15 Jan 2016

तांत्रोत्क शिव मंत्र साधना.

शिवरात्रि पर सच्चा उपवास यही है कि हम परमात्मा शिव से बुद्धि योग लगाकर उनके समीप रहे । उपवास का अर्थ ही है समीप रहना,जागरण का सच्चा अर्थ भी काम, क्रोध आदि पांच विकारों के वशीभूत होकर अज्ञान रूपी कुम्भकरण की निद्रा में सो जाने से स्वयं को सदा बचाए रखना है ।

शिवरात्रि के पर्व पर जागरण का विशेष महत्व है । पौराणिक कथा है कि एक बार पार्वतीजी ने भगवान शिवशंकर से पूछा, 'ऐसा कौन-सा श्रेष्ठ तथा सरल व्रत-पूजन है, जिससे मृत्युलोक के प्राणी आपकी कृपा सहज ही प्राप्त कर लेते हैं?'

उत्तर में शिवजी ने पार्वती को 'शिवरात्रि' के व्रत का उपाय बताया-

चतुर्दशी तिथि के स्वामी शिव हैं. अत: ज्योतिष शास्त्रों में इसे परम शुभफलदायी कहा गया है । वैसे तो शिवरात्रि हर महीने में आती है परंतु फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी को ही महाशिवरात्रि कहा गया है । ज्योतिषीय गणना के अनुसार सूर्य देव भी इस समय तक उत्तरायण में आ चुके होते हैं तथा ऋतु परिवर्तन का यह समय अत्यन्त शुभ कहा गया है । शिव का अर्थ है कल्याण, शिव सबका कल्याण करने वाले हैं अत: महाशिवरात्रि पर तंत्र साधना करने से ही इच्छित सुख की प्राप्ति होती है ।

ज्योतिषीय गणित के अनुसार चतुर्दशी तिथि को चंद्रमा अपनी क्षीणस्थ अवस्था में पहुंच जाते हैं, जिस कारण बलहीन चंद्रमा सृष्टि को ऊर्जा देने में असमर्थ हो जाते हैं। चंद्रमा का सीधा संबंध मन से कहा गया है,अब मन कमजोर होने पर भौतिक संताप प्राणी को घेर लेते हैं तथा विषाद की स्थिति उत्पन्न होती है, जिससे कष्टों का सामना करना पड़ता है । चंद्रमा शिव के मस्तक पर सुशोभित है, इसलिए चंद्रदेव की कृपा प्राप्त करने के लिए भगवान शिव का आश्रय लिया जाता है ।

एक कथा यह भी बताती है कि महाशिवरात्रि शिव की प्रिय तिथि है, इसलिए प्राय: ज्योतिषी शिवरात्रि को शिव अराधना कर कष्टों से मुक्ति पाने का सुझाव देते हैं । शिव आदि-अनादि है,सृष्टि के विनाश और पुन:स्थापन के बीच की कड़ी हैं । ज्योतिष में शिव को सुखों का आधार मान कर महाशिवरात्रि पर अनेक प्रकार के अनुष्ठान करने की महत्ता कही गई है ।

महाशिवरात्रि का यह दिन भगवान शंकर का सबसे प्रिय दिन है । यह अपनी आत्मा को पुनीत करने का महाव्रत है, इस व्रत को करने से सब पापों का नाश हो जाता है। हिंसक प्रवृत्ति बदल जाती है, निरीह जीवों के प्रति आपके मन में दया भाव उपजता है । महाशिवरात्रि को दिन-रात पूजा का विधान है,चार पहर दिन में शिवालयों में जाकर शिवलिंग पर जलाभिषेक कर बेलपत्र चढ़ाने से शिव की अनंत कृपा प्राप्त होती है । साथ ही चार पहर रात्रि में वेदमंत्र संहिता, रुद्राष्टा ध्यायी पाठ ब्राह्मणों के मुख से सुनना चाहिए और मंत्र जाप करना चाहिए।

शास्त्रों के अनुसार, शिव को महादेव इसलिए कहा गया है कि वे देवता, दैत्य, मनुष्य, नाग, किन्नर, गंधर्व पशु-पक्षी व समस्त वनस्पति जगत के भी स्वामी हैं। शिव का एक अर्थ कल्याणकारी भी है,शिव की अराधना से संपूर्ण सृष्टि में अनुशासन, समन्वय और प्रेम भक्ति का संचार होने लगता है । इसीलिए, स्तुति गान कहता है- मैं आपकी अनंत शक्ति को भला क्या समझ सकता हूं. अतः हे शिव, आप जिस रूप में भी हों उसी रूप को मेरा आपको प्रणाम ।

शिव और शक्ति का सम्मिलित स्वरूप हमारी संस्कृति के विभिन्न आयामों का प्रदर्शक है। हमारे अधिकांश पर्व शिव-पार्वती को समर्पित हैं,शिव औघड़दानी हैं और दूसरों पर सहज कृपा करना उनका सहज स्वभाव है।
'शिव' शब्द का अर्थ है ‘कल्याण करने वाला’, शिव ही शंकर हैं. शिव के 'शं' का अर्थ है कल्याण और 'कर' का अर्थ है करने वाला. शिव, अद्वैत, कल्याण- ये सारे शब्द एक ही अर्थ के बोधक हैं. शिव ही ब्रह्मा हैं, ब्रह्मा ही शिव हैं,ब्रह्मा जगत के जन्मादि के कारण हैं ।
गरुड़, स्कंद, अग्नि, शिव तथा पद्म पुराणों में महाशिवरात्रि का वर्णन मिलता है । यद्यपि सर्वत्र एक ही प्रकार की कथा नहीं है, परंतु सभी कथाओं की रूपरेखा लगभग एक समान है । सभी जगह इस पर्व के महत्व को रेखांकित किया गया है और यह बताया गया है कि इस दिन व्रत-उपवास रखकर बेलपत्र से शिव की पूजा-अर्चना की जानी चाहिए ।

आज हम एक विशेष साधना के बारे मे बात करेगे,जिसे महाशिवरात्रि के पर्व पर करने से पुर्ण शिवप्रसाद प्राप्त होता है। जैसे शास्त्र मे कहा जाता है-


धारयत्यखिलं दैवत्यं विष्णु विरंचि शक्तिसंयुतम् । जगदस्तित्वं यंत्रमंत्रं नमामि तंत्रात्मकं शिवम् ।।


अर्थात् विविध शक्तियाँ, विष्णु एवं ब्रह्मा जिसके कारण देवी एवं देवता के रूप में विराजमान हैं, जिसके कारण जगत का अस्तित्व है, जो यंत्र हैं, मंत्र हैं। ऐसे तंत्र के रूप में विराजमान भगवान शिव को नमस्कार है।

इसीलिये मै यहा इस श्लोक को समझते हुए एवं समझाते हुए आपको विशेष शिव तंत्र से सबंधित मंत्र साधना दे रहा हूं।



साधना विधि-विधान:-

साधना महाशिवरात्रि के दिन शाम के समय से प्रारंभ करनी है। ईशान्य दिशा के तरफ मुख करके बैठे,आसन वस्त्र का कोइ बंधन नही है फिर भी सफेद रंग के हो तो उत्तम समझें । घी का दिपक प्रज्वलित करे,सुगंधित धूप जलाये,साधना मे किसी भी प्रकार के शिवलिंग को स्थापित कर सकते है। मंत्र जाप सिर्फ रुद्राक्ष माला से ही करना है और अन्य प्रकार का माला प्रयोग वर्जित है। कम से कम ग्यारह माला जाप करना होगा और जिनमें ज्यादा मंत्र जाप करने का क्षमता हो वह साधक 21, 51, 108 माला भी मंत्र का जाप करे तो अतिउत्तम होगा। साधना मे आप शिव जी का अभिषेक पुजन ईत्यादी मंत्र जाप से पुर्व ही सम्पन्न कर लिजीये ।सर्वप्रथम शिव जी का ध्यान मंत्र हाथ जोडकर बोले और अपना मनोकामना बोलते हुए एक सफेद रंग का पुष्प शिवलिंग पर अर्पित करे।



शिव ध्यान मंत्र व अर्थ-

ध्याये नित्यं महेशं रजतगिरिनिभं चारूचंद्रां वतंसं।
रत्नाकल्पोज्ज्वलांगं परशुमृगवराभीतिहस्तं प्रसन्नम।।
पद्मासीनं समंतात् स्तुततममरगणैर्व्याघ्रकृत्तिं वसानं।
विश्वाद्यं विश्वबद्यं निखिलभय हरं पञ्चवक्त्रं त्रिनेत्रम्।।

सरल शब्दों में मतलब है कि पञ्चमुखी, त्रिनेत्रधारी, चांदी की तरह तेजोमयी, चंद्र को सिर पर धारण करने वाले, जिनके अंग-अंग रत्न-आभूषणों से दमक रहे हैं, चार हाथों में परशु, मृग, वर और अभय मुद्रा है। मुखमण्डल पर आनंद प्रकट होता है, पद्मासन पर विराजित हैं, सारे देव, जिनकी वंदना करते हैं, बाघ की खाल धारण करने वाले ऐसे सृष्टि के मूल, रचनाकार महेश्वर का मैं ध्यान करता हूं।




ध्यान मंत्र के बाद "तांत्रोत्क शिव मंत्र" का जाप करे।


मंत्र:-

।। ह्रीं ॐ हौं शं नमो भगवते सदाशिवाय ।।

(hreem om hroum sham namo bhagawate sadaashivaay)





मंत्र तिष्ण है,इसलिए मंत्र जाप के समय शरीर मे उर्जा  का अनुभूति होगा और एकदम से शरीर मे गर्मी बढेगा परंतु चिंता का कोइ बात नही,येसा होने पर अपने पुरे शरीर का ध्यान करते हुए शिव जी से रक्षा हेतु प्रार्थना करे। साधना पुर्ण होते ही शिव आरती सम्पन्न करे और जो भी प्रसाद स्वरुप मे भोग चढाया हो उसे परिवार मे बाट दिजीये ।

महाशिवरात्रि के महापर्व की आप सभी को शुभकामनाएं.....





Tantrotk Shiva Mantra meditation.

Shivaratri true fast is that we use the wisdom of God Shiva of them are close. Fasting is a means of drawing near, the true meaning of awakening, anger etc. succumbs to five disorders of ignorance of Kumbkrn always is to prevent themselves from being asleep.

Vigil on the occasion of Shivaratri is of particular importance. Legend has it that Lord Shiv Shankar Parwatiji once asked, "So what is the best and simple fast-worship, the dead creature naturally receive your grace?"

In response to Shiva Parvati 'Shivaratri' vow told measure

Lord Shiva chaturdasi date. Since astrology is stated in the scriptures, the ultimate Shubfldayi. Well Shivaratri comes in every month but falgun chaturdasi Krishna said the Maha Shivaratri. According to astrological calculations Sun. solstice arrived in this time of climate change occur and said it was very good. Shiva means welfare, the welfare of all Shiva therefore Mahashivarathri to practice on the system leads to the desired happiness.

According to astrological calculations on chaturdasi reach the Moon in its Kshinsth stage, causing serious trouble and moon are unable to creation energy. Moon stated directly from the mind, so the mind is weak physical pain and nostalgia of being encircling situation occurs, which has suffered. Shiva's forehead is adorned on the moon, so pleased to receive Chandradeo taken shelter of Lord Shiva.

It tells a story that is a date dear to Shiva Maha Shivaratri, so often astrologer can worship Shiva Ratri suggest liberation from suffering. Shiva etc.-is eternal, creative destruction and restoration of the link between. Astrology Shiva Maha Shivaratri pleasures are based on the value the importance of various ritual is said.

This day is the day of Shivaratri most beloved of Lord Shiva. It is your soul Mahavrats to Puneet, this vow is to destroy all sins. Violent trend is changed, in your mind of innocent beings leads to compassion. Maha Shivaratri day-night prayer legislation, four o'clock in the day, go to Shiwalyon infinite grace of Shiva lingam Jalabhishek receive than to give the Belptr. Code Vedmntr four o'clock in the night, Rudraashta Dyayi text Brahmins mouth should hear and chanting.

According to the scriptures, so that they Mahadev Shiva god, monster, man, snake, Trans, demigod who own animals and all fauna. Shiva is also a sense of welfare, worship of Shiva in the entire universe discipline, coordination and communication of love, devotion seems to be. Therefore, hymns says: I can understand your infinite power to do good. Therefore, O Siva, you are the same as well as my bow to you.

Shiva and Shakti showed various aspects of our culture is the nature of the insert. Most of us are dedicated to Shiva and Parvati festival, Shiva and others Awgddani spontaneous favor is their innate nature.

'Shiva' word 'wellness habits ", Shiva Shankar. Shiva 'Shan' means good and "doing", which means. Siva, Advaita, Kalyan These words are symptomatic of the same meaning. Shiva are Brahma, Shiva, Brahma, the Brahma of the world are due to Jnmadi.

Garuda, Skanda, fire, and Padma Puranas, Shiva Maha Shivaratri is described. Although the story is not the same everywhere, but the outline of the story is almost identical. The festival has underlined the importance of the place and it has been reported that the day of fasting, fasting Belptr Shiva worship should be placed.

Today we will talk about a particular practice, on the occasion of Maha Shivaratri, which is derived from the Shiv absolutely. As is called in Scripture

Dharytykiln Dawatyn Virnci Sktisnyutm Vishnu. Jagdastitvan Yantramntrn Nmami Tntratmkan Shivam ..

Namely various powers, Vishnu and Brahma, which sits as the goddess and god, which is the existence of the universe, which are instruments, mantra. As such mechanism is present to greet Shiva.

So here I understand this verse and explaining the mechanisms relating to Shiva Mantra meditation am giving you special.

Silence legislation: -

Sadhana Maha Shivaratri is the day to start the evening. Ishany direction by the home side sitting posture of clothing is not any binding excellent understanding even if white. Deepak fuel to ignite, burn incense, meditation can install on any type Shivling. Rudraksha beads have only just chanting beads and use of other types is forbidden. At least eleven beads and chanting which is the ability to recite the mantra seeker 21, 51, 108 beads to chant will then also excellent. In practice Shiva anoint you Pujn Ityadi chanting performed by the pre tax Liziye Ksrwprtham attention of Shiva mantra chanted and linked arms your wishes Speaking to a white floral tributes at the lingam.

Shiva mantra meditation and lit.

Dyaye Nityn Maheshn Rjtgirinibn Watnsn Caruchandran.

Ratnaklpozzwlangan Prshumrigvrabitihstn Prasnnm ..

Pdmasinan Smntat Vsanan Shuttmmrgnarwyagrkrittin.

Biswadyn Biswbdyn Nikilby Hrn Trinetrm Ptrchvktrn ..

In simple terms that means Ptrchmuki, Trinetrdhari, Tejomayi like silver, lunar holding the head, from which the Body of glowing gems and jewelery, four hands halberd, antelope, bridesmaid and Abbey currency. Mukmndl Anand appears to sit on lotus, in god, whose Vandana, the tiger skin holding the core of the universe, creator of Maheshwar meditate.

After meditation mantra "Tantrotk Shiva mantra" to chant.

mantra:-

Hreem om hroum sham namo bhagawate sadaashivaay

Tishn mantra, so chanting and suddenly the feeling of energy in the body will increase body heat on any matter of concern, but not, your whole body's attention on Yesa from the Shiva to protect pray. Silence has absolutely done prayers to Shiva and enjoyment in whatever form offerings to be winched Unlock move forward in her family.

Best wishes to all of you ..... Mahashivarathri mahaparva



आदेश.......

13 Jan 2016

गुरु गोरख दीक्षा.

