जीवन की प्रत्येक क्रिया तन्त्रोक्त क्रिया है॰यह प्रकृति,यह तारा मण्डल,मनुष्य का संबंध,चरित्र,विचार,भावनाये सब कुछ तो तंत्र से ही चल रहा है;जिसे हम जीवन तंत्र कहेते है॰जीवन मे कोई घटना आपको सूचना देकर नहीं आता है,क्योके सामान्य व्यक्ति मे इतना अधिक सामर्थ्य नहीं होता है के वह काल के गति को पहेचान सके,भविष्य का उसको ज्ञान हो,समय चक्र उसके अधीन हो ये बाते संभव ही नहीं,इसलिये हमे तंत्र की शक्ति को समजना आवश्यक है यही इस ब्लॉग का उद्देश्य है.
8 Apr 2019
तंत्र बाधा निवारण पीताम्बरा साधना
12 Feb 2019
शिव-मोहिनी साधना ( महाशिवरात्रि विशेष )
अनामयिलुभ्यां त्वां ताम्यां स्पृश्यामसि।।
यह मोहिनी प्रयोग का सबसे सुंदर उदाहरण है। दुर्गा सप्तशती में इस विद्या का उल्लेख कुंजिका स्तोत्र में मिलता है।
पाठ मात्र संसिद्धयेत कुंजिका स्तोत्रम्।।
साधना विधि-महाशिवरात्रि के दिन सूर्योदय के बाद दूसरे दिन के सूर्योदय से पूर्व यह साधना किसी भी समय पर कर सकते है । आसन वस्त्र दिशा का कोई बंधन नही है इसलिए आपको जैसा उचित हो आप आसन वस्त्र का इस्तेमाल करे और हो सके तो उत्तर दिशा में मुख करके मंत्र जाप करे । मंत्र जाप शिवलिंग के सामने करना आवश्यक है,मंत्र का कम से कम 21 माला जाप करे,हो सके तो मंत्र जाप से पूर्व सामान्य पद्धति से अवश्य ही शिवपूजन करे ताकि आपको पूर्ण सफलता मीले ।
मंत्र
।। ॐ शं शिवाय मोहिनी सिद्धये ह्रीं ॐ नमः ।।
Om sham shivaay mohini siddhaye hreem om namah
24 Dec 2018
पुर्णत्वं स्वात्म सिद्धि साधना
बहोत सारे लोग कहेते है के उनके जीवन मे ढेर सारी समस्याएं है और उन समस्याओं का उन्हें खोजने पर भी कोई उपाय नही मिल रहा है । सबसे पहिली बात उपाय मिल भी जाये तो क्या कोई भी परेशान व्यक्ति उस उपाय पर विश्वास करेगा? जब तक आप लोग विश्वास नही करोगे तब तक उपाय से आपकी समस्याएं दूर नही हो सकती है । यहां आज के समय मे सभी लोग बिना मेहनत के फल चाहते है और दिन-रात गूगल फेसबुक व्हाट्सएप यु-ट्यूब पर तांत्रिकों को ढूंढते रहेते है,इस उम्मीद से के कोई उनका काम करवा दे । लाचार के तरहा जीवन जीने से कुछ भी संभव नही है,स्वयं की पहेचान ही सर्वप्रथम होती है,आप लोग अपने जीवन को 100% सवार सकते हो सिर्फ आपको प्रमाणिकता से तंत्र-मंत्र के क्षेत्र में मेहनत करना है ।
