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26 Sept 2025

कामाक्षी अप्सरा एक रहस्यमयी साधना.




केवल एक दिन में सिद्ध होने वाली अद्भुत साधना


क्या आप जानते हैं कि ऐसी दिव्य शक्तियाँ भी हैं जो सिर्फ एक दिन में आपके जीवन को पूरी तरह बदल सकती हैं?

आज हम एक ऐसी साधना का रहस्य उजागर करने जा रहे हैं, जो केवल एक दिन में सिद्ध हो सकती है। यह कोई साधारण साधना नहीं, बल्कि एक अद्भुत और रहस्यमयी अप्सरा साधना है, जो आपके जीवन में अप्रत्याशित परिवर्तन ला सकती है।

लेकिन सवाल यह है – क्या आप तैयार हैं इस शक्ति को महसूस करने के लिए?

इस साधना के दौरान आपको ऐसा लगेगा मानो आपके आस-पास कोई अदृश्य शक्ति मौजूद हो। कभी लगेगा कोई आपके बहुत पास है, तो कभी ऐसा महसूस होगा कि कोई रहस्यमय घटना घट रही है।



कामाक्षी अप्सरा – केवल एक दिन की सिद्धि

आज हम जिस अप्सरा की साधना के बारे में बता रहे हैं, उसका नाम है कामशी अप्सरा।
यह अप्सरा पूर्ण काम भाव से साधक के सामने प्रकट होती है और उसे हर प्रकार के सुख, प्रेम और लाभ देती है।

कामाक्षी अप्सरा साधना केवल एक ही दिन में सिद्ध हो जाती है। लेकिन इसके लिए साधक को पहले से ही पूरी तैयारी करनी होती है।

गुरु मंत्र का जाप (जिन्हें गुरु मंत्र प्राप्त नहीं हुआ हो वह साधक "ॐ नमः शिवाय" का जाप इस साधना हेतु कर सकते है) , अनुष्ठान और हवन पहले से करके अपने भीतर आध्यात्मिक ऊर्जा जाग्रत करनी होगी।

यदि आपने पहले से तैयारी कर रखी है, तो यह साधना एक ही दिन में सफल हो जाती है अन्यथा आपको इसे 11 दिनों तक करना पड़ सकता है।



साधना के दौरान साधक को अजीबो-गरीब अनुभव होते हैं जैसे कि–

*कभी लगेगा कमरे में कोई और भी मौजूद है।

*कभी पायल और चूड़ियों की आवाज सुनाई देगी।

*कभी ऐसा महसूस होगा जैसे कोई आपके चारों ओर नृत्य कर रहा है।

*एक मनमोहक सुगंध कमरे में फैल जाएगी।


11 दिन तक साधना नियमों से करने पर अप्सरा प्रत्यक्ष रूप में सामने आना संभव है और साधक के साथ बातें भी कर सकती है।




साधना की विधि:- 

साधना अमावस्या, पूर्णिमा, होली, दिवाली, चंद्रग्रहण, रवि पुष्य नक्षत्र या दशहरे की रात में की जा सकती है।
साधक को स्नान करके लाल या सफेद कपड़े पहनने चाहिए।
गुलाब का इत्र और सफेद चंदन शरीर पर लगाएँ।

लाल आसन पर उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें।
कमरे में एकांत होना चाहिए और वहीं सोने का प्रबंध भी होना चाहिए, अन्यथा आप किसी सुनसान जगह पर भी साधना कर सकते है।

अपने आसन पर बैठकर गुलाब की अगरबत्ती जलाएँ, देसी घी का दीपक जलाएँ।

250 ग्राम मिठाई और दो गुलाब जामुन अर्पित करें।

आँखें बंद कर अप्सरा का मन ही मन ध्यान करें, मानो वह आपके सामने बैठी है और आप उससे प्रेम-भरी बातें कर रहे हैं।

इसके बाद 11 माला जाप करना है।

5 माला के बाद अनुभव शुरू हो जाएंगे।
7 माला के बाद चूड़ियों और पायल की आवाज आएगी।
11 माला तक उसकी छवि दिखाई देगी।

या फिर 11 माला तक वह प्रत्यक्ष होकर आपके पास बैठी होगी। साधना पूर्ण होने पर उसके गले में गुलाब की माला डाल दें। वह आपकी गोद में बैठकर आपसे प्रेम भरी बातें करेगी।
कामाक्षी अप्सरा जब प्रकट हो जाए तो साधक को उससे तीन वचन लेना आवश्यक है –

