12 Jul 2019

मधुमेह का आयुर्वेदिक इलाज .(Ayurvedic treatment of diabetes.)



मधुमेह आज सिर्फ भारत ही नहीं, पूरे विश्व में अपने पैर पसारने लगा है। भारत को तो विश्व की डायबिटीक कैपिटल कहकर पुकारा जाता है। इस प्रकार भारत में मधुमेह से पीड़ित व्यक्तियों की संख्या काफी अधिक है। 

आजकल के इस भागदौड़ भरे युग में अनियमित जीवनशैली के चलते जो बीमारी सर्वाधिक लोगों को अपनी गिरफ्त में ले रही है वह है मधुमेह। मधुमेह को धीमी मौत भी कहा जाता है। यह ऐसी बीमारी है जो एक बार किसी के शरीर को पकड़ ले तो उसे फिर जीवन भर छोड़ती नहीं। इस बीमारी का जो सबसे बुरा पक्ष है वह यह है कि यह शरीर में अन्य कई बीमारियों को भी निमंत्रण देती है। मधुमेह रोगियों को आंखों में दिक्कत, किडनी और लीवर की बीमारी और पैरों में दिक्कत होना आम है। पहले यह बीमारी चालीस की उम्र के बाद ही होती थी लेकिन आजकल बच्चों में भी इसका मिलना चिंता का एक बड़ा कारण हो गया है। 

जब हमारे शरीर के पैंक्रियाज में इंसुलिन का पहुंचना कम हो जाता है तो खून में ग्लूकोज का स्तर बढ़ जाता है। इस स्थिति को डायबिटीज कहा जाता है। इंसुलिन एक हार्मोन है जोकि पाचक ग्रंथि द्वारा बनता है। इसका कार्य शरीर के अंदर भोजन को एनर्जी में बदलने का होता है। यही वह हार्मोन होता है जो हमारे शरीर में शुगर की मात्रा को कंट्रोल करता है। मधुमेह हो जाने पर शरीर को भोजन से एनर्जी बनाने में कठिनाई होती है। इस स्थिति में ग्लूकोज का बढ़ा हुआ स्तर शरीर के विभिन्न अंगों को नुकसान पहुंचाना शुरू कर देता है।

डायबिटीज के मरीजों में सबसे ज्यादा मौत हार्ट अटैक या स्ट्रोक से होती है। जो व्यक्ति डायबिटीज से ग्रस्त होते हैं उनमें हार्ट अटैक का खतरा आम व्यक्ति से पचास गुना ज्यादा बढ़ जाता है। शरीर में ग्लूकोज की मात्रा बढ़ने से हार्मोनल बदलाव होता है और कोशिशएं क्षतिग्रस्त होती हैं जिससे खून की नलिकाएं और नसें दोनों प्रभावित होती हैं। इससे धमनी में रुकावट आ सकती है या हार्ट अटैक हो सकता है। स्ट्रोक का खतरा भी मधुमेह रोगी को बढ़ जाता है। डायबिटीज का लंबे समय तक इलाज न करने पर यह आंखों की रेटिना को नुकसान पहुंचा सकता है। इससे व्यक्ति हमेशा के लिए अंधा भी हो सकता है।

आयुर्वेद में मधुमेह जैसे बीमारी का सटीक इलाज दिया हुआ है,कुछ ऐसी जड़ीबूटीया है जिसके सेवन से मधुमेह को हमेशा के लिये ठीक किया जा सकता है । 32 प्रकार की जड़ीबूटियों के मिश्रण से मधुमेह की एक शक्तिशाली दवा बनायी जाती है जिसका असर 7-8 दिनों में देखने मिलता है,आजतक मैंने जिन मरीजो को भी दवाई दी है उनसे एक बात तो हमेशा बोलता हू "अगर 15 दिनों में आपको दवा से फर्क महसूस नहीं हुआ तो मुझे मेरी दवाई वापिस भेज दो और आपका दवा के लिए किया पुरा धनराशि मुझसे वापिस लीजिए" ।

यह दवा अगर तीन महीने तक सेवन की जाए तो मधुमेह नामक बीमारी से छुटकारा पाया जा सकता है । चाहे आपका मधुमेह कितना ही क्यो ना तकलीफ देता हो,इस दवा से मधुमेह कंट्रोल में आजाता है,मैं यह दवा 100% गारंटी के साथ देता हू और 15 दिनों में आपको असर ना दिखे तो 100% पुरा दवाई का खर्च वापिस दिया जाएगा । दवाई का असर तो पहिले ही दिन से शुरू हो जाता है और 7-8 दिनों में आपको फायदे दिखाई देते है,15 दिनों तक आप रोजाना दवा लेने के बाद स्वयं ही दवा की प्रशंसा करने लगेंगे । यह दवा 30 दिनों के लिए दी जाती है क्योके कुछ लोगो का मधुमेह 30 दिनों में ही ठीक हो गया और कुछ लोगो को ज्यादा से ज्यादा 90 दिनों तक का समय लगा,कम से कम 30 दिन और ज्यादा से ज्यादा 90 दिनों तक दवाई लेने से मधुमेह पूर्णता ठीक हो जाता है,ऐसा आजतक का हमारा अनुभव रहा है ।

जो मधुमेह के मरीज यह 32 प्रकार की जड़ीबूटियों से निर्मित दवाई का सेवन करके स्वास्थ्य होना चाहते है,उन्हें मुझे व्हाट्सएप नंबर पर आपकी मेडिकल रिपोर्ट भेजनी है,जिसमे यह पता चले कि अभी आपका मधुमेह कितना है,आपकी रिपोर्ट देखकर ही सही मात्रा में जड़ीबूटियों का मिश्रण करके दवाई बनाई जाएगी क्योके इन जड़ीबूटियों में मात्राओं को कम ज्यादा करना पड़ता है । इस दवाई के 30 दिन का खर्च 1800/-रुपये है और कूरियर चार्जेस 80- 120/-रुपये तक है,एक दिन के दवा का खर्च ही 60 रुपया आता है और 30 दिनों तक दवाई को लेने के बाद मैं गारण्टी के साथ बोलता हू आप स्वयं पूर्ण स्वास्थ लाभ प्राप्त होने तक अवश्य ही दवाई का सेवन करेंगे । आपको 15 दिनों के बाद फिर से एक बार अपना रिपोर्ट भेजना है और उसमें आपको लाभ ना दिखाई दे तो आपको आपकी धनराशि वापिस कर देंगे,यह मैं आपको वचन देता हू ।

इस दवाई को सेवन करने से लाभ 100% होगा और साथ मे मैं आपको कुछ आवश्यक बाते भी बता दूँगा जिससे आपको अच्छे परिणाम प्राप्त होंगे । दवाई के सेवन काल मे कोई भी तकलीफ हो तो तुरंत फोन करे,इस लिए इस दवाई के सेवन हेतु आपको डरने की आवश्यकता नही है,इसमे मेरा अनुभव भी 10 वर्ष से ज्यादा का रहा है । आयुर्वेद में रोग को ठीक करने के साथ ही उसे शरीर से खत्म करने पर ध्यान दिया जाता है। 


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+918421522368




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7 Jul 2019

कुण्डली में अशुभ योग और उनका निवारण.


1).चांडाल योग-

गुरु के साथ राहु या केतु हो तो जातक बुजुर्गों का
एवम् गुरुजनों का निरादर करता है ,मोफट होता है,तथा अभद्र भाषाका प्रयोग करता है । यह जातक पेट और श्वास के रोगों से पीड़ित हो सकता है और इनका जीवन कष्टदायक होता है। वह निराश व हताश रहता है उसकी प्रकृति आत्मघाती होती है ।


2).सूर्य ग्रहण योग-

सूर्य के साथ राहु या केतु हो तो जातक कोहड्डियों की कमजोरी, नेत्र रोग, ह्रदय रोग होने की संभावना होती है ,एवम् पिताका सुख कम होता है,आत्मविश्वास की कमी होती है इसके वजेसे सफलताये नही मिलती है । ग्रहण का शाब्दिक अर्थ है खा जाना तथा इसी प्रकार यह माना जाता है कि राहु अथवा केतु में से किसी एक के सूर्य अथवा चन्द्रमा के साथ स्थित हो जाने से ये ग्रह सूर्य अथवा चन्द्रमा का कुंडली में फल खा जाते हैं जिसके कारण जातक को अपने जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में समस्याओं का सामना करना पड़ता है।


3).चंद्र ग्रहण योग-

चंद्र के साथ राहु या केतु हो तो जातक को मानसिक पीड़ा एवं माता को हानई पोहोंचती है,जीवन मे सुख को कमी और दुःख ज्यादा होते है । चन्द्रमा पर राहु अथवा केतु की स्थिति अथवा दृष्टि से प्रभाव पड़ता है तो कुंडली में ग्रहण योग का निर्माण हो जाता है जो जातक के जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में उसे भिन्न भिन्न प्रकार के कष्ट दे सकता है।


4).श्रापित योग-

शनि के साथ राहु हो तो यह योग होता है,इस योग से जीवन मे नर्क यातनाएं भुगतनी पड़ती है,ऐसा जातक आत्महत्या के विचार ज्यादा करता है । शाप का सामान्य अर्थ शुभ फलों का नष्ट होना माना जाता है । जिस व्यक्ति की कुण्डली में यह योग बनता है उसे इसी प्रकार का फल मिलता है यानी उनकी कुण्डली में जितने भी शुभ योग होते हैं वे प्रभावहीन हो जाते हैं । इस स्थिति में व्यक्ति को कठिन चुनौतियों एवं मुश्किल हालातों का सामना करना होता है ।


5).पितृदोष-

यदि जातक को 2,5,9 भाव में राहु केतु या शनि है तो जातक पितृदोष से पीड़ित है । इसके प्रभाव से किसी भी कार्य को पूर्ण करने की कोशिशें नाकाम हो जाती है । पितृ दोष के कारण व्यक्ति को बहुत से कष्ट उठाने पड़ सकते हैं, जिनमें विवाह ना हो पाने की समस्या, विवाहित जीवन में कलह रहना, परीक्षा में बार-बार असफल होना, नशे का आदि हो जाना, नौकरी का ना लगना या छूट जाना, गर्भपात या गर्भधारण की समस्या, बच्चे की अकाल मृत्यु हो जाना या फिर मंदबुद्धि बच्चे का जन्म होना, निर्णय ना ले पाना, अत्याधिक क्रोधी होना।


6).नागदोष-

यदि जातक के पाचवे भाव में राहु विराजमान है तो जातक पितृदोष के साथ-साथ नागदोष से भी पीड़ित होता है,ऐसा जातक जीवन मे हमेशा असंतुष्ट होता है और संतान प्राप्ति में इसे कष्ट उठाने पड़ते है । यह दोष होने पर जातक किसी पुराने या यौन संचारित रोग से ग्रस्‍त रहता है। कुंडली में नागदोष हो तो जातक को अपने प्रयासों में सफलता प्राप्‍त नहीं होती। नाग दोष का अत्‍यंत भयंकर प्रभाव है कि इसके कारण महिलाओं को संतान उत्‍पत्ति में अत्‍यधिक परेशानी आती है। कुंडली में नागदोष होने से व्‍यक्‍ति की गंभीर दुर्घटना होने की संभावना रहती है। इन्‍हें जल्‍दी-जल्‍दी अस्‍पताल के चक्‍कर लगाने पड़ते हैं एवं इनकी आकस्‍मिक मृत्‍यु भी संभव है । नागदोष से प्रभावित जातकों को उच्‍च रक्‍तचाप और त्‍वचा रोग की समस्‍या रहती है।


7).ज्वलन योग-

सूर्य के साथ मंगल की युति हो तो जातक ज्वलन योग (अंगारक योग) से पीड़ित होता है,हमेशा किसी न किसी चीज की कमी और स्वास्थ्य में तकलीफे रहती है । जिस स्थान मे हो उसी स्थान के खराब फल देता है ।


