23 Sept 2021

सिद्ध काला सिंदूर.(चौसठ योगिनी प्रदत्व)


जीवन की प्रत्येक क्रिया तन्त्रोक्त क्रिया है । किसी भी वनस्पति के साथ कोई तंत्र करने पर वनस्पति तंत्र कहा जाता है,वैसे ही  यह प्रकृति,यह तारा मण्डल,मनुष्य का संबंध,चरित्र,विचार,भावनाये सब कुछ तो तंत्र से ही चल रहा है,जिसे हम जीवन तंत्र कहेते है।

जीवन मे कोई घटना आपको सूचना देकर नहीं आति है,क्योकी  सामान्य व्यक्ति मे इतना अधिक सामर्थ्य नहीं होता है की वह काल की  गति को पहचान सके,भविष्य का उसको ज्ञान हो,समय चक्र उसके अधीन हो ये बाते संभव ही नहीं,इसलिये हमे तंत्र की शक्ति को समझना आवश्यक है और यह बात मैंने बहोत बार समझाया है ।


आज बात करेंगे के सिद्ध काला सिंदूर क्या है?


सिद्ध काला सिंदूर तंत्र जगत की बहुत ही दुर्लभतम वस्तु मानी जाती है । तांत्रिकों एवं काला जादू करने वालो के लिए ये उसी प्रकार है,जैसे अंधेरे में व्यक्ति को अचानक सूर्य प्रकाश मील जाय, काली और त्रिपुर सुंदरी एवं भैरव महाराज के मंत्रों के अनुष्ठान में काला सिंदूर तांत्रिकों की सबसे महत्वपूर्ण वस्तु है । 64 योगिनियो की सिद्धि या उनका यंत्र बनाने के लिए मुख्य रूप से चाहिए ।

सिद्ध काला सिंदूर अत्याधिक दुर्लभ होने के कारण यह आसानी से प्राप्त नही होता । गुरु कृपा ही केवलं यही पंक्ति यहां पर याद आती है,क्योंकि बिना गुरु कृपा ये प्राप्त नही हो सकता,रावण कृत उड्डीश तंत्र के अनुसार शुद्ध काला सिंदूर पूरी पृथ्वी पर केवल 16,000 किलो है । इसे प्राप्त करना अत्यंत दुर्लभ है , दस महाविद्या की किसी भी साधनाओ में अगर सिद्ध काले सिंदूर का उपयोग केवल तिलक के रूप में किया जाए तो यह ईष्ट को आकर्षण करने का कार्य करता है । मता महाकाली के एवं भैरव बाबा कि पूजन एवं सिद्धि में भी यह काला सिंदूर तिलक सहाय्यक है एवं सिद्धि की प्राप्ति में 100% सहायता हो सकती है।  इससे यह सिद्ध काला सिंदूर तंत्र विद्या और काला जादू के लिए और भी महत्वपूर्ण हो जाता है। सिद्ध काला सिंदूर की इतनी मान्यता है, कि अगर इसका तिलक करके कोई भी व्यक्ति अपने उद्देश्य की पूर्ति के लिए माँ भगवती काली को आवाहन करे तो व्यक्ति किसी भी कार्य से जाए उसमे सफलता प्राप्त होती है और यह बात बहोत से साधको ने अपने जीवन मे आजमायी हुई है । कोई अपना प्रिय बिछड़ गया हो, उसे वापस प्राप्त करना हो, उसके किसी भी कपड़े या उसके बाल युक्ति से प्राप्त कर उसपर सिद्ध कला सिंदूर लगाए एवं निम्न मंत्र का जाप करे आप का प्रिय आपको आपके घर पर आकर मिलेगा । ये सिंदूर इतना दुर्लभ है कि इसका मन्त्र भी हर किसी को नही दिया जा सकता ।

64 योगिनी मंदिर मुरैना के पास पाया गया है,ये पूरातत्व विभाग के अंतर्गत आता है,इस क्षेत्र के आसपास क़ई शिलालेख एवं  कई तांत्रिक मंत्र पाए गए हैं,जिससे स्पष्ट है "जिसमे काला सिंदूर के विषय में इतना दुर्लभ शिला लेख है,कि इस काला सिंदूर को स्वर्ण में बदला जा सकता है"। 64 योगिनी मंदिर के आसपास इसका महत्वपूर्ण आधार है,ऐसा माना जाता है कि अधिकांश कौल तांत्रिक की उत्पत्ति यही हुई है । सामान्य धारणा यह है कि कोई भी व्यक्ति तब तक पूर्ण तांत्रिक नहीं बन सकता जब तक कि वह 64 योगिनी के सामने साधना करके माथा न टेके ।