प्रत्येक मंत्र शक्तिशाली होता है,मंत्रो को कभी भी छोटा ना समझे,तंत्र की शक्ति कोई साधारण शक्ति नही होती है,जिसने इन शक्तियों को समझ लिया वह जीवन मे सवर जाता है । कोई भी मंत्र जब भी प्राप्त करो तो उस मंत्र के प्रति प्रामाणिक रहो और उस मंत्र पर इतना विश्वास रखो के वह एक मंत्र आपको सिद्ध हो सके । चाहे आप कोई भी साधना करो परंतु साधना काल मे मंत्र का स्मरण ज्यादा-से-ज्यादा करो, जैसे आपको कोई मंत्र साधना 21 माला जाप 21 दिनों तक करना हो तो आप निच्छित समय पर जाप करते रहो और साथ मे उसी मंत्र का जाप दिन-रात जब भी समय मिले तो मन ही मन मंत्र जाप या स्मरण करते रहे । ऐसा करने से ही मंत्र सिद्धि संभव है अन्यथा 21 दिन के साधना में आपको 210 दिन भी मंत्र सिद्धि हेतु कम पड़ जायेंगे । मैं आपको मंत्र दे सकता हु परंतु उसे सिध्द आपको ही करना है,आप हृदय से विश्वास करते है तो वह मंत्र आपके लिए संजीवनी है अन्यथा वह आपके लिए सिर्फ कुछ शब्द है ।
किसी भी मंत्र को आप पूजनीय समझे तो वही मंत्र आपको पूजनीय बना देगा,यही सिद्धांत रखे । आपको जीवन मे परेशानी से मुक्त होना है तो 4-5 दिन स्मशान में जाकर बैठकर देखिए,जलते हुए मुर्दो को देखकर आप समझ जाओगे,जब समय समाप्त होता है तो सब कुछ समाप्त हो जाता है,इसलिए आज आपके पास समय है तो उसे व्यर्थ की परेशानियों से दूर कराने से अच्छा तो आनेवाली परेशानियों को मुक्त कराने हेतु इस्तेमाल करे । जो आपका है वह आपको ही मिलेगा इसके लिए भी प्रयास करना जीवन मे एक अनुभव उत्पन्न करेगा । अब नववर्ष आरहा है,उसका स्वागत करे और संकल्प लीजिए के " मै अमुक पिता का पुत्र अमुक नाम का व्यक्ति आजसे जीवन मे अपनी समस्याओं पर पैर रखकर खड़ा होना चाहता हु और इसमे मेरे गुरु/इष्ट/अमुक देवी/देवता मेरा संकल्प पूर्ण करने हेतु आशीर्वाद प्रदान करे" , यह संकल्प और शक्तियो से सम्बंधित मंत्र का जाप आपको जीवन मे सब कुछ प्रदान कर सकता है ।
आपके जीवन की समस्याओं को आप स्वयं दूर करे,किसी के सामने आपको जाकर सहायता मांगने की कोई जरूरत ही नही है । यह तो तब संभव होगा जब आप इस भावना को अपने अंदर जाग्रत करेंगे,देवता सिर्फ साधु सन्यासी तांत्रिक मंत्रिको के लिए नही है,वह तो सभी पर कृपा करते है । आप सभी दैवीय शक्ति के अंश हो,अगर ये बात आप समझ जाओ तो आपको इस जीवन मे कोई भी परेशानी छू भी नही सकती है । आपके जेब मे पैसा हो ना हो परंतु शरीर मे प्राणवायु होना जरूरी है अगर प्राणवायु ही ना हो तो करोड़ो रूपये भी आपको जीवनदान नही दे सकता है इसलिए दैवीय शक्ति को अनुभव करने हेतु अच्छे मार्ग पर चले और बकवास तांत्रिक मंत्रिको के चक्कर काटने से अच्छा है के स्वयं मंत्र साधना संपन्न करे, आशा करता हु के आपको मेरे शब्दों को समझने में कोई तकलीफ नहीं हुई होगी ।