8).अंगारक योग-

मंगल के साथ राहु या केतु वीराजमान हो तो जातक अंगारक योग से पीड़ित होता है,ऐसा जातक सारी जिंदगी अंगारों पर चलने वाली जैसी तकलीफ को सहता है । इसके कारण जातक का स्वभाव आक्रामक, हिंसक तथा नकारात्मक हो जाता है तथा इस योग के प्रभाव में आने वाले जातकों के अपने भाईयों, मित्रों तथा अन्य रिश्तेदारों के साथ संबंध भी खराब हो जाते हैं।


9).प्रेत दोष-

शनि के साथ बुध होने से यह दोष उत्पन्न होता गई,प्रेत बाधा का अ‍र्थ मनुष्‍य के शरीर पर किसी भूत-प्रेत का साया पड़ जाना है। यह योग न केवल जातक को परेशान करता है अपितु उसके पूरे परिवार को भयभीत कर देता है। प्रेत बाधा में अदृश्‍य शक्‍तियां मनुष्‍य के शरीर पर कब्‍जा कर लेती हैं। ज्‍योतिषशास्‍त्र के अनुसार कुंडली में प्रेत बाधा योग बनने पर जातक को भूत-प्रेत से पीड़ा मिलती है।


10).पिशाच योग-

शनि के साथ केतु हो तो यह योग बनता है,इनमें इच्छा शक्ति की कमी रहती है,इनकी मानसिक स्थिति कमज़ोर रहती है,ये आसानी से दूसरों की बातों में आ जाते हैं जिससे इनको धोका मिलता है ।इनके मन में निराशात्मक विचारों का आगमन होता रहता है,कभी कभी स्वयं ही अपना नुकसान कर बैठते हैं ।


11).केमद्रुम योग-

चंद्र के साथ कोई ग्रह ना हो एवम् आगेपीछे के भाव में भी कोई ग्रह न हो तथा किसी भी ग्रह की दृष्टि चंद्र
पर ना हो तब वह जातक केमद्रुम योग से पीड़ित होता है तथा जीवन में बोहोत ज्यादा परिश्रम अकेले
ही करना पड़ता है ।


12).दरिद्र योग-

यदि किसी कुंडली में 11वें घर का स्वामी ग्रह कुंडली के 6, 8 अथवा 12वें घर में स्थित हो जाए तो ऐसी कुंडली में दरिद्र योग बन जाता है। ऐसे में व्यक्ति के व्यवसाय तथा आर्थिक स्थिति पर बहुत अशुभ प्रभाव डाल सकता है। दरिद्र योग के प्रबल प्रभाव में आने वाले जातकों की आर्थिक स्थिति जीवन भर खराब ही रहती है तथा ऐसे जातकों को अपने जीवन में अनेक बार आर्थिक संकट का सामाना करना पड़ता है।


13).कुज योग-

यदि किसी कुंडली में मंगल  लग्न, चतुर्थ, सप्तम, अष्टम या द्वादश भाव में हो तो कुज योग बनता है। इसे मांगलिक दोष भी कहते हैं। जिस स्त्री या पुरुष की कुंडली में कुज दोष हो उनका वैवाहिक जीवन कष्टप्रद रहता है इसीलिए विवाह से पूर्व भावी वर-वधु की कुंडली मिलाना आवश्यक है। यदि दोनों की कुंडली में मांगलिक दोष है तो ही विवाह किया जाना चाहिए।


14).षड़यंत्र योग-

यदि लग्नेश आठवें घर में बैठा हो और उसके साथ कोई शुभ ग्रह न हो तो षड्यंत्र योग का निर्माण होता है। यह योग अत्यंत खराब माना जाता है। जिस स्त्री-पुरुष की कुंडली में यह योग हो वह अपने किसी करीबी के षड्यंत्र का शिकार होता है जैसे धोखे से धन-संपत्ति का छीना जाना, विपरीत लिंगी द्वारा मुसीबत पैदा करना आदि।


15).भाव नाश योग-

जब कुंडली में किसी भाव का स्वामी त्रिक स्थान यानी छठे, आठवें और 12वें भाव में बैठा हो तो उस भाव के सारे प्रभाव नष्ट हो जाते हैं और उससे भाव नाश योग केजते है। उदाहरण के लिए यदि धन स्थान की राशि मेष है और इसका स्वामी मंगल छठे, आठवें या 12वें भाव में हो तो धन स्थान के प्रभाव समाप्त हो जाते हैं।


16).अल्पायु योग-

जब कुंडली में चंद्र पाप ग्रहों से युक्त होकर त्रिक स्थानों में बैठा हो या लग्नेश पर पाप ग्रहों की दृष्टि हो और वह शक्तिहीन हो तो अल्पायु योग का निर्माण होता है। जिस कुंडली में यह योग होता है उस व्यक्ति के जीवन पर हमेशा संकट मंडराता रहता है और उसकी आयु कम होती है।


17).कालसर्प दोष के प्रकार-


अनंत कालसर्प योग
अगर राहु  लग्न में बैठा है और केतु सप्तम में और बाकी ग्रह इन दोनों ग्रहों के बीच में तो कुंडली में अनंत कालसर्प दोष का निर्माण हो जाता है। अनंत कालसर्प योग के कारण जातक को जीवन भर मानसिक शांति नहीं मिलती। इस प्रकार के जातक का वैवाहिक जीवन भी परेशानियों से भरा रहता है।

कुलिक कालसर्प योग
अगर राहु कुंडली के दुसरे घर में, केतु अष्ठम में विराजमान है और बाकी ग्रह इन दोनों ग्रहों के बीच में है तब कुलिक कालसर्प योग का निर्माण होता है। इस योग के कारण व्यक्ति के जीवन में धन और स्वास्थ्य संबंधित परेशानियाँ उत्पन्न होती रहती हैं।

वासुकि कालसर्प योग
जन्मकुंडली के तीसरे भाव में राहु और नवम भाव में केतु विराजमान हो तथा बाकि ग्रह बीच में तो वासुकि कालसर्प योग का निर्माण होता है। इस प्रकार की कुंडली में बल और पराक्रम को लेकर समस्या उत्पन्न होती हैं।

शंखपाल कालसर्प योग
अगर राहु  चौथे घर में और केतु दसवें घर में हो साथ ही साथ बाकी ग्रह इनके बीच में हों तो शंखपाल कालसर्प योग का निर्माण होता है। ऐसे व्यक्ति के पास प्रॉपर्टी, धन और मान-सम्मान संबंधित परेशानियाँ बनी रहती हैं।

पद्म कालसर्प योग
जब जन्मकुंडली के पांचवें भाव में राहु, ग्याहरहवें भाव में केतु और बीच में अन्य ग्रह हों तो पद्म कालसर्प योग का निर्माण होता है। ऐसे इंसान को शादी और धन संबंधित दिक्कतें परेशान करती हैं।

महा पद्म कालसर्प योग
अगर राहु किसी के छठे घर में और केतु बारहवें घर में विराजमान हो तथा बाकी ग्रह मध्य में तो तब महा पद्म कालसर्प योग का जन्म होता है। इस प्रकार के जातक के पास विदेश यात्रा और धन संबंधित सुख नहीं प्राप्त हो पाता है।

तक्षक कालसर्प योग
जब जन्मकुंडली के सातवें भाव में राहु और केतु लग्न में हो तो इनसे तक्षक कालसर्प योग बनता है। यह योग शादी में विलंब व वैवाहिक सुख में बाधा उत्पन्न करता है।

कर्कोटक कालसर्प योग
अगर राहु आठवें घर में और केतु दुसरे घर आ जाता है और बाकी ग्रह इनके बीच में हों तो कर्कोटक कालसर्प योग कुंडली में बन जाता है। ऐसी कुंडली वाले इंसान का धन स्थिर नहीं रहता है और गलत कार्यों में धन खर्च होता है।

शंखनाद कालसर्प योग
जब जन्मकुंडली के नवम भाव में राहु और तीसरे भाव में केतु हो और सारे ग्रह इनके मध्य हों तो इनसे बनने वाले योग को शंखनाद कालसर्प योग कहते है। यह दोष भाग्य में रूकावट, पराक्रम में रूकावट और बल को कम कर देता है।

पातक कालसर्प योग
इस स्थिति के लिए राहु दसंम में हो, केतु चौथे घर में और बाकी ग्रह इन दोनों ग्रहों के बीच में तब पातक कालसर्प योग का निर्माण होता है। ऐसा राहु  काम में बाधा व सुख में भी कमी करने वाला बन जाता है।

विषाक्तर कालसर्प योग
जब जन्मकुंडली के ग्याहरहवें भाव में राहु और पांचवें भाव में केतु हो और सारे ग्रह इनके मध्य मे अटके हों तो इनसे बनने वाले योग को विषाक्तर कालसर्प योग कहते है। इस प्रकार की कुंडली में शादी, विद्या और वैवाहिक जीवन में परेशानियां बन जाती हैं।

शेषनाग कालसर्प योग
अगर राहु बारहवें घर में, केतु छठे में और बाकी ग्रह इनके बीच में हो तो शेषनाग कालसर्प योग का निर्माण होता है। ऐसा राहु  स्वास्थ्य संबंधित दिक्कतें, और कोर्ट कचहरी जैसी समस्याएं उत्पन्न करता है।
इन सारे दोष और योगों में से किसी भी दोष/योग का  शांति करेंगे तो बहोत ज्यादा खर्च होगा,इसलिए मैंने इनके निवारण हेतु एक अच्छा उपाय ढूंढा है,वह है तंत्र और तांत्रिक जड़ी बूटियों के माध्यम से बना हुआ कवच,जो इन दोष/योग से मुक्ति दे सकता है,इस कवच का निर्माण कुंडली के अध्ययन के बाद किया जाएगा और किसी शुभ मुहूर्त में कवच को बनाया जाएगा । इससे आपको कुछ ही दिनों में अच्छे परिणाम देखने मिलेंगे,इस कवच के निर्माण हेतु 1250/-रुपये धनराशि का खर्च आपको उठाना है ।कवच प्राप्त करने हेतु +918421522368 पर whatsapp से संपर्क करे ।


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30 Jun 2019

दोष निवारण और रक्षा कवच.


कर्म और भाग्य कभी-कभी इसलिए साथ नहीं दे पाते हैं  क्योंकि राह में किसी और का भी रोड़ा आ जाता है। अधिक परिश्रम करने के बावजूद किसी भी प्रकार का कोई शुभ परिणाम या मनचाहा परिणाम नहीं निकल पाता है। ऐसे में 4 में से किसी एक तरह की बाधा हो सकती है ।

"1. ग्रह बाधा, 2. गृह बाधा, 3. पितृ बाधा और 4.देव बाधा"।


ग्रह-नक्षत्र बाधा : पहली प्राथमिक बाधा को ग्रह नक्षत्रों या कुंडली की बाधा माना जाता है। किसी को राहु परेशान करता है तो कोई शनि से पीड़ित है, जबकि असल में कुंडली बनती है पूर्व जन्म के कर्मों अनुसार। फिर उसका संचालन होता है इस जन्म के कर्मों अनुसार। कर्म के सिद्धांत को समझना बहुत ही कठिन होता है। कोई ग्रह या नक्षत्र किसी व्यक्ति विशेष पर उतना प्रभाव नहीं डालता जितना कि वह स्थान विशेष पर डालता है। हालांकि व्यक्ति 27 में से जिस नक्षत्र में जन्म लेता है, उसकी वैसी प्रकृति होती है। कोई व्यक्ति क्यों किसी विशेष और कोई क्यों किसी निम्नतम नक्षत्र में जन्म लेता है? इसका कारण है व्यक्ति के पूर्व जन्मों की गति इसीलिए नक्षत्रों का समाधान जरूरी है।


वास्तु दोष : घर के स्थान और दिशा का जीवन पर सबसे ज्यादा असर होता है। यदि ग्रह-नक्षत्र सही न भी हों तो भी यदि घर का वास्तु सही है तो सब कुछ सही होने लगेगा। अक्सर यह देखने में आया है कि उत्तर, ईशान और पश्चिम एवं वायव्य दिशा का घर ही उचित और शुभ फल देने वाला होता है। घर के अंदर शौचायल, स्नानघर और किचन को उचित दिशा में ही बनवाएं।