अकसर यह सोचा जाता है कि तंत्र विद्या और काली शक्तियों का समय गुजर चुका है,लेकिन 64 योगिनी तंत्र आज भी यह जीवन शैली का हिस्सा है । शक्ति तांत्रिक ऐसे समय में एकांतवास से बाहर आते हैं और अपनी शक्तियों का प्रदर्शन करते हैं । इस दौरान वे लोगों को वरदान अर्पित करने के साथ-साथ जरूरतमंदों की मदद भी करते हैं । वैसे तो 64 योगिनी मंदिर अत्यंत प्राचीन मंदिर में दिया जाने वाला प्रसाद भी दूसरें शक्तिपीठों से बिल्कुल ही अलग है। इस मंदिर में प्रसाद के रूप कभी कभार ये काला सिंदूर किसी सिद्ध तांत्रिक के द्वारा किसी बिरले को ही प्राप्त होता है और जो साधक 64 योगिनियों के मंत्र जानता हो वह इस सिंदूर को हक़ से मांगकर प्राप्त कर लेता है । कहा जाता है कि "जब योगिनियां ऋतुकाल में जाग्रत होती है,तो सफेद रंग का कपडा हर योगिनी के सामने बिछा दिया जाता है"। तब वह वस्त्र 3 दिन के बाद रज से काले रंग का होता है । इस कपड़ें को काला वस्त्र कहते है। इस वस्त्र से ये काला सिंदूर प्राप्त कर लिया जाता है । यह एक अत्यंत गोपनीय सिंदूर है,इसे ही विशेष भक्तों को प्रसाद के रूप में दिया जाता है । सिद्ध काला सिन्दूर पाउडर के रूपमें जो की 64 योगिनियो के मंदिर से प्राप्त होता है । मुरैना के इस मंदिर में कुल 64 कमरे और 101 खंभे हैं, प्रत्येक कमरे में एक शिवलिंग के साथ योगिनी की मूर्ति है। इस मंदिर को इकंतेश्वर या इकोत्तरसो मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। मंदिर के बीच में भगवान शिव लिंग को स्थापित किया गया है।

स्थानीय लोगों के अनुसार पहले इस मंदिर में रात के समय तंत्र-मंत्र की शिक्षा दी जाती थी इस कारण से कोई इंसान आज भी रात में चौसठ योगिनी मंदिर में नहीं रहता है और इसी मंदिर से सिद्ध काला सिंदूर प्राप्त किया जा सकता है । पौराणिक कथा के अनुसार, देवी दुर्गा ने एक राक्षसो को मारने के लिए 64 देवताओं और देवी का रूप धारण कर लिया था, इसी कारण से इन चौसठ योगिनी मंदिरों, जिन्हें जोगिनियों के रूप में भी जाना जाता है इसलिए 64 मूर्ति के रूप में स्थापना की गई थी ।



* सिद्ध काला सिन्दूर से वशीकरण सम्भव है और मै यहा आज सिद्धो के आजमाये हुये प्रयोग को दे रहा हूँ ।

1-किसी भी अष्टमी के दिन शुभ समय पर सिद्ध काला सिन्दूर पर "ॐ ह्रीं त्रीं हूं सर्वजन वश्यय वश्यय फट" मंत्र का 50-60 मिनट तक जाप करे और सिन्दूर को संम्भाल कर रखें । जब भी किसी महत्वपूर्ण कार्य पर जाना हो तो स्वयं सिन्दूर का तिलक करके जाये तो सभी कार्यो मे सफलता प्राप्त किया जा सकता है । 

2-अगर किसी साधना मे सफलता ना मिल रहा हो तो सिद्ध काला सिन्दूर (स्याही) से भोजपत्र पर महुआ (पेड़) के कलम से अगर नही मिले तो अनार के पेड़ की लकड़ी से जिस मंत्र को सिद्ध करना हो वह लिखे । उसका साधारण पुजन करते हुए उसको देखते हुए मंत्र का जाप करे तो मंत्र जागृति होता हैं । इस तरह से किसी भी विशेष मंत्र को सिद्ध किया जा सकता है । 

