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16 Apr 2016

Beer kangan (बिर कंगन).

अब तक बहोत सारे लोगो के अनुभव मुझे सुनने मे मिले और येसे साधको का अभिनन्दन जो उन्होंने "बिर कंगन" को विश्वास से मंत्र जाप के माध्यम से जागृत किया। उन्होंने बिर कंगन पर अपने जिवन के कुछ मुख्य कार्यो सिद्ध किया मतलब कुछ येसे कार्य उन्होंने किये जिन्हे वह नही कर सकते थे परंतु बिरो से उन्होंने कार्य करवाया,इस बात पर मुझे सभी साधको पर गर्व है।

मेरा तो इतना ही काम था "आप लोगो को बिर कंगन देना,साथ मे बिर कंगन के प्रामाणिक मंत्र देना और साधना मे आपका मार्गदर्शन करना"। आपको बिर कंगन जाग्रत करने मे सफलता मिला यह आपका मेहनत है,आपने जिस विश्वास के साथ साधना प्रारंभ करके उसमे सफलता प्राप्त की है इसके लिये मुझे आप सभी साधको से मिलने का अवसर प्राप्त हो "मै यही कामना माताराणी से करता हूं। कुछ साधक अभी भी साधना करने मे लगे हुए है,वह अभी तक डगमगाये नही है,उन पर भी मै गर्व महेसुस कर रहा हूं। जिन्हे अभी तक पुर्ण सफलता प्राप्त ना हुयी हो "उन्हे थोड़ा ओर साधना के लिये देना चाहिए और मुझे आप सभी साधको पर विश्वास है,आप सफलता प्राप्त किये बिना नही रहोगे"।

जब आपको यह लगेगा आपको सफलता तो मिला है परंतु और ज्यादा सफलता चाहिए तो उसके लिये भी मै आपको हमेशा मार्गदर्शन करुंगा । मै यही चाहता हू,आप सभी बिरो को जाग्रत करके उनसे अपने जिवन के मुख्य कार्य करवावो और कुछ कार्य जनकल्याण हेतु भी करो । एक साधक है "विरेन्द्र सिंग जी" जो दिल्ली से है,उनके घर मे 10 वर्षों से अभिचार कर्म (तंत्र बाधा/काला जादू) किया हुआ था और वह इस परेशानी मे से निकलने के लिये लाखो रुपया खर्च कर चुके थे,आज बिर कंगन साधना के वजेसे से उन्हे अभिचार कर्म से मुक्ति मिला और उनके माताजी का भी स्वास्थ खराब रहेता था परंतु आज के समय मे उनका स्वास्थ भी ठिक है। एक साधक नासिक से है "विजय जी" जिनका का 12 लाख रुपया फसा हुआ था जो अब निकल चुका है। एक साधक है उडिसा से जिन्होने "आनंद स्वामी जी",इनकी प्रेमिका इनको 3 वर्ष पुर्व छोड़के चली गयी थी परंतु इन्हे विश्वास था वो फिर से इनके जिवन मे वापस आयेगी । आज बिर कंगन के माध्यम से इनका विश्वास जीत गया,उन्होंने फिर से अपने सच्चे प्रेम को 3 वर्ष बाद प्राप्त किया । आनंद स्वामी जी को बहोत बहोत अभीनंदन,वैसे तो बहोत सारे साधक है जिनका अनुभव मै लिखना चाहता था परंतु मै चाहता हू बाकी नये-पुराने साधक स्वयं अनुभव प्राप्त करके दुनिया को सुनाये ।

आप सभी ब्लोग पढ़ने मे रुची रखते है,इसके लिये आप सभी को धन्यवाद । इस बार मै बिर कंगन के साथ बिर मुद्रिका भी निशुल्क देने का मन बना चुका हू ताकी आपको ओर साधना करने मिले,बहोत सारे अनुभव प्राप्त हो,तंत्र मे कुछ नया ग्यान प्राप्त हो । मेरा इच्छा पुर्ण होते जा रहा है,आपको सफलता मिले यही मेरा इच्छा था,आप मेहनत नही करते तो शायद मेरा इच्छा पुर्ण नही होते। आपने भरोसे के साथ मेहनत करके मेरा इच्छा पुर्ण किया इसलिए आपको दिल से धन्यवाद करता हू ।