पितृ बाधा : यदि आपके ग्रह-नक्षत्र भी सही हैं, घर का वास्तु भी सही है तब भी किसी प्रकार का कोई आकस्मिक दुख या धन का अभाव बना रहता है, तो फिर पितृ बाधा पर विचार करना चाहिए। ज्योतिष शास्त्र से भी पितृदोष का पता लगाया जाता है और उसके निवारण हेतु शान्तिकर्म भी किया जाता है ।


देव बाधा : देव बाधा से बचना मुश्किल है। अधिकतर लोगों पर देव बाधा नहीं होती । देव बाधा उन पर होती है, जो नास्तिक है, सदा झूठ बोलते रहते हैं। किसी भी प्रकार का व्यसन करते हैं और देवी-देवता, धर्म या किसी साधु का मजाक उड़ाते या उनके प्रति असम्मान व्यक्त करते रहते हैं। देवी या देवता आपके हर गुप्त कार्य या बातों को सुनने और देखने की क्षमता रखते हैं। छली, कपटी, कामी, दंभी और हिंसक व्यक्ति के संबंध में देवता अधिक जानकारी रखते हैं। वे जानते हैं कि आप किस तरह के व्यक्ति हैं। आप मनुष्य के भेष में असुर हैं या मानव, देव हैं या दानव। इसलिए इस दोष को भी आप निवारण करने हेतु हमेशा तत्पर रहे ।


व्यक्ति मेहनत तो बहोत कर लेता है परंतु जब असफलता के कारण से उसे गुजरना पडता है तो वह जीवन मे मायूस हो जाता है,हार जाता है और फिर से उसको मेहनत करने की इच्छा नही होती है । तंत्र शास्त्र में कई प्रकार की जड़ी बूटियां है जिनके माध्यम से चारो प्रकार के दोषों से बचा जा सकता है परंतु आवश्यकता है सकारात्मक भूमिका की,आप सकारात्मकता के साथ इन चारों दोषों के निवारण हेतु तांत्रिक जडी बूटियों के साथ रक्षा कवच धारण करेंगे तो अवश्य ही आपको जीवन मे सफलता मिलेगी । ये चारों दोष भलेही अपने अपने स्थान पर बड़े है परंतु इस धरा पर ही इन दोषों का समाधान है,बिना कुंडली देखे हमे इन चारों में से कौन-कौनसा दोष है ये पता करना कठिन है । इसलिए ज्योतिष शास्त्र का सहारा लेकर कुंडली के अध्ययन मात्र से हम दोष की सही पहचान करके अगर सही प्रकार से दोष निवारण हेतु तांत्रिक जड़ी बूटियों को रक्षा कवच बनाकर धारण करेंगे तो अवश्य ही जीवन मे सभी क्षेत्रों में उन्नति ही उन्नति संभव है ।


आनेवाले समय मे बहोत सारे शुभ मुहूर्त है,जैसे अभी चंद्रग्रहण, गुरुपूर्णिमा, श्रावण माह......इत्यादि, तो ऐसे मुहूर्तों में जड़ी बूटियों से निर्मित दोष निवारण रक्षा कवच शक्तिशाली बनाये जा सकते है । मैने जीवन मे इस प्रकार का कार्य पहिले भी संपन्न किया था और इसमे मुझे बहोत से लोगो की सेवा करने का मौका मिला, आज वह सभी लोग कहीं ना कही अपने जीवन मे अपने अपने क्षेत्र में उन्नति के ओर आगे बढ़ चुके है । ऐसा तांत्रिक जड़ी बूटियों के माध्यम से बनाया जानेवाला रक्षा कवच कुंडली के अध्ययन से बनाया जायेगा, जिसका न्योच्छावर राशि 1450/-रुपये है । जो व्यक्ति इन्हें धारण करने के इच्छुक है उन्हें धनराशि भेजने हेतु संपर्क करना है,जन्म तारीख, जन्म समय और जन्म स्थान whatsapp पर भेजना है,कुंडली अध्ययन के बाद उचित मूहर्त में उनके लिए कवच बनाकर  उनके रहिवासी स्थान पर जल्दी भेज दिया जाएगा ताकि उन्हें अच्छे परिणाम शीघ्र प्राप्त हो ।
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29 Jun 2019

कुंडलिनी उर्जा का सत्य



कुंडलिनी के बारे में आज आध्यत्म और विज्ञान दोनों ही खोज कर रहे हैं,यह एक आकर्षण का विषय हो गया है किन्तु बिना सत्य यह एक कल्पना और अंधविश्वास का विषय ही है। आज कुंडलिनी ध्यान पर कितने शिबिर और योग और हीलिंग सेंटर चल रहे पर क्या कुंडलिनी के बारे में जो सत्य परोसा गया है वो कितना सत्य है ?

क्यूंकि बिना अभ्यास सीधा ही कुंडलिनी जागरण में प्रवेश करना तबाही का कारण हो सकता है। गुरु परम्परा या सिद्ध कौलमार्ग को समझे बिना मूर्खतावश कुंडलिनी जाग्रत करना साधक का अधोपतन करवाता है। कुंडलिनी विषय गहरा और ध्यानात्मक विषय है। यह एक दिन के शिबिर या कुछ महीनो की प्राणायाम की प्रेक्टिस से सिद्ध नहीं होता। प्राणायाम केवल मस्तिष्क और ब्रह्मरंध्र शरीर के सोये हुए कोषों को चार्ज करता है। इससे कुंडलिनी का वहन 1 प्रतिशत भी नहीं होता। यह मिथ्या धारणा फेली हुई है। इस पर न जाने कितने लोग अपना बिज़नेस बना कर बैठ गए हैं। बिना सिद्धि को प्राप्त किये साधना में कुंडलिनी पर काबू पाना सम्भव नहीं है।

अब यह कुंडलिनी है क्या ? वह समझना है और उसके आयाम कितने है ? यह 16 आयाम और 7 पथ पर चल कर अपने शिव को मिलती है। कुंडलिनी एक सॉफ्टवेर प्रोग्राम जैसा है जहाँ उसकी खुद की शक्ति नहीं है वो प्रोग्रामर के आधीन हो कर अपने प्रोग्राम को रन करती है,प्रोग्रामर अपनी सोच, अपने संकल्प के अनुसार एक ही कुंडलनी को अनेको आयामों में विभाजित करता है,जिसको सहस्त्रदल की सिद्धि कहते हैं।

किन्तु यह प्रोग्रामर के पास खुद की शक्ति नहीं है। बल्कि वो अपने प्रोग्राम को रन करने के लिए पावर हाउस चैतन्य आत्मा का करता है आत्मा को अजाग्रत अवस्था में बांध दिया जाता है,अभी आत्मा तो स्वयं मुक्त है किन्तु कर्म-बंधन या कर्म-चक्र का प्रोग्राम वो आत्मा और शरीर के बीच का माध्यम जिसे मन कहते उसमें इंस्टाल किया जाता है।

कम्पूटर में जितने प्रोग्राम कम होगे उतने कम्पूटर की स्पीड ज्यादा रहेगी पर यह प्रोग्राम की कर्म की चिप जिसे कुंडलिनी कहते है उसे सुषुप्त अवस्था में छोड़ा जाता है। इस के कारण आत्मा परमात्मा नहीं बनकर
जीवात्मा बनाया जाता है। प्रोग्रामर के द्वारा पहले से जन्म और आने वाले जन्मो का कर्म पहले से ही इंस्टाल है। कभी-कभी इन्सान सिक्स्थ सेन्स की बातें करता है मानो वो नॉनसेन्स है क्यूंकि उसको पता ही नहीं प्रेरणा देने वाला उसका ही प्रोग्राम किया हुआ मन है। वो अपने प्रोग्राम के अनुसार ही कर्म करता है
और पाप-पूण्य सिद्धियो के चक्र को सत्य मान लेता है। यही मायाजाल है और उसका सेंसर है मन।
मन की तीन अवस्थाएं है-
उसको बाह्य, सूक्ष्म और अंतर मन कहते हैं। बाह्य वाला व्यक्ति जड और तामसिक होता है। सूक्ष्म वाला भोगी और राजसिक होता है। अंतर मन वाला सात्विक और वैरागी होता है। यह तीनो मायाजाल में घूमते है। किसी प्रोग्रामर के संकल्पों को पूरा करता है। सत्व वाला सत्व बढ़ा कर वापस दूसरे जन्म में रजस में फसता है क्यूंकि उसने सत्व में भौतिक सुखों का त्याग किया किन्तु बाह्य और सूक्ष्म मन के प्रोग्राम को नहीं जिया। विधाता कर्म का चक्र ऐसे घुमाता है।

दुसरे तत्वों वाले उसके विपरीत तत्वों का चयन करेंगे। कुंडलिनी का कार्य है भोगी बनाना।
भोग चाहे सत्व हो, रज हो या तमस,अब बात आएगी प्रोग्रामर के आगे की सोच को समझने की।
उसका एक ही सिद्धांत है-
परमात्मा त्रिगुणातीत है, काला तीत है।
समय उसके हिसाब से चलता है वो समय के हिसाब से नहीं।

अपरा सिद्धि को सिर्फ शब्दब्रह्म की साधना के अंतर्गत गुरु द्वारा सत्य शिष्य को समझाया जाता है।
गुरु ही केवल मार्ग है जो प्रोग्रामर से विपरीत भाषा को जानते हैं। इस हेतु बिना सिद्ध गुरु-निर्देशन से साधना मुक्ति में बाधा बनती है। एक बार गुरुदेव से इस विषय पर बातचीत हुई। उन्होंने कहा था मूर्ख होते है जो कुंडलिनी के पीछे पडते हैं। कुंडलिनी के वश में नहीं होना है कुंडलिनी को अपने वश में करना है। चैतन्य को साधा नहीं जाता, चैतन्यमय हुआ जाता है। जब तक यह अवस्था नहीं है तब तक जीव अपनी आत्मा को कुंडलिनी के पाश में पाता है। कुंडलिनी जागरण में अनेकों सिद्धियों को बताया गया है किन्तु वो सिद्धि साधक को मोक्ष में भटका सकती है।

इसमें दो प्रकार की सिद्धि कार्य में रहती है-
एक परा सिद्धि और एक अपरा सिद्धि। परा सिद्धि के अंतर्गत देवता, यक्ष ,किन्नर, गंधर्व, भूत-प्रेत, डाकिनी-शाकिनी-लाकिनी-हाकिनी-काकिनी--इन तत्वों से जुडी हुई सिद्धि मिलती है। इसमें जीव के प्रमुख तत्वों के अनुसार यह सिद्धियां जाग्रत होती हैं।
साधक कौनसे तत्वों में अपनी साधना करता है उस हिसाब की सिद्धि होती है। 'पराशक्ति पिंडे सौ ब्रह्मांडे' के अनुसार ब्रह्मांड को एक पिंड समझो। उसके अंतर्गत जीव, देवता, मनुष्य सब आ जाते हैं। यह मूल पंचभूतो के माध्यम से 3 तत्वों से अनुसन्धान करता है।

यह तीन तत्व हैं- सत्व, रज और तम।
इसमें से कौन-से तत्व का जीव है,उस प्रकार की सिद्धि जाग्रत होती है।
ऐसीे परासिद्धि से वो एक काल- चक्र के सीमित ज्ञान काउद्बोधन कर सकता है। यह जाग्रति ने कितने सिद्ध आत्माओं को फंसा दिया है।
कौन बोल रहा है कौन-सी भाषा आ रही है? उस हिसाब की सिद्धि का पता चलता है।
इसमें मध्यमा, वैखरी, परा और पश्यन्ति की प्राप्ति होती है किन्तु वो सार या बोध की अवस्था की प्राप्ति नहीं कर पाता। ललिता सहस्त्र नाम् में भगवती और कुंडलिनी के नामो का विवरण आता है। उसमे एक मन्त्र आता है जिसमें पश्यन्ति पर देवता यानि देवताओ की वाणी समझना जिसे श्रुति कहते हैं। यह आकाशिक रिकॉर्ड का ज्ञान मिल जाता है किन्तु आकाश और अन्तरिक्ष वो ब्रह्मांड यानि पिंड का ही सत्य है। साधक अपने आप को यहाँ मोक्ष प्राप्त किया हुआ समझता है पर यह मोक्ष का छल है।
सात्विक वृतियों की सर्वोच्च सिद्धि मिलने पर इन्सान मुक्ति को समझता है, प्राप्त नहीं करता। यहां वह कुछ सिद्धियो को प्राप्त करके अपने आप को पद दे देता है। पर इससे आगे यानि हिरण्यगर्भ संकल्प के अंतर्गत यह एक छलावे के लिए रचना की गयी है कि
साधक को मुक्ति का भ्रम हो। जिसमे बहुत सारे सिद्ध फंस चुके। हमने कितने देवताओं के पीछे नाग का चित्र देखा है। उसका निर्देश यही है की वो कुंडलिनी के अंतर्गत मोक्ष को मिले है मूल मुक्ति इससे काफी दूर है। कृष्ण ने कालियानाग का दमन किया उसके ऊपर चढ़कर। हम इश्वर या देवता की लीला में फंस गए किन्तु यह नहीं सोचा कि बोध क्या है ?