3-मन मे कोइ मनोकामना हो जो पुर्ण नहीं हो रहा हो तो किसी नये लाल वस्त्र पर एक सुपारी रखे जो भैरव का रुप माना जायेगा और उसका किसी अमावस्या के रात्री मे पुजन करके "ॐ भं भैरवाय मम अमुक कामना शिघ्र सिद्धये ह्रीं फट" मंत्र का जाप 540 बार जाप करके सिद्ध काला सिन्दूर का सुपारी को तिलक लगायें । यह क्रिया होने के बाद सुपारी को उसी लाल कपड़े मे बांधकर उसी रात से सर के निचे रखकर सो जाये । जब तक आपका मनोकामना पुर्ण ना हो तब तक सुपारी को सर के निचे रखकर ही सोना है और मनोकामना पुर्ण होने के बाद सुपारी को लाल वस्त्र के साथ बहते हुए जल मे प्रवाहित कर देना है । इस प्रयोग से मनोवांछित सफलता पाया जा सकता है,फसा हुआ धन वापस मिल सकता है,शादी जुड़ सकता है.....इस प्रकार से बहोत सारा मनोकामना पुर्ण किया जा सकता हैं । 

4-जिवन मे धन का अभाव हो और अच्छा पैसा कमाने के बाद घर मे पैसा टिकता ना हो तो पिले रंग के वस्त्र मे सिद्ध काला सिंदूर के साथ बेलपत्र को बांधकर तिजोरी मे रखे तो इस प्रकार के समस्या का समाधान हो सकता है । 

5-अब महत्वपूर्ण प्रयोग जो शायद कुछ लोगो के लिये विशेष है । यह प्रयोग वशीकरण हेतु है,जब दो प्यार करने वालो के जिवन मे किसी कारण से मनमुटाव आजाये और दोनो का रिश्ता टुट जाये तो यह साधनात्मक प्रयोग जो खोये हुए प्यार को वापस जिवन मे प्राप्त किया जा सकता है । यह एक शाबर मंत्र प्रयोग होते हुए भी आसान सा प्रयोग है,इससे हम जिसे चाहते है उसको प्राप्त कर सकते है ।




शाबर वशीकरण मंत्र प्रयोग:-

सिद्ध काले सिन्दूर को गुलाब जल में  मीला कर स्याही बनाये शुक्ल पक्ष के शनिवार को अगर पुष्य नक्षत्र हो तो बहुत उपयोगी होगा किसी भी चौराहे से मिट्टी लेकर आये उस मिट्टी की पुतली बनाये उस पुतली पर काले सिंदूर से आँख नाक कान बनाये एवं साध्य स्त्री का नाम लिखे उसके बाद काले सिंदूर की स्याही से 1 घेरा बनाये उस घेरे में पुतली को रखे । उपरोक्त मन्त्र की 11 मालाये जपे प्रबल वशीकरण होगा । उत्तर दिशा मे मुख करके जाप करे,यह एक गोपनिय प्रयोग है-


मंत्र:-

।। ॐ नमो आदेश गुरु को,जंगल की योगिनी पाताल के नाग उठ गए,मेरे वीर अमुक को लाओ मेरे पास जहाँ जहाँ जाए मेरे सहाई तहां तहां आव कजभरी नजभरी अन्तासो अगरी तक नफे तक एक फुरो मंत्र ईश्वरो वाचा मेरे गुरु का वचन साँचा जो न जाये वीर गुरु गोरखनाथ की दुहाई छू ।।


अब आप लोग समझ ही गये होगे की सिद्ध काला सिन्दूर को मोहिनी/वशीकरण का श्रेष्ठ माध्यम भी कहा जाता है । मैंने यहा मंत्र को आपके सामने रखा है ताकि आप सभीको लाभ हो । तांत्रिक ग्रंथो के अनुसार सिद्ध काले सिंदूर का 1 टीका किसी बच्चे को रोज लगा दिया जाए तो नजर दोष दूर हो जाता है,कोई मकान नया बना हो तो मकान पर कही भी सिद्ध काले सिंन्दूर का एक टीका नारियल के साथ किसी मटके में रख कर घर के मुख्य द्वार पर लटका दे,कभी भी घर बनाने में विलंब नही होगा । अगर केवल सिद्ध काले सिंदूर का एक टीका भी रोज लगा लिया जाए तो 9 ग्रहों के दुष्ट परिणामो से मुक्ति मिलती है,किंतु ये समझ लीजिए कि काला सिंदूर ओरिजनल होना चाहिए और शुद्ध एवं सिद्ध भी होना आवश्यक है ।