जैसे के इससे पहले भी मै बता चुका हू "हम बिरो से कोइ भी काम करवा सकते है" और इसको सिद्ध करना बहोत आसान है।बिर कंगण शाबर मंत्रो के माध्यम से जागृत करके सिद्ध कर सकते है।जब बिर कंगण जागृत होता है तब हमे बिर वशीकरण ,सम्मोहन ,आकर्षण , मोहन ,उच्चाटन ,विद्वेषण ,शान्तिकर्म मे हमारे काम को कर देता है।आपको अगर किसी का भी कोइ काम करना हो तो आप बैठे जगह से दुरस्थ बैठे व्यक्ति का भी काम करवा सकते है।

बिर कोइ साधारण शक्ति नही है,देवताओ के स्मशानी ताकतो को ही बिर कहा जाता है । जैसे हनुमत बिर जो अत्याधिक शक्तिशाली माना जाता है क्युके हनुमानजी के स्मशानी ताकत को ही हनुमत बिर कहेते है। अब आप ही सोचिये येसा कोनसा कार्य है जो हनुमानजी नही कर सकते है । नाथ सम्प्रदाय मे हनुमानजी जी को सिद्ध जती नाम कि उपाधि प्राप्त है और ज्यादा से ज्यादा शाबर मंत्र उनसे ही सम्बन्धित है। हम बिर कंगन के माध्यम से सभी बिरो के अद्भुत शक्ति को जाग्रत करके सभी कार्य बिरो से करवा सकते है।







आदेश.....

16 Dec 2015

बिर कंगण-(21 बिर युक्त)

स्वर्ण रूप्यं ताम्रं च रंग यशदमेव च।
शीसं लौहं रसश्चेति धातवोऽष्टौ प्रकीर्तिता:।

सुश्रुतसंहिता में केवल प्रथम सात धातुओं का ही निर्देश देखकर आपातत: प्रतीत होता है कि सुश्रुत पारा (पारद, रस) को धातु मानने के पक्ष में नहीं हैं, पर यह कल्पना ठीक नहीं। उन्होंने रस को धातु भी अन्यत्र माना है (ततो रस इति प्रोक्त: स च धातुरपि स्मृतथ:)। अष्टधातु का उपयोग प्रतिमा के निर्माण के लिए भी किया जाता है।

अष्टधातु-

सोना, चाँदी, तांबा, रांगा, जस्ता, सीसा, लोहा, तथा पारा (रस).

अष्टधातु का मुनष्य के स्वास्थ्य से गहरा सम्बंध है यह हृदय को भी बल देता है एवं मनुष्य की कितनी ही बीमारियों को दूर करता है। अष्ट धातु की अंगूठी
पहिनने पर या कड़ा धारण करने पर यह मानसिक तनाव को दूर कर मन में शान्ति लाता है। यहीं नहीं यह वात पित्त कफ का इस प्रकार सामंजस्य करती हैं कि बीमारियां कम एवं स्वास्थ्य पर अच्छा प्रभाव होता है अष्ट धातु मस्तिष्क पर गहरा प्रभाव डालता है। इससे व्यक्ति में तीव्र एवं सही निर्णय लेने की क्षमता बढ़ जाती है। धीरे-धीरे सम्पन्नता में वृद्धि होती है।

यह लाभ तो सिर्फ अष्टधातु के है और इसी अष्टधातु से बिर कंगण बनाया जाता है।आज मै यहा पर 21 बिर 36 योगिनी के कंगण के बारे मे लिख रहा हु।

यह कंगण सामान्यतः आकार मे छोटा होता है परंतु शीघ्र फलप्रद कहा जाता है।इस कंगण से सिर्फ अच्‍छे कार्य करवाये जाते है और कार्य पुर्ण होने के बाद बिर को मिठाई का भोग दिया जाता है।यह बिर कंगण पुर्णत: सात्विक है जिसे स्त्री/पुरुष सिद्ध करके अपने और दुसरो के कार्यो को भी पुर्ण करवा सकते है।