हमारी आत्मा जो इश्वर है, जो काल रूपी कुंडलिनी से उपर है, मुक्त है। हमें यहा साधना कुंडलिनी जागरण की नहीं करनी बल्कि उससे मुक्त होकर उसका उद्धार करने की है। अब अपरा सिद्धि को देखो। यह भौतिक और वासनात्मक नहीं अपितु पराभौतिक और आध्यात्मिक है। परा-सिद्धि से आत्मा को प्रलय तक ही मुक्ति मिलती है और अपरा-सिद्धि सर्वदा मुक्ति के लिए है । प्रलय और महाप्रलय में परासिद्धि वाला आत्मा वापस अपने जीव और तत्व के भाव में आ जाता है। जब की अपरासिद्धि कभी नष्ट नहीं होती। वो जब भी जन्म लेती है वो वैरागयुक्त और काल-चक्र से मुक्त रहती है। उसका प्रयोजन मायाजाल में भेद करके मोक्ष के ज्ञान को प्रगट करना होता है। अपरा का महत्व इतना ही है कि परा इसके सामने तुच्छ है।

यही अपराशक्ति परब्रह्म की शक्ति होती है। गुरुतत्व-बोध,तत्वों का सारतत्व युक्त होती है। कौलमार्ग परा और अपरा दोनों ही सीद्धि का मार्ग है। उसके प्रणेता नादी गुरु हैं जो स्वयम प्रगट नाद रूप हो। नाद उनके हिसाब से चलता है। हमने कितने ब्रह्म पुरुषों के बारे में सुना है। वो कहते हैं कि अनेको ब्रह्मांड है, अनेको ब्रह्म हैं और ब्रह्म ही काल से मुक्त होता है। क्यूंकि अपरासिद्धि से कुंडलिनी को छोड़ आत्मा अपने मूल शब्दस्वरुप में आता है। मानो कोई कम्पनी का wi-fi नेटवर्क जहाँ जाओगे हमें ही पाओगे यह इश्वरीय शक्ति है। कण-कण में व्याप्त है।

आत्मा की मूल शक्ति शब्दब्रह्म है नकि कुंडलिनी।
कुंडलिनी काल का पाश है।वो बार- बार अपने ज़हर से इन्द्रिय रूपी गोकुल में तबाही करता है। नाद अनुसन्धान से ही अपरा प्रकृति उद्भव होती है।
इंद्र भी दास हो जाता है। देवता तुम्हारी सेवा में आ जाते हैं। ब्रह्मा तुम्हे समझने नीचे आते हैं। यह बहुत उच्चतम और भगवदीय अवस्था है। इसको मात्र गुरुसेवा और गुरुभक्ति से ही प्राप्त किया जाता है।


आदेश........

24 Jun 2019

ग्रहण और गुप्त नवरात्रि मंत्र साधना.



अब समय इतना बदल गया के एक आर्टिकल लिखना है तो बहोत ज्यादा सोच समझकर लिखना पड़ता है,इंसान जब पैदा होता है तो उसका वजन ढाई किलो के आसपास होता है और मृत्यु के बाद भी जब हड्डियों को सिमटकर जल में बहाया जाता है तब भी उसका वजन ढाई किलो के आसपास ही होता है । जब पूरी जिंदगी घिस गई कुछ ना कुछ पाने में तो अब आप ही सोचो "क्या पाया और क्या खोया",अब तो थोड़ा समय निकालकर भगवान के चिंतन में भी लगा दो,शायद तुम्हारे जीवन मे कुछ अच्छा हो ।

3 जुलाई को गुप्त नवरात्रि प्रारंभ होने वाली है और ठीक उसके एक दिन पूर्व 2 तारीख को रात्रि में पूर्ण सूर्य ग्रहण है,ग्रहण एक ब्रम्हाण्डिय घटना है इसलिए वह किसी भी देश मे हो उसका असर सम्पूर्ण पृथ्वी लोक पर होता है । आवश्यक मंत्र साधना से जीवन के कमियों को पूर्ण करने हेतु इस गुप्त नवरात्रि के पावन अवसर पर माँ भगवती जगदंबा की आराधना की जाती है । ऐसा मौका कभी कभी मिलता है के नवरात्र के एक दिन पूर्व ग्रहण काल मे मंत्र सिद्धि करे और दूसरे दिन से 9 दिनों तक मंत्र जाप करके स्वयं को जीवन मे उन्नति के ओर आगे बढ़ाए ।

साधना सामग्री-100 ग्राम कुंकुम,एक नारियल, मौली (कलावा or पंच रंगी धागा), कपूर,धूपबत्ती,मातारानी का चित्र,तील का तेल दीपक जलाने हेतु,आसन-लाल,वस्त्र-लाल ।

साधना विधि-सर्वप्रथम मातारानी का चित्र लाल वस्त्र पर किसी बाजोट पर स्थापित करे,ठीक चित्र के सामने कुंकुम की ढेरी बनाये,नारियल को छील कर सिर्फ उसका गोला रखे,गोले पर नारियल के तीन आंखे होती है जिसका हमे त्रिशक्ति के रूप में पूजन सम्पन्न करना है,पूजन करते समय हर आंख पर सिंदूर चढ़ाए,तिल के तेल का दीपक प्रज्वलित करे, धूपबत्ती जलाए और मौली को नारियल के गोले को बांध देना है । यह हो गयी पूजन की विधि अब आगे आपको किसी भी प्रकार के माला से नवरात्र में 11 माला जाप रात्रि के किसी भी समय करना है,मुख पच्छिम दिशा के तरफ करके जाप करे,मंत्र सिद्धि हेतु ग्रहण काल मे 21 माला मंत्र जाप करे ।


मंत्र-
( मंत्र Whatsapp पर दिया जाएगा no. है +918421522368 )


मंत्र की गोपनीयता बनाये रखना मेरे लिए सर्वोपरि कार्य है इसलिए मंत्र व्हाट्सएप पर आप प्राप्त कर सकते हो,जो निःशुल्क है ।

दसवें दिन साधना सामग्री को नदी या तालाब में विसर्जित करना है और मातारानी का चित्र,माला को आप हमेशा संभाल कर रखिए ।


साधना के लाभ-
1-मनोकामना पूर्ति
2-रोग निवारण
3-वशीकरण
4-विवाह होता है
5-नॉकरी प्राप्त होती है
6-भगवती की कृपा
7-धनलाभ.
इससे भी ज्यादा लाभ इस साधना से अवश्य प्राप्त हो सकते है,इसलिए इस साधना को अवश्य ही संपन्न करे ।


आदेश ......

30 May 2019

धूमावती साबर मंत्र साधना



माँ धूमावती जयंती 10 जून 2019 को है,धुएं के रूप में विद्यमान,विधवा देवी धूमावती दस महाविद्याओं में सातवीं महाविद्या हैं। बगलामुखी की अंगविद्या हैं इसीलिए माँ बगलामुखी से साधना की आज्ञा लेनी चाहिए और प्रार्थना करना चाहिए की माँ पूरी कराये । ज्ञान के आभाव में या कौतुहल से किताब , इन्टरनेट से पढ़कर प्रयोग करने से विपत्ति में भी फसते देखे गये हैं, बगलामुखी साधना करने के पश्चात ही धूमावती साधना विशेष करने की योग्यता मिलती है । इसीलिए विशेष परिस्थिति में गुरु से प्रक्रिया जानकार ही शुरू करना चाहिए,गुरु जानते हैं की शिष्य की योग्यता क्या है, धूमावती साधना सबके बस की नही इनके काम करने का ढंग बिलकुल अलग है । बांकी महाविद्या श्री देती हैं और धूमावती श्री विहीनता अपने सूप में लेकर चली जाती है ।

जीवन से दुर्भाग्य , अज्ञान , दुःख , रोग , कलह , शत्रु विदा होते ही साधक ज्ञान, श्री और रहस्यदर्शी हो जाता है और साधना में उच्चतम शिखर पे पहुच जाता है । इन्हे अलक्ष्मी या ज्येष्ठालक्ष्मी यानि लक्ष्मी की बड़ी बहन भी कहा जाता है,ज्येष्ठ मास शुक्ल पक्ष अष्टमी को माँ धूमावती जयंती के रूप में मनाया जाता है ।

माँ धूमावती विधवा स्वरूप में पूजी जाती हैं तथा इनका वाहन कौवा है, ये श्वेत वस्त्र धारण कि हुए, खुले केश रुप में होती हैं। धूमावती महाविद्या ही ऐसी शक्ति हैं जो व्यक्ति की दीनहीन अवस्था का कारण हैं, विधवा के आचरण वाली यह महाशक्ति दुःख दारिद्रय की स्वामिनी होते हुए भी अपने भक्तों पर कृपा करती हैं ।

इनका ध्यान इस प्रकार बताया है ’- अत्यन्त लम्बी, मलिनवस्त्रा, रूक्षवर्णा, कान्तिहीन, चंचला, दुष्टा, बिखरे बालों वाली, विधवा, रूखी आखों वाली, शत्रु के लिये उद्वेग कारिणी, लम्बे विरल दांतों वाली, बुभुक्षिता, पसीने से आर्द्र स्तन नीचे लटके हो, सूप युक्ता, हाथ फटकारती हुई, बडी नासिका, कुटिला , भयप्रदा,कृष्णवर्णा, कलहप्रिया, तथा बिना पहिये वाले जिसके रथ पर कौआ बैठा हो ऐसी देवी का मैं ध्यान करता हु ।

देवी का मुख्य अस्त्र है सूप जिसमे ये समस्त विश्व को समेट कर महाप्रलय कर देती हैं। दस महाविद्यायों में दारुण विद्या कह कर देवी को पूजा जाता है। शाप देने नष्ट करने व संहार करने की जितनी भी क्षमताएं है वो देवी के कारण ही है। क्रोधमय ऋषियों की मूल शक्ति धूमावती हैं जैसे दुर्वासा, अंगीरा, भृगु, परशुराम आदि। सृष्टि कलह के देवी होने के कारण इनको कलहप्रिय भी कहा जाता है , चातुर्मास ही देवी का प्रमुख समय होता है जब इनको प्रसन्न किया जाता है। देश के कई भागों में नर्क चतुर्दशी पर घर से कूड़ा करकट साफ कर उसे घर से बाहर कर अलक्ष्मी से प्रार्थना की जाती है की आप हमारे सारे दारिद्र्य लेकर विदा होइए।