गोरखनाथ के गुरु मत्स्येंद्रनाथ थे। मत्स्येंद्रनाथ इतने ज्यादा योग्य थे कि लोग उनको शिव से कम नहीं मानते थे। उनको लोग इंसान नहीं मानते थे, क्योंकि उनमें इंसानों जैसी बात बहुत कम ही थी। उनकी लगभग हर बात जीवन के किसी दूसरे आयाम की ही थी। कहते हैं कि वे अपने नश्वर शरीर में 600 साल तक रहे। आम तौर पर वे समाज से दूर ही रहते थे। उनके कुछ थोड़े-से प्रचंड और तीव्र शिष्य ही उनसे संपर्क कर पाते थे। गोरखनाथ उन्हीं में से एक थे।



दादा गुरु मत्स्येन्द्रनाथ जी के प्रति गुरु भक्ति

एक बार की बात है, मत्स्येंद्रनाथ गोरखनाथ के साथ कहीं जा रहे थे। उन्होंने एक छोटी-सी नदी पार की। मत्स्येंद्रनाथ एक पेड़ के नीचे बैठ गए और बोले, ‘मेरे लिए पानी ले आओ।’ गोरखनाथ तो एक सिपाही की तरह थे। उनके गुरु ने पानी मांगा था और वह तुरंत इस काम को पूरा कर देना चाहते थे। पानी लाने के लिए वह नदी की ओर चल दिए। उन्होंने देखा कि उस छोटी-सी नदी से उसी समय कुछ बैलगाडिय़ां होकर गुजरी हैं, जिसकी वजह से उसका पानी गंदा हो चुका था। वह दौड़ते हुए अपने गुरु के पास आए और बोले, ‘गुरुजी, यहां का पानी गंदा है। यहां से थोड़ी ही दूरी पर एक और नदी है। मैं वहां जाकर आपके लिए पानी ले आता हूं।’

मत्स्येंद्रनाथ ने कहा, ‘नहीं, नहीं। मेरे लिए इसी नदी से पानी लेकर आओ।’ गोरखनाथ बोले, ‘लेकिन वहां का पानी गंदा है।’ मत्स्येंद्रनाथ ने कहा, ‘मुझे उसी नदी का और उसी स्थान का पानी चाहिए। मुझे बहुत प्यास लगी है।’ गोरखनाथ फिर से नदी की ओर दौड़े, लेकिन पानी अभी भी बहुत गंदा था। उन्हें समझ में नहीं आया कि क्या करें। वे लौट कर फिर गुरु के पास आए।

मत्स्येंद्रनाथ ने फिर वही कहा, ‘मैं प्यासा हूं। मेरे लिए पानी लाओ।’ गोरखनाथ बुरी तरह उलझन में फंस गए। वह यहां से वहां यह सोचते हुए दौड़ते रहे कि आखिर क्या किया जाए। वे फिर से गुरु के पास आए और प्रार्थना की, ‘यहां का पानी गंदा है। मुझे थोड़ा वक्त दीजिए। मैं आपको दूसरी नदी से साफ पानी लाकर देता हूं।’ गुरु बोले, ‘नहीं, मुझे तो इसी नदी का पानी चाहिए।’

उलझन में डूबे गोरखनाथ वापस नदी पर गए। उन्होंने देखा कि अब नदी का पानी कुछ स्थिर हो गया है और पहले के मुकाबले थोड़ा साफ है। उन्होंने थोड़ा और इंतजार किया। कुछ देर में पानी पूरी तरह साफ हो गया। गोरखनाथ आनन्द विभोर होकर पानी लिए गुरु के पास पहुंचे और मत्स्येंद्रनाथ को पानी दिया। मत्स्येंद्रनाथ ने पानी एक तरफ रख दिया, क्योंकि वे वास्तव में प्यासे नहीं थे।

दरअसल, वह इस तरह को एक संदेश दे रहे थे। गोरखनाथ एक ऐसे इंसान थे जो गुरु की कही बात हर हाल में पूरी करते। अगर उनसे एक मंत्र का दस बार जाप करने को कहा जाता, तो वह उसका दस हजार बार जाप करते। वह हमेशा गुरु की आज्ञा पूरी करने को तैयार रहते। जो उनसे कहा जाता, उसे बड़ी श्रद्धा और लगन के साथ पूरा करते थे। यह उनका महान गुण था, लेकिन अब वक्त आ गया था कि वे दूसरे आयाम में भी आगे बढ़ें, इसलिए मत्स्येंद्रनाथ ने उन्हें समझाया- यहां-वहां भाग-दौड़ करके और मेहनत करके तुमने अच्छा काम किया है, लेकिन अब वक्त आ गया है, जब तुम्हें बस इंतजार करना है, और तुम्हारा मन बिलकुल शांत और साफ हो जाएगा।





आज आपको एक येसा मंत्र दे रहा हू जिससे आपको गुरु गोरखनाथ प्रेम देगे,शिष्यत्व देगे,अपना शिष्य समजकर स्वयं की शक्तियाँ प्रदान करेंगे,स्वयं गुरु के तरह आपको वह सब देगे जो आपका कामना हो।मुख्य बात बता देता "इस मंत्र के जाप से आप गुरु गोरखनाथ जी के शिष्य बन जायेंगे और वह आपके गुरु बन जायेंगे",एक बात याद रखिये गुरु गोरखनाथ जी ने अपने देह को त्याग नही किया है। इसलिये वह आज भी  स्वयं प्रत्यक्ष रूप मे अपने शिष्य के सामने प्रत्यक्ष हो जाते है। जिन्हे जिवन मे गुरु नही है वह गोरखनाथ जी को गुरु मानकर दीये हुए मंत्र का जाप किसी भी गुरुवार से प्रातः शुरु करें।

सर्वप्रथम पिला वस्त्र बिछाये और उसके उपर गोरखनाथ जी का कोइ भी सुंदर चित्र स्थापित करें।अब गोरखनाथ जी से प्रार्थना करे "हे नाथ,आप सर्वव्यापी है आप सिद्ध गुरु है कृपया मुझे अपना आशिर्वाद प्रदान करके अपना शिष्य बना लिजीये,मै आजसे आपको ही अपना गुरु मानता हू"। इस तरह प्रार्थना करके मंत्र का जाप रुद्राक्ष माला से शुरु करें। रुद्राक्ष माला ही आपका गुरुमंत्र माला है,जिसका उपयोग सिर्फ इसी मंत्र जाप हेतु करे। यह सिर्फ गोरखनाथ जी का मंत्र ही नही है अपितु एक शिष्य के लिये गुरुमंत्र है और समस्त सन्सार मे गुरुमंत्र को ही चिंतामणि मंत्र कहा जाता है।

इस मंत्र से समस्त साधना मे सफलता प्राप्त होता है। गुरुकृपा प्राप्त होती है। सभी मनोकामनाये गुरु गोरखनाथ जी पुर्ण करते है और अपने शिष्य की सदैव रक्षा करते है।




गोरख गुरुमंत्र:-

।।सोहं गोरक्ष गुरुर्वै नमः ।।

soham goraksha gururvei namah




इसी मंत्र से कुण्डलीनी जागरण भी सम्भव है। मंत्र दिखने मे भले ही छोटा है परंतु गुरुमंत्र है,इसलिए आजमाने हेतु मंत्र का जाप ना करे और नित्य मंत्र का 1,3,5,7,11.....21 की संख्या मे जाप किया करे। मंत्र जाप पुर्ण विश्वास और श्रद्धा के साथ करे तो आपका जिवन ही बदल जायेगा।




तंत्र-मंत्र को इतना बुरा माना जाता है कि उसके पास फटकने से भी मना किया जाता है। यह हमेशा बुरा नहीं होता, लेकिन बदकिस्मती से इसका इस्तेमाल बड़े पैमाने पर इसी तरह से किया गया है। कोई भी विज्ञान या टेक्नालॉजी बुरी नहीं होती। लेकिन अगर हम टेक्नालाजी का इस्तेमाल लोगों की जान लेने और उनको यातना देने के लिए करते हैं, तो कुछ समय बाद लगेगा कि टेक्नालाजी बुरी चीज है। तंत्र-मंत्र के साथ यही हुआ है, क्योंकि बहुत ज्यादा लोगों ने अपने निजी फायदे के लिए इसका गलत इस्तेमाल किया। इसलिए आम तौर पर तंत्र-मंत्र को आध्यात्मिक मार्ग से दूर ही रखा जाता है।

आप् अपना अमुल्य जिवन श्रेष्ठ बनाये यही मै चाहता हूं।




Guru Gorakh initiation.

The Guru Gorakh Nath was Matsyendranath. Matsyendranath deserved so much that people do not believe they were less than Shiva. Those people did not feel human, because they speak like humans was very low. Almost every thing in his life was that of another dimension. In your mortal body until they are 600 years. Generally they lived away from society. Some few of them were able ragged and intense student with her. Gorakh Nath was one of them.

Devotion to the Guru Guru Ji grandfather Mtsyendranath

Once upon a time, the Matsyendranath were going somewhere with Goraknath. He crossed a small river. Matsyendranath sat under a tree and said, "Bring me water. 'Goraknath were like a soldier. His master was asked for water and she immediately wanted to accomplish this task. He walked to the river to fetch water. He saw the small river that passed through the same time some Balgadiyhan, because of which the water was dirty. He came running to his master and said, 'Master, here is the dirty water. And is a short walk from the river. I'd go out and get water for you. "

Matsyendranath said, 'No, no. I bring water from the same river. "Goraknath said," but the water is dirty. "Matsyendranath said," I want water in the river and in the same location. I'm very thirsty. "Gorakhnath again rushed to the river, but the water was still very dirty. He did not know what to do. They came back to the master.

Matsyendranath the same again, "I am thirsty. Bring water to me. "Goraknath caught badly confused. He ran from here to there, thinking that what it should be. They then went to the master and prayed, "The water is dirty. Give me some time. I am bringing clean water from the river. "Guru said, 'No, I want water in the river."

Confused immersed Goraknath were back on the river. He saw that some of the river water has stabilized and is a bit clearer than before. He waited some more. Sometime in the water to be cleaned thoroughly. Joy and rushed to Guru Gorakh Nath water and the water Matsyendranath. Matsyendranath the water put aside, because they were not really thirsty.

Indeed, he was delivering such a message. Gorakh Nath was a man who was master of the fulfillment of the matter. If they are asked to recite a mantra ten times, then his ten thousand times chanting. He is always willing to mentor decree. Which is said to them, it was completed with great reverence and devotion. It was his great qualities, but now the time has come that they proceed in the other dimension, so Matsyendranath explained them here and catch up and work hard and you have done well, but now the time has come, When you just have to wait, and your mind will be quiet and clean.

Today I am giving you a Yesa mantra that you love guru Gorakhnath shelve, discipleship shelve, his disciple Smjkr will own powers, their own kind of mentor you shelve all that you tell your wish to Hokmuky "chant the mantra You will become a disciple of Guru Gorakhnath and he will become your master, "Remember one thing Guru Gorakhnath has not abandoned his body. So she still direct themselves directly in front of his disciples become. Life is not master in whom the master as a lamp that Gorakhnath any Thursday morning to start the chant.

First, drink and clothing laid on top of her beautiful pictures Gorakhnath Any installed them.Now Gorakhnath pray, "O Lord, you have the ubiquitous his disciples by providing proven master made me your blessings Liziye, I own to you from today! Who believes master ". Such prayerful chant start of Rudraksha beads. Rudraksha Mala Mala Your Gurumntr, used only for the chanting to. It is not only just but Gorakhnath mantra is a disciple and all the Gurumntr Gurumntr in Snsar mantra is called the Chintamani.

All of this spells success is achieved in practice. Gurukrupa receive. All Mnokamnaie Guru Gorakh Nath Ji is absolutely and always protect your student's.

Gorakh Gurumntra: -

soham goraksha gururvei namah

This spells Kundlini awakening is possible. Even though small in appearance but Gurumntr spells, so try not to chant for the continual mantra chanted in the number of 21 to ..... 1,3,5,7,11. Mantra chanting with faith and devotion to the absolutely will change your Life.

Occult is considered so bad that he is forbidden from Ftkne. It is not always bad, but unfortunately it has been used extensively similar. Any science or technology is not bad. But if we use technology to kill people and to torture them, then take some time, that technology is bad. That is with the occult, because too many people misused it for their personal benefit. So generally occult kept away from the spiritual path.




आदेश......

12 Jan 2016

वास्तु भगवती साधना.

आजकल वास्तुशास्त्र का बोलबाला है। एक सामान्य से घर को वास्तु के इतने जटिल नियमों में बाँध दिया जाता है कि जिन्हें पढ़कर मनुष्य न केवल भ्रमित हो जाता है वरन जिनके घर पूर्णत: वास्तु अनुसार नहीं होते, वे शंकाओं के घेरे में आ जाते हैं। ऐसे मनुष्य या तो अपना घर बदलना चाहते हैं या शंकित मन से घर में निवास करते हैं। वास्तु विज्ञान का स्पष्ट अर्थ है चारों दिशाओं से मिलने वाली ऊर्जा तरंगों का संतुलन...। यदि ये तरंगें संतुलित रूप से आपको प्राप्त हो रही हैं, तो घर में स्वास्थ्य व शांति बनी रहेगी अन्यथा वास्तु दोष से होने वाले दुष्प्रभाव कुछ इस तरह के है-


आर्थिक समस्याएं-

आर्थिक उन्नति न होना, धन का कहीं उलझ जाना, लाभों का देरी से मिलना, आय से अधिक व्यय होना, आवश्यकता होने पर धन की व्यवस्था ना हो पाना, धन का चोरी हो जाना आदि।


पारिवारिक समस्याएं-

वैवाहिक संबंधों में विवाद, अलगाव, विवाह में विलम्ब, पारिवारिक शत्रुता हो जाना, पड़ोसियों से संबंध बिगड़ना, पारिवारिक सदस्यों से किसी भी कारण अलगाव, विश्वासघात आदि।


संतान संबंधी चिन्ताएं-

संतान का न होना, देरी से होना, पुत्र या स्त्री संतान का न होना, संतान का गलत मार्ग पर चले जाना, संतान का गलत व्यवहार, संतान की शिक्षा व्यवस्था में कमियां रहना आदि।


व्यावसायिक समस्याएं-

कैरियर के सही अवसर नहीं मिल पाना, मिले अवसरों का सही उपयोग नहीं कर पाना, व्यवसाय में लाभों का कम होना, साझेदारों से विवाद, व्यावसायिक प्रतिद्वन्द्विता में पिछड़ना, नौकरी आदि में उन्नति व प्रोमोशन नहीं होना, हस्तान्तरण सही जगह नहीं होना, सरकारी विभागों में काम अटकना, महत्वाकांक्षाओं का पूरा नहीं हो पाना आदि।


स्वास्थ्य समस्याएं-

भवन के मालिक और परिवार जनों की दुर्घटनाएं, गंभीर रोग, व्यसन होना, आपरेशन होना, मृत्यु आदि।
कानूनी विवाद, दुर्घटनाएं, आग, जल, वायु प्रकोप आदि से भय, राज्य दण्ड, सम्मान की हानि आदि भयंकर परिणाम देखने को मिलते हैं।


चोरी की समस्याएं-

किसी घर में चोरी क्यों होती है? सुरक्षा की कमी और मालिक की लापरवाही। लेकिन आप यकीन नहीं करेंगे कि वास्तुदोष भी किसी घर में चोरी कराने में अहम भूमिका निभाता है। घर में कुछ उत्पन्न वास्तुदोष भी चोरी के लिए जिम्मेदार होता है।

घर मे अदृश्य शक्तियाँ भी प्रवेश करती है जिसके कारण परिवार के सदस्यों का मानसिक संतुलन बिगडता रहेता है और तनाव महेसुस होता रहेता है। किसी ने कुछ कर दिया है अथवा देखने में तो सब ठीक है परन्तु आपके पितर रुष्ट है येसा निदान निकलता है..आदि..आदि..।

इन सब समस्या के निवारण हेतु ही आज का यह लेख है जिसमे पुर्ण विधि-विधान दे रहा हूं। यह "वास्तु भगवती" साधना है जिससे समस्त प्रकार के वास्तुदोषो का निवारण होते देखा गया है। इस साधना से शिघ्र लाभ देखने मिलता है,यह साधना वैदिक के साथ तांत्रोत्क भी है। इसमे साधना से पुर्व ही सामग्री को तयार रखे और साधना के माध्यम से स्वयं ही अपने वास्तु को दोषमुक्त करे तो आपको अलग ही आनंद का  अनुभुती होगा।




