंगापुर और आस्ट्रेलिआ में दिखाई देगा. साथ ही इस ग्रह का सम्पूर्ण घटनाक्रम सुमार्ता बोरनियो, इण्डोनेशिया और उत्तर प्रशांत महासागर में दिखाई देगा.
इस ग्रहण का स्पर्श प्रातः 5:39 मिनट पर मध्यकाल 6:05 तथा इसका मोक्ष प्रातः 6:52 मिनट पर होगा । इस ग्रहण का पर्वकाल 01:13 मिनट रहेगा । इस ग्रहण का सूतक 8 मार्च 2015 को सायंकाल 05:10 से लगेगा ।
चंद्रग्रहण-23 मार्च 2016
प्रच्छाया में कोई ग्रहण नहीं है।
चन्द्रोदय के बाद उपच्छाया ग्रहण खाली आँख से नहीं दिखेगा।
चन्द्रोदय - 18:36 बजे होगा।
उपच्छाया से पहला स्पर्श - 15:11
परमग्रास चन्द्र ग्रहण - 17:17
उपच्छाया से अन्तिम स्पर्श - 19:24
उपच्छाया की अवधि - 04 घण्टे 13 मिनट्स तक होगा।
सुर्यग्रहण-1 सितंबर 2016
इस ग्रहण का स्पर्श प्रातः 6:13 मिनट पर मध्यकाल 09:01 मिनट तथा इसका मोक्ष प्रातः 11:58 मिनट पर होगा । इस ग्रहण का पर्वकाल 5:45 मिनट रहेगा । इस ग्रहण का सूतक 8 मार्च 2015 को सायंकाल 05:10 से लगेगा ।
ग्रहण दर्शनीय नहीं होगा।
1 सितंबर 2016 को लगने वाला कंकण सूर्य ग्रहण भारत में नहीं देखा जा सकेगा.यह ग्रहण केवल दक्षिणी एशिया के देशों, पूर्वी आस्ट्रेलिया, अफ्रीका के देशों, एटलांटिक और अंटार्टिका में दिखाई देगा.
चंद्रग्रहण-17 सितंबर 2016
प्रच्छाया में कोई ग्रहण नहीं है।
उपच्छाया ग्रहण खाली आँख से नहीं दिखेगा।
उपच्छाया से पहला स्पर्श - 22:27 - 16th, सितम्बर को
परमग्रास चन्द्र ग्रहण - 00:25
उपच्छाया से अन्तिम स्पर्श - 02:24
उपच्छाया की अवधि - 03 घण्टे 56 मिनट्स तक होगा।
आध्यात्मिक दृ्ष्टिकोण:-
यह तो स्पष्ट है कि सूर्य/चंद्र में अद्भुत शक्तियाँ निहित हैं और ग्रहण काल में सूर्य/चंद्र अपनी पूर्ण क्षमता से इन शक्तियों को, इन रश्मियों को विकीर्ण करता है, जिसे ध्यान-मनन के प्रयोगों द्वारा ही प्राप्त किया जा सकता है,किन्तु उतना ही जितना हमारे शरीर में क्षमता है। ग्रहण का शाब्दिक अर्थ ही लेना, अंगीकार या स्वीकार करना है। हमारे श्रृषि मुनियों नें इतना ज्ञान हमारे सम्मुख रखा है जिसका अनुमान लगाना,अर्थात ज्ञान से ज्ञान को प्राप्त करना ही जीवन की सार्थकता है। अपने भीतर के अन्धकार को मिटाने के लिए दैविक आराधना,पूजा अर्चना इत्यादि विशेष पर्वों पर करते रहने का विधान है।
जैसा कि ग्रहण काल में उत्तम यौगिक क्रिया,पूजा अनुष्ठान,मन्त्र सिद्धि,तीर्थ स्नान,जप दान आदि का अपना एक विशेष महत्व है। इसके प्रमाण शास्त्रों में विधमान हैं। बहुत से बुद्धिजीवी लोग कहते है कि ग्रहण काल में ध्यान मनन,जाप,उपवास इत्यादि निरा अन्धविश्वास है, इन सब का कोई औचित्य नहीं। भई मान लेते हैं कि इन सब से कुछ नहीं होता। अब यदि कोई व्यक्ति इसी बहाने (चाहे भयवश ही) कुछ समय ध्यान,जाप,पूजा पाठ आदि का आश्रय ले लेता है तो उसमें हर्ज भी क्या है? यदि कुछ नहीं भी होने वाला तो कम से कम कुछ क्षण के लिए ही सही किसी अच्छे काम में तो लगेगा। हालाँकि इस सन्दर्भ में मेरे पास कोई प्रमाण नहीं हैं किन्तु फिर भी मेरा इस विषय में निजी मत ये है कि ग्रहण का प्रभाव पृ्थ्वी के समस्त जीव-जंतुओं,पशु पक्षियों,वनस्पति इत्यादि पर अवश्य पडता है। क्यों कि ग्रहण काल में देखने को मिलता है कि अनायास जानवर उत्तेजित हो उठते हैं,पक्षी अपने घोंसलों में दुबक जाते हैं और कईं प्रकार के फूल अपनी पंखुडियाँ समेट लेते हैं।
इस वर्ष मे मै आपको सही समय पर अद्वितीय शाबर मंत्र साधनाये दे रहा हू,ताकी आपका अमुल्य जिवन सार्थक हो सके।
आदेश.....