ज्योतिष शास्त्रानुसार मां धूमावती का संबंध केतु ग्रह तथा इनका नक्षत्र ज्येष्ठा है । इस कारण इन्हें ज्येष्ठा भी कहा जाता है,ज्योतिष शस्त्र अनुसार अगर किसी व्यक्ति की कुण्डली में केतु ग्रह श्रेष्ठ जगह पर कार्यरत हो अथवा केतु ग्रह से सहयता मिल रही ही तो व्यक्ति के जीवन में दुख दारिद्रय और दुर्भाग्य से छुटकारा मिलता है। केतु ग्रह की प्रबलता से व्यक्ति सभी प्रकार के कर्जों से मुक्ति पाता है और उसके जीवन में धन, सुख और ऐश्वर्य की वृद्धि होती है ।
देवी की कृपा से साधक धर्म अर्थ काम और मोक्ष प्राप्त कर लेता है। ऐसा मानना है की कुण्डलिनी चक्र के मूल में स्थित कूर्म में इनकी शक्ति विद्यमान होती है। देवी साधक के पास बड़े से बड़ी बाधाओं से लड़ने और उनको जीत लेने की क्षमता आ जाती है।
महाविद्या धूमावती के मन्त्रों से बड़े से बड़े दुखों का नाश होता है ।


देवी माँ का महामंत्र है-"धूं धूं धूमावती ठ: ठ:"
इस मंत्र से काम्य प्रयोग भी संपन्न किये जाते हैं व देवी को पुष्प अत्यंत प्रिय हैं इसलिए केवल पुष्पों के होम से ही देवी कृपा कर देती है,आप भी मनोकामना के लिए यज्ञ कर सकते हैं,जैसे-

1. राई में सेंधा नमक मिला कर होम करने से बड़े से बड़ा शत्रु भी समूल रूप से नष्ट हो जाता है ।
2. नीम की पत्तियों सहित घी का होम करने से लम्बे समस से चला आ रहा ऋण नष्ट होता है ।
3. जटामांसी और कालीमिर्च से होम करने पर काल्सर्पादी दोष नष्ट होते हैं व क्रूर ग्रह भी नष्ट होते हैं ।
4. रक्तचंदन घिस कर शहद में मिला लेँ व जौ से मिश्रित कर होम करें तो दुर्भाग्यशाली मनुष्य का भाग्य भी चमक उठता है ।
5. गुड से होम करने पर गरीबी सदा के लिए दूर होती है ।
6. केवल काली मिर्च से होम करने पर कारागार में फसा व्यक्ति मुक्त हो जाता है ।
7. मीठी रोटी व घी से होम करने पर बड़े से बड़ा संकट व बड़े से बड़ा रोग अति शीग्र नष्ट होता है ।
वाराही विद्या में इन्हे धूम्रवाराही कहा गया है जो शत्रुओं के मारन और उच्चाटन में प्रयोग की जाती है।



साबर मन्त्र :-

।। ॐ पाताल निरंजन निराकार,आकाश मण्डल धुन्धुकार,आकाश दिशा से कौन आई,कौन रथ कौन असवार,आकाश दिशा से धूमावन्ती आई ,काक ध्वजा का रथ असवार थरै धरत्री थरै आकाश,विधवा रुप लम्बे हाथ,लम्बी नाक कुटिल नेत्र दुष्टा स्वभाव,डमरु बाजे भद्रकाली,क्लेश कलह कालरात्रि ,डंका डंकनी काल किट किटा हास्य करी ,
जीव रक्षन्ते जीव भक्षन्तेजाया जीया आकाश तेरा होये ,धूमावन्तीपुरी में वास,न होती देवी न देव ,
तहा न होती पूजा न पाती तहा न होती जात न जाती ,तब आये श्रीशम्भुजती गुरु गोरखनाथ ,आप भयी अतीत ॐ धूं धूं धूमावती फट स्वाहा ।।



विशेष पूजा सामग्रियां-

पूजा में जिन सामग्रियों के प्रयोग से देवी की विशेष कृपा मिलाती है । सफेद रंग के फूल, आक के फूल, सफेद वस्त्र व पुष्पमालाएं,केसर,अक्षत,घी,सफेद तिल,धतूरा,आक,जौ,सुपारी व नारियल,मेवा व सूखे फल प्रसाद रूप में अर्पित करें । सूप की आकृति पूजा स्थान पर रखें,दूर्वा, गंगाजल, शहद, कपूर, चन्दन चढ़ाएं, संभव हो तो मिटटी के पात्रों का ही पूजन में प्रयोग करें।

देवी की पूजा में सावधानियां व निषेध-
माँ धूमावती की पूजा करते समय ऐसा ध्यान करना चाहिए कि माँ प्रसन्न होकर हमारे सभी रोग , दोष , क्लेश , तंत्र , भूत प्रेत आदि बाधाओं को अपने शूप में समेटकर हमारे घर से विदा हो रही हैं और हमें धन , लक्ष्मी सुख शांति का आशीर्वाद दे रही हैं।

जब दुर्भाग्य,दुःख एवं दरिद्रता लम्बे समय से पीछा कर रही हो तो माँ धूमावती की दीक्षा लेकर उनकी उपासना करनी चाहिए । जब शत्रु मृत्यु तुल्य कष्ट दे रहे हों तो माँ बगलामुखी से साथ धूमावती की उपासना करनी चाहिए ।

जो साधक धूमावती साबर मंत्र जाप करना चाहते है और साधना में विशेष सफलता प्राप्त करने की इच्छा रखते है,उनको "साबर मंत्र सिद्धि यंत्र" प्रदान किया जायेगा जिसकी न्योच्छावर राशि 1150/-रुपये रखी है,यह यंत्र साबरशिंगां को प्राणप्रतिष्ठा करके बनाया जाता है । यंत्र को लाल रंग के धागे में धारण कर सकते है और यंत्र धारण के नियम भी बताए जाएंगे ।

सांबरशिंगां और साबरशिंगां में फर्क है,यहा हम यंत्र हेतु साबरशिंगां के जड़ का इस्तेमाल करने वाले है । यंत्र प्राप्त करने हेतु +918421522368 पर फोन भी कर सकते है,बात करने का समय होगा सुबह 11 बजे से शाम 7 बजे तक और इस पर आप व्हाट्सएप के जरिये भी संपर्क कर सकते है ।

आदेश........

8 Apr 2019

तंत्र बाधा निवारण पीताम्बरा साधना



वैशाख शुक्ल अष्टमी को देवी बगलामुखी का अवतरण दिवस कहा जाता है जिस कारण इसे मां बगलामुखी जयंती के रूप में मनाया जाता है । इस वर्ष 2019 में यह जयन्ती 12 मई , को मनाई जाएगी,इस दिन व्रत एवं पूजा उपासना कि जाती है । साधक को माता बगलामुखी की निमित्त पूजा अर्चना एवं व्रत करना चाहिए, बगलामुखी जयंती के अवसर पर जगह-जगह अनुष्ठान के साथ विश्व कल्याणार्थ महायज्ञ का आयोजन किया जाता है तथा महोत्सव के दिन शत्रु नाशिनी बगलामुखी माता का विशेष पूजन किया जाता है और रातभर भगवती जागरण होता है ।

माँ बगलामुखी स्तंभन शक्ति की अधिष्ठात्री हैं अर्थात यह अपने भक्तों के भय को दूर करके शत्रुओं और उनके बुरी शक्तियों का नाश करती हैं । माँ बगलामुखी का एक नाम पीताम्बरा भी है इन्हें पीला रंग अति प्रिय है इसलिए इनके पूजन में पीले रंग की सामग्री का उपयोग सबसे ज्यादा होता है । देवी बगलामुखी का रंग स्वर्ण के समान पीला होता है अत: साधक को माता बगलामुखी की आराधना करते समय पीले वस्त्र ही धारण करना चाहिए ।

देवी बगलामुखी दसमहाविद्या में आठवीं महाविद्या हैं यह स्तम्भन की देवी हैं । संपूर्ण ब्रह्माण्ड की शक्ति का समावेश हैं माता बगलामुखी शत्रुनाश, वाकसिद्धि, वाद विवाद में विजय के लिए इनकी उपासना की जाती है । इनकी उपासना से शत्रुओं का नाश होता है तथा भक्त का जीवन हर  प्रकार की बाधा से मुक्त हो जाता है । बगला शब्द संस्कृत भाषा के वल्गा का अपभ्रंश है, जिसका अर्थ होता है दुलहन है अत: मां के अलौकिक सौंदर्य और स्तंभन शक्ति के कारण ही इन्हें यह नाम प्राप्त है ।

बगलामुखी देवी रत्नजडित सिहासन पर विराजती होती हैं रत्नमय रथ पर आरूढ़ हो शत्रुओं का नाश करती हैं,देवी के भक्त को तीनो लोकों में कोई नहीं हरा पाता, वह जीवन के हर क्षेत्र में सफलता पाता है पीले फूल और नारियल चढाने से देवी प्रसन्न होतीं हैं । देवी को पीली हल्दी के ढेर पर दीप-दान करें, देवी की मूर्ति पर पीला वस्त्र चढाने से बड़ी से बड़ी बाधा भी नष्ट होती है, बगलामुखी देवी के मन्त्रों से दुखों का नाश होता है ।

कुब्जिका तंत्र के अनुसार, बगला नाम तीन अक्षरों से निर्मित है व, ग, ला; 'व' अक्षर वारुणी, 'ग' अक्षर सिद्धिदा तथा 'ला' अक्षर पृथ्वी को सम्बोधित करता हैं। देवी का प्रादुर्भाव भगवान विष्णु से सम्बंधित हैं परिणामस्वरूप देवी सत्व गुण सम्पन्न तथा वैष्णव संप्रदाय से सम्बंधित हैं, इनकी साधन में पवित्रता-शुद्धता का विशेष महत्व हैं परन्तु कुछ अन्य परिस्थितियों में देवी तामसी गुण से सम्बंधित है, आकर्षण, मारण तथा स्तंभन कर्म तामसी प्रवृति से सम्बंधित हैं क्योंकि इस तरह के कार्य दूसरों को हानि पहुंचाने हेतु ही किए जाते हैं । सर्वप्रथम देवी की आराधना ब्रह्मा जी ने की थी, तदनंतर उन्होंने बगला साधना का उपदेश सनकादिक मुनियों को किया, कुमारों से प्रेरित हो देवर्षि नारद ने भी देवी की साधना की। देवी के दूसरे उपासक स्वयं जगत पालन कर्ता भगवान विष्णु हुए तथा तीसरे भगवान परशुराम।

बगलामुखी जयंती के पावन अवसर पर आप सभी लोग 21 माला मंत्र जाप करे ताकि आपके जीवन से तंत्र क्रिया का गलत असर समाप्त हो और आप तांत्रिक बाधा से मुक्त हो जाओ । ऐसे पावन अवसर पर बगलामुखी का तंत्र बाधा दोष निवारण मंत्र जाप करने से आपको अवश्य ही लाभ होगा और आपका जीवन अवश्य ही सुखमय होगा । इस मंत्र से तंत्र बाधा दोष समाप्त होता  है और धन-धान्य की प्राप्ति भी होती है,जीवन मे धन की आवश्यकता सभी को है इसलिए इस बार एक प्रामाणिक विधि विधान आपको दिया जा रहा है ।

साधना विधि-साधना सुबह 6 बजे या फिर रात्रि में 9 बजे के बाद करे,साधना एक दिन का है इसलिए इसे अवश्य संपन्न करे, साधना में गाय के घी का दीपक और चंदन के धूपबत्ती का इस्तेमाल करे,उत्तर दिशा के तरफ मुख करके मंत्र जाप करे,आसन और वस्त्र पिले रंग के हो । मंत्र जाप हेतु पिले हल्दी के माला का प्रयोग आवश्यक है परंतु माला ना हो तो 60-70 मिनिट तक मंत्र जाप करे । माता के चित्र और यंत्र की आवश्यकता नही है,अगर आपके पास हो तो अवश्य उसे सामने रखे,प्रसाद में पीले रंग के मिठाई को रखना चाहिए और प्रसाद वितरण स्वयं के परिवार में ही करे ।

मंत्र-
।। ॐ ह्लीं श्रीं पीताम्बरे तंत्र बाधा नाशय नाशय नमः ।।
Om hleem shreem pitambare tantra baadha naashay naashay namah



आदेश.......