किसी भी शुभ अवसर पर प्रातः इस कर्म को सम्पादित कर लेना चाहिए । यदि हम विशेष मुहूर्त पर कर लें तो कई दृष्टि से ये बहुत ही अद्भुत विधान साबित होगा,दिशा पूर्व,वस्त्र व आसन श्वेत या रक्त होंगे ।

साधना सामग्री:-

पूजन सामग्री में आप "वास्तु भगवती महायंत्र" और "ह्रीं शक्ति माला",कुमकुम मिश्रित आधा किलो अक्षत की व्यवस्था कर लें और जो भी सामान्य पूजन सामग्री और पुष्प आदि हों,उनकी भली भाँती व्यवस्था कर लें ।



विधि-विधान:-

पुष्प से जल छिड़कते हुए स्वस्तिवाचन करें-

ॐ स्वस्ति न इंद्रो वृद्धश्रवाः स्वस्ति नः पूषा विश्ववेदाः ।
स्वस्ति नस्तार्क्ष्यो अरिष्ट्टनेमिः स्वस्ति नो बृहस्पतिर्दधातु ॥
द्यौः शांतिः अंतरिक्ष गुं शांतिः पृथिवी शांतिरापः
शांतिरोषधयः शांतिः। वनस्पतयः शांतिर्विश्वे देवाः
शांतिर्ब्रह्म शांतिः सर्वगुं शांतिः शांतिरेव शांति सा
मा शांतिरेधि। यतो यतः समिहसे ततो नो अभयं कुरु ।
शंन्नः कुरु प्राजाभ्यो अभयं नः पशुभ्यः। सुशांतिर्भवतु ॥
ॐ सिद्धि बुद्धि सहिताय श्री मन्ममहागणाधिपतये नमः l


संकल्प-

ॐ विष्णुर्विष्णुर्विष्णु:, ॐ अद्यब्रह्मणोऽह्नि द्वितीय परार्धे श्री श्वेतवाराहकल्पे वैवस्वतमन्वन्तरे,
अष्टाविंशतितमे कलियुगे, कलिप्रथम चरणे जम्बूद्वीपे भरतखण्डे भारतवर्षे पुण्य(अपने नगर-गांव का नाम)क्षेत्रे बौद्धावतारे वीरविक्रमादित्यनृपते
(वर्तमान संवत),तमेऽब्दे क्रोधी नाम संवत्सरे उत्तरायणे (वर्तमान) ऋतो महामंगल्यप्रदे मासानां मासोत्तमे (वर्तमान)मासे (वर्तमान)पक्षे (वर्तमान)तिथौ (वर्तमान)वासरे (गोत्र का नाम लें)गोत्रोत्पन्नोऽहं अमुकनामा (अपना नाम लें)सकलपापक्षयपूर्वकं सर्वारिष्ट शांतिनिमित्तं सर्वमंगलकामनया-
श्रुतिस्मृत्योक्तफलप्राप्त्यर्थं मनेप्सित कार्य सिद्धयर्थं श्री महामृत्युंजय साहित्य सौभाग्य वास्तु कृत्या पूजनं च अहं करिष्ये। ( यदि इतना ना बोलते बने तब भी मात्र हिंदी में अपना संकल्प बोलकर जल भूमि पर छोड़ दें )


निम्न मंत्र बोल कर लिखे गए अंग पर अपने दाहिने हाथ का स्पर्श करे-

ह्रीं नं पादाभ्याम नमः -( दोनों पाव पर ),

ह्रीं मों जानुभ्याम नमः - ( दोनों जंघा पर )

ह्रीं भं कटीभ्याम नमः - ( दोनों कमर पर )

ह्रीं गं नाभ्ये नमः -( नाभि पर )

ह्रीं वं ह्रदयाय नमः -( ह्रदय पर )

ह्रीं ते बाहुभ्याम नमः -( दोनों कंधे पर )

ह्रीं वां कंठाय नमः - ( गले पर )

ह्रीं सुं मुखाय नमः - ( मुख पर )

ह्रीं दें नेत्राभ्याम नमः -( दोनों नेत्रों पर )

ह्रीं वां ललाटाय नमः -( ललाट पर )
ह्रीं यां मुध्र्ने नमः -( मस्तक पर )

ह्रीं नमो भगवते वासुदेवाय नमः -( पुरे शरीर पर )



नमस्कार मंत्र :-

ह्रीं श्री गणेशाय नमः।
ह्रीं इष्ट देवताभ्यो नमः।
ह्रीं कुल देवताभ्यो नमः।
ह्रीं ग्राम देवताभ्यो नमः।
ह्रीं स्थान देवताभ्यो नमः।
ह्रीं सर्वेभ्यो देवेभ्यो नमः।
ह्रीं गुरुवे नमः।
ह्रीं मातृ पितृ चरणकमलभ्यो नमः।।

अब सामने बाजोट पर जिस पर श्वेत या रक्त वस्त्र बिछा हुआ हो,उस पर ताम्बे की थाली स्थापित कर उस पर महायंत्र को स्थापित कर अग्रक्रिया करें-


गणपति पूजन

हाथ में पुष्प लेकर गणपति का आवाहन करें.

ॐ गं गणपतये इहागच्छ इह तिष्ठ : |

और अब हाथ में पुष्प लेकर निम्न मंत्र का उच्चारण करते हुए भगवान् गणपति के सामने छोड़ दें -

गजाननम्भूतगणादिसेवितं कपित्थ जम्बू फलचारुभक्षणम्।
उमासुतं शोक विनाशकारकं नमामि विघ्नेश्वरपादपंकजम्।



निम्न मंत्र का उच्चारण करते हुए थोड़े थोड़े अक्षत के दाने महायंत्र पर अर्पित करें-

नवग्रह आवाहन -

अस्मिन नवग्रहमंडले आवाहिताः सूर्यादिनवग्रहा
देवाः सुप्रतिष्ठिता वरदा भवन्तु ।
जपाकुसुम संकाशं काश्यपेयं महदद्युतिम् I
तमोरिंसर्वपापघ्नं प्रणतोSस्मि दिवाकरम् II

ॐ ह्सौ: श्रीं आं ग्रहाधिराजाय आदित्याय स्वाहा
दधिशंखतुषाराभं क्षीरोदार्णव संभवम् I
नमामि शशिनं सोमं शंभोर्मुकुट भूषणम् II

ॐ श्रीं क्रीं ह्रां चं चन्द्राय नमः
धरणीगर्भ संभूतं विद्युत्कांति समप्रभम् I
कुमारं शक्तिहस्तं तं मंगलं प्रणाम्यहम् II

ऐं ह्सौ: श्रीं द्रां कं ग्रहाधिपतये भौमाय स्वाहा
प्रियंगुकलिकाश्यामं रुपेणाप्रतिमं बुधम् I
सौम्यं सौम्यगुणोपेतं तं बुधं प्रणमाम्यहम् II

ॐ ह्रां क्रीं टं ग्रहनाथाय बुधाय स्वाहा
देवानांच ऋषीनांच गुरुं कांचन सन्निभम् I
बुद्धिभूतं त्रिलोकेशं तं नमामि बृहस्पतिम् II

ॐ ह्रीं श्रीं ख्रीं ऐं ग्लौं ग्रहाधिपतये बृहस्पतये ब्रींठ: ऐंठ: श्रींठ: स्वाहा
हिमकुंद मृणालाभं दैत्यानां परमं गुरुम् I
सर्वशास्त्र प्रवक्तारं भार्गवं प्रणमाम्यहम् II

ॐ ऐं जं गं ग्रहेश्वराय शुक्राय नमः
नीलांजन समाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम् I
छायामार्तंड संभूतं तं नमामि शनैश्चरम् II

ॐ ह्रीं श्रीं ग्रहचक्रवर्तिने शनैश्चराय क्लीं ऐंस: स्वाहा
अर्धकायं महावीर्यं चंद्रादित्य विमर्दनम् I
सिंहिकागर्भसंभूतं तं राहुं प्रणमाम्यहम् II

ॐ क्रीं क्रीं हूँ हूँ टं टंकधारिणे राहवे रं ह्रीं श्रीं भैं स्वाहा
पलाशपुष्पसंकाशं तारकाग्रह मस्तकम् I
रौद्रंरौद्रात्मकं घोरं तं केतुं प्रणमाम्यहम् II

ॐ ह्रीं क्रूं क्रूररूपीणे केतवे ऐं सौ: स्वाहा
अब हाथ जोड़कर स्तुति करें.
ॐ ब्रह्मा मुरारिस्त्रिपुरान्तकारी भानुःशशि भूमिसतो बुधश्च गुरुश्च शुक्रः शनि राहुकेतवः सर्वेग्रहाः मुन्था सहिताय शान्तिकरा भवन्तु ॥



निम्न मंत्र का उच्चारण करते हुए थोड़े थोड़े अक्षत के दाने महायंत्र पर अर्पित करें-

षोडशमातृका आवाहन -

ॐ गौरी पद्या शचीमेधा सावित्री विजया जया |
देवसेना स्वधा स्वाहा मातरो लोकमातरः ||

हृटि पुष्टि तथा तुष्टिस्तथातुष्टिरात्मन: कुलदेवता : |
गणेशेनाधिका ह्यैता वृद्धौ पूज्याश्च तिष्ठतः ||

ॐ भूर्भुवः स्व: षोडशमातृकाभ्यो नमः ||
इहागच्छइह तिष्ठ ||


अब हाथ जोड़कर निम्न मंत्र का उच्चारण करते हुए यन्त्र पर कुमकुम मिश्रित अक्षत डालें-

ॐ जयंती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी |
दुर्गा क्षमा शिवाधात्री स्वाहा स्वधा नमोस्तुस्ते ||
अनया पूजया गौर्मादि षोडश मातः प्रीयन्तां न मम |




कलश पूजन-

हाथ में पुष्प लेकर वरुण का आवाहन करें-

अस्मिन कलशे वरुणं सांगं सपरिवारं सायुध सशक्तिकमावाहयामि,
ॐ भूर्भुव: स्व:भो वरुण इहागच्छ इहतिष्ठ। स्थापयामि पूजयामि॥

और अब कलश का पंचोपचार पूजन कर लें,तत्पश्चात घृत या तिल के तेल का दीपक प्रज्वलित कर लें और सुगन्धित अगरबत्ती भी,और इसके बाद हाथ में जल लेकर विनियोग करें.

ॐ अस्य श्रीप्राणप्रतिष्ठामंत्रस्य ब्रह्मा-विष्णु-रुद्रा ऋषयः ऋग्यजुर्सामानी छन्दांसी प्राणशक्तिर्देवता आं बीजं ह्रीं शक्तिः क्रों कीलकं अस्मिन यंत्रे श्री सौभाग्य वास्तु कृत्या यन्त्र प्राण प्रतिष्ठापने विनियोगः !

इसके बाद यंत्र को एक हाथ में लेकर तथा दुसरे हाथ से कुश,या अग्रभाग टूटी हुयी दूर्वा लेकर यंत्र पर स्पर्श करते जाएँ.

ॐ आं ह्रीं क्रों यं रं लं वं शं षं सं हों ॐ क्षं सं हं सः ह्रीं ॐ आं ह्रीं क्रों अस्य सौभाग्य वास्तु कृत्या यन्त्र प्राणा इह प्राणाः ।
ॐ आं ह्रीं क्रों यं रं लं वं शं षं सं हों ॐ क्षं सं हं सः ह्रीं ॐ आं ह्रीं क्रों अस्य सौभाग्य वास्तु कृत्या यन्त्र जीव इह स्थितः ।
ॐ आं ह्रीं क्रों यं रं लं वं शं षं सं हों ॐ क्षं सं हं सः ह्रीं ॐ आं ह्रीं क्रों अस्य सौभाग्य वास्तु कृत्या यन्त्र सर्वेंद्रियाणी
वांड-मनस्त्वकचक्षु: श्रोत्रजिह्वा-घ्राण-प्राणा इहागत्य इहैव सुखं चिरं तिष्ठन्तु स्वाहा ।
ॐ मनो जूतिर्जुषतामाज्यस्य बृहस्पतिर्यज्ञमिमन्तनोत्वरिष्टम यज्ञं समिमं दधातु ।
विश्वे देवास इह मादयन्ताम ॐ प्रतिष्ठ ।।

एष वै प्रतिष्ठा नाम यज्ञो यत्र तेन यज्ञेन यजन्ते ! सर्वमेव प्रतिष्ठितं भवति ।।
अस्मिन सौभाग्य वास्तु कृत्या यंत्रस्य सुप्रतिष्ठता वरदा भवन्तु ।


फिर गंध , पुष्पादि से पंचोपचार ( स्नान , चन्दन , पुष्प , धूप- दीप , नैवेद्य एवं आरती ) पूजन करें और यंत्र के षोडश संस्कारों की सिद्धि के लिए १६बार निम्न मन्त्र का उच्चारण करते हुए अक्षत डालते जाएँ-

ॐ वास्तोष्पते प्रति जानीद्यस्मान स्वावेशो अनमी वो भवान यत्वे महे प्रतितन्नो जुषस्व शन्नो भव द्विपदे शं चतुष्प्दे स्वाहा |

ॐ वास्तोष्पते प्रतरणो न एधि गयस्फानो गोभि रश्वे भिरिदो अजरासस्ते सख्ये स्याम पितेव पुत्रान्प्रतिन्नो जुषस्य शन्नो भव द्विपदे शं चतुष्प्दे स्वाहा |

फिर हाथ में कुमकुम मिश्रित अक्षत लेकर उस यन्त्र पर निम्न मंत्र बोल कर अर्पित कर दें-

अस्य यंत्रस्य षोडश संस्काराः सम्पद्यन्ताम

निम्न मंत्र का ८ बार उच्चारण करते हुए यन्त्र पर कुमकुम मिश्रित अक्षत अर्पित करें.