1. जब भी मैं तुम्हें बुलाऊँ, तुम तुरंत उपस्थित होगी।

2. मेरी और मेरे परिवार की रक्षा करोगी। मेरी पत्नी को अपनी छोटी बहन मानकर उसका ध्यान रखोगी।

तीसरा वचन उसी समय नहीं लेना है।
उसे कहना होगा – "तीसरा वचन मैं उचित समय आने पर ही लूँगा।"

यदि आप यह वचन ले लेते हैं तो वह अप्सरा आपके जीवनभर हाजिर रहेगी अन्यथा केवल एक दिन तक ही रहेगी।

कामाक्षी अप्सरा साधना एक अत्यंत रहस्यमयी और अद्भुत साधना है। यह साधना साधक को अलौकिक सुख, समृद्धि और दिव्य अनुभव देती है।

कहने को तो साधको यह साधना एक दिन की है लेकिन इस साधना में साधक को टाइम भी लग सकता है जो नये साधक है उसको एक दिन में यह सिद्धि प्राप्त नहीं होती इसलिए जो लोग पहले से सिद्धियां प्राप्त कर चुके हैं उनके लिए सिर्फ यह एक दिन की है बाकी लोगों को और ज्यादा समय लग सकता है ।


पहिले तो मंत्र निःशुल्क देने की इच्छा थी परन्तु बिना दक्षिणा दिए बहुत सारे विधान सफल नहीं होते है और दूसरी बात साधक को भी निःशुल्क प्राप्त हुए मंत्र की कीमत नहीं होती है । जो साधक मेरे बात से सहमत हो वह 1100/- रूपए दक्षिणा देकर मंत्र प्राप्त करे, मंत्र ऑडियो और टेक्स्ट में वॉट्सएप पर दिया जायेगा । ऐसे दुर्लभ मंत्र आज के समय में प्राप्त करना कोई आसान काम नहीं है और मैं जो मंत्र दे रहा हु वह एक प्रामाणिक शाबर मंत्र है, जिससे साधना में सफलता मिलना संभव है। साधना का विधि विधान दिया हुआ है सिर्फ मंत्र नहीं दिया है क्योंकी यह विशेष साधना है।

Contact number - 8421522368


आदेश.....

26 Jan 2017

लीलावती अप्सरा मंत्र साधना.(चंद्रग्रहण पर विशेष साधना)

यह एक विशेष साधना है,जिसको सिर्फ चंद्रग्रहण पर ही शुरू किया जा सकता है,अन्य समय पर शुरुआत करने से लाभ प्राप्त करना कठिन है। यहा दिया जाने वाला लीलावती अप्सरा मंत्र पुर्ण और प्रामाणिक है,जिससे साधक को अवश्य ही लाभ प्राप्त हो सकता है।
11 फरवरी 2017 को सुबह चंद्रग्रहण है मतलब 10 फरवरी को रात्रि मे 12 बजे के बाद,यहा चंद्रग्रहण का समय दे रहा हूं।

उपच्छाया से पहला स्पर्श - 04:06
परमग्रास चन्द्र ग्रहण - 06:14
उपच्छाया से अन्तिम स्पर्श - 08:22
उपच्छाया की अवधि - 04 घण्टे 16 मिनट्स 27 सेकण्ड्स है।


साधना के लाभ:

जो व्यक्ति पूर्ण रूप से हष्ट पुष्ट होते हुए भी आकर्षक व्यक्तित्व न होने के कारण अन्य लोगों को अपनी और आकर्षित नहीं कर पाते हैं तथा हीनभावना से ग्रस्त होते हैं , इस साधना के प्रभाव से उनका व्यक्तित्व अत्यंत आकर्षक व चुम्बकीय हो जाता है तथा उनके संपर्क में आने वाले सभी लोग उनकी और आकर्षित होने लगते हैं । जो मन के अनुकूल सुंदर जीवन साथी पाना चाहते हैं किन्तु किसी कारणवश यह संभव न हो रहा हो, इस साधना के प्रभाव से उनको मन के अनुकूल सुंदर जीवन साथी प्राप्त होने की स्थितियां उत्पन्न हो जाती हैं और मनचाहा जीवनसाथी मिल जाता है ।