आज एक अनुभवी मंत्र साधना दे रहा हु जिससे आपके जीवन का नवीनीकरण होना संभव है,जो भी जीवन मे परेशानी हो वह समाप्त हो सकती है ।
साधना विधि-स्फटिक माला से नित्य मंत्र का 11 माला जाप करे,मुख उत्तर दिशा के तरफ होना चाहिए, आसन और वस्त्र पिले रंग के हो,मंत्र जाप सुबह 5-6 बजे के समय मे या रात ने 9-10 बजे तक के समय मे करे,साधना किसी भी सोमवार से शुरू करे,यह साधना 21 दिनों तक करना अनिवार्य है ।
।। ॐ ह्रीं त्रीं पूर्णत्वं स्वात्म सिद्धये ॐ नमः ।।
Om hreem treem purnatwam swaatm siddhaye om namah
साधना समाप्ति के 21 वे दिन किसी गरीब को कुछ आवश्यक वस्तु अवश्य दान करे । यह साधना सूर्यग्रहण के समय मे 21 माला करने से उसी दिन पूर्ण हो जाएगी । साधनात्मक अनुभव किसीको ना बताये,इससे आपको जीवन मे चमत्कारीक लाभ प्राप्त हो सकते है ।
सूर्यग्रहण समय
इस वर्ष 2019 का पहला सूर्य ग्रहण 6 जनवरी को है, इस दिन रविवार पड़ रहा है । यह एक आंशिक सूर्य ग्रहण है,यह सूर्य ग्रहण भारतीय समयानुसार सुबह 5:04 बजे से 9:18 बजे तक रहेगा अर्थात इसकी अवधि क़रीब 4 घंटे 14 मिनट है । साथ ही यह भी बता दें कि देखने पर यह ग्रहण भारत में नहीं दिखाई देगा परंतु मध्य-पूर्वी चीन, जापान, उत्तरी-दक्षिणी कोरिया आदि क्षेत्रों में यह ग्रहण नजर आएगा ।
ज्योतिषीय के अनुसार सूर्य ग्रहण धनु राशि और पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र में लग रहा है । इस कारण धनु राशि और पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र के जातकों के जीवन पर इसका प्रभाव होगा । इसलिए धनु राशि और पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र के जातकों को सावधानियां बरतनी होगी ।
आदेश.........
18 Nov 2018
गुरु गोरखनाथ कृपा प्राप्ति साधना
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ॐ नमो आदेश गुरु मच्छीन्द्रनाथ जी को,नमो आदेश धरतरी माई को,नमो आदेश गजानन गणपति को,नमो आदेश महादेव को,नमो आदेश आदिगुरु को,शम्भुजति को गुरु मच्छीन्द्रनाथ ने हाँक लागाई,हाँक सुनते प्रगट हुए,पहिला शब्द आदेश बोला,अपना शीश गुरु चरणो में झुकाया,दीक्षा के साथ सोहं मंत्र प्राप्त किया,तीनो लोको में विजय प्राप्त किया,गुरु आज्ञा से गुरु गोरखनाथ बने,मेरा कारज पूरण करो अपना शिष्य बनाओ,इतना मंत्र उज्जयिनी में सिद्धो को सुनाया,गोरख कृपा मंत्र सम्पूर्ण भया,श्री नाथजी गुरुजी को आदेश आदेश आदेश ।।
23 Oct 2018
वशीकरण प्रयोग (वीर वैताल साधना).
