18 Aug 2018

ज्ञान उत्कीलन साधना

गुरु दीक्षा प्राप्त व्यक्ति के जीवन मे एक ऐसा समय आता है जिसमे वह गुरु के उपदेश को भूलते जाता है । शिष्य अपने गुरुमुख से प्राप्त मंत्रो पर संदेह करने लगता है, तो कभी कभी उसे गुरु पर अविश्वास भी होने लगता है । ऐसे स्थिति में शिष्य को गुरुमंत्र की महिमा भी गलत लगने लगती है और एक अच्छा शिष्य पतन के रास्ते पर चलने लगता है ।

"सात चक्रो का सफर है
एक को पार करो तो जानो
दूजा तो रास्ता खोल देगा
पाँचवे से आगे ही गुरु शिव रूप में दर्शन देगे
और छठवे पर पुर्णत्व देगे"।

यह शब्द मैने एक सन्यासी से सुने थे,जो सप्तचक्र जाग्रत करने के लिए सब कुछ त्याग कर बैठा था और गृहस्थ जीवन जीने वाले साधको पर हस रहा था । उसे सफलता तो नही मिली थी परंतु वह कई साधनात्मक रहस्यों से अवगत था, पहिले तो मैंने मान लिया था के वह मूर्ख है,एक ऐसा मूर्ख जो ज्ञानी होकर भी साधनात्मक जीवन से दूर रहकर यादों में खोया रहेता है । उसने एक बात बताई जो जीवन मे मृत्यु के आखरी क्षणों तक याद रहेगी "सबसे बड़ा गुरु और गुरु से बड़ा गुरु का ध्यास",ये शब्द सुनकर मैंने मान लिया के वह मूर्ख नही अपितु इस संसार का सबसे बड़ा ज्ञानी है । जिसने गुरुदीक्षा प्राप्त कर जीवन मे गुरु को प्राप्त करने का संकल्प लिया था,उसके पास साधनात्मक ज्ञान होकर भी वह सिर्फ गुरुतत्व को समजने के लिए वह कठिन उपासना में लगा हुआ था ।

आज मैं एक ऐसे विषय को आपके सामने रखने की कोशिश कर रहा हु जो शायद आप सभी के लिए आवश्यक है । "ज्ञान का उत्कीलन" शायद यह बात सुनने में नही आता है परंतु "ज्ञान के उत्कीलन" की आवश्यकता सभी को है,चाहे वह कोई भी हो । इस संसार मे जितनी भी चैतन्य शक्तियाँ अवतरित हुई है वह "ज्ञान के उत्कीलन" को समझकर ही अवतरित होती आरही है । भगवान राम सिर्फ रावण के वध हेतु धरती पर नही आये थे,उन्होंने भी इसी धराह पर गुरु से ज्ञान प्राप्त किया और अपने अद्भुत ज्ञान का उत्कीलन किया । उत्कीलन का अर्थ सिर्फ इतना ही है ‘परस्पर दो और लो’,कीलित मंत्रो का उत्कीलन एक अलग क्रिया है परंतु ज्ञान के उत्कीलन को समझना कठिन है । आप सभी ज्ञानी हो परंतु माया का एक जाल जो आपको ज्ञानी होते हुए भी गलतियां करने पर मजबूर कर देता है । आप जानते हो शराब पीने से जीवन बर्बाद होता है परंतु पीने वाला शराब पीना छोडता नही है और उसे पीते हुए देखने वाला उसे शराब पीने से रोकने के लिए ज्यादा प्रयास करता नही है ।

आज जो साधना दे रहा हु,वह आपके जीवन मे ज्ञान को उत्कीलन कर देगा,जो ज्ञान आपने प्राप्त किया है उसीको आपके जीवन मे उतार देगा,जैसे अच्छे विचार सभी पढ़ते है परंतु उसको जीवन मे उतारते नही है । गुरु से बहोत ज्ञान प्राप्त कर लेते है परंतु जीवन मे उस ज्ञान के महत्व को समजते नही है ।

इस साधना के माध्यम से आप जो भी किताब पढोगे उसमे आपको आपके अंदर के गुरु से पूर्ण सहाय्यता प्राप्त होगी,इसीसे आपको साधनात्मक दुर्लभ ज्ञान प्राप्त होगा और आप कई सारे रहस्यों को समझ सकेंगे ।"यथा पिंडे,तथा ब्रम्हांडे" का अर्थ अगर समजना चाहते हो तो यही साधना आपको इस दुर्लभ ज्ञान को प्राप्त करने में मार्गदर्शक है । इस साधना के बाद गुरु स्वयं सुष्म रूप में आकर आपको ज्ञान और आशीर्वाद प्रदान करेंगे ।

मंत्र-

।। ॐ श्रीं क्लीं ह्रीं सप्तचक्र गुरु रहस्यम उत्कीलनं कुरु कुरु स्वाहा ।।

Om shreem kleem hreem saptachakra guru rahasyam utkilanam kuru kuru swaha

साधना किसी भी गुरुवार से प्रातः 5 बजे प्रारंभ करे,11 दिन की साधना है,रोज 11 माला जाप करे,आसन वस्त्र पिले रंग के हो और मुख उत्तर दिशा में हो,धूप-दीप नित्य किया करे,दीपक घी का लगाए,मंत्र जाप स्फटिक माला से करना अनिवार्य है,माला आपको पंसारी के दुकान से मिल जाएगा ।
संसार के समस्त साधनाओ के दुर्लभ रहस्य को समजने हेतु यह साधना करना अनिवार्य है,इसीसे आपको अन्य साधनाओ में भी सफलता प्राप्त होगी ।

आदेश.........