जैसे के इससे पहले भी मै बता चुका हू "हम बिरो से कोइ भी काम करवा सकते है" और इसको सिद्ध करना बहोत आसान है।बिर कंगण शाबर मंत्रो के माध्यम से जागृत करके सिद्ध कर सकते है।जब बिर कंगण जागृत होता है तब हमे बिर वशीकरण ,सम्मोहन ,आकर्षण , मोहन ,उच्चाटन ,विद्वेषण ,शान्तिकर्म मे हमारे काम को कर देता है।आपको अगर किसी का भी कोइ काम करना हो तो आप बैठे जगह से दुरस्थ बैठे व्यक्ति का भी काम करवा सकते है।

बिर कोइ साधारण शक्ति नही है,देवताओ के स्मशानी ताकतो को ही बिर कहा जाता है।जैसे हनुमत बिर जो अत्याधिक शक्तिशाली माना जाता है क्युके हनुमानजी के स्मशानी ताकत को ही हनुमत बिर कहेते है। अब आप ही सोचिये येसा कोनसा कार्य है जो हनुमानजी नही कर सकते है। नाथ साम्प्रदाय मे हनुमानजी जी को सिद्ध जती नाम कि उपाधि प्राप्त है और ज्यादा से ज्यादा शाबर मंत्र उनसे ही सम्बन्धित है।इस प्रकार से अन्य 20 बिर भी बिर कंगण मे स्थापित किये गये है।

माहिती बिर-जो हमे किसी भी जगह का खबर हमारे कान मे सुनाता है और हम उसे किसी प्रकार का प्रश्न पुछकर जवाब प्राप्त कर सकते है।

शामरी बिर-जो कोइ भी कार्य सिद्ध करवा देता है।
नारसिंग बिर-जो हम पर किये जाने वाले तंत्र प्रयोग को वापिस भेजता है।

दादू बिर-जो शत्रुओं का नाश करता है।

मोहन्या बिर-जो हमारे लिए वशीकरण,आकर्षण,सम्मोहन और मोहन करवाने के काम करवा देता है।

जादू बिर-जो हमारे हाथो होने वाले किसी भी प्रकार के जादू को सत्य कराता है।

मायावी बिर-जो माया डालकर कुछ समय के लिये देखने वालो को रस्सी का सर्प भी बनाकर दिखाता है मतलब माया से असत्य को सत्य दिखाता है।

गगना बिर-रक्षात्मक कार्यो मे हमारा काम करता है।
सगना बिर-हमे धोका खाने से बचाता है।

गरुड बिर-सर्पो से हमारा रक्षा करता है और विष का नाश करता है।

धनात्री बिर-जो हमे जमीन मे गडे हुये वस्तुओ को बाहर निकालने मे सहायता करता है और जमीन के निचे जो कोइ भी वस्तु हो उसकि सही जानकारी देता है और हमारा किस्मत अच्छा हो तो वह उसे बाहर निकालकर देता है।

अष्टभैरव बिर-अब अष्टभैरव के बारे मे क्या बताऊ हनुमानजी के तरह ये भी सभी काम करवा देते है।इनके लिये तो शत्रु का नाश करना भी मतलब आसान सा कार्य है।अष्टभैरव मे आठ भैरव होते है जो अलग अलग प्रकार के कार्यो मे माहिर होते है।

कलवा बिर-यह तो एक प्रसिद्ध बिर है जो प्रत्येक कार्य आसानी से कर देता है।

कालु बिर-यह बिर रात के अंधेरे मे ही कार्य करता है और यह बिर शत्रुओं को पिडा देने हेतु और कर्ज मे दिया हुआ धन निकालने मे माहिर है।

दृष्टा बिर-इसके माध्यम से हमे दुर के चिजो को देखने मे सहायता होता है।जैसे मुम्बई मे बैठा व्यक्ति दिल्ली मे बैठे व्यक्ति का हलचल देख सकता है।कौन क्या कर रहा है?"ये सब काम इसी बिर से होते है।