मुख्य रूप से काला सिंदूर एक अत्यंत दुर्लभ वस्तु है,जो सिद्ध होने के बाद आप को सफल व्यक्ति बना सकती है,इसके अलावा धरती में से स्वर्ण की खोज एवं अत्याधिक उच्च तांत्रिक क्रियाओं के लिए इस सिद्ध काले सिंदूर का प्रयोग किया जाता है ब्लॉग पर सब कुछ लिखना सम्भव नही है इसलिए यह आर्टिकल यही पर पूर्ण करता हु ।

सिद्ध काले सिंदूर को प्राप्त करने के लिए आपको 1850/-रुपये दक्षिणा राशि देनी होगी जो कि कामिया (कामाख्या)  सिन्दूर के मुकाबले बहोत कम है । जितना फायदा कामिया सिंदूर का है, उतना ही फायदा काले सिंदूर से होता है । यहां पर सिध्द काले सिंदूर का फोटो डालने की इच्छा थी परंतु इतने गोपनीय वस्तु को सब के सामने फ़ोटो के माध्यम से दिखना मुझे सही नही लग रहा है इसलिए सिध्द काले सिंदूर को प्राप्त करके अवश्य लाभ उठाएं ।

सिध्द काले सिंदूर को प्राप्त करने हेतु सम्पर्क करें-

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आदेश......

16 Sept 2021

अघोरी मनसाराम साधना एवं अघोर गुरुमंत्र.

अघोरी साधना का नाम सुनकर लोगों के मन में या तो भय व्याप्त होता है या उनके मन में एक नार्किक मलीन साधना के बारे में मानसिक दृष्य चलने लगता है।

ये बात प्रमाणित है कि मनुष्य की समाज में प्रतिष्ठा उसे व्यवहार या संस्कार से नही अपितु उसके धन वैभव से ही होती है सभके जीवन में ईश्वर एक न एक बार समृद्ध होने का अवसर देता है लेकिन कई बार आदमी खुद गलती करता है यो कई बार अपने स्नेही जनों के कारण किसी मुसीबत में पड़ता है और भी बहुत सारी धन वैभव प्राप्त करने की साधनायें है, जो शास्त्रों में विधिवत रूप से वर्णित है लेकिन ये समय बहुत तीव्रता से चलता है समय कम होने के कारण अक्सर सभी शास्त्रीक साधनायें मर्यादित और विधिवत न होने के कारण फलित नही होती ।

बहुत सारी मुस्लिम साधनायें भी होती है उनमें बहुत सख़्त नियम और बहुत गहन मार्गदर्शन की आवश्यकता होती है और कई बार उन साधनाओं को कई कई बार दोहराना पड़ता है जिससे बिना मार्गदर्शन और धैर्य के मनुष्य का अमूल्य समय नष्ट होता है और साधना कभी फलित नही होती।
मेरे जीवन में ऐसे बहुत से साधकों से संपर्क हुआ जिनका जीवन धन के अभाव में या भूत प्रेत बाधा के कारण अंत होने के कगार पर था एक अघोरी साधना जिसका कोई भी साधक आज तक निराश नही हुआ हा कई बार आदमी के परिश्रम या भावना में ही कोई कमी रह जाती है।

वरना इस साधना से साधक का जीवन अवश्य परिवर्तित होता है और साधक समृद्धि की तरफ अग्रसर होता ही है।

अब कोई बोले कि मुझे रातों रात में करोड़पति बनना है तो वो कोरे झूठ के इलावा कुछ नही होगा । साधना करने के बाद आपको आभा मण्डल असमान्य रूप से विकसित हो चुका होता है,अगर आप साधनाकाल पूरा होने तक प्रतीक्षा नही कर सकते तो ये वही बात होगी कि बिल्ली दही ना जमने दे,उतनी प्रतीक्षा तो करनी ही पड़ेगी ही पड़ेगी ।