6 Aug 2018

रोग निवारण के उपाय


जिस घर में जब कोई रोग आ जाता है तो उस रोगी के साथ साथ उस घर के सभी व्यक्ति भी मानसिक रूप से चिंता और आशांति का अनुभव करने लगते है , लेकिन कुछ छोटी छोटी बातो को ध्यान में रखकर हम हालत पर काबू पा सकते है , शीघ्र स्वास्थ्य लाभ प्राप्त कर सकते है ।
1.यदि आपके परिवार में कोई व्यक्ति बीमार है तो अगर संभव हो तो उसे सोमवार को डॉक्टर को दिखाएँ और उसकी दवा की पहली खुराक भगवान शिव को अर्पित करके कुछ राशी भी चड़ा दें और रोगी व्यक्ति के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की प्रार्थना करें , व्यक्ति के बहुत जल्दी ही ठीक हो जाने की सम्भावना बन जाती है ।
2.हर पूर्णिमा को किसी भी शिव मंदिर में भगवान भोलेनाथ से अपने परिवार को निरोग रखने की प्रार्थना रखें ,तत्पश्चात मंदिर में और गरीबों में कुछ ना कुछ फल,मिठाई और नगद दान अवश्य दें ।
3.रोगी व्यक्ति को मंगलवार और शनिवार किसी भी दिन हनुमान जी की मूर्ति से सिंदूर लेकर उसके माथे पर लगाने से उसका दिल मजबूत होता है और रोगी जल्दी स्वस्थ भी होता है ।
4.यदि कोई बीमार व्यक्ति प्रात: काल एक गिलास पानी लेकर पूर्व दिशा की ओर मुंह करके खड़े होकर ऐं मन्त्र का 21 बार जाप करके पी जाय एवं ईश्वर से अपने रोग को दूर करने के लिए प्रार्थना करें तो शीघ्र ही स्वास्थ्य लाभ प्राप्त होता है। यह प्रयोग सोमवार से शुरू करके रविवार तक लगातार 7 दिन तक करना चाहिए ।
5.अशोक के वृक्ष की ताजा तीन पत्तियों को प्रतिदिन प्रातः चबाने से चिंताओं से मुक्ति मिलती है और स्वास्थ्य भी उत्तम बना रहता है ।
6.यदि किसी बीमार व्यक्ति का रोग ठीक ना हो रहा हो तो उसके तकिये के नीचे सहदेई और पीपल की जड़ रखने से बीमारी जल्दी ठीक होती है ।
7.यदि किसी रोगी को मृत्युतुल्य पीड़ा हो रही हो , तो जौ के आटे ( बाजार में यह आसानी से उपलब्ध है ) में काले तिल और सरसों का तेल मिला कर रोटी बना कर रोगी के ऊपर से 7 बार उतार कर किसी भैंसे को खिलाएं त्वरित लाभ मिलता है ।
8.सूर्य जब भी मेष राशी में ( 13 से 15 अप्रैल ) में प्रवेश करें तो प्रात: काल नीम की ताजी कपोलें गुड़ व मसूर के साथ पीस कर खाने से वर्ष भर रोग दूर रहते है , यह घर के सभी छोटे बड़े व्यक्तियों को खाना चाहिए ।
9.यदि कोई व्यक्ति लम्बे समय से बीमार है तो उसे घर के दक्षिण पश्चिम कोने ( नैत्रत्य कोण ) के कमरे में दक्षिण दिशा में सर रखकर सुलाएं , उनकी दवाएं और जल कमरे के ईशान कोण में रखें । ध्यान रखें रोगी व्यक्ति अपनी दवाएं और अपना खाना पीना ईशान कोण अथवा पूर्व की तरफ मुंह करके ही खाएं ।
10.यदि घर का कोई व्यक्ति अधिक समय से बीमार हो तो उसके तकिये के नीचे मणिक्य रखने से वह जल्दी स्वस्थ होता है ।
11.सभी रोगों में पीपल की सेवा से बहुत लाभ प्राप्त होता है , रविवार को छोड़कर नियमित रूप से पीपल के वृक्ष पर प्रात: मीठा जल चड़ाकर उसकी जड़ जो छूकर अपने माथे से लगायें पुरुष पीपल की 7 परिक्रमा करें स्त्री ना करें और अपने रोग को दूर करने की प्रार्थना करें अति शीघ्र लाभ मिलता है ।
12.यदि आपके परिवार में कोई लम्बे समय से बीमार है तो आप प्रति माह कम से कम एक बार किसी भी अस्पताल में जाकर गरीबों में अपनी सामर्थ्यानुसार दवा एवं फलों का वितरण अवश्य करें, इससे रोगी को भी लाभ होगा और घर के अन्य सभी सदस्य भी निरोगी रहेंगे। यह बहुत ही चमत्कारी और सिद्ध प्रयोग है ।
13.यदि आप कभी किसी भी बीमार व्यक्ति को देखने जाएँ तो फूल और फल लेकर अवश्य जाएँ और यदि संभव हो तो कुछ ना कुछ नकद राशी भी अवश्य दें , इससे आपके परिवार का सदैव रोगों से बचाव होगा ।
14.रोगी व्यक्ति को पान में गुलाब की सात पंखुडियां खिलाने से अगर उसको कोई नजर लगी है तो उससे छुटकारा मिलता है और दवा भी जल्दी असर करती है ।
15.यदि कोई व्यक्ति मरणासन्न अवस्था में हो उसके बचने की कोई आशा ना हो परन्तु उसके प्राण भी नहीं निकल रहें हो तो उसके हाथ से नमक का दान करवाना चाहिए ।
16. स्वस्थ शरीर के लिए एक रुपये का सिक्का लें। रात को उसे सिरहाने रख कर सो जाएं। प्रातः इसे स्मशान की सीमा में फेंक आएं। शरीर स्वस्थ रहेगा।
17. यदि कोई व्यक्ति काफी समय से बीमार है तो एक नारियल से उसकी नज़र उतार कर उस नारियल को तंदूर/अंगीठी/हवनकुंड अथवा किसी तसले में आग जलाकर उसमें जलाने से रोगी अति शीघ्र स्वस्थ होने लगता है ।
18. सात जटा वाले नारियल शुक्ल पक्ष के सोमवार को ॐ नमा शिवाय मन्त्र का जाप करते हुए नदी में प्रवाहित करने से उस व्यक्ति के घर से रोग और दरिद्रता का नाश होता है ।
19. रोगी के पीने वाले जल में थोड़ा सा गंगाजल मिला दीजिये ,वह जब भी जल पिए उसे वह जल ही पीने को दिया जाय....... शीघ्र स्वास्थ्य लाभ मिलेगा ।
20. जिस व्यक्ति की तबियत ख़राब रहती है उसके पलंग की पाए में चाँदी के तार में एक गोमती चक्र बांध दें स्वास्थ्य सम्बन्धी परेशानी दूर होने लगेगी । ( गोमती चक्र को पहले गंगाजल में धोकर घर के मंदिर में रखकर तिलक लगाकर धुप/दीप/अगरबत्ती दिखाकर शुद्ध कर लें।)
21. एक देसी पान,गुलाब का फूल और ग्यारह बताशे बीमार व्यक्ति के ऊपर से 31 बार उतार कर किसी चौराहे पर रख दें ध्यान रहे कोई टोके नहीं ....व्यक्ति को शीघ्रता से स्वास्थ्य लाभ मिलने लगेगा ।
22. यदि कोई व्यक्ति तमाम इलाज के बाद भी बीमार रहता है तो पुष्य नक्षत्र में सहदेवी की जड़ उसके पास रखिये .....रोग दूर लगेगा ।