12 Feb 2019

शिव-मोहिनी साधना ( महाशिवरात्रि विशेष )



तंत्र विद्या के प्राचीन ग्रंथों में वशीकरण और मोहिनी विद्या का विस्तार से वर्णन मिलता है। मोहिनी से प्रभावित व्यक्ति की दशा किसी सम्मोहित व्यक्ति की तरह होती है। यहां तक कि वह चेतन अवस्था में भी सम्मोहित रहता है। तंत्र में मोहिनी विद्या का प्रयोग त्राटक, मंत्र और यंत्र के द्वारा किया जाता है।खास बात यह भी है कि सम्मोहन जीवन के समस्त क्षेत्रों में अपना प्रभाव और महत्व रखता है। आधुनिक युग में भले ही इसे पूरी मान्यता न मिली हो पर इसका इतिहास बहुत पुराना है। इसके सूत्र वेदों में मिलते हैं। इन सबसे अलग मोहिनी विद्या के सबसे कुशल और शक्तिशाली प्रयोगकर्ता भगवान कृष्ण थे। वे मोहिनी और वशीकरण विद्या के पूर्ण आचार्य थे।

ऋग्वेद में लिखा है-

हस्ताभ्यां दशाखाभ्यां जिह्वा वाचं पुरो गवो।
अनामयिलुभ्यां त्वां ताम्यां स्पृश्यामसि।।

अर्थात: मेरी जिह्वा वाणी को प्रथम प्रेरणा देने वाली है। मैं तुमको दस अंगुली रूपी शाखा वाले अपने दोनों हाथों से स्पर्श करता हूं इससे तुम्हारा रोग दूर होगा और आरोग्य बढ़ेगा।

यह मोहिनी प्रयोग का सबसे सुंदर उदाहरण है। दुर्गा सप्तशती में इस विद्या का उल्लेख कुंजिका स्तोत्र में मिलता है।

मारणं, मोहनं, वश्यं, स्तंभोच्चाटनादिकम्।
पाठ मात्र संसिद्धयेत कुंजिका स्तोत्रम्।।

वानर राज बालि को वरदान प्राप्त था कि उसका विरोधी युद्ध क्षेत्र में उसकी सामना करते ही आधा बल खो देगा। बालि की वाणी और नेत्रों में इतनी प्रबल मोहिनी थी कि जैसे ही वह क्रोध से शत्रु को देखता था, उसकी आधी शक्ति समाप्त हो जाती थी।
आज के समय मे ऐसी प्रबल सिद्धि तो संभव नही है परंतु आनेवाले महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर आप शिव मोहिनी साधना संपन्न कर सकते है । शिव मोहिनी साधना एक दिवसीय है और इस साधना में आपको सिर्फ रुद्राक्ष माला की जरूरत है । आपको अगर साधना के माध्यम से सफलता मिल जाये तो समझ लीजिए आपका जीवन धन्य हो जाएगा ।


साधना विधि-महाशिवरात्रि के दिन सूर्योदय के बाद दूसरे दिन के सूर्योदय से पूर्व यह साधना किसी भी समय पर कर सकते है । आसन वस्त्र दिशा का कोई बंधन नही है इसलिए आपको जैसा उचित हो आप आसन वस्त्र का इस्तेमाल करे और हो सके तो उत्तर दिशा में मुख करके मंत्र जाप करे । मंत्र जाप शिवलिंग के सामने करना आवश्यक है,मंत्र का कम से कम 21 माला जाप करे,हो सके तो मंत्र जाप से पूर्व सामान्य पद्धति से अवश्य ही शिवपूजन करे ताकि आपको पूर्ण सफलता मीले ।



मंत्र 


।। ॐ शं शिवाय मोहिनी सिद्धये ह्रीं ॐ नमः ।।


Om sham shivaay mohini siddhaye hreem om namah



छोटासा मंत्र है परंतु अचूक कार्य करता है,इसका प्रभाव जीवन मे आप आसानी से देख सकते हो जैसे लोगो का आपके प्रति मान-सम्मान बढ़ना,आपको प्रेम के क्षेत्र में सफलता मिलने,व्यापार में आपको अच्छे ग्राहकों से संबंध जोड़ना,घर मे होनेवाले झगड़े कम होना.......ऐसे बहोत से अनुभव हो सकते है । विशेष कार्य मे आपको जिसे वश करना है उसके लिए संकल्प लेकर जाप करने से भी सफलता मिलती है । संकल्प क्या लेना है और संकल्प को पूर्ण करने के लिए "कितने दिनों में कितना जाप करना है?",ये मैं आपको व्हाट्सएप पर बता दूगा ।
whatsapp number +918421522368

शिव जी के प्रति आस्था रखिये,अवश्य ही आपकी कामनाएं पूर्ण होगी ।


आदेश......

24 Dec 2018

पुर्णत्वं स्वात्म सिद्धि साधना

बहोत सारे लोग कहेते है के उनके जीवन मे ढेर सारी समस्याएं है और उन समस्याओं का उन्हें खोजने पर भी कोई उपाय नही मिल रहा है । सबसे पहिली बात उपाय मिल भी जाये तो क्या कोई भी परेशान व्यक्ति उस उपाय पर विश्वास करेगा? जब तक आप लोग विश्वास नही करोगे तब तक उपाय से आपकी समस्याएं दूर नही हो सकती है । यहां आज के समय मे सभी लोग बिना मेहनत के फल चाहते है और दिन-रात गूगल फेसबुक व्हाट्सएप यु-ट्यूब पर तांत्रिकों को ढूंढते रहेते है,इस उम्मीद से के कोई उनका काम करवा दे ।  लाचार के तरहा जीवन जीने से कुछ भी संभव नही है,स्वयं की पहेचान ही सर्वप्रथम होती है,आप लोग अपने जीवन को 100% सवार सकते हो सिर्फ आपको प्रमाणिकता से तंत्र-मंत्र के क्षेत्र में मेहनत करना है ।

प्रत्येक मंत्र शक्तिशाली होता है,मंत्रो को कभी भी छोटा ना समझे,तंत्र की शक्ति कोई साधारण शक्ति नही होती है,जिसने इन शक्तियों को समझ लिया वह जीवन मे सवर जाता है । कोई भी मंत्र जब भी प्राप्त करो तो उस मंत्र के प्रति प्रामाणिक रहो और उस मंत्र पर इतना विश्वास रखो के वह एक मंत्र आपको सिद्ध हो सके । चाहे आप कोई भी साधना करो परंतु साधना काल मे मंत्र का स्मरण ज्यादा-से-ज्यादा करो, जैसे आपको कोई मंत्र साधना 21 माला जाप 21 दिनों तक करना हो तो आप निच्छित समय पर जाप करते रहो और साथ मे उसी मंत्र का जाप दिन-रात जब भी समय मिले तो मन ही मन मंत्र जाप या स्मरण करते रहे । ऐसा करने से ही मंत्र सिद्धि संभव है अन्यथा 21 दिन के साधना में आपको 210 दिन भी मंत्र सिद्धि हेतु कम पड़ जायेंगे । मैं आपको मंत्र दे सकता हु परंतु उसे सिध्द आपको ही करना है,आप हृदय से विश्वास करते है तो वह मंत्र आपके लिए संजीवनी है अन्यथा वह आपके लिए सिर्फ कुछ शब्द है ।

किसी भी मंत्र को आप पूजनीय समझे तो वही मंत्र आपको पूजनीय बना देगा,यही सिद्धांत रखे । आपको जीवन मे परेशानी से मुक्त होना है तो 4-5 दिन स्मशान में जाकर बैठकर देखिए,जलते हुए मुर्दो को देखकर आप समझ जाओगे,जब समय समाप्त होता है तो सब कुछ समाप्त हो जाता है,इसलिए आज आपके पास समय है तो उसे व्यर्थ की परेशानियों से दूर कराने से अच्छा तो आनेवाली परेशानियों को मुक्त कराने हेतु इस्तेमाल करे । जो आपका है वह आपको ही मिलेगा इसके लिए भी प्रयास करना जीवन मे एक अनुभव उत्पन्न करेगा । अब नववर्ष आरहा है,उसका स्वागत करे और संकल्प लीजिए के " मै अमुक पिता का पुत्र अमुक नाम का व्यक्ति आजसे जीवन मे अपनी समस्याओं पर पैर रखकर खड़ा होना चाहता हु और इसमे मेरे गुरु/इष्ट/अमुक देवी/देवता मेरा संकल्प पूर्ण करने हेतु आशीर्वाद प्रदान करे" , यह संकल्प और शक्तियो से सम्बंधित मंत्र का जाप आपको जीवन मे सब कुछ प्रदान कर सकता है ।

आपके जीवन की समस्याओं को आप स्वयं दूर करे,किसी के सामने आपको जाकर सहायता मांगने की कोई जरूरत ही नही है । यह तो तब संभव होगा जब आप इस भावना को अपने अंदर जाग्रत करेंगे,देवता सिर्फ साधु सन्यासी तांत्रिक मंत्रिको के लिए नही है,वह तो सभी पर कृपा करते है । आप सभी दैवीय शक्ति के अंश हो,अगर ये बात आप समझ जाओ तो आपको इस जीवन मे कोई भी परेशानी छू भी नही सकती है । आपके जेब मे पैसा हो ना हो परंतु शरीर मे प्राणवायु होना जरूरी है अगर प्राणवायु ही ना हो तो करोड़ो रूपये भी आपको जीवनदान नही दे सकता है इसलिए दैवीय शक्ति को अनुभव करने हेतु अच्छे मार्ग पर चले और बकवास तांत्रिक मंत्रिको के चक्कर काटने से अच्छा है के स्वयं मंत्र साधना संपन्न करे, आशा करता हु के आपको मेरे शब्दों को समझने में कोई तकलीफ नहीं हुई होगी ।

आज एक अनुभवी मंत्र साधना दे रहा हु जिससे आपके जीवन का नवीनीकरण होना संभव है,जो भी जीवन मे परेशानी हो वह समाप्त हो सकती है ।

साधना विधि-स्फटिक माला से नित्य मंत्र का 11 माला जाप करे,मुख उत्तर दिशा के तरफ होना चाहिए, आसन और वस्त्र पिले रंग के हो,मंत्र जाप सुबह 5-6 बजे के समय मे या रात ने 9-10 बजे तक के समय मे करे,साधना किसी भी सोमवार से शुरू करे,यह साधना 21 दिनों तक करना अनिवार्य है ।

।। ॐ ह्रीं त्रीं पूर्णत्वं स्वात्म सिद्धये ॐ नमः ।।
Om hreem treem purnatwam swaatm siddhaye om namah

साधना समाप्ति के 21 वे दिन किसी गरीब को कुछ आवश्यक वस्तु अवश्य दान करे । यह साधना सूर्यग्रहण के समय मे 21 माला करने से उसी दिन पूर्ण हो जाएगी । साधनात्मक अनुभव किसीको ना बताये,इससे आपको जीवन मे चमत्कारीक लाभ प्राप्त हो सकते है ।

सूर्यग्रहण समय

इस वर्ष 2019 का पहला सूर्य ग्रहण 6 जनवरी को है, इस दिन रविवार पड़ रहा है । यह एक आंशिक सूर्य ग्रहण है,यह सूर्य ग्रहण भारतीय समयानुसार सुबह 5:04 बजे से 9:18 बजे तक रहेगा अर्थात इसकी अवधि क़रीब 4 घंटे 14 मिनट है । साथ ही यह भी बता दें कि देखने पर यह ग्रहण भारत में नहीं दिखाई देगा परंतु मध्य-पूर्वी चीन, जापान, उत्तरी-दक्षिणी कोरिया आदि क्षेत्रों में यह ग्रहण नजर आएगा ।

ज्योतिषीय के अनुसार सूर्य ग्रहण धनु राशि और पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र में लग रहा है । इस कारण धनु राशि और पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र के जातकों के जीवन पर इसका प्रभाव होगा । इसलिए धनु राशि और पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र के जातकों को सावधानियां बरतनी होगी ।

आदेश.........