जिस व्यक्ति के वैवाहिक, पारिवारिक, सामाजिक जीवन में क्लेश व तनाव की स्थिति उत्पन्न हो, इस साधना के प्रभाव से उनके वैवाहिक, पारिवारिक व सामाजिक जीवन में प्रेम सौहार्द की स्थितियां उत्पन्न हो जाती हैं !
जो व्यक्ति अभिनय के क्षेत्र में सफल होने की इच्छा रखते हैं किन्तु सफल नहीं हो पाते हैं, इस साधना के प्रभाव से उनके अंदर उत्तम अभिनय की क्षमता की वृद्धि होने के साथ-साथ अभिनय के क्षेत्र में सफल होने की स्थितियां उत्पन्न हो जाती हैं । जो व्यक्ति युवावस्था में होने पर भी पूर्ण यौवन से युक्त नहीं होते हैं, इस साधना से उनके अंदर उत्तम यौवन व व्यक्तित्व निखर आता है ।

जो व्यक्ति सुन्दर रूप सौन्दर्य की इच्छा रखते हैं किन्तु प्रकृति द्वारा कुरूपता से दण्डित हैं, इस साधना के प्रभाव से उनके अंदर आकर्षक रूप सौन्दर्य निखर आता है । जो व्यक्ति कार्यक्षेत्र में मन के अनुकूल अधिकारी या सहकर्मी न होने के कारण असहज परिस्थियों में नौकरी करते हैं, या नौकरी चले जाने का भय रहता है, इस साधना के प्रभाव से उनके अधिकारी व सहकर्मी उनके साथ मित्रवत हो जाते हैं तथा नौकरी चले जाने का भय भी समाप्त हो जाता है ।
जो व्यक्ति ऐसा मानते हैं कि वह अन्य लोगों को अपनी बात या कार्य से प्रभावित नहीं कर पाते हैं, इस साधना के प्रभाव से उनका व्यक्तित्व अत्यंत आकर्षक व चुम्बकीय हो जाता है तथा उनके संपर्क में आने वाले सभी लोग उनकी और आकर्षित होकर उनकी बातों या कार्य से प्रभावित होने लगते हैं ।

उपरोक्त विषयों में अत्यंत कम समय में ही अपेक्षित परिणाम देकर आनंदमय जीवन को प्रशस्त करने वाली यह लीलावती अप्सरा साधना अवश्य ही संपन्न कर लेनी चाहिए, जिससे निश्चित ही आप अपनी इच्छा की पूर्णता को प्राप्त कर सकते हैं व आनंदमय भौतिक जीवन व्यतीत कर सकते हैं । क्योंकि अप्सराएं सौन्दर्य, यौवन, प्रेम, अभिनय, रस व रंग का ही प्रतिरूप होती हैं, अतः इनका प्रभाव जहाँ भी होता है वहां पर सौन्दर्य, यौवन, प्रेम, अभिनय, रस व रंग ही व्याप्त होता है ।
लीलावती अप्सरा की साधना अनेक रूपों में की जाती है, जैसे माँ, बहन, पुत्री, पत्नी अथवा प्रेमिका के रूप में इनकी साधना की जाती है ओर साधक जिस रूप में इनको साधता है ये उसी प्रकार का व्यवहार व परिणाम भी साधक को प्रदान करती हैं, अप्सराओं को पत्नी या प्रेमिका के रूप में साधने पर साधक को कोई कठिनाई या हानी नहीं होती है, क्योंकि यह तो साधक के व्यक्तित्व को इतना अधिक प्रभावशाली बना देती हैं कि साधक के संपर्क में रहने वाला प्रत्येक व्यक्ति अप्सरा साधक के मन के अनुकूल आचरण करने लगता है । अप्सरा को प्रत्यक्ष सिद्ध कर लिए जाने पर वह अपने गुण, धर्म, प्रभाव व सीमा के अधीन बिना किसी बाध्यता के अपनी सीमाओं के अधीन साधक की सभी इच्छाओं की पूर्ति करती है । माँ के रूप में साधने पर वह ममतामय होकर साधक का सभी प्रकार से पुत्रवत पालन करती हैं तो बहन व पुत्री के रूप में साधने पर वह भावनामय होकर सहयोगात्मक होती हैं ओर पत्नी या प्रेमिका के रूप में साधने पर उस साधक को उनसे अनेक सुख प्राप्त हो सकते हैं ।