23.पीपल के वृक्ष को प्रातः 12 बजे के पहले, जल में थोड़ा दूध मिला कर सींचें और शाम को तेल का दीपक और अगरबत्ती जलाएं। ऐसा किसी भी वार से शुरू करके 7 दिन तक करें। बीमार व्यक्ति को आराम मिलना प्रारम्भ हो जायेगा।
24. किसी कब्र या दरगाह पर सूर्यास्त के पश्चात् तेल का दीपक जलाएं। अगरबत्ती जलाएं और बताशे रखें, फिर वापस मुड़ कर न देखें। बीमार व्यक्ति शीघ्र अच्छा हो जायेगा।
25. धोबी के घर से तुरंत धुलकर आये वस्त्रों को मन ही मन रोगी के अच्छे स्वास्थ्य की प्रार्थना करते हुए रोगी के शरीर से स्पर्श करा देने से बहुत जल्दी आराम मिलता है ।
26. हर माह के प्रथम सोमवार को सुबह सवेरे अपने ईष्ट देव का नाम लेते हुए थोड़ी सी पीली सरसों अपने सर पर से 7 बार घुमाकर घर से बाहर फ़ेंक दें .....रोग आपके पास भी नहीं आयेंगे ।
27. यदि घर में आपकी माता जी को निरंतर कोई रोग सता रहा है तो सोमवार के दिन 121 किसी भी साइज़ के पेड़े लेकर बच्चो और गरीबों में बाँट दें ......निश्चय ही रोग में आराम मिलेगा ।
28. अशोक के ताजे तीन पत्ते सुबह सुबह रोजाना बिना कुछ खाए चबाये जाएँ तो व्यक्ति शारीरिक एवं मानसिक रूप से स्वस्थ रहता है ....इसके सेवन से रोग और चिन्ताओं का भी नाश होता है।
29. सदैव ध्यान दें भैया दूज (यम दीतिया) के दिन बहन के घर उसके हाथ से बना भोजन करने से, गुरु पूर्णिमा के दिन गुरु के घर/मंदिर से प्रसाद लेकर खाने से, बसंत पंचमी के दिन पत्नी के हाथ से बने पीले चावल खाने से एवं मात्र नवमी के दिन माँ के हाथ से बना भोजन करने से व्यक्ति निरोगी रहता है उसकी आयु में निसंदेह वृद्धि होती है।
30. स्वस्थ जीवन जीने के लिये रात्रि को अपने सिरहाने पानी किसी लोटे या गिलास में रख दें। सुबह उसे पी कर बर्तन को उल्टा रख दें तथा दिन में भी पानी पीने के बाद बर्तन को उल्टा रखने से व्यक्ति सदैव स्वस्थ बना रहता है।
31. बाजार से कपास के थोड़े से फूल खरीद लें। रविवार शाम 5 फूल, आधा गिलास पानी में साफ कर के भिगो दें। सोमवार को प्रात: उठ कर फूल को निकाल कर फेंक दें तथा बचे हुए पानी को पी जाएं। जिस पात्र में पानी पीएं, उसे कहीं पर भी उल्टा कर के रख दें। कुछ ही दिनों में आश्चर्यजनक स्वास्थ्य लाभ अनुभव करेंगे।
32. रात्रि के समय शयन कक्ष में कपूर जलाने से पितृ दोष का नाश होता है, घर में शांति बनी रहती है, बुरे स्वप्न नहीं आते है और सभी प्रकार के रोगों से भी छुटकारा मिलता है ।
33. पूर्णिमा के दिन रात्रि में घर में खीर बनाएं। ठंडी होने पर उसका मंदिर में मां लक्ष्मी को भोग लगाएं एवं चन्द्रमा और अपने पितरों का मन ही मन स्मरण करें और कुछ खीर काले कुत्तों को दे दें। ऐसा वर्ष भर पूर्णिमा में करते रहने से घर में सुख शांति, निरोगिता एवं हर्ष और उल्लास का वातावरण बना रहता है धन की कभी भी कमी नहीं रहती है ।
34. घर में कोई बीमार हो जाए तो उस रोगी को शहद में चन्दन मिला कर चटाएं |
35. यदि घर में पुत्र बीमार हो तो कन्याओं को हलवा खिलाएं एवं पीपल के पेड़ की लकड़ी को सिरहाने रखें।
36. जिस घर में स्त्रीवर्ग को निरन्तर स्वास्थ्य की पीड़ाएँ रहती हो, उस घर में तुलसी का पौधा लगाकर उसकी श्रद्धापूर्वक देखशल करने, संध्या के समय घी का दीपक जलाने से रोग पीड़ाएँ शीघ्र ही समाप्त होती है।
37. यदि घर में किसी की तबियत ज्यादा ख़राब लग रही है तो रविवार के दिन बूंदी के सवा किलो लड्डू किसी भी धार्मिक स्थान चड़ा कर उसका कम से कम 75% वहीँ पर प्रसाद के रूप में बांटे।
38. अगर परिवार में कोई परिवार में कोई व्यक्ति बीमार है तथा लगातार दवा सेवन के पश्चात् भी स्वास्थ्य लाभ नहीं हो रहा है, तो किसी भी रविवार से लगातार 3 दिन तक गेहूं के आटे का पेड़ा तथा एक लोटा पानी व्यक्ति के सिर के ऊपर से उसार कर जल को पौधे में डाल दें तथा पेड़ा गाय को खिला दें। इन 3 दिनों के अन्दर व्यक्ति अवश्य ही स्वस्थ महसूस करने लगेगा। अगर इस अवधि में रोगी ठीक हो जाता है, तो भी इस प्रयोग को अवश्य पूरा करना चाहिए।
39. पीपल के वृक्ष को प्रात: 12 बजे के पहले, जल में थोड़ा दूध मिला कर सींचें और शाम को तेल का दीपक और अगरबत्ती जलाएं। ऐसा किसी भी दिन से शुरू करके 7 दिन तक करें ( अगर सोमवार से शुरू करें तो अति उत्तम होगा )। रोग से ग्रस्त व्यक्ति को जल्दी ही आराम मिलना प्रारम्भ हो जायेगा।
40. शुक्रवार रात को मुठ्ठी भर काले साबुत चने भिगोयें। शनिवार की शाम उन्हें छानकर काले कपड़े में एक कील और एक काले कोयले के टुकड़े के साथ बांध दें । फिर इस पोटली को रोगी के ऊपर से 7 बार वार कर किसी तालाब या कुएं में फेंक दें। ऐसा लगातार 3 शनिवार करें। बीमार व्यक्ति शीघ्र अच्छा हो जायेगा|
41. यदि कोई प्राणी कहीं देर तक बैठा हो और उसके हाथ या पैर सुन्न हो जाएँ तो जो अंग सुन्न हो गया हो, उस पर उंगली से 27 का अंक लिख दीजिये, उसका सुन्न अंग तुरंत ठीक हो जाएगा।
42. काले तिल और जौ का आटा तेल में गूंथकर एक मोटी रोटी बनाकर उसे अच्छी तरह सेंकें। गुड को तेल में मिश्रित करके जिस व्यक्ति के मरने की आशंका हो, उसके सिर पर से 7 बार उतार कर मंगलवार या शनिवार को किसी भैंस को खिला दें।यह क्रिया करते समय ईश्वर से रोगी को शीघ्र स्वस्थ करने की प्रार्थना करते रहें।
43. गुड के गुलगुले सवाएं लेकर उसे 7 बार रोगी के सर से उतार कर मंगलवार या शनिवार व इतवार को चील-कौए को डाल दें, रोगी को तुरंत राहत मिलने लगती है।
आदेश......