एक मिनट में जिन्न दो मिनट में परी सिद्ध करने वाले के बारे में क्या बोला जाए। सुनकर ही हंसी आती है कि जो संभव नहीं है झूठ बोलने वाले किस तरह डींगें मारते हैं,लेकिन सच सामने आने में समय नही लगता ये बात बिल्कुल सही है ।

असल बात ये है कि अगर आप नए साधक हो तो पहली बार गलती करोगे ही करोगे । बस उसी चक्कर में बहुत सारे नए साधक उलझ जाते है और एक बार भ्रमित अवश्य होंगे और जब होश आएगा तब बहुत ज्यादा समय बर्बाद हो गया होगा।

अघोरी साधना एक बहुत ही आधिक प्रचंड शक्तिशाली उग्र तामसिक साधना है,अघोरी साधना इसको करने से कोई भी इच्छा पूरी ना हो ये हो नही सकता । अघोरी साधनाये कभी भी व्यर्थ नही जाती है परंतु बिना गुरु के मार्गदर्शन ऐसी साधनाये भी कभी कभी विफल हो जाती है । इस साधना को गृहस्थ और सन्यासी सभी कर सकते हैं। किसी तरह के खाने पीने का कोई परहेज़ नही है।

ये साधना आपको तब करनी चाहिए जब आप के जीवन में रुकावटें खत्म होने का नाम नही लेती एक से एक समस्या आपके जीवन में आती ही रहती है और धंदे व्यापार में से कोई लाभ नही मिलता । अगर पूरी तरह कंगाली भी आ गयी हो खाने के लाले पड़ गए हों तो ये साधना आपके जीवन को सम्पन्नता को और अग्रसर करती है।


मैं यहाँ पर आपको मनसाराम अघोरी बाबा का एक मन्त्र उसके नियम और विधि देने जा रहा हूं जिसको करने से बहोत सारे साधकों का किसी ना किसी तरह से फायदा हुआ ही हुआ है।

ये जाने अगर आप बिलकुल नए साधक है तो कुछ चीजों का किसी विद्वान जानकार पता लगा लें कि आपके ग्राम देवी, ग्राम देवता,कुलदेवी,कुलदेवता,इष्ट और पित्र किसी तरह से नाराज तो नही हैं, क्या जीवन में कोई भूल या कोई गलती तो नही हुई या किसी का कोई भोग देना तो नही रहता है। या आपके घर में किसी अनजानी शक्ति जिस का आपको पता न हो वास तो नही। ये अनजान शक्तियां आपका फायदा और नुकसान दोनों तरह का काम कर सकती है।

ये साधना 41 दिनों की है। खाने पीने का कोई परहेज नहीं है,अपितु जो भी खाओ पीओ पहले अघोरी बाबा को भोग लगाओ ताकि जल्दी सफलता मिले । हां ब्रह्मचर्य व्रत का पालन सख्ती से करें , जिनको स्वप्नदोष की समस्या है उनको पहले शमसान की साधना करनी चाहिए, क्योंकि जलते हुए मसान के सामने खड़े होने से ये दोष धीरे धीरे समाप्त हो जाता है।

प्रथम दिन साधना को शुरू करने से पहले एक बार अपने इष्ट पित्र को भोग दे, फिर हाथ में जल लेकर मनोकामना स्मरण करें और संकल्प लें। सिर पर काला पटका बांधे और कपड़े काले पहनने है।
भोजन जितनी बार भी करो लेकिन पहला ग्रास अघोरी को समर्पित करना होगा।


जिस दिन जाप शुरू करना हो उस दिन शमशान मैं या चौराहे पर जाकर आपको एक बोतल शराब एक पताशा पांच लड्डू लौंग का जोड़ा एक इलायची ग्यारह सफेद गुलाब के फूल अघोरी मंसाराम के नाम से दें और वहाँ से थोड़ी सी मिट्टी किसी कागज में डालकर अपने साथ ले लें।