चतुषष्टि योगिनी स्थापन-

ॐ आवाहयाम्बहं देवी योगिनी परमेश्वररीम् । योगाभ्यासेन सन्तुष्ट पराध्यान समन्बिताः ।।
चतुषष्ठी: योगिनीभ्यो नमः

अब हाथ जोड़कर हाथ में पुष्प लेकर सौभाग्यलक्ष्मी ध्यान करें और ध्यान मंत्र के उच्चारण के बाद उस पुष्प को यन्त्र पर अर्पित कर दें -

ॐ या सा पद्मासनस्था,
विपुल-कटि-तटी, पद्म-
दलायताक्षी।
गम्भीरावर्त-नाभिः, स्तन-भर-
नमिता, शुभ्र-वस्त्रोत्तरीया।।

लक्ष्मी दिव्यैर्गजेन्द्रैः। मणि-
गज-खचितैः, स्नापिता हेम-
कुम्भैः।
नित्यं सा पद्म-हस्ता, मम वसतु गृहे, सर्व सौभाग्य,सर्व-मांगल्य-युक्ता।।



इसके बाद यन्त्र में सौभाग्य लक्ष्मी की प्रतिष्ठा करें.
हाथ में अक्षत लेकर निम्न मंत्र उच्चारित करें-

“ॐ भूर्भुवः स्वः सौभाग्यलक्ष्मी, इहागच्छ इह तिष्ठ,
एतानि पाद्याद्याचमनीय-स्नानीयं, पुनराचमनीयम्।”

आसन :-
आसनानार्थेपुष्पाणिसमर्पयामि।
आसन के लिए फूल चढाएं

पाद्य :-
ॐअश्वपूर्वोरथमध्यांहस्तिनादप्रबोधिनीम्।
श्रियंदेवीमुपह्वयेश्रीर्मादेवींजुषाताम्।।
पादयो:पाद्यंसमर्पयामि।
जल चढाएं

यन्त्र के सामने मिठाई का भोग अर्पित करें ।



हाथ में अक्षत लेकर मंत्रोच्चारण करें :-

ॐ त्रयम्बकं यजामहे सुगन्धिंत पुष्टि वर्द्धनम् । उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्म्मुक्षीय मामृताम् ।। (इस मंत्र का ११ बार उच्चारण करें)



फिर निम्न मन्त्रों का मात्र १ बार ही उच्चारण करना है और यन्त्र पर अक्षत डालते जाना है-

ॐ त्रयम्बकायै नमः
ॐ आद्ये लक्ष्म्यै नम:
ॐ विद्यालक्ष्म्यै नम:
ॐ सौभाग्य लक्ष्म्यै नम:
ॐ अमृत लक्ष्म्यै नम:
ॐ लक्ष्म्यै नम:
ॐ सत्य लक्ष्म्यै नम:
ॐ भोगलक्ष्म्यै नम:
ॐ योग लक्ष्म्यै नम:
ॐ वसुन्धरायै नमः
ॐ उदाराङ्गायै नमः
ॐ हरिण्यै नमः
ॐ हेममालिन्यै नमः
ॐ धनधान्य कर्यै नमः
ॐ सिद्धये नमः
ॐ स्त्रैण सौम्यायै नमः
ॐ शुभप्रदायै नमः
ॐ नृपवेश्म गतानन्दायै नमः
ॐ वरलक्ष्म्यै नमः
ॐ वसुप्रदायै नमः
ॐ शुभायै नमः
ॐ हिरण्यप्राकारायै नमः
ॐ समुद्र तनयायै नमः
ॐ जयायै नमः
ॐ मङ्गलायै नमः
ॐ देव्यै नमः
ॐ विष्णु वक्षःस्थल स्थितायै नमः
ॐ विष्णुपत्न्यै नमः
ॐ प्रसन्नाक्ष्यै नमः
ॐ नारायण समाश्रितायै नमः
ॐ दारिद्र्य ध्वंसिन्यै नमः
ॐ सर्वोपद्रव वारिण्यै नमः
ॐ नवदुर्गायै नमः
ॐ महाकाल्यै नमः
ॐ ब्रह्म विष्णु शिवात्मिकायै नमः
ॐ त्रिकाल ज्ञान सम्पन्नायै नमः
ॐ भुवनेश्वर्यै नमः
ॐ प्रजापतये नमः
ॐ हिरण्यरेतसे नमः
ॐ दुर्धर्षाय नमः
ॐ गिरीशाय नमः
ॐ गिरिशाय नमः
ॐ अनघाय नमः
ॐ भुजङ्ग भूषणाय नमः
ॐ भर्गाय नमः
ॐ गिरिधन्वने नमः
ॐ गिरिप्रियाय नमः
ॐ कृत्तिवाससे नमः
ॐ पुरारातये नमः
ॐ भगवते नमः
ॐ प्रमधाधिपाय नमः
ॐ मृत्युञ्जयाय नमः
ॐ सूक्ष्मतनवे नमः
ॐ जगद्व्यापिने नमः
ॐ जगद्गुरवे नमः
ॐ व्योमकेशाय नमः
ॐ महासेन जनकाय नमः
ॐ चारुविक्रमाय नमः
ॐ रुद्राय नमः
ॐ भूतपतये नमः
ॐ स्थाणवे नमः
ॐ अहिर्भुथ्न्याय नमः
ॐ दिगम्बराय नमः
ॐ अष्टमूर्तये नमः
ॐ अनेकात्मने नमः
ॐ स्वात्त्विकाय नमः
ॐ शुद्धविग्रहाय नमः
ॐ शाश्वताय नमः
ॐ खण्डपरशवे नमः
ॐ अजाय नमः
ॐ पाशविमोचकाय नमः
ॐ मृडाय नमः
ॐ पशुपतये नमः
ॐ देवाय नमः
ॐ महादेवाय नमः




"ह्रीं शक्ति माला" से "वास्तु भगवती" मंत्र के पहले और बाद में "ह्रीं" बीज मंत्र का ३-३ माला करें और २१ माला जाप "वास्तु भगवती" मंत्र का करें-




वास्तु भगवती मंत्र-

ॐ ह्रीं नमो भगवती वास्तु देवतायै नमः ||

om hreem namo bhagawati vastu devataayei namah




हाथ जोड़कर आद्य शक्ति से क्षमा याचना करें-

न मंत्रं नोयंत्रं तदपिच नजाने स्तुतिमहो
न चाह्वानं ध्यानं तदपिच नजाने स्तुतिकथाः ।
नजाने मुद्रास्ते तदपिच नजाने विलपनं
परं जाने मातस्त्व दनुसरणं क्लेशहरणं
विधेरज्ञानेन द्रविणविरहेणालसतया
विधेयाशक्यत्वात्तव चरणयोर्याच्युतिरभूत् ।
तदेतत् क्षंतव्यं जननि सकलोद्धारिणि शिवे
कुपुत्रो जायेत क्वचिदपि कुमाता न भवति
पृथिव्यां पुत्रास्ते जननि बहवः संति सरलाः
परं तेषां मध्ये विरलतरलोहं तव सुतः ।
मदीयोयंत्यागः समुचितमिदं नो तव शिवे
कुपुत्रो जायेत् क्वचिदपि कुमाता न भवति
जगन्मातर्मातस्तव चरणसेवा न रचिता
न वा दत्तं देवि द्रविणमपि भूयस्तव मया ।
तथापित्वं स्नेहं मयि निरुपमं यत्प्रकुरुषे
कुपुत्रो जायेत क्वचिदप कुमाता न भवति
परित्यक्तादेवा विविध सेवाकुलतया
मया पंचाशीतेरधिकमपनीते तु वयसि
इदानींचेन्मातः तव यदि कृपा
नापि भविता निरालंबो लंबोदर जननि कं यामि शरणं
श्वपाको जल्पाको भवति मधुपाकोपमगिरा
निरातंको रंको विहरति चिरं कोटिकनकैः
तवापर्णे कर्णे विशति मनुवर्णे फलमिदं
जनः को जानीते जननि जपनीयं जपविधौ
चिताभस्म लेपो गरलमशनं दिक्पटधरो
जटाधारी कंठे भुजगपतहारी पशुपतिः
कपाली भूतेशो भजति जगदीशैकपदवीं
भवानि त्वत्पाणिग्रहणपरिपाटीफलमिदं
न मोक्षस्याकांक्षा भवविभव वांछापिचनमे
न विज्ञानापेक्षा शशिमुखि सुखेच्छापि न पुनः
अतस्त्वां सुयाचे जननि जननं यातु मम वै
मृडाणी रुद्राणी शिवशिव भवानीति जपतः
नाराधितासि विधिना विविधोपचारैः
किं रूक्षचिंतन परैर्नकृतं वचोभिः
श्यामे त्वमेव यदि किंचन मय्यनाधे
धत्से कृपामुचितमंब परं तवैव
आपत्सु मग्नः स्मरणं त्वदीयं
करोमि दुर्गे करुणार्णवेशि
नैतच्छदत्वं मम भावयेथाः
क्षुधातृषार्ता जननीं स्मरंति
जगदंब विचित्रमत्र किं
परिपूर्ण करुणास्ति चिन्मयि
अपराधपरंपरावृतं नहि माता
समुपेक्षते सुतं
मत्समः पातकी नास्ति
पापघ्नी त्वत्समा नहि
एवं ज्ञात्वा महादेवि
यथायोग्यं तथा कुरु

इसके बाद मातारानी की आरती संपन्न करें और महायंत्र को पूजन स्थल में ही स्थापित कर दें और परिवार के साथ प्रसाद ग्रहण करें.ये महत्वपूर्ण विधान व यन्त्र आपके जीवन को उन्नति से युक्त और बाधाओं से विहीन करे,यही मैं माँ भगवती और मेरे सदगुरुदेव के श्री चरणों में प्रार्थना करता हूँ । उम्मिद करता हू आप सभी साधना प्रयोग से लाभ उठाने हेतु अपने इच्छाशक्ति को मजबूत बनायेगे ।


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amannikhil011@gmail.com



Bhagwati architectural practice.

Nowadays architecture dominated. In a normal home is tied to the architectural rules so complex that the reading is not only confusing but man whose home completely according architecture are not, they are struck by doubts. If a man or want to change your home or live in the house with suspicious minds. Architecture, is a clear sense of balance of energy waves coming from all directions .... If you are receiving these waves are symmetrically, health and peace in the home or building will retain some side effects from defects such is-

economic problems-

The absence of economic growth, wealth than get involved, get delayed benefits, be disproportionate expenditure, being unable to provide necessary funds, funds, etc. stolen.

Family problems-

Marital conflict, isolation, delay in marriage, family enmity grow deteriorate relations with neighbors, family members, for any reason, isolation, betrayal etc.

Child-related Cintaan-

The absence of children, be delayed, son or absence of female children, children go on the wrong path, child abuse, child deficiencies in the education system, etc. remain.

Occupational problems-

Inability to find the right career opportunity, do not get the correct use of opportunities, loss of business profits, partners controversy, fall behind in commercial rivalry, job advancement and promotion, etc. should not be, should not transfer the right place, government departments stick work, ambitions do not get full on.

health problems-

Building owners and family members of the accidents, serious illness, to be addicted, to the operation, death etc.

Legal disputes, accidents, fire, water, air etc. fear outbreaks, the judgment, respect the result of the loss, etc. are awful.

Theft problems-

Why is a home burglary? Lack of security and negligence of the owner. But you will not believe Washudosh also plays a key role in providing a home burglary. Washudosh generated in the home is responsible for the theft.

In the house enters the invisible powers which family members composure and stress Mahesus Bigdta stepwise stepwise. Someone has to do something or have seen, all right, but your ancestors are angry ... Yesa diagnosis implies Hazzadizzadi

All troubleshooting of today's article in which it absolutely am giving ritual. The "architectural Bhagwati" practice which has seen all kinds Washudosho resolved. Instantly benefit from this practice is to see, it is Tantrotk with Vedic meditation. It has prepared the material and spiritual practices from pre through to absolve its own architectural Anubhuti you will enjoy different.

आदेश......

10 Jan 2016

शक्तिशाली नवरत्न.

ऋग्वेद को सबसे प्राचीन ग्रन्थ कहा जाता है|

ऋग्वेद के प्रथम मन्त्र में ही रत्न शब्द विद्यमान है|
अग्निमीळे पुरोहितं यज्ञस्य देवमृत्विजम|
होतारं रत्न धातमं||
---(ऋग्वेद/१/१)

इस मन्त्र में ध्यान देने वाली बात यह है कि
परमात्मा को ‘रत्नधातम’ कहा है अर्थात् रत्नों को धारण करने वाला वह स्वयं ही है| वस्तुतः यह स्पष्ट होता है कि रत्नों में अग्नि रश्मि के रूप में विधमान है ।

कोनसा रत्न कब धारण करना चाहिये,यह जानना जरुरी है। क्युके येसे ही किसीने बोल दिया और उसे धारण कर लिया तो येसे स्थिति मे आवश्यक लाभ प्राप्त नही होते है। महत्वपूर्ण बात ये भी है के रत्न कितने रत्ती का पहेना जाये ? यह तो हम कुण्डली को देखकर ही समज सकते परन्‍तु यहा मै आपको सामान्य जानकारी दे रहा हू जो आपके लिये सहायक है।

* सूर्य को शक्तिशाली बनाने में माणिक्य का परामर्श दिया जाता है। 3 रत्ती के माणिक को स्वर्ण की अंगूठी में, अनामिका अंगुली में रविवार के दिन पुष्य योग में धारण करना चाहिए।

* चंद्र को मोती पहनने से शक्तिशाली बनाया जा सकता है, जो 2, 4 या 6 रत्ती की चांदी की अंगूठी में शुक्ल-पक्ष सोमवार रोहिणी नक्षत्र में धारण करना चाहिए।

* मंगल को शक्तिशाली बनाने के लिए मूंगे को सोने की अंगूठी में 5 रत्ती से बड़ा, मंगलवार को अनुराधा नक्षत्र में सूर्योदय से 1 घंटे बाद तक के समय में पहनना चाहिए।

* बुध ग्रह का प्रधान रत्न पन्ना होता है जो अधिकांश रूप में पांच रंगों में पाया जाता है। हल्के पानी के रंग जैसा, तोते के पंखों के समान रंग वाला, सिरस के फूल के रंग के समान, सेडुल फूल के समान रंग वाला, मयूर पंख के समान रंग वाला। इसमें अंतिम मयूर पंख के समान रंग वाला श्रेष्ठ माना जाता है, किंतु यह चमकीला और पारदर्शी होना चाहिए। कम से कम 6 रत्ती वजन का पन्ना सबसे छोटी उंगली में प्लेटिनम या सोने की अंगूठी में बुधवार को प्रात:काल उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र में धारण करना चाहिए।

* गुरु (बृहस्पति) के लिए पुखराज 5, 6, 9 या 11 रत्ती का सोने की अंगूठी में तर्जनी अंगुली में गुरु-पुष्य योग में सायं समय धारण करने का परामर्श ग्रंथों में उपलब्ध होता है।

* शुक्र ग्रह को शक्तिशाली बनाने के लिए हीरा (कम से कम 2 कैरेट का) मृगशिरा नक्षत्र में बीच की अंगुली में धारण करना चाहिए।

* शनि ग्रह की शांति के लिए नीलम 3, 6, 7 या 10 रत्ती का मध्यमा अंगुली में शनिवार को श्रवण नक्षत्र में पंचधातु की अंगूठी में धारण करना चाहिए।

* राहु के लिए 6 रत्ती का गोमेद उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र में बुधवार या शनिवार को धारण करना चाहिए। इसे पंचधातु में तथा मध्यमा अंगुली में पहनना चाहिए।

* केतु के लिए 6 रत्ती का लहसुनिया गुर पुष्य योग में गुरुवार के दिन सूर्योदय से पूर्व धारण करना चाहिए। इसे भी पंचधातु में तथा मध्यमा अंगुली में पहनना चाहिए।

रत्न विशेष:-

माणिक्य

माणिक्य सूर्य ग्रह का रत्न है। माणिक्य को
अंग्रेज़ी में 'रूबी' कहते हैं। यह गुलाबी की तरह गुलाबी सुर्ख श्याम वर्ण का एक बहुमूल्य रत्न है और यह काले रंग का भी पाया जाता है। इसे सूर्य-रत्न की संज्ञा दी गई है। अरबी में इसको ' लाल बदख्शां' कहते हैं। यह कुरुंदम समूह का रत्न है। गुलाबी रंग का माणिक्य श्रेष्ठ माना गया है।

पन्ना

पन्ना बुध ग्रह का रत्न है। पन्ना को अंग्रेज़ी में 'एमेराल्ड' कहते हैं जो कई रंगों में पाया जाता है। यह हरा रंग लिए सफ़ेद लोचदार या नीम की पत्ती जैसे रंग का पारदर्शक होता है। नवरत्न में पन्ना भी होता है। हरे रंग का पन्ना सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। पन्ना अत्यंत नरम पत्थर होता है तथा अत्यंत मूल्यवान पत्थरों में से एक है। रंग, रूप, चमक, वजन, पारदर्शिता के अनुसार इसका मूल्य निर्धारित होता है।

हीरा

हीरा शुक्र ग्रह का रत्न है। अंग्रेज़ी में हीरा को 'डायमंड' कहते हैं। हीरा एक प्रकार का बहुमूल्य रत्न है जो बहुत चमकदार और बहुत कठोर होता है। यह भी कई रंगों में पाया जाता है, जैसे- सफ़ेद, पीला , गुलाबी, नीला, लाल, काला आदि। इसे नौ रत्नों में सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। हीरा रत्न अत्यन्त महंगा व दिखने में सुन्दर होता है। सफ़ेद हीरा सर्वोत्तम है और हीरा सभी प्रकार के रत्नों में श्रेष्ठ है। हीरे को हीरे के कणों के द्वारा पॉलिश करके ख़ूबसूरत बनाया जाता है।