5 Jul 2018

त्रिया बंगालन-भैंसासुर वीर साधना.


त्रिया बंगालन जिनके दुहाई से कई सारी मशानी शक्तियां काम करती है और भैंसासुर वीर तो बहोत खतरनाक शक्ति है । भैंसासुर वीर को दिया हुआ कोई भी काम वह करता है,इनके लिए षट्कर्म तो बहोत मामूली काम है । यह मंत्र साधना षट्कर्म में पूर्ण सिद्धिदायक है,इसी साधना से मयांग (आसाम का तांत्रिक क्षेत्र ) के तांत्रिक आज के समय मे प्रसिद्ध हुए है ।

गुवाहाटी के पास एक गांव में आज भी काला जादू सिर चढ़कर बोलता है । चमत्कार और आसाम का बेहद पुराना रिश्ता है,तब यह प्रागज्योतिषपुर के नाम से मशहूर था । मिर्जा नत्थन, इब्न बतूता और शहाबुद्दीन जैसे विद्वानों ने अपनी किताबों में प्रागज्योतिषपुर की तंत्र-मंत्र विद्या का उल्लेख भी किया है । हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान कृष्ण ने यहीं पर आध्यात्मिक शक्तियों से संपन्न भागदत्त के पिता नरकासुर से माया युद्ध किया था । प्राचीन काल में आसाम स्थित शक्तिपीठ कामाख्या तंत्र-मंत्र का गढ़ हुआ करता था,तब वहां बौद्ध संन्यासी तंत्र-मंत्र करने के लिए जाते थे । जैसे-जैसे वक्त गुजरा, बौद्ध संन्यासी आसाम के विभिन्न हिस्सों में जाने लगे,यह बात दीगर है कि उनमें से ज्यादातर ने हाजो और मयांग को ही अपना डेरा बना लिया ।

मयांग में तंत्र-मंत्र की प्रथा आज की नहीं है, यहां यह आठवीं-नौवीं सदी से चली आ रही है,12वीं सदी में बौद्ध संन्यासियों ने मयांग की तंत्र विद्या को हिंदू और बौद्ध 'गुप्त विद्या' के एक अनोखे साझा केंद्र के रूप में स्थापित करने में खास योगदान किया । इसके मूल में काला जादू है,यही वजह है कि गुवाहाटी के काफी करीब होने के बावजूद मयांग आधुनिकता से कोसों दूर है ।

मयांग का नाम राजा के नाम पर ही पड़ा,प्रचीन काल से ही मयांग तंत्र-मंत्र विद्या के लिए मशहूर था, इसीलिए पहले अहोम शासक और बाद में ब्रिटिश शासक काचरी साम्राज्य को चुनौती देने का साहस नहीं जुटा सके । वहां लोग दुश्मनों को हराने के लिए वशिकरण विद्या का इस्तेमाल करते थे और त्रिया बंगालन का विद्या से एक ही समय पर बहोत सारे लोगो पर वशिकरण क्रिया के माध्यम से सफलता हासिल करते थे ।

कहा जाता है सन 1332 में आसाम पर मुग़ल बादशाह मोहम्मद शाह ने एक लाख घुड़सवारों के साथ आक्रमण कीया था । तब उस समय गांव में हज़ारों तांत्रिक मौजूद थे, उन्होंने मयांग गांव को बचाने के लिए एक ऐसी जादुई दीवार खड़ी कर दी थी जिसको पार करते ही सैनिक गायब हो जाते थे ।
मयांग गांव में बूढ़े मयांग नाम का एक जगह है, जिसको काले जादू का केंद्र माना जाता है, यहां भगवान शिव, देवी पार्वती एवं श्री गणेश की तांत्रिक प्रतिमा है, जहां सदियों पहले नरबलि दी जाती थी,आज के समय मे यह प्रथा बंद किया गया है । एक विशेष योनि कुंड यहा पर बना हुआ है,जिस पर कई मन्त्र लिखे हैं, मान्यता है कि तंत्र-मंत्र शक्ति के कारण ये कुंड हमेशा पानी से भरा रहता है ।

मयांग में नाटा, कलवा, दायमत, किच्चिन और बिरो से काम करवाया जाता है,इसमे कलवा और भैंसासुर वीर का पूजा ज्यादा होता है । भैंसासुर वीर एक आक्रामक शक्ति होने के साथ-साथ साधक के लिये दयालु शक्ति है परंतु साधक के शत्रुओं के लिए हानिकारक शक्ति है । जो भैंसासुर वीर का साधना करता है,उसको भैंसासुर वीर महाराज हमेशा अभय प्रदान करते है और साधक से प्रेमपूर्वक रहते है । साधक पर जो भी शत्रु हानि पहोचाना चाहता हो उसको भैंसासुर वीर जी दंड भी देते है । षट्कर्म में से कोई भी कर्म स्वयं भैंसासुर वीर साधक को करवा देता है, चाहे साधक किसीका वशिकरण करवाना चाहे या फिर उच्चाटन करवाना चाहे तो भैंसासुर वीर करवा देते है । भैंसासुर वीर के मदत से साधक अन्य लोगो के काम भी करवा देता है । यह मंत्र साधना त्रिया बंगालन जी का है जो तंत्र की महारानी है, माँ कामाख्या के कृपा से त्रिया बंगालन मयांग की जादूगरनी कहलाती थी,आज के समय मे सिर्फ उनका विद्या और मंत्र जीवित है ।


साधना विधि:-यह साधना किसी भी अमावस्या से शुरू करके 21 दिनों तक नित्य 3 माला जाप करने से सिद्ध होता है,साधना के समय त्रिया बंगालन के कहेनुसार साधक को काला आसन ओर काले वस्त्र पेहेनना जरूरी है । साधना रात्रि में 9 बजे के बाद ही सम्पन्न किया जा सकता है,साधना महाकाली जी के चित्र के सामने सम्पन्न किया जाता है । साधना में रक्षा कवच आवश्यक है और एक जादूई वनस्पति से बना भैंसासुर वीर प्रत्यक्षीकरण यंत्र जरूरी है,वैसे मयांग में कई प्रकार की जादुई वनस्पति है परंतु उनके नाम सिर्फ वहां के लोग याद रख सकते है क्योके वहां का भाषा अलग है,जो हमारे समझ के बाहर है । जब जरूरत पड़ता है तो वहां के लोगो से "जादुई वीर का वनस्पति चाहिए" ये भी उन्हींके भाषा मे बोलना पड़ता है । इस वनस्पति से बने ताबीज के बिना इस साधना में सफलता प्राप्त करना संभव नही । इस जादुई वीर वनस्पति को 24 घंटे तक लाल कुंकुम के पानी मे भिगाकर रखा जाता है,उसके बाद जब वनस्पति मोटा हो जाता है तो उसी समय उसपर भैंसासुर वीर का आवाहन करके इत्र लगाते है और महुआ के फूलों का हवन करके 108 बार आहुति दिया जाता है,एक नारियल के साथ एक अनार और ग्यारह नींबू का बली दीया जाता है ।
रक्षा कवच को काले धागे में पहनना है और भैंसासुर वीर प्रत्यक्षीकरण यंत्र को काले चावल पर स्थापित करना है,मंत्र याद किये बिना जाप नही किया जा सकता है,इसलिए मंत्र को याद करना जरूरी है और भैंसासुर वीर प्रत्यक्षीकरण यंत्र को देखते हुए जाप करना है । इस साधना में रुद्राक्ष के माला का इस्तेमाल होता है,अन्य किसी भी माला से जाप नही किया जा सकता है ।


मंत्र:-
।। ॐ नमो आदेश गुरु का,अड़हुल फुल फुले फुफनर ऊपर बामत योगनी करे सिंणगर,माँस खाए हाड़ जोगवे तब तु बामत जोगनी कहांवे,आदि देवता वीर बजरंगबली भैसासुर को पकड़ बांध लाए और वचनबद्ध कराएं,मेरा इतना काम इसी क्षण आदि देवता वीर बजरंगबली करके नहीं बताए तो (*****यहां मंत्र को गोपनीय रखा जा रहा है****) आदेश गुरु का शब्द सांचा पिंड काचा चले मंत्र ईश्वर वाचा ।।