साधना स्थल का चुनाव करने के बाद आपको दक्षिण दिशा छोड़कर किसी भी दिशा में मुँह कर सकते हैं। भोग में देसी या अंग्रेजी शराब देना है। सफेद मिठाई, सफेद फूल,चंदन की अगरबत्तियां लगानी है और गुग्गल की धूनी देनी है । साधना काल में एक सरसों के टेलनक दीया जलता रहे। कंम्बल का आसन लगाएं। इस साधना को आप श्मशान चौराहे खाली मैदान या घर की खाली छत पर कर सकते है,लेकिन भोग आपको श्मशान घाट,किसी चौराहे,किसी पीपल या वट वृक्ष के नीचे ही देना है । जल पात्र अवश्य अपने पास में रखें जाप के बाद वो जल दूसरे दिन सुबह किसी पेड़ में डाल दें।
5 माला रोज़ जाप करें तो बहुत अद्धभुत होगा आपको ज्यादा से ज्यादा एक हफ्ते में परिणाम मिलने लगेंगे,किसी किसी साधक को ऐसा भी हो सकता है अघोरी वीर परीक्षा लें अक्सर ऐसा नहीं होता उस अवस्था में साधक को धैर्य से काम लेना चाहिए। इस साधना को कभी खाली नहीं छोड़ना चाहिए।



मन्त्र:-

।।ॐ नमो आदेश गुरु को,मनसाराम मरघट बसे खप्पर में पिये मद कस प्याला फिर मेरा कारज सिद्ध करे तो पूजूँ औघड़वीर ना सिद्ध करो तो गौरा महादेव पार्वती की दुहाई,चले मन्त्र औघड़ी वाचा देखूं औघड़वीर मनसाराम तेरे शब्द का तमाशा मेरे लिये चल मेरा कारज करने चल ना चले तो कालभैरव की लाख लाख दुहाई फिरै छू ।।


ये प्रामाणिक मंत्र है अन्य किसी के भी आर्टिकल में देखने नही मिलेगा, कुछ लोगो ने इस विषय पर अधूरा लिखा है और गलत मंत्र दिया है परंतु आज आपको सही मंत्र दिया जा रहा है ।



अघोर गुरु मंत्र

।। घोर घोर अघोर का चेला मद मे मस्त रमता मुर्दे के भस्म को चलाता महाकाल को पुजे मसान को पुजे गुरु के चरणों को पूजे गुरुकृपा से सब कारज सिद्ध करे इतनी शक्ति औघड़ के शिष्य को वचन में मीले ना मिले तो ****** गुरुमुख औघड़ अघोरी बाबा का गुरुमंत्र सच्चा चले छू ।।


संसार का कोई भी अघोरी साधना करो परन्तु उससे पहिले औघड़ अघोरी बाबा का गुरुमंत्र जाप करो,इससे सभी साधनाओ में सफलता मिलता है । इस गुरुमंत्र को कान में 3 बार बोलकर फुंक लगाकर दिया जाता है और मंत्र देने से पहिले मशान में एक देसी मुर्गा,शराब की बड़ी बॉटल, पान के पत्ते पर कत्था चुना लौंग इलायची सुपारी काले वस्त्र पर रखकर देना पड़ता है । गुरुमंत्र को देने के लिए लगने वाला सामान का खर्चा 1800/-रुपये के आस पास आता है और 101 रुपये दक्षिणा को पकड़कर 1900/-रुपये लिया जाएगा,अब जिन्हें बिना औघड़ अघोरी बाबा का गुरुमंत्र जाप किये साधना करनी है वो कर सकते है और जिन्हें औघड़ अघोरी बाबा का गुरुमंत्र प्राप्त करके साधना करनी हो वो भी कर सकते है ।

यह साधना निशुल्क है परंतु जिन्हें औघड़ अघोरी बाबा का गुरुमंत्र चाहिए उन्हें खर्चा करना पड़ेगा ।
आगे आपकी मर्जी.....भगवती सभी को सफलता प्रदान करे यही प्रार्थना है ।



आदेश......