साधना सामग्री:-
एक छोटा काले रंग का मिट्टी का मटका,50 ग्राम काले उड़द,एक हल्दी की गाँठ, ग्यारह काली मिर्च के दाने,वशीकरण यंत्र ( जिसको वश करना है,उसीके नाम से बनाया हुआ हो ),काला कपड़ा और काला धागा ।
वशीकरण क्रिया:-
यह प्रयोग अमावस्या के रात्रि में 9 बजे के बाद कभी भी सम्पन्न करना है,सिर्फ एक ही दिन का साधना है । साधक को दक्षिण दिशा के तरफ मुख करके एकांत में बैठना जरूरी है । सामने मिट्टी का मटका रखे,उसमे काले उड़द डाले उसपर लड़का/लड़की का फोटो रखे अगर फ़ोटो ना हो तो लाल रंग के कागज पर काले पेन से लड़का/लड़की का नाम लिखकर रखे,उसके ऊपर वशीकरण यंत्र को हल्दी के गाँठ के साथ काले धागे से बांधकर रखे । अब मंत्र का एक-एक माला जाप करके एक-एक काली मिर्च का दाना मटके में डाले,इस प्रकार से ग्यारह माला जाप करते हुए ग्यारह काली मिर्च के दानों को मटके में डाले । मंत्र जाप समाप्त होते ही काले कपड़े से मटके का मुँह बंद करे और कपड़े को अच्छेसे काले धागे से बांध दे । इस मटके को दूसरे दिन ठीक 11.30 से 12.30 के समय दोपहर में जाकर जंगल मे कही पर भी आधा फिट जमीन के अंदर गाड़ दे,गाड़ने के बाद उस स्थान के ऊपर दो अगरबत्ती जलाकर रखे और कुछ कपूर की टिकिया प्रज्वलित करे, कपूर के अग्नि के लौ को देखते हुए 21 बार मंत्र का जाप कर ले और "कार्य शीघ्र पुर्ण हो" ऐसी प्रार्थना करे । अब बिना पीछे मुड़कर देखते हुए अपने घर वापस चले जाएं,वह स्थान याद रखना जरूरी है जहां आपने मटका गाड़ा था क्योके कार्य पूर्ण होने के बाद उसी जगह पर जाकर नारियल फोड़ना है और एक अनार का बली भी देना है ।
मंत्र:-
20 Oct 2018
महालक्ष्मी-सर्व कामना पूर्ति साधना (अग्नि पुराण)
शुक्र-राहु के बल का उपयोग वृषभ लग्न में करे तो अवश्य ही सफलता मिलेगी और तुला राशि का चंद्रमा आपको आकस्मिक धन प्राप्ति में भी मदत करेगा । तुला राशि मे शुक्र उच्च का होता है इसलिए महालक्ष्मी जी के प्रसन्नता प्राप्ति हेतु यह दिवस कुछ विशेष बन जाता है,जिसका लाभ सभी साधक मित्रो को इस वर्ष उठाना चाहिए ।
दिए हुए शुभ समय पर मंत्र की 11,21..51 माला जाप अपने सुविधा नुसार करे,जाप के लिए कमलगट्टे की माला या स्फटिक माला का इस्तेमाल कर सकते हो ।
मंत्र:-
।। ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं नमो महालक्ष्म्यै हरिप्रियायै स्वाहा ।।
त्रैलोक्य पूजिते देवि कमले विष्णुवल्लभे।
यथा त्वं सुस्थिरा कृष्णे तथा भव मयि स्थिरा।।
ईश्वरी कमला लक्ष्मीश्चला भूतिर्हरिप्रिया।
पद्मा पद्मालया सम्पद् रमा श्री: पद्मधारिणी।।
द्वादशैतानि नामानि लक्ष्मीं सम्पूज्य य: पठेत्।
स्थिरा लक्ष्मीर्भवेत् तस्य पुत्रदारादिभि:
19 Sept 2018
Contact Me
+918421522368 यह मेरा मोबाईल नंबर है और इसी पर से व्हाट्सएप भी चलेगा । आपको जब भी फोन करना हो तो सूबह 11 बजे के बाद और शाम को 7 बजे तक ही संपर्क करे । कभी-कभी आपको व्हाट्सएप पर सवाल का जवाब प्राप्त करने हेतु समय लग सकता है परंतु अवश्य ही आपको मुझे समय मिलते ही प्रश्न जवाब दिया जायेगा । वैसे यह मोबाईल नंबर पिछले 3 वर्षों से हमेशा से ही शुरू है और आप मे से बहोत सारे लोगो के पास होगा,आगे भी यही नंबर सेवारत रहेगा । किसी कारण से अगर मेरे पास समय ना रहे और मैं आपका फोन उठा नही सका तो नाराज मत होना,फिर एक-दो बार फोन करने का प्रयास करे ।
गोविंदनाथ.