मंत्र को गोपनीय रखने का एक ही कारण है कि यूट्यूब के चोर आजकल इस ब्लॉग से आर्टिकल जैसा के वैसा पढ़कर वीडियो बना रहे है और वहां गुरु बन रहे है । इनको किसी चीज का ज्ञान नही है,ये कभी अच्छे शिष्य नही बन पाए परंतु इनको गुरु बनने की बहोत खुजली है । मैं इसी वर्ष में इनकी खुजली अवश्य ही मिटा दूँगा,चाहे वह कोई भी हो । ये चोरो के लिए बहोत प्यारी सी चेतावनी है के मेरे सभी आर्टिकल जो उन्होने यहां से चुराए है वह हटा दे अन्यथा मैं इनके बुरे हालात का जिम्मेदार नही रहुगा । इन चोरो को लगता है के ये लोग बहोत अक्लमंद है,इनका कोई कुछ नही बिगाड़ पायेगा परंतु धैर्य की भी एक सीमा होती है । अब तक मैने धैर्य से काम लिया इसलिए अब इनका संख्या बढ़ते जा रहा है परंतु इस वर्ष में इनका यह चोरी का खेल मैं खत्म कर दूँगा । जनवरी 2019 तक कोई चोर चोरी करने का स्वप्न में भी प्रयास नही करेगा । आज इन चोरो के वजह से मुझे मंत्र गोपनीय रखने पड़ रहे है जो दुखद बात है,जैसे मैने गुरु गोरखनाथ दीक्षा का मंत्र बताया था "सोहं गोरक्ष गुरुर्वै नमः",अब ये मंत्र आप you tube पर search करे तो आपको पता चल जाएगा के कैसे चोर पूरा आर्टिकल चोरी करके गुरु बन जाते है । उनके वीडियो का तारीख देखे और मेरे आर्टिकल के पोस्ट करने का तारीख देखिए तो आप लोग भी समझ जाओगे ।


साधना सामग्री-भैंसासुर वीर प्रत्यक्षीकरण यंत्र,रक्षा कवच और रुद्राक्ष माला ।
न्यौछावर राशि: 2150/-रुपये ।


साधना सामग्री हेतु ईमेल करे या फिर ब्लॉग पर व्हाट्सएप नंबर दिया हुआ है,वहां पर सम्पर्क करें ।
snpts1984@gmail.com



आदेश........

22 Jun 2018

100% Fatty Liver Treatment

(Note:-चिंता ना करो,अगर मैं आपके वसायुक्त लीवर (Fatty liver) का ईलाज नही कर सका,तो ईलाज हेतु लगने वाले दवाई का दुगना शुक्ल वापिस कर दूँगा )


इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) का कहना है कि वसायुक्त लीवर (Fatty liver) से पीड़ित लोगों की संख्या में खतरनाक रूप में वृद्धि हो रही है । यदि ठीक से इलाज न हो तो वसायुक्त लीवर (Fatty liver) से लंबे समय में लीवर कैंसर भी हो सकता है । उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, भारत में हर पांच में से एक व्यक्ति के लीवर में अधिक वसा (fat's) मौजूद होती है और हर 10 में से एक व्यक्ति में फैटी लीवर रोग होता है । यह चिंता का एक कारण है, क्योंकि ठीक से जांच और इलाज न हो तो वसायुक्त लीवर (Fatty liver) से लीवर को क्षति पहुंच सकती है और लीवर कैंसर भी हो सकता है ।

अगर आपका पेट आपकी छाती से ज्यादा बाहर आने लगे, अगर आपको झुकने और अपने जूते का फीता बांधने में कठिनाई होने लगे, अगर आप अपनी शर्ट ठीक से पैंट के अंदर न कर पा रहे हों तो यह सीधा संकेत है कि आपके शरीर में फैट की मात्रा बढ़ रही है । हम भारतीयों के लिए यह तो कोई नई बात नहीं है, लेकिन इन दिनों किए जा रहे तमाम नए अध्ययनों से पता चलता है कि किसी व्यक्ति के दीर्घकालीन स्वास्थ्य के बारे में कोई अनुमान लगाना या भविष्यवाणी करना आसान नहीं है ।

डॉक्टर एक ऐसे अंग पर दिखाई न देने वाली चर्बी के खतरे की चेतावनी दे रहे हैं, जिसके बारे में कोई सोच भी नहीं सकता 'वह है लीवर' । भारत के शहरों में फैटी लीवर की बीमारी की शिकायत तेजी से बढ़ रही है,इस तरह के फैटी लीवर से दिल का दौरा पडऩे का खतरा हो सकता है । इसके अलावा इससे कैंसर भी हो सकता है,लीवर की यह बीमारी कितनी गंभीर हो चुकी है, इसका अंदाजा इन तथ्यों से लगाया जा सकता है :-

*32 फीसदी भारतीयों में कुछ हद तक फैटी लीवर की बीमारी होने का अनुमान है ।
*70 से 90 फीसदी मोटापे और मधुमेह के शिकार लोग फैटी लीवर की बीमारी से ग्रस्त हैं ।
*54 फीसदी लोग, जो न शरीर और न ही पेट के मोटापे से ग्रस्त हैं, फैटी लीवर के रोगी हैं ।
*24 फीसदी भारतीय पुरुष फैटी लीवर से प्रभावित हैं, जबकि ऐसी महिलाओं की तादाद 13 फीसदी है।
*20 फीसदी फैटी लीवर के रोगियों की बीमारी गंभीर रूप ले लेती है ।
*लीवर के वसा (फैट्स) के कारण शहरी भारतीयों को दिल का दौरा पडऩे से मौत हो जाने या फिर दिल का दौरा पडऩे का दोहरा खतरा होता है ।
*भारत में लीवर की गंभीर बीमारी में फैटी लीवर तीसरा सबसे बड़ा कारण है ।
*पश्चिमी देशों के समान वजन वाले लोगों के मुकाबले भारतीयों में फैट की मात्रा दोगुनी होती है ।
इस तरह स्वास्थ्य के मोर्चे पर लीवर की बीमारी एक बड़ी समस्या का रूप ले चुकी है ।


दिल्ली में इंस्टीट्यूट ऑफ लीवर ऐंड बाइलियरी साइंस (आइलबीएस) के निदेशक डॉ. शिव सरीन, जो नॉन-अल्कोहलिक फैटी लीवर डिजीज़ (एनएएफएलडी) पर ग्लोबल गाइडलाइंस के सह-लेखक रह चुके हैं, कहते हैं, ''अब वसायुक्त लीवर (Fatty liver) का खतरा सिर्फ उन लोगों तक ही सीमित नहीं रह गया है, जो बहुत ज्यादा शराब पीते हैं.” । उनकी पुस्तक 2014 जून में वर्ल्ड गैस्ट्रोएन्टेरोलॉजी ऑर्गेनाइजेशन से प्रकाशित हुई है । वे कहते हैं, ''नकारात्मक जीवन शैली से बायो-कैमिकल रिएक्शन पैदा हो रहा है । जो फैटी लीवर की बीमारी का कारण बन रही है अगर हम सचेत नहीं हुए तो यह जल्दी ही भारत में एक महामारी का रूप ले सकती है, क्योंकि इसका अब तक कोई इलाज नहीं है.” ।