1 Sept 2021

पितृदोष निवारण शाबर मंत्र (pitru dosh nivaran shabar mantra)



हम जहां रहते हैं वहां कई ऐसी शक्तियां होती हैं, जो हमें दिखाई नहीं देतीं किंतु बहुधा हम पर प्रतिकूल प्रभाव डालती हैं,जिससे हमारा जीवन अस्त-व्यस्त हो उठता है और हम दिशाहीन हो जाते हैं । इन अदृश्य शक्तियों को ही आम जन ऊपरी बाधाओं की संज्ञा देते हैं । भारतीय ज्योतिष में ऐसे कतिपय योगों का उल्लेख है जिनके घटित होने की स्थिति में ये शक्तियां शक्रिय हो उठती हैं और उन योगों के जातकों के जीवन पर अपना प्रतिकूल प्रभाव डाल देती हैं।


भारतीय संस्कृति के अनुसार प्रेत योनि के समकक्ष एक और योनि है जो एक प्रकार से प्रेत योनि ही है, लेकिन प्रेत योनि से थोड़ा विशिष्ट होने के कारण उसे प्रेत न कहकर पितृ योनि कहते हैं । प्रेत लोक के प्रथम दो स्तरों की मृतात्माएं पितृ योनि की आत्माएं कहलाती है । इसीलिए प्रेत लोक के प्रथम दो स्तरों को पितृ लोक की संज्ञा दी गयी है।


भारतीय ज्योतिष में सूर्य को पिता का कारक व मंगल को रक्त का कारक माना गया है । अतः जब जन्मकुंडली में सूर्य या मंगल, पाप प्रभाव में होते हैं तो पितृदोष का निर्माण होता है । पितृ दोष वाली कुंडली में समझा जाता है कि जातक अपने पूर्व जन्म में भी पितृदोष से युक्त था । प्रारब्धवश वर्तमान समय में भी जातक पितृदोष से युक्त है ।

जन्म के समय व्यक्ति अपनी कुण्डली में बहुत से योगों को लेकर पैदा होता है । यह योग बहुत अच्छे हो सकते हैं, बहुत खराब हो सकते हैं, मिश्रित फल प्रदान करने वाले हो सकते हैं या व्यक्ति के पास सभी कुछ होते हुए भी वह परेशान रहता है । सब कुछ होते भी व्यक्ति दुखी होता है ।

इसका क्या कारण हो सकता है? कई बार व्यक्ति को अपनी परेशानियों का कारण नहीं समझ आता तब वह ज्योतिषीय सलाह लेता है । तब उसे पता चलता है कि उसकी कुण्डली में पितृ-दोष बन रहा है और इसी कारण वह परेशान है ।

बृहतपराशर होरा शास्त्र के अनुसार जन्म कुंडली में 14 प्रकार के शापित योग हो सकते हैं । जिनमें पितृ दोष, मातृ दोष, भ्रातृ दोष, मातुल दोष, प्रेत दोष आदि को प्रमुख माना गया है । इन शाप या दोषों के कारण व्यक्ति को स्वास्थ्य हानि, आर्थिक संकट, व्यवसाय में रुकावट, संतान संबंधी समस्या आदि का सामना करना पड़ सकता है, पितृ दोष के बहुत से कारण हो सकते हैं । उनमें से जन्म कुण्डली के आधार पर कुछ कारणों का उल्लेख किया जा रहा है जो निम्नलिखित हैं :-


जन्म कुण्डली के पहले, दूसरे, चौथे, पांचवें, सातवें, नौवें या दसवें भाव में यदि सूर्य-राहु या सूर्य-शनि एक साथ स्थित हों तब यह पितृ दोष माना जाता है. इन भावों में से जिस भी भाव में यह योग बनेगा उसी भाव से संबंधित फलों में व्यक्ति को कष्ट या संबंधित सुख में कमी हो सकती है ।

सूर्य यदि नीच का होकर राहु या शनि के साथ है तब पितृ दोष के अशुभ फलों में और अधिक वृद्धि होती है.किसी जातक की कुंडली में लग्नेश यदि छठे, आठवें या बारहवें भाव में स्थित है और राहु लग्न में है तब यह भी पितृ दोष का योग होता है । 


यदि समय रहते ही इस दोष के शाबर मंत्र का जाप कर लिया जाये तो पितृदोष से मुक्ति मिल सकती है। पितृदोष वाले जातक के जीवन में सामान्यतः निम्न प्रकार की घटनाएं या लक्षण दिखायी दे सकते हैं ।


1. यदि राजकीय/प्राइवेट सेवा में कार्यरत हैं तो उन्हें अपने अधिकारियों के कोप का सामना करना पड़ता है । व्यापार करते हैं, तो टैक्स आदि मुकदमे झेलने होंगे, सम्मान की बर्बादी होगी ।