18 Nov 2018

गुरु गोरखनाथ कृपा प्राप्ति साधना



एक पंडित रोज रानी के पास कथा करता था। कथा के अंत में सबको कहता कि ‘राम कहे तो बंधन टूटे’। तभी पिंजरे में बंद तोता बोलता, ‘यूं मत कहो रे पंडित झूठे’। पंडित को क्रोध आता कि ये सब क्या सोचेंगे, रानी क्या सोचेगी। पंडित अपने गुरु के पास गया, गुरु को सब हाल बताया। गुरु तोते के पास गया और पूछा तुम ऐसा क्यों कहते हो?

तोते ने कहा- ‘मैं पहले खुले आकाश में उड़ता था। एक बार मैं एक आश्रम में जहां सब साधू-संत राम-राम-राम बोल रहे थे, वहां बैठा तो मैंने भी राम-राम बोलना शुरू कर दिया। एक दिन मैं उसी आश्रम में राम-राम बोल रहा था, तभी एक संत ने मुझे पकड़ कर पिंजरे में बंद कर लिया, फिर मुझे एक-दो श्लोक सिखाये। आश्रम में एक सेठ ने मुझे संत को कुछ पैसे देकर खरीद लिया। अब सेठ ने मुझे चांदी के पिंजरे में रखा, मेरा बंधन बढ़ता गया। निकलने की कोई संभावना न रही। एक दिन उस सेठ ने राजा से अपना काम निकलवाने के लिए मुझे राजा को गिफ्ट कर दिया, राजा ने खुशी-खुशी मुझे ले लिया, क्योंकि मैं राम-राम बोलता था। रानी धार्मिक प्रवृत्ति की थी तो राजा ने रानी को दे दिया। अब मैं कैसे कहूं कि ‘राम-राम कहे तो बंधन छूटे’।

तोते ने गुरु से कहा आप ही कोई युक्ति बताएं, जिससे मेरा बंधन छूट जाए। गुरु बोले- आज तुम चुपचाप सो जाओ, हिलना भी नहीं। रानी समझेगी मर गया और छोड़ देगी। ऐसा ही हुआ। दूसरे दिन कथा के बाद जब तोता नहीं बोला, तब संत ने आराम की सांस ली। रानी ने सोचा तोता तो गुमसुम पढ़ा है, शायद मर गया। रानी ने पिंजरा खोल दिया, तभी तोता पिंजरे से निकलकर आकाश में उड़ते हुए बोलने लगा ‘सतगुरु मिले तो बंधन छूटे’। अतः शास्त्र कितना भी पढ़ लो, कितना भी जाप कर लो, लेकिन सच्चे गुरु के बिना बंधन नहीं छूटता।

अब सच्चे गुरु कहा ढूंढेगे,जो भी मिले इस जमाने मे वो तो शिष्यों की किस्मत ही है,मैं पहिले से समझा रहा हु "गुरु गोरख ही गुरु बने,बनाया कौन बाबा मच्छीन्द्रनाथ,आज्ञा संजीवन की गोरख माने चले"।

इस श्लोक में स्वयं बाबा मच्छीन्द्रनाथ जी ने गोरखनाथ जी को आज्ञा दे दी थी के गोरख तुम सब के गुरु बनो और कभी शरीर का त्याग ना करो,हमेशा संजीवनी के तरह संजीवन रहो । इस कलयुग में गोरखनाथ, चर्पटीनाथ ,चौरंगीनाथ....आज भी बिना देह त्याग किये हुए वायुमंडल में अपनी समाधी में शिष्यों के कल्याण हेतु चैतन्य रूप में है । इसलिए गुरु गोरखनाथ जी को अपना गुरु माने और पिछले पोस्ट में जो गोरख गुरु मंत्र दिया था उसका जाप प्रारंभ करे । यह मंत्र 13 जनवरी 2016 को दिया था और सर्वप्रथम मैने ही यह मंत्र पोस्ट किया था परंतु चोरो ने उस आर्टिकल को जैसे के वैसा बोलकर अपने नामो से यूट्यूब पर डाला हुआ है,उस आर्टिकल का लिंक दे रहा हु-

https://ssd-sadhnaye.blogspot.com/search/label/Gorakhanath%20Guru%20Mantra.?m=0

इस लिंक को कॉप्पी करे और गूगल पर पेस्ट करके पढ़ सकते हो ।

21 नवम्बर को बाबा गोरखनाथ जी की जयंती है तो इस अवसर को आप कुछ महत्वपूर्ण बनाये इसलिए आज आपके सामने गुरु गोरखनाथ जी का एक मंत्र स्पष्ट कर रहा हु जो गोपनीय है । श्रावण माह में यह मंत्र मुझे उज्जैन में रामनाथ बाबाजी से प्राप्त हुआ था । अभी कुछ समय पहिले उनसे बात हुई और उन्होंने मुझे इस मंत्र को जनहित में साधकों को देने हेतु प्रेरित किया ।


ॐ नमो आदेश गुरु मच्छीन्द्रनाथ जी को,नमो आदेश धरतरी माई को,नमो आदेश गजानन गणपति को,नमो आदेश महादेव को,नमो आदेश आदिगुरु को,शम्भुजति को गुरु मच्छीन्द्रनाथ ने हाँक लागाई,हाँक सुनते प्रगट हुए,पहिला शब्द आदेश बोला,अपना शीश गुरु चरणो में झुकाया,दीक्षा के साथ सोहं मंत्र प्राप्त किया,तीनो लोको में विजय प्राप्त किया,गुरु आज्ञा से गुरु गोरखनाथ बने,मेरा कारज पूरण करो अपना शिष्य बनाओ,इतना मंत्र उज्जयिनी में सिद्धो को सुनाया,गोरख कृपा मंत्र सम्पूर्ण भया,श्री नाथजी गुरुजी को आदेश आदेश आदेश ।।


मंत्र का विधि-विधान:-
गुरु गोरखनाथ जयंती के पावन अवसर पर किसी भी समय शरीर शुद्ध करके मंत्र जाप हेतू किसी भी रंग के आसन पर बैठे और मंत्र जाप हेतू पूजास्थल में बैठे । मंत्र का 108 बार जाप रुद्राक्ष माला से करना है मतलब 1 माला जाप कम से कम करना आवश्यक है । जाप के बाद गुरु गोरखनाथ जी से साधना सफलता हेतु प्रार्थना करे और एक नारियल भगवान के सामने फोड़ दीजिये,नारियल का प्रसाद घर में सबको देना है । पहले दिन के विधान के बाद रोज 1 माला जाप 41 दिनों तक करते रहे,गोरखनाथ जी की कृपा आप पर बनी रहेगी ।


आदेश.....

23 Oct 2018

वशीकरण प्रयोग (वीर वैताल साधना).



वीरों के विषय में सर्वप्रथम पृथ्वीराज रासो में उल्लेख है वहां इनकी संख्या 52 बताई गई है। इन्हें भैरवी के अनुयायी या भैरव का गण कहा गया है। इन्हें देव और धर्मरक्षक भी कहा गया है। वीर वैताल एक ऐसी साधना है जो साधक को सभी रूप से बलशाली बनाती है। वेताल का साधक कभी किसी चीज से वंचित नहीं रहता है। आज आपको वीर वैताल वशीकरण साधना दिया जा रहा है जो अचूक है,इसका प्रभाव साधक को कुछ ही दिनों में देखने मिलता है ।

वास्तव में वैताल साधना अत्यन्त सौम्य और सरल साधना है, जो भगवान शिव की साधना करता है वह वैताल साधना भी सम्पन्न कर सकता है। जिस प्रकार से भगवान शिव का सौम्य स्वरूप है, उसी प्रकार से वैताल का भी आकर्षक और सौम्य स्वरूप है। इस साधना को पुरुष या स्त्री सभी सम्पन्न कर सकते हैं। यद्यपि यह शाबर वशीकरण साधना है, परन्तु इसमें किसी प्रकार का दोष या वर्जना नहीं है। गायत्री उपासक या देव उपासक, किसी भी वर्ण का कोई भी व्यक्ति इस साधना को सम्पन्न कर अपने जीवन में पूर्ण सफलता प्राप्त कर सकता है। सबसे बड़ी बात यह है, कि इस साधना में भयभीत होने की बिल्कुल जरूरत नहीं है, घर में बैठकर के भी यह साधनात्मक क्रिया सम्पन्न की जा सकती है।

आज के समय मे वशीकरण एक महत्वपूर्ण क्रिया है,इस क्रिया के माध्यम से तनाव को नष्ठ कर आप जिससे प्रेम करते हो उसे पुनः प्राप्त कर सकते हो,मुझे पूर्ण विश्वास है इस साधना से आप अपने मनपसंद व्यक्ति को जीवन मे प्राप्त कर सकते हो । किसी भी व्यक्ति को धोखा देने हेतु यह साधना ना करे अन्यथा आपको नुकसान होने की संभावना बन जाएगी । आप सच्चा प्रेम करते हो तो आपको आपके प्रेम को प्राप्त करने हेतु इससे अच्छा साधना मिलना कठिन है,आप इस साधना को अवश्य आजमाए तो अवश्य ही सफलता मिलेगा ।



साधना सामग्री:-


एक छोटा काले रंग का मिट्टी का मटका,50 ग्राम काले उड़द,एक हल्दी की गाँठ, ग्यारह काली मिर्च के दाने,वशीकरण यंत्र ( जिसको वश करना है,उसीके नाम से बनाया हुआ हो ),काला कपड़ा और काला धागा ।



वशीकरण क्रिया:-


यह प्रयोग अमावस्या के रात्रि में 9 बजे के बाद कभी भी सम्पन्न करना है,सिर्फ एक ही दिन का साधना है । साधक को दक्षिण दिशा के तरफ मुख करके एकांत में बैठना जरूरी है । सामने मिट्टी का मटका रखे,उसमे काले उड़द डाले उसपर लड़का/लड़की का फोटो रखे अगर फ़ोटो ना हो तो लाल रंग के कागज पर काले पेन से लड़का/लड़की का नाम लिखकर रखे,उसके ऊपर वशीकरण यंत्र को हल्दी के गाँठ के साथ काले धागे से बांधकर रखे । अब मंत्र का एक-एक माला जाप करके एक-एक काली मिर्च का दाना मटके में डाले,इस प्रकार से ग्यारह माला जाप करते हुए ग्यारह काली मिर्च के दानों को मटके में डाले । मंत्र जाप समाप्त होते ही काले कपड़े से मटके का मुँह बंद करे और कपड़े को अच्छेसे काले धागे से बांध दे । इस मटके को दूसरे दिन ठीक 11.30 से 12.30 के समय दोपहर में जाकर जंगल मे कही पर भी आधा फिट जमीन के अंदर गाड़ दे,गाड़ने के बाद उस स्थान के ऊपर दो अगरबत्ती जलाकर रखे और कुछ कपूर की टिकिया प्रज्वलित करे, कपूर के अग्नि के लौ को देखते हुए 21 बार मंत्र का जाप कर ले और "कार्य शीघ्र पुर्ण हो" ऐसी प्रार्थना करे । अब बिना पीछे मुड़कर देखते हुए अपने घर वापस चले जाएं,वह स्थान याद रखना जरूरी है जहां आपने मटका गाड़ा था क्योके कार्य पूर्ण होने के बाद उसी जगह पर जाकर नारियल फोड़ना है और एक अनार का बली भी देना है ।



मंत्र:-


।। ॐ नमो वीर वैताल, अमुक को मन फेर अमुक के वश में कर,चरणों मे पड़े,कहियो करे,सौ ताले तोड़ हाजर होय,कहु सो होय,***** ।।



कुछ शब्द आखरी में गोपनीय रखे है ताकि बिना मार्गदर्शन के आप साधना ना कर सको क्योंके इसमे आपको मेरे मार्गदर्शन का जरूरत पड़ेगा । इस प्रयोग से ग्यारह दिनों में कार्य पूर्ण होता है और वशीकरण का असर देखने मिलता है,यह एक दुर्लभ प्रामाणिक क्रिया है जिसका प्रभाव तिष्ण है ।

न्योच्छावर राशि "वशीकरण यंत्र:1250/-रुपये"



आदेश.....