अध्ययनों से पता चलता है कि भारतीय पुरुष फैटी लीवर का खास तौर से शिकार हो सकते हैं । मोटापे की समस्या में लीवर एक नदारद कड़ी है और इस क्षेत्र में अब नए रिसर्च की गति बढ़ रही है । अखिल भारतीय स्तर पर कोई अध्ययन न होने से टुकड़ों-टुकड़ों में जो रिसर्च हो रहा है, उससे यह समस्या और भी जटिल होती जा रही है ।

डॉ. नंदी कहते हैं, ''लीवर में खुद को दोबारा मजबूत करने और ठीक करने की गजब की ताकत होती है.” नुकसान के बावजूद यह वर्षों तक काम कर सकता है, लेकिन एक समय के बाद यह नुकसान लीवर को इतना बिगाड़ चुका होता है कि उसका ठीक होना असंभव हो जाता है । इसीलिए डॉक्टर लीवर की बीमारियों को साइलेंट किलर यानी खामोशी से जान लेने वाली बीमारी कहते हैं ।

फैटी लीवर की बीमारी तब शुरू होती है, जब वसा (फैट्स) के अणु लीवर की कोशिकाओं में जमा हो जाते हैं , ऐसा मोटापे और मधुमेह के कारण होता है । रिसर्च से पता चलता है कि मोटापे और डायबिटीज से पीडि़त 70 से 90 फीसदी लोग इस बीमारी से ग्रस्त होते हैं , फैटी लीवर की बीमारी वर्षों तक खामोश रहती है । एक बार जब यह उस व्यक्ति को हो जाती है, जो शराब नहीं पीता या प्रति दिन 20 मिलीग्राम से भी कम शराब पीता है तो डॉक्टर इसे नॉन अल्कोहलिक स्टियोहेपेटाइटिस (स्टियो का मतलब वसा (फैट्स) और हेपेटाइटिस का मतलब सूजन है) या एनएएसएच कहते हैं ।

अगर एनएएसएच लीवर को इतना नुकसान पहुंचा देता है कि उसे ठीक नहीं किया जा सकता तो आगे चलकर सिरोसिस की बीमारी हो सकती है, लीवर काम करना बंद कर सकता है या फिर कैंसर भी हो सकता है । पहले से यह बताना असंभव है कि किसे सिरोसिस हो सकता है और किसे कैंसर, लेकिन फैटी लीवर की बीमारी जितने लंबे समय तक छुपा रहेगा, बीमारी का खतरा उतनी ही ज्यादा होगी ।
फैटी लीवर की बीमारी मोटापे का नतीजा है, लेकिन यह हमेशा एक खास रूप में ही नहीं नजर आती । लीवर की चर्बी उन लोगों में भी हो सकती है, जिनका न वजन ज्यादा है और न ही पेट बढ़ा हुआ है । 2010 में कोलकाता में इंस्टीट्यूट ऑफ पोस्टग्रेजुएट मेडिकल एजुकेशन ऐंड रिसर्च के शोधकर्ताओं द्वारा नमूने के तौर पर करीब दो हजार लोगों पर किए गए एक अध्ययन से चिंताजनक नतीजे सामने आए-"फैटी लीवर की बीमारी से ग्रस्त 75 फीसदी लोगों का बॉडी मास इंडेक्स (ऊंचाई के मुताबिक वजन) सामान्य से कम था, जबकि 54 प्रतिशत लोगों का वजन ज्यादा नहीं था"।

वसायुक्त लीवर (Fatty liver) लक्षणों में प्रमुख हैं- थकान, वजन घटना या भूख की कमी, कमजोरी, मितली, सोचने में परेशानी, दर्द, लीवर का बढ़ जाना और गले या बगल में काले रंग के धब्बे । डॉक्टरों का कहना है कि करीब 90 फीसदी दिल की बीमारियां नौ जोखिम वाले कारणों से होती हैं-धूम्रपान, हाई ब्लड प्रेशर, असामान्य कोलेस्ट्रॉल, डायबिटीज, असामान्य मोटापा, मनोवैज्ञानिक कारण, अपर्याप्त आहार, शराब पीना और नियमित शारीरिक गतिविधियों का अभाव,अब फैटी लीवर को दसवां कारक माना जाने लगा है । दुर्भाग्य से फैटी लीवर की बीमारी या एनएएसएच का अब तक कोई इलाज नहीं है । आहार में बदलाव, शारीरिक गतिविधि और वजन कम रखना ही एकमात्र उम्मीद है । डॉ. मिश्र कहते हैं, ''शरीर का वजन कम रखने से लाभ होता है.”लेकिन तेजी से वजन घटने से  लीवर को नुकसान होता है ।

परंतु हमने एक ऐसी दवाई खोज निकाली है जिससे वसायुक्त लीवर (Fatty liver) को 100% ठीक किया जाता है,हम 100% गारंटी लेते है आपके वसायुक्त लीवर (Fatty liver) को ठीक करने का क्योके हमने वसायुक्त लीवर (Fatty liver) का ईलाज पहेले भी बहोत बार किया हुआ है,जिसमे हमे 100% सफलता प्राप्त हुआ है । हम लोग वसायुक्त लीवर (Fatty liver) को पुर्ण: से ठीक करने के आयुर्वेदिक दवाई का खर्च 5,000/- रुपये लेते है और मरीज से ये भी कहेते है के "अगर तुम्हारा वसायुक्त लीवर (Fatty liver) 31 दिनों के अंदर ठीक नही हुआ तो हमसे 32 वे दिन 10,000/-रुपया लेकर जाना",इतना गारंटी कोई नही देता है । आप जो हमे ईलाज का शुल्क दे रहे हो उसको लाभ ना होने पर दुगने शुल्क में वापिस देने की बात को मैंने सोशल नेटवर्किंग पर ऐसे ही नही लिखा है,मुझे आयुर्वेद पर पूर्ण विश्वास है और माताराणी के प्रति पूर्ण आस्था है,जो मुझे मेरे इस कार्य मे सफल बनाता है ।

जो व्यक्ति हमसे वसायुक्त लीवर (Fatty liver) का ईलाज करवाना चाहता है,उन्हें हमसे ईलाज करवाने से पूर्व किसी लेबोरेटरी (Laboratory) से लिवर फंक्शन टेस्ट (Liver Function Test / LFT) करवाकर रिपोर्ट का कॉपी ईमेल से या फिर व्हाट्सएप के माध्यम से भेजना है । आपका रिपोर्ट देखकर आपको दवाई भेजेंगे, जिससे आपको 100% सफलता मिलेगा और आपका लिवर नॉर्मल हो जाएगा । आपका ईलाज पूर्ण होने के बाद भी आप हमें नया लिवर फंक्शन टेस्ट (Liver Function Test / LFT) रिपोर्ट भेज सकते है ।


यह एक शुद्ध आयुर्वेदिक दवा है,जिससे किसी भी प्रकार का कोई नुकसान नही होता है । ईलाज के समय मे किसी भी प्रकार का कोई परहेज नही है,जो भी आपको खाना है पीना है वह आप कर सकते हो।


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आप ईमेल से या व्हाट्सएप से हमसे संपर्क कर सकते है ।


आदेश.......