नीलम

नीलम शनि ग्रह का रत्न है। नीलम का अंग्रेज़ी नाम 'सैफायर' है। नीलम रत्न गहरे नीले और हल्के नीले रंग का होता है। यह भी कई रंगों में पाया जाता है; मसलन- मोर की गर्दन जैसा, हल्का नीला, पीला आदि। मोर की गर्दन जैसे रंग वाला नीलम उत्तम श्रेणी का माना जाता है। नीलम पारदर्शी, चमकदार और लोचदार रत्न है। नवरत्न में नीलम भी होता है। शनि का रत्न नीलम एल्यूमीनियम और ऑक्सिजन के मेल से बनता है। इसे कुरुंदम समूह का रत्न माना जाता है।

मोती

मोती चन्द्र ग्रह का रत्न है। मोती को अंग्रेज़ी में 'पर्ल' कहते हैं। मोती सफ़ेद, काला, आसमानी , पीला, लाला आदि कई रंगों में पाया जाता है। मोती समुद्र से सीपों से प्राप्त किया जाता है। मोती एक बहुमूल्य रत्न जो समुद्र की सीपी में से निकलता है और छूटा, गोल तथा सफ़ेद होता है। मोती को उर्दू में मरवारीद और संस्कृत में मुक्ता कहते हैं।

लहसुनिया

लहसुनिया केतु ग्रह का रत्न है। लहसुनिया रत्न में बिल्लि की आँख की तरह का सूत होता है। इसमें पीलापन्, स्याही या सफ़ेदी रंग की झाईं भी होती है। लहसुनिया रत्न को वैदूर्य भी कहा जाता है।

मूँगा

मूँगा मंगल ग्रह का रत्न है। मूँगा को अंग्रेज़ी में 'कोरल' कहा जाता है, जो आमतौर पर सिंदूरी लाल रंग का होता है। मूँगा लाल, सिंदूर वर्ण, गुलाबी, सफ़ेद और कृष्ण वर्ण में भी प्राप्य है। मूँगा का प्राप्ति स्थान समुद्र है। वास्तव में मूँगा एक किस्म की समुद्री जड़ है और मूँगा समुद्री जीवों के कठोर कंकालों से निर्मित एक प्रकार का निक्षेप है। मूँगा का दूसरा नाम प्रवाल भी है। इसे संस्कृत में विद्रुम और फ़ारसी में मरजां कहते हैं।

गोमेद

गोमेद राहु ग्रह का रत्न है। गोमेद का अंग्रेज़ी नाम 'जिरकॉन' है। सामान्यतः इसका रंग लाल धुएं के समान होता है। रक्त-श्याम और पीत आभायुक्त कत्थई रंग का गोमेद उत्त्म माना जाता है। नवरत्न में गोमेद भी होता है। गोमेद रत्न पारदर्शक होता है। गोमेद को संस्कृत में गोमेदक कहते हैं।

पुखराज

पुखराज गुरु ग्रह का रत्न है। पुखराज को अंग्रेज़ी में 'टोपाज' कह जाता हैं। पुखराज एक मूल्यवान रत्न है। पुखराज रत्न सभी रत्नों का राजा है। यह अमूनन पीला, सफ़ेद, तथा नीले रंगों का होता है। वैसे कहावत है कि फूलों के जितने रंग होते हैं, पुखराज भी उतने ही रंग के पाए जाते हैं। पुखराज रत्न एल्युमिनियम और फ्लोरीन सहित सिलिकेट खनिज होता है। संस्कृत भाषा में पुखराज को पुष्पराग कहा जाता है। अमलतास के फूलों की तरह पीले रंग का पुखराज सर्वश्रेष्ठ माना जाता है।

नवग्रह मंत्र जिन्हे रत्न धारण करने के बाद भी जाप करना चाहिये।

सूर्य – ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं स: सूर्याय नमः
जप संख्या – 7000
जप समय – सूर्योदय काल

चंद्रमा – ॐ श्रां श्रीं श्रौं स: चंद्राय नमः
जप संख्या – 11000
जप समय – संध्याकाल

मंगल – ॐ क्रां क्रीं क्रौं स: भौमाय नमः
जप संख्या – 10000
जप समय – दिन का प्रथम प्रहर

बुध – ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं स: बुधाय नमः
जप संख्या – 9000
जप समय – मध्याह्न काल

बृहस्पति – ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं स: गुरवे नमः
जप संख्या – 19000
जप समय – प्रात:काल

शुक्र – ॐ द्रां द्रीं द्रौं स: शुक्राय नमः
जप संख्या – 18000
जप समय – ब्रह्मवेला

शनि – ॐ प्रां प्रीं प्रौं स: शनैश्चराय नमः
जप संख्या – 23000
जप समय – संध्याकाल

राहु – ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं स: राहवे नमः
जप संख्या – 18000
जप समय – रात्रिकाल

केतु – ॐ स्रां स्रीं स्रौं स: केतवे नमः
जप संख्या – 17000
जप समय – रात्रिकाल

जप संकल्प करने पर प्रतिदिन कम से कम एक माला (108 बार) जप आवश्यक है…

१२ राशियों के नाम एवम उनके स्वामी और राशी रत्न कि जानकारी-

मेष का स्वामी = मंगल-मुंगा ।

वृष का स्वामी = शुक्र-हिरा ।

मिथुन का स्वामी = बुध-पन्ना ।

कर्क का स्वामी = चन्द्रमा-मोती ।

सिंह का स्वामी = सूर्य-माणिक ।

कन्या का स्वामी -= बुध-पन्ना ।

तुला राशी का स्वामी = शुक्र-हिरा ।

वृश्चिक का स्वामी = मंगल-मुंगा ।

धनु का स्वामी = गुरु-पुखराज ।

मकर का स्वामी = शनि-नीलम ।

कुम्भ का स्वामी = शनि-नीलम ।

मीन का स्वामी = गुरु-पुखराज ।


मै सभी रत्न कम दाम मे देना चाहता हू क्युके रत्न बेचना मेरा व्यवसाय नही है और आपको भी लाभ मिले।

माणिक-600 रुपये रत्ती , मोति-400 रुपये रत्ती , मुंगा-450 रुपये रत्ती , पन्ना-550 रुपये रत्ती , पुखराज-600 रुपये रत्ती , नीलम-600 रत्ती , गोमेद-650 रुपये रत्ती , लहसुनिया-450 रुपये रत्ती ।

मै जो भी रत्न दे रहा हू,वह प्राण-प्रतिष्ठा और चैतन्य करके ही दे रहा हू । इनको अलग से कोइ विधी-विधान का जरुरत नही पडेगा । आप अगर इनमे किसी भी 5 रत्ती वजन के रत्न का हिसाब लगाकर मुल्य देखे तो 3250 रुपये के उपर किमत नही है। रत्न सस्ते ही होते है परंतु आजकल सभी अपना व्यवसाय चलाना जानते है,इसलिये रत्नो का किमत बहोत अधिक बताते है। मै उत्तम प्रकार के रत्न ही दुगा काच के तुकडे नही दे रहा हू और आप सभी का कल्याण हो यही कामना करता हू ।दुनिया मे तो आपको लाखो रत्न मिल जायेंगे परंतु शक्तियुक्त चार्ज रत्न बहोत कम लोग ही देते है और इतने कम मुल्य मे रत्न प्राप्त होना ये भी तो लाभदायक बात है।



NAVRATNA powerful.

Rig Veda is the oldest known texts |

The first gem in the Rig Veda mantra word exists |

Agnimilae Purohitn Devmritvijm Yjtrsy |

Hotarn Gems Dhatmn ||

--- (Rigveda / 1/1)

The mantra is the focus,

God 'Ratndhatm' is said that he is holding the jewels | Indeed, it is clear that the gems are present as fire rays.

When Konsa gems should hold, it is important to know. Kyuke Yese broke loose and took on the position in the Yese are not receiving the necessary benefits. More importantly, it is also the smallest number of gems to be wearing? The only understanding we can see the sun, but here I am giving you general information that is helpful to you.

* The strengthening sun is advised throws. 3 carat gold and ruby ​​ring, ring finger should hold Sunday pushya totals.

* Chandra wearing the beads can be made powerful, 2, 4 or 6-ounce silver ring should hold the bright-side Monday in Rohini constellation.

* To strengthen Tue 5 carat gold ring with coral and large, in the constellation Anuradha Tuesday from sunrise until 1 hour after the time should wear.

* Mercury staple gemstone is emerald which is found mostly in the five colors. As light watercolor, parrot feathers with the same color, similar to cirrus flower color, flower Sedul identical color, identical color of peacock feathers. Peacock feather color similar to the last one is considered the best, but it should be bright and transparent. Less than 6 emerald carat weight of platinum or gold ring in the little finger on Wednesday morning in Uttara Falguni constellation should hold.

* Guru (Jupiter) for Topaz 5, 6, 9 or 11 carat gold ring of the forefinger in the evening in time to hold consultations yoga guru-pushya texts are available.

* To strengthen the planet Venus Diamond (less than 2 carats) in the constellation Orion, the middle finger should hold.

* Saturn peace Sapphire 3, 6, 7 or 10-carat Star of the middle finger in Saturday's hearing should hold Pancdhatu ring.

* Onyx Uttara Falguni constellation of Rahu 6 ounce Wednesday or Saturday must hold. Pancdhatu and middle finger should wear it in.

* Ketu of 6 carat beryl tricks pushya sum should hold the Thursday before sunrise. Also in Pancdhatu and middle finger should wear.

Gem Special: -

Maaniky

Gem is a gem of the sun planet. To maaniky

In English, "Ruby says. The rosy pink tulip like a precious gem of black characters and black is also found. It was hailed as the Sun-gem. In Arabic it 'red Bdkshan says. It is a gem of Kurundm group. Pink gem is considered excellent.

Emerald

Mercury is emerald gemstone. Emerald in English 'Emerald' is found in many colors, which adds. The green color of the white elastic or neem leaf color is transparent. Emerald is also in NAVRATNA. Emerald green is considered to be the best. Emerald is extremely soft stone and is one of the most precious stones. Color, shape, luster, weight, according to the transparency of its value is determined.

Diamond

Diamond is the gem of the planet Venus. Diamond in English to "Diamond says. Diamond is a sort of precious gem which is very bright and very rigid. It is also found in many colors, such as white, yellow, pink, blue, red, black, etc. It is considered the best in the nine gems. Diamond gemstone is very expensive and beautiful in appearance. White Diamond is the best and is the best in all kinds of diamond jewels. Diamonds and polished by the diamond particles are created beautiful.

Sapphire

Sapphire is the gem of the planet Saturn. Sapphire's English name 'Sapphire' is. Amethyst gemstone color is dark blue and light blue. It is also found in many colors; E.g. as the peacock's neck, light blue, yellow, etc. The exquisite range of colors such as peacock's neck is considered sapphire. Sapphire transparent, shiny and elastic gems. Sapphire is also in NAVRATNA. Amethyst gemstone Saturn is made from a combination of aluminum and oxygen. It is considered the gem of Kurundm group.

Pearl

Pearl is the gem of the planet Moon. Pearls in English, "Pearl says. Pearl white, black, sky blue, yellow, Lala, etc. are found in many colors. Pearl is obtained from sea shells. A precious pearl mussel which comes out of the sea and drawn, round and white occurs. Pearls in Urdu and Sanskrit Mrwarid says Mukta.

Cat's-eye

Beryl gemstone of Ketu is the planet. Billi in cat's-eye gemstone is the kind of yarn. The Peelapn, ink or white color is the Jain also. Beryl beryl gemstone called.

Coral

Tue planet's coral gems. Coral in English "Coral is called, which is usually red vermilion. Coral red, vermilion characters, pink, white and black characters is also attainable. The realization that sea coral. The Coral Sea is the root of a variety of hard coral skeletons of marine organisms have built a sort of deposit. Coral reefs have another name. In Sanskrit it is called coral and Mrjan in Persian.

Onyx

Onyx is the gemstone of the planet Rahu. Onyx's English name "zircon" is. The color red is generally similar to smoke. Blood-black and brown-colored onyx yellow Abayukt Uttm considered. Onyx is also in NAVRATNA. Onyx gemstone is transparent. Onyx onyx says in Sanskrit.

Topaz

Topaz gems master planet. Topaz in English 'Topaz' are telling. Topaz is a precious gem. Topaz gemstone is the king of all gems. This Amunn yellow, white, and blue colors are. The color of the flowers are just saying that, just as the color of topaz are found. Topaz gemstone is silicate minerals including aluminum and fluorine. Pushprag in Sanskrit is called Topaz. Cassia flowers like yellow topaz is considered the best.

Navagraha who chant after chant should hold gems.


12 signs alert their owner's name and the amount that information Gems

Munga = Tue-old owner.

Taurus owner = Fri-diamond.

The owner of Gemini = Mercury Emerald.

Cancer of the owner = moon-pearl.

Singh's owner = sun-ruby.

Virgo's owner - = Mercury Emerald.

= Fri-old owner of the diamond mass.

Munga = Tue-old owner.

The old master = master-topaz.

Sapphire = Sat-old owner.

Sat-sapphire = Aquarius owner.

The old master = master-topaz.

I'm trying to give all the gems on low prices to sell gems Kyuke is not my business, and you also benefit.

Carat ruby ​​worth -600, -400 Rs Moti zero, zero Munga RS -450, -550 emerald worth zero, zero bucks Topaz -600, -600 carat amethyst, onyx zero Rs -650, -450 cat's zero bucks.

I am giving you the gem, the soul-consciousness only by reputation and am giving. You will not need to separate them from the legislation any methodology. If you have any of these 5-ounce weight with a price in terms of gems worth seeing over the 3250 is not the price. Gems are cheap to run your business, but nowadays all know, because of Ratno Price is bringing out more. Best of gems not only hack I am giving to Kac Duga and wish you all the hoo Kdunia on welfare you will find gems million charge gemstone extremely frisky but few people give and receive so little gem in price It is also beneficial to speak.


आदेश......

जल अप्सरा सिद्धि.