अभी मैने आपको यहा आज 21 बिरो के बारे मे बताया और 36 योगिनीया दिये हुए सभी कामो मे बिरो के साथ कार्य करती है,योगिनीयो के लिए मंत्र जाप करने कि कोइ जरुरत नही है।बिरो के मंत्रो से ही योगिनीया साधक के काम करवा देती है।





बिर कंगण निर्माण विधी-

इसके पहले भी यह बता चुका हू,बिर कंगण का निर्माण एक कठिन कार्य है परंतु सामान्य बिर कंगण को बनाना थोडा आसान है।इसमे अष्टधातु का प्रयोग होता है,जिनके मात्रा और मुल्य के बारे मे मै आपको अवगत करवा देता हू-

सोना- सव्वा ग्राम जिसका मुल्य 3375 रुपये है।
चाँदी-सव्वा पाच ग्राम जिसका मुल्य 250 रुपये है।
तांबा-200 रुपये का लगेगा।
रांगा-250 रुपये का लगता है।
जस्ता-300 रुपये लगता है।
सीसा-350 रुपये का लगता है।
लोहा-5 रुपये का लगता है।
पारा(रस)-600 रुपये का लगता है।

कुल अष्टधातु का खर्च 5330/- रुपये होता है।जिसमे कंगण निर्माण का खर्च 500 रुपये लगेगा क्युके ये कंगण बनाने का कार्य अधिक परिश्रम युक्त है।जिसमे सर्वप्रथम अष्टधातु को अग्नि मे डालकर उसका पानी बनाया जाता है।उसके बाद एक गोल रिंग बनाना पड़ता है और उस रिंग के उपर बिरो के मुर्तियो को बिठाया जाता है।कंगण बानते समय कंगण बनाने वाला कारीगर कपडे नही पहन सकता है,उसे नग्न अवस्था मे बैठकर ही कंगण का निर्माण करना पडता है और एक बार वह निर्माण कार्य शुरु कर देता है तो उसको बीच मे छोडकर उठ नही सकता है,अब सबसे महत्वपूर्ण बात कंगण को जमीन पर नही रख सकते है जब तक बिर कंगण निर्माण पुर्ण नही होता है।

इसका न्योच्छावर राशी 5830 रुपये है,50 रुपये बैंक वाले ट्रान्सफर का चार्जेस लेते है,200 रुपये कोरियर के चार्जेस लगते है।कुल मिलाकर कर सामन्य आकार का बिर कंगण (21 बिर 36 जोगिनी) 6080/-रुपये मे आप प्राप्त कर सकते है।


बिर कंगण प्राप्त करने हेतु ई-मेल के माध्यम से सम्पर्क करे- "amannikhil011@gmail.com" और बिर कंगण प्राप्त करे।




आदेश......

30 Oct 2015

हनुमान बिर ताबीज.