17 May 2018

बाबा वीर बुलाकी प्रत्यक्ष दर्शन साधना



शक्ति तो सभी देवी देवताओ में है परंतु इस वीर की शक्ति ही गजब की है,जहाँ अपनी बात पर रुष्ट होकर अड़ जाये तो फिर बड़े से बड़े देवी और देवता भी इनके सामने हाथ जोडते नजर आते है फिर चाहे माँ काली ही सामने क्यों ना हो । पुत्र भैरव के आगे उनकी माँ काली की भी नही चलती है क्युके भैरव हुकुम मानते है तो सिर्फ सदाशिव महाकाल का इसके आलावा किसी का नही फिर चाहे आदि शक्ति ही क्यों ना हो । ठीक उसी तरह बाबा बुलाकी के किसी अन्य के घर में प्रवेश करने पर उस घर की सारी शक्तियां खुद घर का कौन पकड़ लेती है । उस अशांत रूप में भी मानते है तो सिर्फ देवी की बात क्योकि हर देवी के स्थान पर कहीं खुलकर तो कहीं गुप्त रूप से भैरव अगवानी है और भैरव बाबा सभी देवियो के लाल माने गये है । इसलिए इस वीर की बैठ सभी देवियो के पास है,सभी देवियाँ इसकी और सभी देवियो का ये वीर बुलाकी जिसे चाहे उसे मना लें जिसका चाहे उसका हो जाएँ।

बाबा श्री वीर बुलाकी कोई और नही स्वयंम् बाबा महाकाल भैरव नाथ है,जो कलयुग में मसान भैरव की छवि के साथ बुलाकी मसान के नाम से अवतरित हुए है । बाबा बुलाकी बहोत ही पवित्र शक्ति के मालिक है इनकी छवि कुछ गंदे साधको ने गन्दी कर दी है। बाबा बुलाकी को प्रसन्न करके कुछ मुर्ख तांत्रिक मासूम लोगो पर पैसा लेकर अत्याचार करते है जैसे पति-पत्नी में झगड़ा लगवाना,लड़कियों को वश में करवाना फिर उच्चाटन करवाना,कोई भी बीमारी लगवा देना,अपघात करवाना,घर में बंधन लगवाना,मोटापा बढ़ा देना, शादी तुडवा देना,....इत्यादी ।

बाबा श्री के पहनावे और रूप रंग से देखो तो: एक ऐसा बालक वीर जो रंग से काला हाथ में सोटा एक हाथ में मदिरा पान का पात्र (खप्पर) और लाल लंगोट के साथ लँगोट धारी है।और लड्डुओं के साथ मदिरा भोग जो स्वयंम् महाकाल भैरव की छवी दिखती है।आप सभी ज्ञानी जन खुद सोचो की इस धरती पर खप्पर श्री महाकाल के बाद श्री आदि शक्ति माँ काली,माँ चंडी और माँ भवानी के बाद बाबा महाकाल भैरव के हाथ पर है । बाबा महकाल भैरव के सिवा किसी अन्य देवी देवता के हाथ पर खप्पर नही है ।

इस वीर की भक्ति नाथो की है और शक्ति नवनाथो की है , जो भी साधक इस वीर की सेवा पूजा पाठ सच्चे मन से निस्वार्थ भाव से करेगा ये वीर बाबा उस साधक को नवनाथो की सेवा में लगा देते है । फिर ये इस साधक को भुत प्रेतों की सेवा में नही रहने देते है,उस साधक को लेकर नवनाथो में और सिद्धियों में डट जाते है।

इस साधना से सभी प्रकार के कार्य किये जाते है,सिर्फ किसीका नुकसान करने का इरादा मन से निकाल डाले । ऐसा साधना प्राप्त होना बाबा श्री का कृपा ही है,आज के समय में तांत्रिको ने शाबर मंत्रो से मासूम लोगो के जिंदगी से खेल खेलना शुरू कर दिया है क्योके वो जानते है जिस पर भी बुलाकी या मसानी चढ़ा दिया जाए उसको वही तांत्रिक बुलाकी चढ़ाकर मुक्त कर सकते है । मसानी का काट बाबा श्री ही है और उनका विद्या वही काट सकते है । इस साधना से स्वयम के कार्यो के साथ साथ अन्य लोगों के भी कार्य किये जा सकते है,जिस पर बाबा श्री कृपा कर दे वो मालामाल हो जाता है और ये बात उनके सभी भक्त बिना किसी किन्तु-परंतु के मानते है ।


सामग्री:-एक बूंदी का लड्डू, एक बर्फी , दो पान का पत्ते,एक जायफल, एक सुपारी,दो लौंग,दो इलायची , ग्यारह बताशे,एक शराब की बोतल,थोडा हनुमानी वाला पीला सिन्दूर,सात हरी चूडिया,थोडे साबुत उडद के दाने ,दही बड़ा उडद का हो ।श्री बाबा वीर बुलाकी यंत्र ताबिज और रक्षा कवच,लाल धागा । इस साधना में किसी भी प्रकार का मास नहीं चढ़ाना है क्युके यह पूर्ण रूपेण तामसिक साधना नहीं है ।


विधि :-नवनाथों को प्रणाम करके शनिवार से साधना आरंभ करें और रक्षा कवच को लाल धागे में डालकर पहन ले,साधना में धूप दीप कर पूजन सामग्री को सामने रखे,एक लोटे मे जल भर कर उस मे 1 बताशा डाल दे और मिट्टी के कोरे सिकोरे में 1 लड्डू ,2 बर्फी, 1 पान का पता ,दही-बड़ा,5 बताशे रखे । लड्डू के पास 2 लौंग,2 इलायची और श्री बाबा वीर बुलाकी यंत्र ताबिज को रखे और उस पर जन्नत-ए-फिरदोस नाम के इत्र का फाहा लगा दे,उस पर आधा बॉटल शराब चढ़ाये ,बचा हुआ आधा बॉटल शराब संभालकर रखे । मन्त्र को बिना गिनती अनुमान से 90 मिनट तक जप करना है,जप करते समय दृष्टी श्री बाबा वीर बुलाकी यंत्र ताबिज पर हो जाप रात को 10.30 बजे के बाद करना है ताकि 12 बजे के बाद ही जाप पूर्ण हो जाए । जाप के उपरांत कपूर जला कर देव को अग्नि रूपी जानकर दही-बड़े का भोग,जायफल सुपारी,5 बताशे,1 पान के पत्ता और बचा हुआ आधा बॉटल शराब का भोग शराब लगाए और उसके ऊपर से तीन बार हाथ में जल लेकर घुमाये,अब 5 लौंग का अपनी कोई भी मनोकामना बोलते हुए चढ़ाये ।

मिट्टी के सिकोरे में कपूर पर भोग दी हुई सामग्री में
थोड़ी शराब भी सिकोरै में डाल दें फिर वह सिकोरा घर से बाहर कहीं आक के पौधे की जड में रख आए सिकोरा रखने के बाद कुछ उडद के दाने मन्त्र बोलते हुए आक के पौधे पर फेंके ।

साधना काल में अत्यंत सावधान रहे साधना के दौरान शराब,मछली, किसी भी प्रकार के मीट का सेवन भूल के भी ना करें ।