जल परी तो सभी ने सुना है और आज मै एक गोपनीय बात बता रहा हु "जल अप्सरा भी होती है"।जिसके बारे मे आज मै यहा आप सभी के लिये लिख रहा हूं। महत्वपूर्ण बात तो यह की बहोत कम लोग अप्सरा की उत्पत्ति के बारे मे जानते है तो मै बता देता हू के अप्सरा का उत्पत्ति समुद मंथन से हुआ है और इसके बारे मे अधिक माहीति आपको पुराणो से प्राप होगी। जप समुद्र मंथन से अप्सराओं का उत्पत्ति हो रहा था तब अप्सरा वर्ग मे सबसे आखिर मे "जल अप्सरा" का प्रत्यक्षीकरण हुआ था। जल अप्सरा कभी इंद्र के दरबार मे या फिर किसी अन देवि/देवता के प्रसन्नता हेतु न्रुत नही करती है,वह तो हमेशा आनंद मे रहती है अपने पिता समुद्र देव के साथ जो उनसे अत्याधिक स्नेह करते है। अन्य अप्सराएँ तो अपने पिता को छोड़ कर देव लोक चलि गयी परंतु जल अप्सरा ने अपने पिता का साथ कभी नही छोडा इसलिय इनका महत्व अत्याधिक है।

आप अप्सरा को साधारण ना समझे क्युके महाबली हनुमानजी को एक अप्सरा ने ही अंजना के रूप मे जन्म दिया है। तो सोचिये जब अप्सरा हनुमानजी को जन्म दे सकती है तो उनमे कितनी क्षमता होगी उनके प्रिय साधक वर्गो को सुख देने की? आप इतना समझिये अप्सराएँ कोइ साधारण योनियों मे से नही है अपितु अर्धदेवियाँ है जो अपने साधक को सब कुछ देने कि क्षमता रखती है। इस दुनिया मे कुछ येसे भी मुर्ख है जो कहेते है "मै ग्यारह दिनो मे अप्सरा प्रत्यक्ष करवा दुगा" तो आप भी मेरा एक बात समझ लिजीये "जिसने अप्सरा से प्रेम किया हो उसके लिये तो सिर्फ ग्यारह मिनिट का काम है परंतु अप्सरा से प्रेम करना इतना आसान कार्य नही है। कोइ कहेता है अप्सराएँ मंत्र शक्ति से प्रत्यक्ष होती है तो येसे लोगो के लिये सिर्फ एक बात कहुगा "इनका बाप कोइ विश्वमित्र है क्या जो ये लोग मंत्र शक्ति से प्रत्यक्षीकरण करवा रहे है?"।

आप चिंतित ना हो,मै यहा शाबर मंत्र का वास्तविक रुप और उसकी क्षमता क्या है ये लिख रहा हु और यहा प्रत्यक्षीकरण का बात नही हो रहा है। यहा आज मे दुर्लभ बात बता रहा हू ।

अप्सराएँ प्रत्येक व्यक्ति के मन की बात बता सकती है और भुत भविष्य वर्त्तमान भी बता सकती है। ये कार्य सिर्फ "जल अप्सरा"करती है जो दुर्लभ है तंत्र के क्षेत्र मे और अब तक इसका विधान गोपनीय रखा गया है।
"जल अप्सरा"अत्यन्त रत्नप्रिया है,वह एक विशेष रत्न से प्रेम करती है। रत्न तो पुरातन काल मे समुद्र से प्राप्त होते थे और आज भी प्राप्त होते ही हैं,इसमे कोइ संदेह नही है। पिता से अत्याधिक प्रेम होने के कारण से "जल अप्सरा"को रत अत्याधिक प्रिय है परंतु एक रत्न येसा भी है जो "जल अप्सरा"को अत्याधिक प्रिय है। अगर इस रत्न पर गुह्यकालि तंत्र के शास्वत 55 मंत्रो से सिद्ध किया जाये तो पुर्ण सफलता हम प्राप्त कर सकते है और गुह्यकालि जी इतर योनि की आराध्या है। इसीलिये जब गुह्यकालि की प्रचण्ड शक्ति चैतन्य होती है तब तो समस्त इतर योनिया शिघ्र जाग्रत होती है। इस साधना मे एक विशेष रत्न का आवश्यकता है और बिना रत्न के साधना को सफल बनाने का कोइ भी दुसरा मार्ग नही है। इसलिये बिना विशेष रत्न के साधना करने की सोचना भी मतलब समय को व्यर्थ करने के समान है।

इस साधना मे जिस रत्न का महत्व है,आज वह रत्न कम से कम 900 रुपये कैरट से मार्केट मे बेचा जा रहा है परंतु यहा पर मै उस गोपनीय रत्न का नाम नही बता रहा हू क्युके अगर रत्न का नाम बता दुगा तो लोग रत्न के महत्व को समझकर महेंगे दाम मे बेचना शुरू कर देगे ।इस गोपनिय रत्न मे गुह्यकालि जी का अदभुत शक्ति है जिसके कारण समस्त अर्ध देवि/देवताओं के साथ समस्त इतर योनि शक्तियाँ मंत्र जाप से तुरंत आकर्षित होकर साधक के सामने आजाती है,इसमे कोइ संदेह नही है क्युके यह बात गुह्यकालि तंत्र मे विशेष रूप मे कहा गया है।यह रत्न साधना हेतु कम से कम सव्वा चार कैरेट/रत्ति का होना जरुरी है और मै साधना हेतु साधकों को कम से कम पाच कैरेट/रत्ति का रत्न 3100/- रुपये का मन बना चुका हू क्युके सुशिल नरोले साधको से प्रेम करता है पैसो से नही ।यहा यह गोपनिय रत्न जो पाच कैरेट का है 4500/-रुपये मे साधारण रत्न के रूप मे मिलना मार्केट मे प्रारंभ होता है,उसिको मै 3500/-रुपये मे दे रहा हू और मै कोइ साधारण रत्न नही दे रहा हू,मै सिर्फ इस साधना हेतु विशेष अच्छा रत्न दे रहा हू ।साथ मे इस रत्न को मै गुह्यकालि के शास्वत 55 मंत्रो से प्राण-प्रतिष्ठीत करके दे रहा हू ताकि आपको साधना मे पुर्ण सफलता प्राप्त हो ।मेरा एक ही लक्ष्य है "सभी साधक एक अच्छे सिद्धि को प्राप्त करे,जिससे उनको समस्त साधना मे सफलता प्राप्त करने हेतु सहायक सिद्धि मिले ",इसी तात्पर्य को पुर्णता देना मै आवश्यक समजता हू ।

मुझे येसे व्यक्तियों के बारे मे सोचना जरुरी है जो इस क्षेत्र मे कुछ भी कर जाने हेतु ज्यादा सोचते नही है,वर्ना इस दुनिया मे स्वयं को धोका देने वाले साधको का कोइ कमी नही है,इसलिये वह कुछ मंत्र विद्या के भरोसे अपने आपको स्वयं घोषित महान तांत्रिक समझ बैठते है और सिर्फ जिवन मे दुखो से संघर्ष करते रहेते है।

"जल अप्सरा"साधना का यह विशेषता है,जिससे आप किसी भी व्यक्ति के मन का बात और उसका भूत भविष्य वर्त्तमान जान सकते है परंतु वह व्यक्ति आपके नजरो के सामने उपस्थित होना जरुरी है। अगर "जल अप्सरा"प्रसन्न हो जाये तो साधक को कइ प्रकार के उपहार नित्य प्रदान करती है। यह साधना 21 दिनो का है,जिसमे प्रथम दिन मंत्र का 108 बार जाप करना है और बाकि के 20 दिनो मे सिर्फ  54 बार मंत्र का जाप करना आवश्यक है। जब आप रत्न को प्राप्त करे तब उसे अपने मध्यमा उंगली के आकार से चांदी के धातु मे अंगुठि बनाना है और प्रथम दिन पर अंगुठि को दहिने हाथ मे पकड़कर ही मंत्र का 108 बार जाप करके अंगुठि को उसी समय धारण करना है। अंगुठि को धारण करके अन्य 20 दिन जाप करते समय आपको स्त्री कि मिठी आवाजे आयेगी और वह आवाज "जल अप्सरा की होती है। इसमे वचन देने का या लेने का कोइ विधान नही है क्युके "जल अप्सरा" साधना मे साधक 21 दिनो मे सफल होने का अवसर होता है। इस साधना को विशेष मुहुर्त मे सम्पन्न करना पडता है,यह भी एक इस साधना मे सफलता प्राप्त करने का विशेष अंग है।

साधना सिद्धि हेतु "शाबर जल अप्सरा मंत्र" इस प्रकार से है जो पुर्णत: दुर्लभ और गोपनिय है जो दुनिया के किसी किताब मे नही है क्युके यह मंत्र "नाथ सम्प्रदाय"मे गुरु मुख से प्राप्त होता है परंतु मै यहा साधको के कल्याण हेतु अपने गुरुजी के आज्ञा से ही आपको मंत्र विधान बताउगा ।

मंत्र:-

।। ॐ नमो आदेश गुरुजी को,आवो समुंदर की पुत्रि जल अप्सरा,समुंदर मे रहेने वाली,समुंदर मंथन से निकलने वाली,जल अप्सर तुम्हारी नजर है पुरानी,***************************अमुक के मन कि बात बताओ****************भुत भविष्य वर्त्तमान बताओ,*************के अंदर का दिखाओ************ ।।

यहा मैने 40% मंत्र लिखा है और पुर्ण मंत्र विधी-विधान "विशेष रत्न" के साथ दे रहा हू क्युके यहा पर मंत्र विधान देकर कोई फायदा नही है और दे भी दु तो इसका महत्व कम हो जायेगा । प्रत्येक शब्द का एक अलग मुल्य होता है और यह मुल्य जो महत्व से सम्बन्धित है उसको सही साधक ही समझ सकता है,येसे विधान को समझना मुर्खो के बस कि बात नही है ।रत्न प्राप्त करने हेतु मुझे ई-मेल से सम्पर्क करे -
amannikhil011@gmail.com






Water Nymph accomplishment.

Water Angel is heard all around and today I have a secret to tell myself "Water Nymph is also" About Kjiske here today, I am writing to all of you. More importantly, the extremely few people know about the origin of nymph I am telling the origin of the nymph of the sea is churned and more about the legend of Mahiti be attained. Origin of elves was the chanting from the churning sea nymph in class in the end, "Water Nymph" was the manifestation. Water nymph ever in the court of Indra Devi, or any un / god does not Nrut for pleasure, he is always in bliss with his father the sea god is love them too. Other Apsraaa leave his father was God, but water nymph Public corrugation with his father never left their significance is extremely purged.

You simply do not understand nymph Kyuke Mahabali Hanuman as a nymph in the same Anjana gave birth. So think when the nymph Hanuman may lead them to give pleasure to many capacity classes their beloved seeker? Not so much out of you Understand Apsraaa no ordinary birth but is Ardhdeviya your seeker that holds the potential to deliver everything. In this world nothing is fool Yese which also is called "I got eleven days in the nymph direct Duga" So you understand my Liziye "nymph who loved to work for him, but just eleven minutes to love nymph task is not so simple. There is no direct power Kheta mantra is Apsraaa Yese Khuga just one thing to people, "their father is no Biswmitr manifestation of what you are making is that they spell power?".

You're not worried, I am here as Shabr actual spells and his ability to write Who and what is happening here is not a matter of manifestation. I'm here to tell rarity in today.

Apsraaa can tell each person's mind and tell incurred future may present. These functions only "water nymph", which is rare in the field of system and the legislation has been kept secret until now.

"Water Nymph" is very ratnapriya, he falls in love with a special gemstone. Gems were obtained from the sea in ancient times and are still being received, no doubt about it is not. Due to the extreme love of the Father "water nymph" a gem, but the pass is too dear Yesa is also "water nymph" is dear to the extreme. Guhykali mechanism on this gem eternal 55 Mantras proven success we can achieve is absolutely speaking, and other vaginal Guhykali G is Aaradhya. So when there is consciousness, then all other Guhykali the fierce power is Yonia Instantly awake. This practice is in need of a particular gemstone and gemstone without any of the success of cultivation is also not another way. So think of the mean time to practice without a special gem is similar to waste.

In practice, the importance of this gem, today at least Rs 900 carat gem is being sold on the market, but here I am on the name of the secret gems Kyuke am not telling the name of the gem stones to tell people the importance of Duga Expensive prices started to sell in understanding confidential shelve This amazing power of gemstones in which all semi Devi Guhykali G / gods vagina with all other powers were attracted immediately by chanting seeker is Ajati, It is no doubt In particular, it stated in Kyuke Guhykali system to practice this gem Savva least four carats / Ratti seekers to practice, and I must have at least five carats / stone Ratti 3100 / - Rs mind Hu has made Kyuke Sushil Nrole Kyha devotees loves money not from the five carat gem is the confidential 4500 / -rupye meet as a gemstone in the market in general starts Usiko 3500 I / -rupye give in Hu and I'm not issue any ordinary jewel, I'm just giving the practice an especially good gem in this gem I Guhykali Ksath 55 Mantras from the eternal life-giving by Pratishtit'm so absolutely you may be successful in practice .My goal is the same, "the seeker to achieve a good accomplishment, which is conducive for them to achieve success in the accomplishment of all the practices found", this refers to the Puarnta I am turn takes necessary.

Yese people think of me is important in this area not think much is to be anything else in the world that self-deception is not lacking any of devotees, so he spells gazing confidently declared itself self Great Tantric confused and just grieves in Life is prone to conflict.

"Water Nymph" Silence is the attribute which any person can know the mind of the matter and its past present future, but the eye of the person in front of you must be present. If "water nymph" will be agreeable to the seeker provides many types of gifts ever. This practice is of 21 days, which is the first day of the mantra 108 times and only 54 times in 20 days of rest must chant. When you get the gems to the size of his middle finger on the silver metal to Anguti and Anguti on the first day on the right hand holding the mantra 108 times and at the same time to hold the Anguti. Anguti by holding another 20 days while the woman that the sweet voices chanting and the sound will come "is a water nymph. It does not promise to give or take any legislative Kyuke" water nymph "seeker in practice succeed in 21 days There is an opportunity. This practice has to be done in the particular auspicious, it is a special part of achieving success in this practice.

Silence for accomplishment "Shabr water nymph mantra" is thus Puarnt: rare and confidential in the world is not in a book Kyuke the mantra "Nath sect" master in the home comes from, but I am here for the welfare of his devotees Master's commandment to you Btauga legislation spells.


Here I wrote 40% spells and incantations absolutely mode-legislative "special jewel" with Kyuke am giving here is not worth the mantra by legislation and sad, devalued it will give. Each word has a different price and the price is related to the importance seeker could understand him correctly, Yese legislation Murkho understand that this is not just e-mail me to get Kratn Info -

amannikhil011@gmail.com



आदेश.......

8 Jan 2016

प्रेमि/पति वशीकरण.

आज के समय मे महिलाओं के साथ प्यार मे धोखा खाना येसे किस्से बहोत ज्यादा बढ रहे है। बहोत से येसे लड़के है जिन्होने लड़की से शादी का वादा करके उनसे एक अलग रिश्ता बनाकर उनको छोड़ दिया है। येसे मे लड़कीया परेशान हो जाति है और रोती रहेती है। मै सिर्फ यहा लड़कीयो का बात नही बता रहा हु अपितु येसा लडको के साथ भी हो रहा है। परंतु आज सिर्फ महिलाओं के लिये यह पोस्ट है।

शुरुआत होती है एक सच्चे प्यार के तलाश से और अचानक एक दिन कोइ लड़का जीवन मे आजाता है। पहिले ही नजर मे लड़की को लड़का अच्छा लगने लगता है। तब उनको ये नही पता होता है के लड़का कैसा है या फिर कभी कभी लड़का पहेचान का भी होता है और लड़कीया उसे अपना दिल दे बैठती है। एक समय येसा आता है जब सब कुछ अच्छा चल रहा होता है तो लडका एकदम से बदल जाता है। लड़की का फोन नही उठाता और नाही उसके किसी मेसेज का जवाब देता है। तो तब लड़कीया अंदर से टुट जाति है। अपने आपको एकेला महेसुस करती है,उसके बुरे बर्ताव से चिंतीत होती है,एकेले रहेते हुये रोना शुरु कर देती है। जब के कइ लड़कीया अपने प्रेमी को तन-मन-धन से उसे सब कुछ देकर प्यार करती है परंतु एक दिन वही लडका अपनी प्रेमिका को सपने दिखाकर उसे छोड़ देता है। सबसे पहिली बात जब तक लड़का शादी नही करता तब तक उन्हे छुने ना दे तो वो सही मे कितना सच्चे दिल से आपको चाहता है इसकी जानकारी आपको मिलेगी ।

जब रिश्ता टुट चुका हो तो इन बातो का अब कोइ अर्थ नही बचता है इसलिये अगला सही कदम यही है उसे तंत्र के माध्यम से अपने पास वापिस बुलाना है।आज मै जो बता रहा हू इससे लड़कीयो को उनका प्यार फिर से वापिस मिलेगा। ये वशीकरण के माध्यम से सम्भव है जिससे आपका प्रेमि/पति आपसे फिर दिल से प्यार करेगा और आपके साथ रहेगा ।आगे जिवन मे आपको कभी धोखा नही देगा और किसी दुसरी औरत के चक्कर मे भी नही फसेगा ।

यहा पर एक वशीकरण का विधान दे रहा हू जो महिलाओं के लिये अचुक प्रयोग है। साथ मे आप अपना फोटो,जन्म तारीख़,समय और स्थान मुझे ई-मेल amannikhil011@gmail.com पर मेल करके भेज दिजीये ताकि मै अपने तरफ से भी आपके सफलता हेतु प्रयास कर सकु । मै अपने तरफ से आपकि निशुल्क मे मदत कर रहा हु इसलिये आप मन मे येसा भ्रम ना रखे के "मै आपसे धनराशि लुगा ",ये आपके तकलिफ को कम करने हेतु मेरा एक छोटासा प्रयास है।


मंत्र-

।। ॐ चामुंडा देवी "अमुक" मे वश्यं कुरू कुरू स्वाहा ।।

om chaamundaa devi amuk me vashyam kuru kuru swaahaa

example: ।। ॐ चामुंडा देवी "रणबीर ऋषि कपुर" मे वश्यं कुरू कुरू स्वाहा ।।



इस मंत्र मे "अमुक" के जगह पर जिसे वश करना है उनका नाम लेकर मंत्र जाप करे।माला (लाल मुंगा) लाल रंग कि हो और आसन वस्त्र भी लाल रंग के हो । दिशा दक्षिण मतलब दक्षिण दिशा के तरफ मुख करके रात्रि मे जाप करना है। रात मे 9 बजे के बाद जाप करें। कम से कम मंत्र का जाप नित्य 11 दिनो तक 1 घण्टे तक करना जरुरी है। पहिले दिन मंत्र जाप से पहिले 11 बार मंत्र बोलकर एक अनार चाकु से काटना है और यही क्रिया आखिरी दिन मतलब 11 वे दिन मंत्र जाप पुर्ण होने के बाद करना है। अनार को दुसरे दिन किसी पिपल के पेड़ के निचे रखकर बिना पिछे मुडे घर पर वापिस आजाना है। साधना आनेवाले मंगलवार से शुरु किजीये ।

आप सिर्फ इतना किजीये बाकि क्रियाएँ मै स्वयं आपके लिये कर रहा हु। आप यह साधना करे तो अवश्य ही आपको सफलता मिल सकती है।



मातारानी आपको सफलता प्रदान करे यही मंगलकामना करता हूं।



Lover / husband Captivate.