हनुमान जी को प्रसन्न करना बहुत सरल है। राह चलते उनका नाम स्मरण करने मात्र से ही सारे संकट दूर हो जाते हैं। जो साधक विधिपूर्वक साधना से हनुमान जी की कृपा प्राप्त करना चाहते है उनके लिये मै हनुमान बिर ताबीज बना रहा हू l
वर्तमान युग में हनुमान साधना तुरंत फल देती है। इसी कारण ये जन-जन के देव माने जाते हैं। इनकी पूजा-अर्चना अति सरल है, इनके मंदिर जगह-जगह स्थित हैं अतः भक्तों को पहुंचने में कठिनाई भी नहीं आती है। मानव जीवन का सबसे बड़ा दुख भय'' है और जो साधक श्री हनुमान जी का नाम स्मरण कर लेता है वह भय से मुक्ति प्राप्त कर लेता है।
“पंचवत्रं महाभीमं पंचदश नयनेर्युतम्"
हनुमान मन्दिर देशभर में सर्वत्र हैं। वे अजर-अमर, कल्पायु-चिरायु, कालजयी,
मृत्युंजयी, वत्सल, कल्पतरू, मंगलकर्ता
सर्वाभीष्ट प्रदाता है। उनकी उपासना, गुणगान, चर्चा, कथा देश-विदेशों में प्रचलित है। स्कन्दपुराण ब्रह्मखंड के वर्णनानुसार तथा तुलसीदास ने हनुमान चालीसा में उनके हाथ में वज्ज्, गदा, आयुध कहा है।
वैसे तो कलियुग में 33 करोड़ देवी.देवताओं की कल्पना की गयी हैं जिनमें
शिवए रामए कृष्णए दुर्गाए लक्ष्मीए गणेशए
पार्वती हनुमान आदि प्रमुख हैं। इनमें हनुमान की एकमात्रा ऐसे देवता हैं जिनकी पूजा करने से लगभग सभी देवी.देवताओं
की पूजा का एक साथ फल मिल जाता है। हनुमान साधना कलियुग में सबसे सरल और प्रभावी मानी जाती है। पौराणिक ग्रंथों में हनुमान जी को शिव जी का अंश कहा गया है l
सभी हनुमत भक्त ये बात भली भाती जानते है "हनुमान जी की शक्ति अपरंम्पार है" परंतु कुछ लोग ये बात नही जानते जैसे हनुमान जी की एक तीव्र शक्ती जिसे मसानी शक्ती के रुप मे "हनुमान बिर"कहा जाता है.हनुमान जी बिरो के बिर है इसलिये उनका एक नाम "महाबिर" नाम से प्रचलित है.देवताओ की स्मशानी ताकतो को तंत्र मे "बिर" कहा जाता है और कोई भी काम बिर शीघ्र ही करवा देते है,उनको किसी भी काम को करने का कोई बंधन नही है.जैसे अन्य देवी/देवता की कृपा से इंसान का जीवन बदल सकता है परंतु कोई भी देवी/देवता मनुष्य के वश मे होकर काम नही करते.बिरो को वश मे करने का विधान शाबर विद्याओ मे बहोत प्रचलित है.बिरो को वश करके उनसे सभी प्रकार के काम किये जाते है जिसके लिये ज्यादा पुजा-पाठ करने की आवश्यकता नही होती है.बिर काम करने के बाद साधक से कुछ प्रसाद भी माँगते है जैसे हनुमान बिर से कोई भी काम करवाओ तो उन्हे प्रत्येक समय भेट स्वरुप नारियल और सिंदूर देना पडता और हम जो भेट चढाते है उसके बदले मे हनुमान बिर हमारा कोई भी काम तुरंत कर देते है.अभि कुछ दिनो पहिले मेरे पास कामाख्या शक्तीपीठ के एक तांत्रिक आये थे जिनका नाम है "कालीदास बाबा",उन्होने मुझे कोई काम बताया था और वो काम मै 3-4 घंटे के अंदर हनुमान बिर की कृपा से करवा दिया.ये सब देखकर वो आच्छर्यचकित हो गये और कहेने लगे "सुशील भाइ,येसा कौनसा तंत्र है आपके पास के जो काम मै 20-25 दिनो से पूर्ण करने मे लगा हुआ हू परंतु हो नही रहा था और आपने इतने शीघ्र कैसे करवा दिया?"
असल मे बाबा ने मुझे उनके भक्त को शराब की बुरी आदत छुडाने का काम दिया था और अब तक मै सेकडो लोगो की शराब हनुमान बिर के कृपा से छुडवा चुका हु.जब कलीदास बाबा को मैने हनुमान बिर के कार्यप्रणाली के बारे मे बताया तो वो मेरे से 7 हनुमान बिर ताबीज लेकर गये.कालीदास बाबा कामाख्या शक्तीपीठ के आस-पास के क्षेत्र मे प्रसिद्ध तांत्रिको मे से एक जबरदस्त तांत्रिक है.उनको मैने अच्छेसे बिर को चलाने का विधि-विधान समझाया जिससे वो बहोत खुश हुए.
यह विद्या बहोत आसान है आपके लिये परंतु हनुमान बिर ताबीज बनाने वालो के लिये बडी जटिल क्रिया है.आपको सिर्फ छोटासा काम करना है जैसे मंत्र को याद करना है और मंत्र को याद करके 7 दिन तक मंत्र का 108 बार जाप करना है.अब सात दिनो मे किस तरहा से मंत्र को सिद्ध किया जाये तो इसका गोपनिय विधान मै आपको बता दुगा.हनुमान बिर ताबीज को हमेशा प्लास्टिक की डिबीया मे सिंदूर के साथ सम्भाल के रखना है और जब भी हनुमान बिर से काम करवाना हो तब चावल के कुछ दानो मे सिंदूर+केवडे का इत्र मिलाकर मंत्र का 11 बार जाप करके चावल हनुमान बिर ताबीज पर चढाना है.यह विधान करने के बाद हनुमान बिर की कृपा से कार्यसिद्धी होती है और काम पूर्ण होने के बाद हनुमान बिर को नारियल+सिंदूर अर्पित करे ताकि उनके कृपा से आगे भी जीवन मे कार्यसिद्धी होता रहे.हनुमान बिर ताबीज 1150/- रुपये के मूल्य मे आपको प्राप्त होगा.इस ताबीज का शुल्क बहोत कम है वो इसलिये ताकी आपको जिवन मे अन्य लोगो की सहय्यता करने का लाभ प्राप्त हो.मै अगर यही ताबीज 11 हजार मे दु तो बहोत कम ही लोग इसे प्राप्त कर सकेगे जिससे हमारे समाज मे सामाजिक कल्याण कम तौर पर घटित होगा और कम मूल्य मे दे देता हु तो ज्यादा-से-ज्यादा लोग हनुमान बिर की कृपा प्राप्त कर सकेगे.
यहा हनुमान बिर का मंत्र दे रहा हु जो मराठी भाषा मे है,कृपया इसे हनुमान बिर ताबीज को प्राप्त करने से पहिले याद करके रखिये.