2. मानसिक व्यथा का सामना करना पड़ता है । पिता से अच्छा तालमेल नहीं बैठ पाता।

3. जीवन में किसी आकस्मिक नुकसान या दुर्घटना के शिकार होते हैं।

4. जीवन के अंतिक समय में जातक का पिता बीमार रहता है या स्वयं को ऐसी बीमारी होती है जिसका पता नहीं चल पाता।

5. विवाह व शिक्षा में बाधाओं के साथ वैवाहिक जीवन अस्थिर सा बना रहता है।

6. वंश वृद्धि में अवरोध दिखायी पड़ते हैं। काफी प्रयास के बाद भी पुत्र/पुत्री का सुख नहीं होगा।

7. गर्भपात की स्थिति पैदा होती है।

8. अत्मबल में कमी रहती है। स्वयं निर्णय लेने में परेशानी होती है। वस्तुतः लोगों से अधिक सलाह लेनी पड़ती है।

9. परीक्षा एवं साक्षात्मार में असफलता मिलती है।



पितृदोष ऐसे भी पहचान सकते है:-

पेट के रोग, दिमागी रोग, पागलपन, खाजखुजली ,भूत -चुडैल का शरीर में प्रवेश, बिना बात के ही झूमना, नशे की आदत लगना, गलत स्त्रियों या पुरुषों के साथ सम्बन्ध बनाकर विभिन्न प्रकार के रोग लगा लेना, शराब और शबाब के चक्कर में अपने को बरबाद कर लेना,लगातार टीवी और मनोरंजन के साधनों में अपना मन लगाकर बैठना, होरर शो देखने की आदत होना, भूत प्रेत और रूहानी ताकतों के लिये जादू या शमशानी काम करना, नेट पर बैठ कर बेकार की स्त्रियों और पुरुषों के साथ चैटिंग करना और दिमाग खराब करते रहना, कृत्रिम साधनो से अपने शरीर के सूर्य यानी वीर्य को झाडते रहना, शरीर के अन्दर अति कामुकता के चलते लगातार यौन सम्बन्धों को बनाते रहना और बाद में वीर्य के समाप्त होने पर या स्त्रियों में रज के खत्म होने पर टीबी तपेदिक फ़ेफ़डों की बीमारियां लगाकर जीवन को खत्म करने के उपाय करना, शरीर की नशें काटकर उनसे खून निकाल कर अपने खून रूपी मंगल को समाप्त कर जीवन को समाप्त करना, ड्र्ग लेने की आदत डाल लेना, नींद नही आना, शरीर में चींटियों के रेंगने का अहसास होना,गाली देने की आदत पड जाना,सडक पर गाडी आदि चलाते वक्त अपना पौरुष दिखाना या कलाबाजी दिखाने के चक्कर में शरीर को तोड लेना, जैसे गाडीबाजी,पहलवानी, शर्त लगाना ...आदि ।


पितृदोष निवारण शाबर मंत्र पितृदोष को समाप्त करने हेतु एक तीव्र प्रभावशाली मंत्र है,यह मंत्र गुरु गोरखनाथ जी का है और इस मंत्र को कई बार आजमाया गया है । इस मंत्र का असर शीघ्र देखने मिल जाता है,चाहे जीवन मे कितना भी भयंकर पितृदोष हो इस एक मंत्र से दोष समाप्त किया जा सकता है । इस मंत्र में साधक का पितृदोष स्वयं गुरु गोरखनाथ जी समाप्त करते है,अभी पितृपक्ष आनेवाला है और पितृपक्ष में जाप करे तो अच्छा फल मिलता है अन्यथा किसी भी अमावस्या से यह साधना की जा सकती है ।

यह साधना मात्र 3 दिनों की है, रोज इसमें 108 बार ही मंत्र जाप करना है,साधना का पूर्ण जानकारी व्हाट्सएप पर दिया जाएगा ।

पितृदोष निवारण शाबर मंत्र और पूर्ण विधि विधान सशुल्क है,इसमे 501 रुपये दक्षिणा ली जाएगी क्योके निशुल्क मंत्र और विधान का आज के समय मे किसीको भी महत्व नही रहा है ।


इसलिए जो साधक दक्षिणा देने में समर्थ हो वही साधक संपर्क करे,दक्षिणा की राशि हमारे प्यारे किसानो को लिये मदत हेतु इस्तेमाल होगी ।


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