In today's times cheated in love with women garner What is growing. The  boy who is extremely promising to marry them by making them a different relationship left. In this race girls upset and crying gravis. I was not just talking here of girls but also with boys . But today just for women it is posted.

There is the beginning of a search for true love in life and suddenly one day no boy Builders. Girl on first glance may seem to be a good boy. Then the boy how he would know whether or not they sometimes have the boy's identification and girls give him your heart sinks. Yesa a time when everything is going great with the boy suddenly turns. Not take the girl's phone and not her answer to a message. So then snapped inside girls race. Alone is experience  himself, is worried by his bad behavior, are prone experience is started crying. When many of girls money whenever your boyfriend loves giving her everything, but one day that dream boy showing his girlfriend leaves him. The first thing the guy does not get married until then he is not touching them on the right so fervently wants the information you will receive.

If the relationship has snapped not sense any longer survives because of these things is the next right step through her system to call back today I am telling you it will girls his love back again. It is possible that through captivate your Premi / spouse will love you again and your heart will be with you in Life Kage will not lie and not covered under the other woman Fsega affair.

who is here to give a Captivate legislation is used for women . On with your photo, birth date, time and location by mail, send me e-mail at amannikhil011@gmail.com Unlock move so I logically tried his behalf for your success. I'm lenders on your behalf yours free this confusion occurred because you do not keep in mind the "I ask you cleves funds", the effort to reduce problem mine is a small effort.

mantra

om chaamundaa devi amuk me vashyam kuru kuru swaahaa

In the mantra "so and so" the place which is to tame chanting his name Krekmala (red Munga) and seat wear that red is too red. On the south side of the south means the home is chanting in the night. In the night after 9 pm chant. Chant at least 1 hour to 11 days is necessary to continually. Voice chanting the mantra 11 times before the first day of the pomegranate cutting knife and the action means the last day of the 11th day after chanting absolutely have to. By the bottom of the second day to a pomegranate tree without People Are Ajana behind is turned back at home. Silence falls Kijiye starting from Tuesday.

You just rest Kijiye Activities Who am I for you self. If you must, you may find success is to practice it.

Goddess bless the benediction do you success.



आदेश......

2 Jan 2016

महाशिवरात्रि विशेष.

बहुत से लोग शिव और शंकर को एक ही मानते है, परन्तु वास्तव में इन दोनों में भिन्नता है | आप देखते है कि दोनों की प्रतिमाएं भी अलग-अलग आकार वाली होती है | शिव की प्रतिमा अण्डाकार अथवा अंगुष्ठाकार होती है जबकि महादेव शंकर की प्रतिमा शारारिक आकार वाली होती है | यहाँ उन दोनों का अलग-अलग परिचय, जो कि परमपिता परमात्मा शिव ने अब स्वयं हमे समझाया है तथा अनुभव कराया है स्पष्ट किया जा रह है :-

महादेव शंकर

१. यह ब्रह्मा और विष्णु की तरह सूक्ष्म शरीरधारी है | इन्हें ‘महादेव’ कहा जाता है परन्तु इन्हें ‘परमात्मा’ नहीं कहा जा सकता |
२. यह ब्रह्मा देवता तथा विष्णु देवता की रथ सूक्ष्म लोक में, शंकरपुरी में वास करते है |
३. ब्रह्मा देवता तथा विष्णु देवता की तरह यह भी परमात्मा शिव की रचना है |
४. यह केवल महाविनाश का कार्य करते है, स्थापना और पालना के कर्तव्य इनके कर्तव्य नहीं है |



परमपिता परमात्मा शिव

१. यह चेतन ज्योति-बिन्दु है और इनका अपना कोई स्थूल या सूक्ष्म शरीर नहीं है, यह परमात्मा है |
२. यह ब्रह्मा, विष्णु तथा शंकर के लोक, अर्थात सूक्ष्म देव लोक से भी परे ‘ब्रह्मलोक’ (मुक्तिधाम) में वास करते है |
३. यह ब्रह्मा, विष्णु तथा शंकर के भी रचियता अर्थात ‘त्रिमूर्ति’ है |
४. यह ब्रह्मा, विष्णु तथा शंकर द्वारा महाविनाश और विष्णु द्वारा विश्व का पालन कराके विश्व का कल्याण करते है |



शिव का जन्मोत्सव रात्रि में क्यों ?

‘रात्रि’ वास्तव में अज्ञान, तमोगुण अथवा पापाचार की निशानी है | अत: द्वापरयुग और कलियुग के समय को ‘रात्रि’ कहा जाता है | कलियुग के अन्त में जबकि साधू, सन्यासी, गुरु, आचार्य इत्यादि सभी मनुष्य पतित तथा दुखी होते है और अज्ञान-निंद्रा में सोये पड़े होते है, जब धर्म की ग्लानी होती है और जब यह भरत विषय-विकारों के कर्ण वेश्यालय बन जाता है, तब पतित-पावन परमपिता परमात्मा शिव इस सृष्टि में दिव्य-जन्म लेते है | इसलिए अन्य सबका जन्मोत्सव तो ‘जन्म दिन’ के रूप में मनाया जाता है परन्तु परमात्मा शिव के जन्म-दिन को ‘शिवरात्रि’ (Birth-night) ही कहा जाता है |चित्र में जो कालिमा अथवा अन्धकार दिखाया जाता  है वह अज्ञानान्धकार अथवा विषय-विकारों की रात्रि का घोतक है | ज्ञान-सूर्य शिव के प्रकट होने से सृष्टि से अज्ञानान्धकार तथा विकारों का नाशजब इस प्रकार अवतरित होकर ज्ञान-सूर्य परमपिता परमात्मा शिव ज्ञान-प्रकाश देते है तो कुछ ही समय में ज्ञान का प्रभाव सारे विश्व में फ़ैल जाता है और कलियुग तथा तमोगुण के स्थान पर संसार में सतयुग और सतोगुण कि स्थापना हो जाती है और अज्ञान-अन्धकार का तथा विकारों का विनाश हो जाता है | सारे कल्प में परमपिता परमात्मा शिव के एक अलौकिक जन्म से थोड़े ही समय में यह सृष्टि वेश्यालय से बदल कर शिवालय बन जाती है और नर को श्री नारायण पद तथा नारी को श्री लक्ष्मी पद का प्राप्ति हो जाती है | इसलिए शिवरात्रि हीरे तुल्य है |

“ॐ नम: शिवाय” वह मूल मंत्र है, जिसे कई सभ्यताओं में महामंत्र माना गया है। इस मंत्र का अभ्यास विभिन्न आयामों में किया जा सकता है। इन्हें पंचाक्षर कहा गया है, इसमें पांच मंत्र हैं। ये पंचाक्षर प्रकृति में मौजूद पांच तत्वों के प्रतीक हैं और शरीर के पांच मुख्य केंद्रों के भी प्रतीक हैं। इन पंचाक्षरों से इन पांच केंद्रों को जाग्रत किया जा सकता है। ये पूरे तंत्र (सिस्टम) के शुद्धीकरण के लिए बहुत शक्तिशाली माध्यम हैं।




महाशिवरात्रि का मूल

पुराणों में महाशिवरात्रि को लेकर कई तरह के वृत्तांत हैं। जिसमें सबसे अधिक प्रचलित है शिकारी द्वारा अनजाने में की गई शिवरात्रि की कथा । लेकिन यह कथा शिवरात्रि के व्रतफल की कथा है न कि इसकी मूल कथा। मूल कथा कुछ इस प्रकार है -

"शिव परंब्रह्म हैं। सृष्टि उनकी ही परिकल्पना है सृष्टि के अस्तित्व में आने के पहले चारों और सर्वव्यापक अन्धकार होता है। तब शिव सृष्टि की परिकल्पना करते हैं। ब्रह्माण्ड की रचना करते हैं, त्रिदेवों का गठन होता है। तथा सृष्टि अस्तित्व में आती है। माना जाता है कि सृष्टि के प्रारंभ में इसी दिन मध्य रात्रि परंब्रह्म शिव का ब्रह्मा से रुद्र के रूप में अवतरण हुआ। प्रलय की वेला में इसी दिन प्रदोष के समय भगवान शिव तांडव करते हुए ब्रह्मांड को तीसरे नेत्र की ज्वाला से समाप्त कर देते हैं। इसीलिए इसे महाशिवरात्रि अथवा कालरात्रि कहा गया।"

जब कल्प के समाप्ति पर शिव सृष्टि को विलीन कर देतें हैं तो एक बार फिर रह जाता है – सिर्फ अन्धकार। ऐसे ही एक अवसर पर (जब पूरी सृष्टि अँधकार में डूबी हुई थी) पार्वतीजी ने शिवजी की पूर्ण मनोयोग से साधना की। शिव जी ने प्रसन्न होकर पार्वती जी को वर दिया। पार्वतीजी ने महादेव से यह वर मांगा कि जो कोई भी इस दिन अगर आपकी साधना करे तो आप उस पर प्रसन्न हो जांए तथा मनवांछित वर प्रदान करें। इस प्रकार पार्वती जी के वर के प्रभाव से शिवरात्रि का प्रारम्भ हुआ।

एक अन्य पुराण कथा के अनुसार जब सागर मंथन के समय सागर से कालकेतु विष निकला तब शिव ने संसार के रक्षा हेतु सम्पूर्ण विष का पान कर लिया और नीलकंठ कहलाए। इसी अवसर को महाशिवरात्रि के रूप में मनाया जाता है। महाशिवरात्रि के अवसर पर ही शिव-पार्वती का विवाह भी सम्पन्न हुआ था। फाल्गुन कृष्ण-चतुर्दशी की महानिशा में आदिदेव कोटि सूर्यसमप्रभ शिवलिंग के रुप में आविर्भूत हुए थे। फाल्गुन के पश्चात वर्ष चक्र की भी पुनरावृत्ति होती है अत: फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी की रात्रि को पूजा करना एक महाव्रत है जिसका नाम महाशिवरात्रि व्रत पड़ा।

अब कुछ साधना के बारे मे जानते है,यह साधना दर्द-पीडा निवारण हेतु हैं। दर्द या पीड़ा एक अप्रिय अनुभव होता है। इसका अनुभव कई बार किसी चोट, ठोकर लगने, किसी के मारने, किसी घाव में नमक या आयोडीन आदि लगने से होता है। इस साधना से पेट दर्द,कमर दर्द,जबड़े का दर्द, आधा शिर दर्द,घुटनों का दर्द,अंगुष्ठ का दर्द.....इत्यादि पीडाये समाप्त होता है।




साधना विधी:-

महाशिवरात्रि के दिन शाम को 7 बजे से मंत्र जाप शुरु करें। आसन,वस्त्र,दिशा का कोइ बंधन नही है। रुद्राक्ष माला से 11 माला जाप करने से मंत्र सिद्धि होगा ।मंत्र सिद्धि के बाद एक ग्लास शुद्ध जल पर 108 बार मंत्र बोलते हुए 3 फुंक लगाये और वह अभिमंत्रीत जल रोगी को पिलादे । इस प्रकार से रोगी को 3-7 दिन तक लगातार अभिमंत्रीत जल पिलाने से हर प्रकार के शारिरिक पीडा और दर्द से राहत मिलता है। मंत्र सिद्धि के समय जैसे मैने मंत्र दिया उसी तरहा जाप करे और रोगी को अभिमंत्रीत जल पिलाते समय "अमुक"के जगहा पीडा को बोलकर 108 बार मंत्र बोलना है जैसे  "पेट दर्द पीडा जाए",इस तरहा बोलने का विधान है ।



मंत्र:-

।। शंकर शंकर खोज जाई,शंकर बैठे जंगल जाई,सब देवन की जय जय मनाय,ब्रम्हा विष्णु पुजे जाय,अमुक पीडा दर्द जाए ।।

साधना प्रती कोइ भी प्रश्न हो तो आप मुझसे सम्पर्क करके पुछ सकते है।



Shivaratri special.

Many people believe that Shiva and Shankar is one, but actually two variations | You see the two statues of different sizes is also | Shiva Shankar Mahadev statue of the statue is elliptical or Angushtakar size is Shararik | Here are different from them both, who explained that the Supreme God Shiva and experience have made us so himself remain to be clarified: -

Mahadev Shankar

1. Brahma and Vishnu incarnate as it is subtle | These 'Mahadev', but they are called 'God' can not be called |

2. The chariot of Lord Brahma, Lord Vishnu and subtle folk, have resided in Shankrpuri |

3. Lord Brahma and Vishnu, the god Shiva is the creation of God like |

4. It is only acts of mass destruction, their duty is not the duty of raising and rearing |

Supreme God Shiva

1. The flame-point conscious and they do not have any physical or astral body, it is God |

2. This Brahma, Vishnu and Shiva public, ie beyond micro dev folk 'Brahmaloka' (liberation) have resided in |

3. This Brahma, Vishnu and Shiva, ie the Creator 'Trinity' is |

4. This Brahma, Vishnu and Shiva and Vishnu world by following the disaster by making the welfare of the world |

Shiva's birthday night Why?

'Night' the ignorance, tamo or is a sign of sinful | Therefore, the timing of Kali Yuga Dwaparyug and 'night' is called | At the end of Kali Yuga, while monks, monk, master, master, etc. are all human beings degenerate and unhappy and are lying asleep in ignorance-sleep, when there is guilt of religion and Bharat subject disorders ear when it becomes brothel, Then the Purifier Supreme God Shiva in the universe is divine-born | If the other all birthday 'birthday' is celebrated as the birthday of Shiva, but God 'Shivaratri' (Birth-night) is called | blackness or darkness, which is shown in the picture or theme that Agyanandhkar disorders of the night is Gotk | Knowledge-Sun Shiva appeared Agyanandhkar creation and knowledge-Sun disorders Nashjb stirred and thus give off light when the Supreme God Shiva knowledge-time knowledge and Kali's influence spread to the whole world and for tamoguna that is set in the Golden Age and Satogun the world and the darkness of ignorance and the destruction of disorders | Supreme God Shiva in all of fiction by a supernatural birth creation in the short term it may become pagoda brothel changed from male to female and Mr. Lakshmi Narayan post office is the realization | Shivaratri is therefore like diamonds |

"Namah Shivaya" is the mantra, mantras is considered by many civilizations. This mantra can be practiced in various dimensions. They stated Panchakshr, the five mantra. These are symbols of the five elements in nature Panchakshr and body are also symbols of the five main centers. These Panchakshron these five centers can be awakened. The entire system (system) for the purification are very powerful medium.