14 Sept 2018
दिव्यांगना रूपोज्ज्वला अप्सरा साधना
इस साधना को सिद्ध करने पर व्यक्ति निश्चिंत और प्रसन्नचित्त बना रहता है, उसके जीवन में मानसिक तनाव व्याप्त नहीं होते, इस रूपोज्ज्वला अप्सरा साधना के माध्यम से उसे मनचाहा स्वर्ण, द्रव्य, वस्त्र, आभूषण और अन्य भौतिक पदार्थ उपलब्ध होते रहते हैं, यही नहीं, इस अप्सरा-साधना को सिद्ध करने पर साधक इसे जो भी आज्ञा देता है वह उस आज्ञा का तुरन्त पालन करती है, और इस प्रकार साधक अपनी आवश्यकता और महत्वपूर्ण सभी मनोवांछित इच्छाओं की पूर्ति कर लेता है।
साधना-विधि
।। ॐ श्रीं रूपोज्ज्वला वश्यमानय श्रीं फट् ।।
All Gods and sages like – Vashisht, Vishwamitra, Indra etc. accorded a significant position to beauty in their liveṣ. They demonstrated the divine path of attaining complete perfection through clarification of spiritual thoughts about Urvashi, Menaka, Rambha etc. This enabled them to fill divine nectar and celestial beauty into their lives. This divine combination of nectar and beauty in life makes it successful, perfect and total.
Om Shreem Roopojjwalaa Vashya Maanaya Shreem Phat
9 Sept 2018
पूर्ण पितृदोष निवारण साधना.
गजछाया योग में श्राद्ध का पांच गुना फल
गज छाया योग में पड़ने वाले पितृ पक्ष को, वंश वृद्धि, धन संपत्ति और पितरों से मिलने वाले आशीर्वाद के लिये विशेष माना गया है ।ऐसी मान्यता है कि गज छाया योग में पितृकर्म और तर्पण करने से, पांच गुना फल मिलता है। पितृ आत्मायें तृप्त होकर, अपने वंशजों को भरपूर आशीर्वाद देती हैं।
गजच्छाया योग हर वर्ष नहीं आता है। लेकिन जब भी गजच्छाया योग होता है तो यह पितृ पक्ष के दौरान होता है और यह श्रद्धा अनुष्ठान और दान के प्रदर्शन के लिए अत्यधिक शुभ माना जाता है। गजच्छाया योग बनने के लिए पितृपक्ष में त्रयोदशी तिथि को चंद्र मघा नक्षत्र में तथा सूर्य हस्त नक्षत्र में होना चाहिए। जब सूर्य हस्त नक्षत्र में है और चंद्रमा मघा नक्षत्र में होने के के दौरान पितृ पक्ष की त्रयोदशी तिथि गजच्छाया योग के रूप में जाना जाता है । यह शुभ संयोजन या तो त्रयोदशी तिथि पर या अमावस्या तिथि पर होता है ।
* जब पितृपक्ष में सूर्य और राहू या फिर सूर्य या केतु की युति हो तो गज छाया योग बनता है ।
* सूर्य पर राहू या फिर केतू की दृष्टि पड़ने पर गज छाया योग बनता है ।
इस वर्ष 8 ऑक्टोबर 2018 को दोपहर 1 बजकर 33 मिनट पर गजच्छाया योग बन रहा है और यह योग 9 ऑक्टोबर सुबह 9 बजकर 16 मिनट पर समाप्त हो जाएगा । इस समय पर पितृ शांति या पितृ दोष निवारण साधना करने से पाच गुणा फल मिलेगा ।