हनुमान बिर मंत्र:-
ll बि.र.र. गणा न गणपती सारजा सरस्वती,सारजा सरस्वती न काय केल?डाग डुबला,डाग डुबल्याची काजल आणली,शिरी कुंकवाची चिरी ल्याली,ये अंजनिच्या पुता,रामाच्या दुता,आमचे काम सिद्ध करावे,नाही करशिल तर राम-लक्ष्मणाची आण,सिता जानकीची आण,सिद्धांशी गुरू छू वाचापुरी ll



बि.र.र.का अर्थ मै बता दुगा और तब तक आप बिना "बि.र.र."का उच्चारण किये मंत्र को याद करके रखिये.





आदेश.....

26 Sept 2015

बिर कंगन.


बहोत सारे लोग है जो सिर्फ बाते करते है बिर कंगन के बारे मे परंतु यहा मै आपको इसका प्रामानीक महत्व बता रहा हू क्युके मेरे पास बिर कंगन है.बिर कंगन क्या है?
अगर ये बात सुशील नरोले आपको नही
बतायेगा तो कौन बतायेगा,सही है ना. बिर कंगन 3 प्रकार के होते है.

1-52 बिर-64 जोगिनी.
2-51 बिर 52 जोगिनी.
3-21 बिर 24 जोगिनी.