20 Oct 2018

महालक्ष्मी-सर्व कामना पूर्ति साधना (अग्नि पुराण)



7 नवंबर 2018 को दीपावली मनाई जाएगी और यह एक मात्र ऐसा दिवस है जिस दिन भाग्य को बदला जा सकता है । अन्य दिवस पर आनेवाले सभी मुहूर्त दीपावली के मुहूर्त से शक्तिशाली नही होते है । चाहे वेद में पढ़े या तंत्र शास्त्र में पढ़े ऐसा दुर्लभ दिवस ही इंसान को सही रास्ता और जीवन मे गती प्रदान करता है । जीवन मे धन-धान्य की आवश्यकता ना हो ऐसा एक भी मनुष्य इस धरा पर देखने नहीं मिलेगा, सभी को धन-धान्य के साथ सुख-सुविधाओं की भी आवश्यकता है । सूख-सुविधाओं से प्राप्त जीवन सिर्फ आर्थिक स्थितियों को मजबूत करने से संभव है और सुख हमेशा प्राप्त होता रहे इसलिए देवताओं की कृपा भी आवश्यक है ।

सिर्फ हमारे देश मे ही नही अपितु कई सारे देशों में माँ महालक्ष्मी जी की पूजा अन्य रूपो में होती है,माँ के अलग-अलग नाम प्रचलित है । इस वर्ष दीपावली स्वाती नक्षत्र पर है और कहावत भी है कि जब स्वाति नक्षत्र में ओंस की बूँद सीप पर गिरती है तो मोती बनता है। दरअसल मोती नहीं बनता बल्कि ऐसा जातक मोती के समान चमकता है। यह कहावत पुराने जमाने से चलती आरही है और मैने स्वयं अनुभव किया जब स्वाति नक्षत्र पर बारिश होती है तो बारिश के पाणी को स्टील के बर्तन में जमा करता हु और उसे जमीन पर नही गिरने देता,अब इसी जल से जब किसी देवी/देवता के विग्रह का स्नान करता हू तो वह देवी/देवता का विग्रह पहिले से ज्यादा चैतन्य होता जाता है । जब भी स्वाति नक्षत्र के बारिश के पाणी से मंत्रो से युक्त विग्रह का अभिषेक किया जाता है तो विग्रह के साथ-साथ हमारा शरीर भी चैतन्य हो जाता है,किसी भी साधक का जब तक शरीर चैतन्य ना हो तब तक वह मंत्र सिद्धि समय से पूर्व नही कर पाता है । साधक के शरीर को चैतन्यता प्राप्त होने से वह समस्त मंत्र साधनाओ में शीघ्र सफलता प्राप्त कर लेता है ।

अमावस्या एक काली रात मानी जाती है और स्वाति नक्षत्र का स्वामी राहु है जो अधंकार का प्रतीक है,इस वर्ष यह दुर्लभ योग है जो तंत्र के हिसाब से देखा जाए तो शक्तिशाली दिवस है । माँ लक्ष्मी जी को प्रसन्न करने के लिए शुक्र ग्रह की साधना संपन्न करते है और जब शुक्र-राहु का संबंध वृषभ से हो तो साधक अवश्य ही धन प्राप्ति साधनाओं में निच्छित सफलता प्राप्त करता ही है,इसलिए आप इस वर्ष सिंह लग्न से ज्यादा वृषभ लग्न के समय मे महालक्ष्मी जी के मंत्र का जाप ज्यादा-से-ज्यादा करे । मेरे शहर में इस वर्ष वृषभ लग्न समय 18:02 से 20:01 तक रहेगा और आप भी अपने शहर का दीपावली पूजन वृषभ लग्न समय गूगल पर सर्च करे तो पता कर सकते है ।

शुक्र-राहु के बल का उपयोग वृषभ लग्न में करे तो अवश्य ही सफलता मिलेगी और तुला राशि का चंद्रमा आपको आकस्मिक धन प्राप्ति में भी मदत करेगा । तुला राशि मे शुक्र उच्च का होता है इसलिए महालक्ष्मी जी के प्रसन्नता प्राप्ति हेतु यह दिवस कुछ विशेष बन जाता है,जिसका लाभ सभी साधक मित्रो को इस वर्ष उठाना चाहिए ।

इस वर्ष मैं आपको एक विशेष यंत्र के बारे में बताने वाला हु और यह यंत्र आपको स्वयं अपने घर पर ही बनाना है, यंत्र निर्माण करने हेतु आपको चाँदी/तांबे का ताबीज,भोजपत्र,चमेली की कलम और अष्टगंध के स्याही की आवश्यकता है । आप ताबीज,भोजपत्र और अष्टगंध किसी भी पंसारी के दुकान से 7 तारीख से पहिले ही खरीदे और चमेली की कलम मतलब कोई चमेली के पौधे की डंडी तोड़कर सूखा ले ओर इसीका प्रयोग यंत्र निर्माण में करना है, यह यंत्र सर्व साधना सिद्धि हेतु निर्माण करना है,जिससे आपको सभी मंत्र-तंत्र-शाबर-अघोरी साधनाओ में शीघ्र सफलता मीले । यह यंत्र बनाने में 10 मिनट से ज्यादा का समय नही लगेगा और इसी दिन वृषभ लग्न मुहूर्त में यह यंत्र निर्माण करके धारण करे और महालक्ष्मी सर्व कामना पूर्ति साधना सम्पन्न करे और जीवन मे होने वाले अनुभव को देखिए । महालक्ष्मी सर्व कामना पूर्ति मंत्र अग्नि पुराण में दिया हुआ है और यह मंत्र इसी ब्लॉग पर आप लोगो को 3-4 नवंबर को पढ़ने मिलेगा । इस मंत्र से समस्त प्रकार के कामनाओ के साथ-साथ महालक्ष्मी जी की पूर्ण कृपा प्राप्त कर सकते हो जिससे जीवन मे धन,धान्य, सुख,सुविधा, समृद्धि आपके जीवन मे प्राप्त होगी ।

दिए हुए शुभ समय पर मंत्र की 11,21..51 माला जाप अपने सुविधा नुसार करे,जाप के लिए कमलगट्टे की माला या स्फटिक माला का इस्तेमाल कर सकते हो ।

मंत्र:-


।। ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं नमो महालक्ष्म्यै हरिप्रियायै स्वाहा ।।

Om hreem shreem kleem namo mahaalakshmai haripryaayai swaahaa



यंत्र:-





मुझे पूर्ण विश्वास है के इसी साधना के माध्यम से आप जीवन मे आर्थिक स्थिति को मजबूत कर सकते हो,अब तक आपने भी बहोत साधनाये की होगी परंतु यह साधना आपको निच्छित सफलता देगी । मैं इस बार वही मंत्र और क्रिया पोस्ट करने वाला हु जो मुझे अनुभूतित है,ऐसा मंत्र दे रहा हु जिसका जाप मैंने स्वय किया है और मुझसे पहिले जिन्होंने भी अग्नि पुराण पढ़ा है शायद उन्होंने भी किया ही होगा (अग्नि पुराण एक प्राचीन ग्रंथ है) ।






त्रैलोक्य पूजिते देवि कमले विष्णुवल्लभे।
यथा त्वं सुस्थिरा कृष्णे तथा भव मयि स्थिरा।।
ईश्वरी कमला लक्ष्मीश्चला भूतिर्हरिप्रिया।
पद्मा पद्मालया सम्पद् रमा श्री: पद्मधारिणी।।
द्वादशैतानि नामानि लक्ष्मीं सम्पूज्य य: पठेत्।
स्थिरा लक्ष्मीर्भवेत् तस्य पुत्रदारादिभि: 



आदेश.......

19 Sept 2018

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"शहीद दिवस" जो देश के लिए शहीदों को पहचानने का दिन है और शहीद का अर्थ होता है "किसी शुभ प्रयत्न में अपने प्राण देनेवाला व्यक्ति" । इसी दिन पर रात्रि में यह ब्लॉग बनाया था 23 मार्च 2013 को "शहीद दिवस" के अवसर पर ताकि जो लोग तंत्र के क्षेत्र में अपना पूर्ण जीवन अर्पित कर दिए है उनके ज्ञान को आपके पास पहोचाने हेतु यह एक छोटासा प्रयास किया जाए । यह प्रयास सफलता पूर्वक रहा है,इस ब्लॉग से बहोत सारे लोगो को लाभ प्राप्त हुआ है,अब तक यह ब्लॉग 32,00,000 से ज्यादा लोगो ने पढ़ा हुआ है । एक छोटासा प्रयास अब लाखो लोगो के लिए ज्ञानवर्धक रहा है और साधना क्षेत्र में आगे बढ़ने हेतु मार्गदर्शक रहा है ।

पिछले पाँच वर्षों में मुझे आपको मार्गदर्शन करने का जो अवसर मिला वह मेरे लिए आनंददायक है,समय-समय पर आपको साधना प्रति प्रेरित करने में मुझे अपने जीवन का एक सुंदर अनुभव भी प्राप्त हुआ । आगे भी यह ब्लॉग चलता रहे और मातारानी जी के कृपा से आपके दुःख-दर्द का नाश हो यही कामना करता हूँ । अब इस बार मैं आप सभी को समय देने के इछुक हु सिर्फ एक विनंती है के "कोई भी साधक मुझसे गुरुदीक्षा नही मांगे क्योके मैं गुरु बनना नही चाहता हूँ" । मुझे अपना भाई समझिए या फिर मित्र समझिए परंतु गुरु ना समझे,आजकल फेसबुक यु-ट्यूब,व्हाट्सएप पर बहोत सारे लोग गुरु-सद्गुरु बन गए जब के उनको अभी तक स्वयं के रक्षा करने का ज्ञान भी नही है और शिष्य को रक्षा करने का वचन देते है । आपको जीवन मे गुरु की आवश्यकता हो तो आप गुरु गोरखनाथ जी को अपना गुरु माने और ब्लॉग में उनका गुरु मंत्र दिया हुआ है,उसीका जाप करे ।

आप सभी से जुड़ने हेतु आपको अपना मोबाइल नंबर देता हु ताकि आप फोन भी कर सके और व्हाट्सएप पर भी बात कर सके । मेरे तरफ से मैं आपके समस्या समाधान हेतु निःशुल्क सहाय्यता करने का वचन देता हू और कोई भी व्यक्ति तंत्र-मंत्र-काले जादू से परेशान होतो उसको अवश्य ही बाधा मुक्त करने का प्रयास करूंगा, यह सेवाएं मेरे तरफ से निःशुल्क है,जिसमे आपसे एक पैसा भी नही लिया जाएगा । आपको तंत्र मंत्र बाधा से डरने की कोई जरूरत नही है और किसी तांत्रिक के चक्कर मे फसने की भी जरूरत नही है ।

+918421522368 यह मेरा मोबाईल नंबर है और इसी पर से व्हाट्सएप भी चलेगा । आपको जब भी फोन करना हो तो सूबह 11 बजे के बाद और शाम को 7 बजे तक ही संपर्क करे । कभी-कभी आपको व्हाट्सएप पर सवाल का जवाब प्राप्त करने हेतु समय लग सकता है परंतु अवश्य ही आपको मुझे समय मिलते ही प्रश्न जवाब दिया जायेगा । वैसे यह मोबाईल नंबर पिछले 3 वर्षों से हमेशा से ही शुरू है और आप मे से बहोत सारे लोगो के पास होगा,आगे भी यही नंबर सेवारत रहेगा । किसी कारण से अगर मेरे पास समय ना रहे और मैं आपका फोन उठा नही सका तो नाराज मत होना,फिर एक-दो बार फोन करने का प्रयास करे ।





-आपका अपना
    गोविंदनाथ.

आदेश.........