स्कन्दपुराण, अग्निपुराण, मत्स्यपुराण, वराहपुराण, महाभारत आदि में एक अतिविशेष मुहूर्त गजच्छाया (हस्तिच्छाया) योग का वर्णन मिलता है जो अक्षयफल दायक है और जिसमें श्राद्ध करने से पितर कम से कम 13 वर्ष तृप्त रहते हैं ।
एतेषु युज्यते श्राद्धं प्रकर्तुं पितृतृप्तये ॥
एषा मेध्यतमा राजन्युगादिः कलिसंभवा॥
स्नाने दाने जपे होमे श्राद्धे ज्ञेया तथाऽक्षया ॥
अस्यां चेत्तु गजच्छाया तिथौ राजन्प्रजायते ॥ तदाऽक्षयं मघायोगे श्राद्धं संजायते ध्रुवम्॥
पितृदोष निवारण मंत्र साधना-
7 Sept 2018
जिन्न मंत्र साधना ( jin mantra sadhna)
इन्सानी वजूद मिट जायेगा मगर " जिन्नात " कायनात के दिन तक अस्तित्व में रहेंगे।
जिन्न मंत्र:-
विधि :- गुरुवार या शुक्रवार की रात को 10 बजे अपने घर से निकले और मोमबत्ती,धूप,जन्नत-ए-फिरदौस अत्तर और ऋतुफल लेके सुनसान जगह या स्मशान मे जाये । हरे रंग के आसन पर बैठे,आसन के नीचे "जिन्न सिद्धि यंत्र" रखे जिससे जिन्न आपके तरफ आकर्षित होकर प्रत्यक्ष हो सके और "आयतुल कुर्सी युक्त रक्षा कवच" धारण करे,बिना रक्षा कवच के साधना करने के बारे मे ना सोचे अन्यथा स्वयं के हानि के आप स्वयं जिम्मेदार माने जाएंगे अथवा रोज 21 बार आयतुल कुर्सी पढ़कर साधना करे । 242 बार मंत्र का जाप इसमे रोज करना जरूरी है, इस तरह 21 दिन तक जाप करे । इस मंत्र के पीर देवता जिनको जीन्न कहते हे,वो साधक के सामने आकर साधक के सब कार्यो को पूर्णा करेगे परंतु प्रत्यक्ष होते ही साधक मंत्र के देवता से वचन ले ।
18 Aug 2018
ज्ञान उत्कीलन साधना
गुरु दीक्षा प्राप्त व्यक्ति के जीवन मे एक ऐसा समय आता है जिसमे वह गुरु के उपदेश को भूलते जाता है । शिष्य अपने गुरुमुख से प्राप्त मंत्रो पर संदेह करने लगता है, तो कभी कभी उसे गुरु पर अविश्वास भी होने लगता है । ऐसे स्थिति में शिष्य को गुरुमंत्र की महिमा भी गलत लगने लगती है और एक अच्छा शिष्य पतन के रास्ते पर चलने लगता है ।
"सात चक्रो का सफर है
एक को पार करो तो जानो
दूजा तो रास्ता खोल देगा
पाँचवे से आगे ही गुरु शिव रूप में दर्शन देगे
और छठवे पर पुर्णत्व देगे"।
यह शब्द मैने एक सन्यासी से सुने थे,जो सप्तचक्र जाग्रत करने के लिए सब कुछ त्याग कर बैठा था और गृहस्थ जीवन जीने वाले साधको पर हस रहा था । उसे सफलता तो नही मिली थी परंतु वह कई साधनात्मक रहस्यों से अवगत था, पहिले तो मैंने मान लिया था के वह मूर्ख है,एक ऐसा मूर्ख जो ज्ञानी होकर भी साधनात्मक जीवन से दूर रहकर यादों में खोया रहेता है । उसने एक बात बताई जो जीवन मे मृत्यु के आखरी क्षणों तक याद रहेगी "सबसे बड़ा गुरु और गुरु से बड़ा गुरु का ध्यास",ये शब्द सुनकर मैंने मान लिया के वह मूर्ख नही अपितु इस संसार का सबसे बड़ा ज्ञानी है । जिसने गुरुदीक्षा प्राप्त कर जीवन मे गुरु को प्राप्त करने का संकल्प लिया था,उसके पास साधनात्मक ज्ञान होकर भी वह सिर्फ गुरुतत्व को समजने के लिए वह कठिन उपासना में लगा हुआ था ।