The origin of Maha Shivaratri

There are many accounts in the Puranas about Shivaratri. Which is most prevalent hunter inadvertently made by the legend of Shivaratri. But this story is not the story of the original narrative of Shivaratri Wrtfl. The original story is something -

"Shiva are Prnbrhm. The creation of the universe came into being before his own hypothesis around the ubiquitous darkness. Then Shiva envisage creation. Creation of the universe, the holy trinity is formed. And the creation comes into existence . It is believed that in the beginning of creation, the day of Brahma, Shiva Rudra as midnight Prnbrhm has descended. Cataclysm Vella same day at dusk on the third eye of Lord Shiva Tandava the universe terminate blaze . So it was Shivaratri or kaalaraatri. "

At the end of the Aeon Shiva gives us creation dissolves remains so once again - just darkness. On one such occasion (when the whole world was sinking into Andkar) Parwatiji the full studiously Shiva meditated. Pleased, Shiva Parvati granted to. Mahadev Parwatiji the desire that whoever you on that happy day if there is poison to your spiritual practice and provide Mnwanchit bridesmaid. Thus, the influence of God's Shivaratri began Parvati.

Another myth, according to legend, the waters churning time Kalketu venom out of the ocean of the world, to protect the entire Shiva was drinking poison and called Jay. Maha Shivaratri is celebrated as the occasion. On the occasion of Shivaratri Shiva and Parvati was solemnized the marriage. Falgun Mahanisha of Krishna-chaturdasi had emerged as the Adidev quality Surysmprb lingam. Falgun after year cycle is repeated so falgun chaturdasi night of Krishna worship was a Mahavrats named Maha Shivaratri festival.

Now know anything about meditation, this practice is for pain-relieving suffering. Pain or suffering is an unpleasant experience. The experience often an injury, it takes offense, hitting someone, or iodine salt in a wound etc. is required. This practice abdominal pain, back pain, jaw pain, half head pain, knee pain, thumb pain ends Peedaye ..... etc.

Silence mode: -

Mahashivarathri the evening from 7 am to start chanting. Posture, clothing, any direction is not binding. Rudraksha beads, 11 beads to chant the mantra will Kmntr accomplishment after accomplishment Speaking mantra 108 times on a glass of pure water 3 is blown, and he put water Abhimntreet Pilade patient. Thus the patient drink water every 3-7 days of continuous Abhimntreet physical pain and get relief from pain. At the same time as I did the accomplishment mantra mantra to chant and patient Abhimntreet water Trha time around, "so and so" the voice of the suffering Jagha utter the mantra 108 times as "abdominal pain is pain", the Trha speech legislation.

Silence per Any question you can contact me.



आदेश......

1 Jan 2016

फसे हुये धन को प्राप्त करने के लिये।

कई बार लोग किसी की मदद के लिए, दुकान, मकान, प्लाट या किसी रोजगार, किसी कंपनी या किसी सरकारी विभागों से कोई काम निकलवाने के धन दे देते है या अपना ही धन किसी के पास रखवा देते है लेकिन समय पर वह व्यक्ति आपका धन नहीं लौटाता है या आपका वह काम भी नहीं होता है और आपको आपका दिया धन भी नहीं वापस मिल पाता है तब बहुत ज्यादा मानसिक पीड़ा का सामना करना पड़ता है । धन वापस मिलने के सारे प्रयास विफल होते है, सम्बन्ध भी ख़राब हो जाते है । तब जब आपको सारे उपायों में असफलता मिले और आपको सारे रास्ते बंद नज़र आये तो ऐसी परिस्तिथियों में आप ये साधना भगवान पर पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ करें , आपको अवश्य ही लाभ नज़र आएगा।

यदि आपका धन किसी के पास फंस गया है और वह उसे वापस नहीं कर रहा । अपना डूबा हुआ धन प्राप्त करने के लिए आपको ये साधना करना जरुरी है। धीरे धीरे आपके धन की वापसी होने लगेगी। यह साधना बहुत ही कारगर है इसे बिलकुल चुपचाप पूर्ण श्रद्धा और विश्वास से करना चाहिए और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि धैर्य बनाये रखना चाहिए ।

मुझे पुर्ण विश्वास है आपका फसा हुआ धन आपको पुनः वापिस मिलेगा। मैने आज तक जितने लोगो को यह साधना दिया उनका काम साधना के बाद कुछ दिनो मे ही हुआ है । मंत्र विधान मैने फोटो मे दिया हुआ है


To receive funding are a problem here.

Sometimes people help someone, shop, house, plot or a job, a company or a government department is a working flush give money or give your own money to anybody but at the time he placed the money There are no returns or your work and you have your money does not get back the face of too much mental anguish. Money is getting back all attempts fail, the relationship has become even worse. Then when you get failure in many ways and you have no way appeared in such situations you practice the full faith and trust in God, you will surely see the benefits.

If your money is stuck next to someone and they do not return to him. To get your dipped money to you this practice is necessary. Your refund will be slowly. This practice is very effective full faith and confidence should make it quite quietly and most importantly, the patient should be maintained.

I absolutely believe your cobwebbed money you'll get back again. I still have many people practice it a few days after their work in practice is the same. I have been on the legislative mantra Photo.


आदेश......

30 Dec 2015

परी सिद्धि साधना.

2015 आज चला जायेगा और इस नववर्ष पर आपको
बहोत सारे बधाई के साथ उच्चकोटि की साधनाये भी पढ़ने मिलेगा। इसमे से एक साधना आज ही दे रहा हू,"आकाश परी साधना"जो प्रामाणिक है और अन्य लोगो ने जो गलत मंत्र दिये है तो उनको भी अब सही मंत्र मिलेगा। ये साधना विधान अजमेर के एक येसे व्यक्ति से मिला है जिन्होने परी साधनाओं मे महारत हासील किया हुआ है और वह एक हिंदु व्यक्ति है परंतु उनका ज्ञान काबिले तारीफ़ है।

उन्होने इसी साधना के माध्यम से कई परीयो को सिद्ध  किया है और कई लोगो का मदत भी उन्होने तहे दिल से किया है जिसका अगर हम शुक्रिया अदा करना चाहे तो सम्भव नही है। आज के ही दिन दो वर्ष पुर्व उनका परलोक गमन हुआ था और आज भी वह हमारे साथ साधना के माध्यम से जिवीत है परंतु देह के माध्यम से नही है।

इस साधना से इच्छित कार्य पुर्ण होते है,परी सामने आकर हमारे कार्यो को सम्भाल लेती है। उसका रूप अत्यंत सुंदर होता है,उसके शरीर हमेशा सुगंध से महेकता रहेता है। उसकि आंखो मे देखने से साधक अपना सबकुछ भुल जाता है और परी का दिवाना हो जाता है। जब वो स्पर्श करती है तो येसे लगता है जैसे सारी ख्वाहिश पुर्ण हो गयी हो,उनका शरीर हमेशा थंडा होता है और वो जब स्वयं हमे स्पर्श करे तो उसका शरीर गरम हो जाता है परंतु हमारे स्पर्श से उसका शरीर गरम नही होता है।

परी साधक को कभी नाराज नही करती है,उसकी प्रत्येक कामना पुर्ण करती है। ये साधना कोइ भी कर सकता है जैसे शादी-शुदा पुरुष भी कर सकते हैं।

एकांत कमरे मे रात्रि 10 बजे से 12 बजे तक मंत्र जपे।सुगँधीत धुप दीप जला कर शुक्रवार से शुरु करे और तैहतीस (33) दीन नित्य जाप करे। जाप करते समय "तिलस्मी रत्न" और मिठाई हाथ मे ही रखे। जब परी प्रकट हो तब सबसे पहीले उसे "तिलस्मी रत्न" निर्मित अंगुठी पहेनाये और मिठाई उसे देकर उसके हाथ को चुमते हुए उसको अपनी प्रेमिका बनने का रिश्ता कायम रखने का वचन बध्धता करा ले। परि प्रसन्न होने पर साधक कि प्रत्येक इच्छा पुर्ण करेगी ।



सबसे पहले "तिलस्मी रत्न " को अंगुठी मे बनवाकर स्थापित करे और १०१ बार दरूद शरीफ पढ़े ।

"अल्लाह हुम्मा सल्ले अला सैयदना मौलाना मुहदिव बारीक़ वसल्लम सलातो सलामोका या रसूलअल्लाह सल्ललाहो ताला अलैह वसल्लम"




परी मंत्र सिद्धि हेतु माला का आवश्यकता नही है और बिना माला के रोज 72 मिनिट जाप करना है।"तिलस्मी रत्न (हकिक) अंगुठी" को सामने रखकर ही मंत्र जाप करना अनिवार्य है अन्यथा हानिकारक हो सकता है। क्युके यह तिलस्मी रत्न कोइ साधारण रत्न नही है,यह परी का प्रिय रत्न है जिसे वो बहोत चाहती है। परी सामने आने के बाद जब तक हम उसको अंगुठी नही पहेनाते है तब तक वो हमारे वश मे नही हो सकती है। उसको अंगुठी पहेनाने से वो हमारी प्रेमिका बन जाती है और हमे सभी सुख देती है। बिना अंगुठी के तो शादी का रिश्ता तक नही जुडता है तो सोचिये तुम्हे परी कैसे रिश्ता जोडेगी ? इसलिये उसको सिर्फ "तिलस्मी रत्न से बनी अंगुठी ही पहेनाये,अन्य रत्न से बनी अंगुठी पहेनाने से वो नाराज हो जाती है और फिर वापिस कभी नही आती है।




आकाश परी मंत्र:-

।। बिस्मिल्लाह रहेमाने रहिम आकाश परि के पाव मे  घुंगरु,नाचति आवे-बजाती आवे,सोति हो तो जागकर आवे,जागती हो तो जल्द आवे,छमा छम करे-बादल मे घोर करे,मेरा हुकुम नही माने तो परि लोक से जमीन पर  गीरे,हज साल जहन्नुम भोगे,लाख लाख बिच्छुन कि पिडा भोगे,दुहाई सुलेमान पैगम्बर कि,दुहाई हसन-हुसैन साहब की,मेरी भक्ति गुरु कि शक्ति,फुरो मंत्र ईश्वरो वाचा ।।




साधना मे सिर्फ सफेद वस्त्र,आसन,मिठाई का प्रयोग करे।सर के बाल ढके हुए हो इसलिए सफेद रुमाल सर पर बांधे और गुलाब का इत्र वस्त्रो पर लगाना है। साधना हेतु पच्छिम दिशा के तरफ मुख करके बैठना है। जाप के समय बिच मे उठना नही चाहिये और साधना करने के बाद ही आप आसन से उठ सकते है।




परी साधनाओं के नियम :-

1.परी साधना में वज्रासन का प्रयोग किया जाता है,जैसे नमाज अदा करने के लिए बैठते है ।

2. वस्त्र स्वच्छ एवं धुले हुए इस्तेमाल करने चाहिए ।

3. असत्य भाषण से बचना चाहिए और यथासंभव कम बोलना चाहिए क्योंकि हम जितना ज्यादा बोलेंगे मुख से असत्य तो निकलेगा ही साथ ही साथ हमारी उर्जा भी ज्यादा नष्ट होगी ।

4. साधना स्थल साफ़ एवं शांत होना चाहिए । साधना स्थल पर गंदगी नहीं फैलानी चाहिए । हर रोज़ पोचा लगाना चाहिए । एक बात का विशेष ध्यान रखें कि शौचालय के पास कभी साधना नहीं करनी चाहिए और कमरे में भी शौचालय नहीं होना चाहिए ।

5. साधक को मन , वचन एवं कर्म से ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए ।

6. साधक को शौच के बाद स्नान और लघु शंका के बाद हाथ पैर धोने चाहिए ।

7. परी साधनाओं और अमलों में चमड़े से बनी हुई वस्तुओं से परहेज़ रखना चाहिए ।

8. इन साधनाओं को करने के दिनों में गायत्री मंत्र जप नहीं करनी चाहिए क्योंकि इससे साधना में जो शक्ति संचार होता है उसका क्रम अवरोधित हो जाता है ।

9. अगर साधना में पुष्पों का प्रयोग करना हो तो हमेशा तीव्र सुगन्धित पुष्पों का ही उपयोग करना चाहिए । गुलाब और चमेली के पुष्प इस दृष्टि से उत्तम हैं ।

10. साधना करने के बाद कुछ मिष्ठान का वितरण हमेशा करना चाहिए । इस बात को लोग हमेशा नज़र अंदाज़ कर देते हैं ,वो लोग यह नहीं जानते कि येसा करने से उनकी सफलता का प्रतिशत बढ़ जाता है ।

11.लोहबान धुप का ही प्रयोग करें । लोहबान को हर परी साधना में इस्तेमाल करने से साधना अपना पूर्ण प्रभाव देती है ।

12. साधना में सूती आसन का ही उपयोग करना चाहिए ।

इन 12 नियमों का पालन अवश्य करें क्योंकि मैं आपको सफल होते हुए ही देखना चाहता हू ।




आपके जिवन का निराशता परी साधना से समाप्त होगा यही आनेवाले नववर्ष मे आपका भविष्य होगा,आपको मोहब्बत के साथ प्रेमिका मिलेगी जिसे सिर्फ आप ही देख सकते हो दुसरा कोइ नही देख सकता है। वो हमेशा साधक के साथ रहेती है,उसकि सेवा करती है,साधक को वो खुशियां ही खुशियां देती है,किसी भी कार्य के लिये मना नही करती है।

दुनिया का कोइ भी किताब पढलो परंतु सुशिल नरोले ने लिखे हुये शब्दो को आप किसी किताब मे नही पढ़ने मिलेगे क्युके इसमे अनुभव के आधार पर वर्णन किया हुआ है। येसे ही किताबें मे पढकर यह आर्टीकल यहा पर लिखा नही गया है। यहा पर अनुभव और प्रामाणिक विधी-विधान के साथ यहा सब कुछ लिखा हुआ है।

"तिलस्मी रत्न" कोइ साधारण रत्न नही है यह विशेष प्रकार का हकिक पत्थर है जो मिलना दुर्लभ होता है। कुछ दिन पहिले मुझे 7 रत्न प्राप्त हुए,अब और भी रत्न प्राप्त करने हेतु मै प्रयास कर रहा हु। मुझे 7 रत्न प्राप्त हुए इसलिये मै यहा आज यह साधना दे रहा अन्यथा मै बिना रत्न के साधना नही दे सकता था ।

इस दुर्लभ रत्न को मै बहोत कम धनराशि मे आपको दे रहा हू। मै चाहता तो यह दुर्लभ रत्न 10-20 हजार मे भी दे सकता था परंतु तंत्र के नाम पर साधको के साथ खिलवाड़ करना मेरे नियमो के विरुद्ध है इसलिये यह रत्न मै आपको 1850 रुपयो मे दे रहा हू जिसमे 100 रुपये आपको कोरियर का चार्जेस अतिरिक्त देना होगा। इस प्रकार से आपको 1950/- रुपये मे "तिलस्मी रत्न" प्राप होगा और रत्न के साथ मे उसको सिद्ध करने का विधान भी दिया जायेगा। किसी दुसरे व्यक्ति से सिद्ध किया हुआ रत्न आपके किसी काम का नही है। रत्न को आप स्वयं सिद्ध करेंगे तो आपको पुर्ण सफलता प्राप्त हो सकती है और परी भी प्रत्यक्ष रूप मे सिद्ध हो सकती है।एक परी का इलम भी मै आपको बता दुगा,जिससे आप अन्य परीओ से सम्पर्क कर सकते है।

किसी भी प्रकार के परी से सम्बन्धित प्रश्न और "तिलस्मी रत्न" को प्राप्त करने हेतु ई-मेल के माध्यम से सम्पर्क करे।

amannikhil011@gmail.com


नववर्ष की आप सभी को शुभकामनाएं ।




आदेश.......