साधना विधी:-

यह साधना ग्रहण शुरुआत होने के कुछ ही समय पहिले  ही शुरू करना है,जैसे 5-10 मिनट पुर्व शुरु कर सकते है और ग्रहण के समाप्ति के बाद भी 5-10 मिनट तक मंत्र जाप करते रहना है। मंत्र जाप बिना किसी माला के जाप करना भी सम्भव है। साधना करने हेतु किसी बाजोट पर पिला वस्त्र बिछाये और उसके उपर एक चमेली के फुलो का माला रखे,किसी प्लेट मे कुछ मिठाइयाँ रखे,एक छोटे ग्लास मे पानी रखें। बडा सा दिपक जलाये जो ग्रहण काल तक चलता रहे और दिपक मे शुद्ध देसी गाय के घी का ही उपयोग करें। धूप कोई भी चलेगा और साधना काल मे बुझ जाये तो कोई चिंता का बात नही है। मंत्र जाप उत्तर दिशा के तरफ ही मुख करके करना है,आसन वस्त्र का कोई बंधन नही है,किसी भी रंग के ले सकते हो । यह एक दिवसीय साधना है परंतु साधक चाहे तो चंद्रग्रहण के बाद भी नित्य जब तक चाहे तब तक मंत्र जाप कर सकता है।

मंत्र:-

।। ॐ हूं हूं लीलावती कामेश्वरी अप्सरा प्रत्यक्षं सिद्धि हूं हूं फट् ।।

om hoom hoom lilaawati kaameshwari apsaraa pratyaksham siddhi hoom hoom phat

साधना समाप्ति के बाद रखा हुआ मिठाइयों का भोग स्वयं ग्रहण करले और ग्लास मे रखा हुआ जल पिपल के पेड़ के जड पर चढा दे,जल चढाने के बाद भगवान श्रीकृष्ण जी से मन ही मन साधना सफलता हेतु प्रार्थना करें। साधना से आपको अपने जिवन मे परिवर्तन नजर आयेगा,इस साधना से किसी प्रकार का कोई नुकसान नही होता है सिर्फ अप्सरा प्रति स्वयं का भावना शुद्ध रखें। जब भी जिवन मे किसी विशेष मनोकामना को पुर्ण करवाना हो तो शुक्रवार या सोमवार के रात्री मे 9 बजे के बाद अप्सरा से प्रार्थना करते हुए मंत्र का 1 घण्टे तक जाप करने से आपका कोई भी मनोकामना शिघ्र ही पुर्ण हो सकता है। मंत्र जाप से पहिले वही विधी करना है जैसे हमने चंद्रग्रहण के समय किया था। जो साधक अप्सरा को प्रत्यक्ष सिद्ध करना चाहते है उन्हे यह साधना कम से कम नित्य रात्रिकाल मे 2-3 घण्टे तक करते रहना चाहिए। येसा कम से कम 21 दिनो तक करने से लीलावती अप्सरा का प्रत्यक्षीकरण होना सा सम्भव है। यह विशेष साधना करने से आपको बहोत सारी अनुभुतिया हो सकती है,जिसमे आपको सुगंध का एहसास हो सकता है और पायल/घुंगरु के बजने का आवाज भी आसकता है।

आप सभी को साधना मे अवश्य ही सफलता प्राप्त हो,यही मातारानी से प्रार्थना है।



आदेश..........

30 Nov 2015

उर्वशी अप्सरा प्रत्यक्षीकरण साधना.

नारायण की जंघा से उर्वशी की उत्पत्ति मानी जाती है। पद्म पुराण के अनुसार कामदेव के ऊरू से इसका जन्म हुआ था। श्रीमद्भागवत के अनुसार यह स्वर्ग की सर्वसुन्दर अप्सरा थी।शास्त्रों में कई स्थानों पर अप्सराओं का उल्लेख आता है।

आखिर ये अप्सराएं कौन हैं? यह प्रश्न काफी लोगों के मन में उठता है। अप्सराएं बहुत ही सुंदर, मनमोहक, किसी की भी तपस्या भंग करने में सक्षम कन्याएं होती बताई गई हैं। जब भी कोई असुर, राजा, ऋषि या अन्य कोई मनुष्य भगवान को प्रसन्न करने के लिए कठोर तप करता है वहां देवराज इंद्र अप्सराओं को भेजकर उनका तप भंग करवाने की चेष्टा करते हैं। ऐसा ही उल्लेख वेद-पुराण में बहुत से स्थानों पर आया है।

शास्त्रों के अनुसार देवराज इंद्र के स्वर्ग में 11 अप्सराएं मुख्य रूप से बताई गई हैं। इन सभी अप्सराओं का रूप बहुत ही सुंदर बताया गया है। ये 11 अप्सराएं हैं- कृतस्थली, पुंजिकस्थला, मेनका, रंभा, प्रम्लोचा, अनुम्लोचा, घृताची, वर्चा, उर्वशी, पूर्वचित्ति और तिलोत्मा। वेद-पुराण में कई स्थानों में इन अप्सराओं के नाम आए हैं, जहां इन्होंने घोर तपस्या में लीन भक्तों के तप को भी भंग कर दिया।