आज मैं एक ऐसे विषय को आपके सामने रखने की कोशिश कर रहा हु जो शायद आप सभी के लिए आवश्यक है । "ज्ञान का उत्कीलन" शायद यह बात सुनने में नही आता है परंतु "ज्ञान के उत्कीलन" की आवश्यकता सभी को है,चाहे वह कोई भी हो । इस संसार मे जितनी भी चैतन्य शक्तियाँ अवतरित हुई है वह "ज्ञान के उत्कीलन" को समझकर ही अवतरित होती आरही है । भगवान राम सिर्फ रावण के वध हेतु धरती पर नही आये थे,उन्होंने भी इसी धराह पर गुरु से ज्ञान प्राप्त किया और अपने अद्भुत ज्ञान का उत्कीलन किया । उत्कीलन का अर्थ सिर्फ इतना ही है ‘परस्पर दो और लो’,कीलित मंत्रो का उत्कीलन एक अलग क्रिया है परंतु ज्ञान के उत्कीलन को समझना कठिन है । आप सभी ज्ञानी हो परंतु माया का एक जाल जो आपको ज्ञानी होते हुए भी गलतियां करने पर मजबूर कर देता है । आप जानते हो शराब पीने से जीवन बर्बाद होता है परंतु पीने वाला शराब पीना छोडता नही है और उसे पीते हुए देखने वाला उसे शराब पीने से रोकने के लिए ज्यादा प्रयास करता नही है ।
आज जो साधना दे रहा हु,वह आपके जीवन मे ज्ञान को उत्कीलन कर देगा,जो ज्ञान आपने प्राप्त किया है उसीको आपके जीवन मे उतार देगा,जैसे अच्छे विचार सभी पढ़ते है परंतु उसको जीवन मे उतारते नही है । गुरु से बहोत ज्ञान प्राप्त कर लेते है परंतु जीवन मे उस ज्ञान के महत्व को समजते नही है ।
इस साधना के माध्यम से आप जो भी किताब पढोगे उसमे आपको आपके अंदर के गुरु से पूर्ण सहाय्यता प्राप्त होगी,इसीसे आपको साधनात्मक दुर्लभ ज्ञान प्राप्त होगा और आप कई सारे रहस्यों को समझ सकेंगे ।"यथा पिंडे,तथा ब्रम्हांडे" का अर्थ अगर समजना चाहते हो तो यही साधना आपको इस दुर्लभ ज्ञान को प्राप्त करने में मार्गदर्शक है । इस साधना के बाद गुरु स्वयं सुष्म रूप में आकर आपको ज्ञान और आशीर्वाद प्रदान करेंगे ।
मंत्र-
।। ॐ श्रीं क्लीं ह्रीं सप्तचक्र गुरु रहस्यम उत्कीलनं कुरु कुरु स्वाहा ।।
Om shreem kleem hreem saptachakra guru rahasyam utkilanam kuru kuru swaha
साधना किसी भी गुरुवार से प्रातः 5 बजे प्रारंभ करे,11 दिन की साधना है,रोज 11 माला जाप करे,आसन वस्त्र पिले रंग के हो और मुख उत्तर दिशा में हो,धूप-दीप नित्य किया करे,दीपक घी का लगाए,मंत्र जाप स्फटिक माला से करना अनिवार्य है,माला आपको पंसारी के दुकान से मिल जाएगा ।
संसार के समस्त साधनाओ के दुर्लभ रहस्य को समजने हेतु यह साधना करना अनिवार्य है,इसीसे आपको अन्य साधनाओ में भी सफलता प्राप्त होगी ।
आदेश.........