मुख्यता इन तीनो कंगन मे सबसे अच्छा कंगन 51 बिर-52 जोगिनी वाला माना जाता है क्युके एक पर एक भारी शक्ती वाला कंगन अच्छे-बुरे काम कर सकता है. बिर कंगन के माध्यम से बिरो से जो चाहो वह कार्य उनसे करवा सकते है परंतु बात येसा है के बिरो से वही काम करवाने कहो जो हम नही कर सकते है क्युके प्रत्येक कार्य को करने के बाद बिर बदलेमे कुछ ना कुछ तो माँगता ही है और अगर हमने उसकी डिमांन्ड पुरी नही की तो जब बिरो को अगला काम दे तो वह उस कार्य को पुरा नही करता है.या आसान भाषा मे कहा जाये तो बिर कार्य करने के बाद उर्जाहीन होने लगता है और उसके पसंद का चिज
उसको मिलतेही वह फिर से शक्तीशाली बन जाता है.बिर कंगन के माध्यम से षटकर्म कार्य आसानी से किये जाते है और
आजकल लोग बिरो से काम करवाते है और मोटा पैसा कमाते है जब के बिरो से येसे काम नही करवाने चाहिये जिससे सिर्फ धनार्जन हो बल्की कुछ जनकल्याण करके पिडित व्यक्ती का साहय्यता करके उनसे
आशीर्वाद भी प्राप्त करना चाहिये.बिर कंगन का आसान सा अर्थ है कंगन मे बिरो का स्थापना और साथ मे जोगिनी का स्थापना.जैसे बराटी का अर्थ है बिर और बराटी विद्या का अर्थ है "बिरो का विद्या" और जिसने बिरो का जागरण कर दिया समझलो उसने बराटी विद्या को सिद्ध कर लिया. मेरे पास 150 साल से भी ज्यादा पुराना बिर कंगन है जो मुझे मेरे दादाजी से प्राप्त हुआ,इससे मुझे एक फायदा हुआ के कोई भी नया कंगन मै जागरत कर सकता हू परंतु मै सर्वप्रथम जिनके लिये कंगन बनाता हू उनको ही साधना विधि विधान संपन्न करने के निर्देश देता हू,कुछ लोगो ने प्रैक्टिकल अनुभुतिया की है.बिरो से कोई भी काम करवाना संभव है परंतु बिरो को
खुश रखना भी जरुरी है अन्यथा बिर समय पर कार्य नही करते है,बिरो को कैसे खुश रखना है यही इसमे मुख्य सुत्र होता है.जैसे मैने बताया बिर कंगन तीन प्रकार होते है और उन्हे बनाने मे पंचधातु,अष्टधातु,नवधातु का इस्तेमाल होता है.पंचधातु मे स्वर्ण,रजत,कास्य,तांबा और पित्तल होता है,इनको स्थिर लग्न
शुभ मुहूर्त मे खरिदकर कंगन बनाने से अधिक लाभ प्राप्त होते है और स्वर्ण को गुरुवार रजत को शुक्रवार कास्य को
शनीवार तांबा को रविवार पित्तल को सोमवार को खरिदना चाहिये.कंगन बनाते समय शरीर पर कोई भी वस्त्र नही होना चाहिये और कंगन बनाते समय वहा से उठकर अन्य कोई भी कार्य करना वर्जित माना जाता है.यह सब कुछ होने के बाद मंत्र साधना 7,11 या 21 दिनो तक की जाति है परंतु साधना मे योग्य सफलता प्राप्ति के लिये प्रामानीक विधि विधान का ग्यान होना आवश्यक है जो किताबो से नही मिलता है इसके लिये योग्य व्यक्ती का मार्गदर्शन प्राप्त होना चाहिये.जो व्यक्ती बिर कंगन बनाना चाहता है वह मुझसे सम्पर्क करे,मै आपको वचन देता हू आपको प्रामानिक मार्गदर्शन करुगा और आपके लिये योग्य बिर कंगन का निर्माण करके दुगा क्युके प्रत्येक तांत्रिक का एक स्वप्न होता है "उसको बिर कंगन जैसा दुर्लभ वस्तु प्राप्त हो.सिद्ध नवनाथ भगवान
भगवान को बिर कंगन बहोत प्रिय है यह बात सभी जानते है और समजते है.आपके कल्याण हेतु मै यह संकल्प ले रहा हू बिर कंगन के माध्यम से आप श्रेश्ट तांत्रिक बने,समाज मे जनकल्याण करके अपने नाम को रोशन करे और साथ थोडा बहोत धनार्जन भी करे.मुख्य बात यह है की पाखन्ड़ से बचे जैसे जब भी आपको किसी से बिर कंगन लेना हो तो सर्वप्रथम उसको बिर कंगन का फोटो दिखाने का आग्राह करे अन्यथा वह आपको बिर कंगन के नाम पर कोई भी कंगन दे देगा.
मेरा सम्पर्क:-
amannikhil011@gmail.com
पर मुझे आप इमेल करे और बिर कंगन को प्राप्त करे.

आदेश......