सौन्दर्य, सुख प्रेम की पूर्णता हेतु रम्भा, उर्वशी और मेनका तो देवताओं की अप्सराएं रही हैं, और प्रत्येक देवता इन्हे प्राप्त करने के लिए प्रयत्नशील रहा है। यदि इन अप्सराओं को देवता प्राप्त करने के लिए इच्छुक रहे हैं, तो मनुष्य भी इन्हे प्रेमिका रूप में प्राप्त कर सकते हैं। इस साधना को सिद्ध करने में कोई दोष या हानि नहीं है तथा जब अप्सराओं में श्रेष्ठ उर्वशी सिद्ध होकर वश में आ जाती है, तो वह प्रेमिका की तरह मनोरंजन करती है, तथा संसार की दुर्लभ वस्तुएं और पदार्थ भेट स्वरुप लाकर देती है। जीवन भर यह अप्सरा साधक के अनुकूल बनी रहती है, वास्तव में ही यह साधना जीवन की श्रेष्ठ एवं मधुर साधना है तथा प्रत्येक साधक को इस सिद्धि के लिए प्रयत्नशील होना चाहिए।




साधना विधान:-

इस साधना को किसी भी शुक्रवार से प्रारम्भ किया जा सकता है। यह रात्रिकालीं साधना है। स्नान आदि कर पीले आसन पर उत्तर की ओर मुंह कर बैठ जाएं। सामने पीले वस्त्र पर 'उर्वशी यंत्र' (ताबीज) स्थापित कर दें तथा सामने पांच गुलाब के पुष्प रख दें। फिर पांच घी के दीपक लगा दें और अगरबत्ती प्रज्वलित कर दें। फिर उसके सामने 'सोनवल्ली' रख दें और उस पर केसर से तीन बिंदियाँ लगा लें और मध्य में निम्न शब्द अंकित करें -

॥ ॐ उर्वशी प्रिय वशं करी हुं ॥

Om urvashi priy vashyam kari hoom

इस मंत्र के नीचे केसर से अपना नाम अंकित करें। फिर उर्वशी माला से निम्न मंत्र की १०१ माला जप करें -


मंत्र:-

॥ ॐ ह्रीं उर्वशी मम प्रिय मम चित्तानुरंजन करि करि फट ॥

om hreem urvashi mam priy mam chittaanuranjan kari kari phat



यह मात्र सात दिन की साधना है और सातवें दिन अत्यधिक सुंदर वस्त्र पहिन यौवन भार से दबी हुई उर्वशी प्रत्यक्ष उपस्थित होकर साधक के कानों में गुंजरित करती है कि जीवन भर आप जो भी आज्ञा देंगे, मैं उसका पालन करूंगी । तब पहले से ही लाया हुआ गुलाब के पुष्पों वाला हार अपने सामने मानसिक रूप से प्रेम भाव उर्वशी के सम्मुख रख देना चाहिए। इस प्रकार यह साधना सिद्ध हो जाती है और बाद में जब कभी उपरोक्त मंत्र का तीन बार उच्चारण किया जाता है तो वह प्रत्यक्ष उपस्थित होती है तथा साधक जैसे आज्ञा देता है वह पूरा करती है। साधना समाप्त होने पर 'उर्वशी यंत्र (ताबीज)' को धागे में पिरोकर अपने गलें में धारण कर लेना चाहिए। सोनवल्ली को पीले कपड़े में लपेट कर घर में किसी स्थान पर रख देना चाहिए, इससे उर्वशी जीवन भर वश में बनी रहती है।




अब बात करेंगे की सोनवल्ली क्या है?

जो साधक पारद के अठारह संस्कार जानते है उनके लिये यह कोइ नया नाम नही है।पारद तंत्र मे स्वर्ण निर्माण प्रक्रिया मे अगर सोनवल्ली का सही प्रयोग किया जाये तो क्रिया मे पुर्ण सफलता प्राप्त होता है किंतु सिर्फ सोनवल्ली के आधार पर क्रिया नही कर सकते है,इसके लिये अन्य जडियो का भी महत होता है। आज के समय मे ओरिजिनल सोनवल्ली मिलना आसान कार्य नही है।मेरे लिये तो कुछ दिन पुर्व ही इसको प्राप्त करना सम्भव हुआ है और इसको सही साधकों तक पहोचाने हेतु अब मै कार्यरत हु।





आदेश......