मंत्र:-


।। ॐ नमो आदेश गुरु का, या वीर बुलाकी मसान तार का तरकस लोहे का तीर खिचेगा वीर बुलाकी, मसाण माता का चीर लाल लड्डू लौंग सुपारी जिसपे चले वीर बुलाकी मसाण,शब्द सांचा पिंड काचा चलो मंत्र ईश्वरो वाचा,मैंने बुलाया बाटे-बाट आप आए उबाट-बाट,इसी समय वीर बुलकी मसाण प्रत्यक्ष हाजिर हो ना होतो बहन बसंती की आन,अगर इतने पर भी हजीर नी होए तो,बहन बसंती का चिरफाड लंगोटा करें,बहन बसंती से आराम करें चल चल वीर बुलाकी मसान हाजिर हो,ना हो तो दो दुहाई उस्ताद कमाल का सैयद की,दिल्ली के हजरत तख़्त की, आओ-आओ वीर बुलाकी मसान मेरे समक्ष प्रत्यक्ष हो,नहीं हो उस्ताद कमाल खान सैयद की  ****** को भंगी की लात पड़े ।।



इस मंत्र से बाबा श्री प्रत्यक्ष दर्शन दे सकते है और इस मंत्र में एक शब्द को गोपनीय रखा हुआ है जिसे प्रामाणिक साधक को बताया जाएगा । साधना कितने दिन करना है,आखरी दिन क्या करना है और बाबा श्री दर्शन दे तो उस समय उन्हें कैसे शांत करना है,यह भी गोपनीय रखा हुआ है परंतु जिन्हें जिज्ञासा हो वह इसे जानने के अधिकारी है । यह बाबा श्री का उग्र शाबर मंत्र है इसलिये इसमे बहोत सारा "आन/दुहाई" दिया हुआ है ।


अन्य जानकारी और साधना सामग्री को प्राप्त करने हेतु ईमेल से संपर्क करे-
snpts1984@gmail.com
साधना सामग्री-न्यौछावर राशि 2450/-रुपये ।



आदेश.......

7 Apr 2018

साधना ही अमूल्य है ।

यह संसार एक विचार है अगर आपने विज्ञान में छलांग लगा दी तो उसका एक अलग महत्व है अगर आपने धर्म के क्षेत्र में छलांग लगा दी उसका अपना एक अलग क्षेत्र है यह संसार रहस्यों से भरा पड़ा है। आप एक रहस्य से पदा हटाते है फिर आपके सामने दूसरे रहस्य खड़े हो जाते है जिस प्रकार आपके मन मस्तिष्क में निरंतर विचार चलते रहते है।


हम जो शब्द सुनेगे वह शाश्वत है जब हम बिल्कुल चुप होंगे तब उनके शब्द सुनाई पड़ेगें। पराम्बा से बोलना नहीं है उन्हें सिर्फ सुनना है।


कोई अल्लाह हूँ, बोल रहा है तो कोई लाहू बोल रहा है, कोई क्लींग बोल रहा है तो कोई क्लीम बोल रहा है, कोई काली बोल रहा है, कोई पराम्बा बोल रहा है ठीक उच्चारण क्या है। मुझे पता नहीं है मैं क्या करता हूँ या मैं क्या करती हूँ, तुम ही मुझे बताओ। हम ठीक उच्चारण, व्याकरण में लगे रहते है? बाल्मिकी राम-राम जपते जपते मरा-मरा कहने लगे और वह सिद्ध हो गए।


तुम्हारा मंत्र नाभि तक पहुँच जाना चाहिए जब मंत्र नाभि तक पहुँचता है। तब हम जो भी बोलते है तब वह कुछ और मंत्र होता है। और जब हम सुनते है तो वह कुछ और हो जाता है मंत्र का सीधा संबंध आपकी प्राण चेतना से है वहाँ से निकलने वाला मंत्र सीधा ईश्वर तक पहुँचता है यहीं मंत्र रहस्य है।


साधना का अर्थ यह नहीं है कि बुराई को छोड़ो और भलाई को पकड़ो, साधना का वास्तविक अर्थ है बुराई से सत्य की तरफ आगे बढ़ो उस पर विजय प्राप्त करो भलाई में भी सत्य की तरफ आगे बढ़ो दोनो के अनुभव का निचोड़ निकालो ताकि आपकी समझ गहरी हो जाए। क्योंकि बुराई और भलाई दोनो से साधक का हृदय विस्तीर्ण हो जाए, दोनो के बीच तुम्हें अपना सामजस्य बैठाना पड़ेगा तुम अपनी नाव को बहने दो और ताकि वह अपनी सही मंजिल सागर तक पहुँच सके। पाप और पुण्य तुम्हारे किनारे बन जाएँ तुम किसी को मत चुनना न पाप को और न ही पुण्य को अगर तुम पुण्य को चुनोगे तो भी किनारे पर ही रह जाओगे और अगत तुम पाप को चुनोगे तो भी किनारे पर ही रहोगेे सागर तक नहीं पहुँच पाओगे जो दोनो का सही उपयोग कर लेगा उसमें सामंजस्य स्थापित कर लेगा तुम अपनी बुराई से भी भयभीत मत होना ।

मंत्र तंत्र यंत्र यह कोई भयभीत करने हेतु नही है अपितु यह तो जीवन का वह सच है जिसे सामान्य व्यक्ति सहजता से स्वीकृति नहीं दे पाता हसि ।आप अपने जीवन को सामान्य जीवन ना बनाये और किसी भी प्रकार का मतभेद दिमाग मे नही पाले,किसी भी मंत्र तंत्र साधना हेतु जाती धर्म समाज का कोई पाबंदी नहीं है । इस संसार मे दो जातीया है "स्त्री और पुरूष" जाती,धर्म एक ही है "मानवता",जब यह सच्चाई है तो क्यो साधना से भागना,क्यों बुराई के रास्ते पर चलना? अभी समय है एकता से सब कुछ संभव करके दिखाने के लिए ।


एक छोटासा मंत्र दे रहा हु जो जीवन मे समस्त साधना में पूर्ण सफलता देने हेतू तत्पर है,मंत्र है "ॐ ऐं ह्रीं क्लीं ॐ" इसका मन ही मन उठते बैठते चलते फिरते शुद्ध अवस्था मे जाप करे तो अवश्य ही आपका रुझान तंत्र साधना के लिए बढ़ेगा ।


हमने अभी कुछ दिनों पहिले अपना youtube चैनल बनाया है और वहां पर भी आप अन्य साधनाये देख सकते है ।

https://www.youtube.com/channel/UCNkYEFtLD7KzQzqiXd6QOkg


आदेश.....

23 Mar 2018

लिवर का ईलाज (Curing the Liver)



लिवर खराब होने पर शरीर की कार्य करने की क्षमता न के बराबर हो जाती है और लिवर डैमेज का सही समय पर इलाज कराना भी जरूरी होता है नहीं तो यह गंभीर समस्या बन सकती है। गलत आदतों की वजह से लीवर खराब होने की आशंका सबसे ज्यादा होती है। गलत आदते जैसे जैसे शराब का अधिक सेवन करना, धूम्रपान अधिक करना, खट्टा ज्यादा खाना, अधिक नमक सेवन आदि।

सबसे पहले लिवर खराब होने के लक्षणों को जानना बहुत जरूरी है। जिससे समय रहते आपको पता रहे और इलाज सही समय पर हो सके। भारत में दस खतरनाक रोगों में से एक है लिवर की बीमारी। हर साल तकरीब दो लाख लोग लीवर की समस्या से मरते हैं। नए शोध के अनुसार भारत में 32 फीसदी लोग लीवर की किसी न किसी समस्या से ग्रसित हैं। लेकिन इसमें से सबसे अधिक वे लोग हैं जो अधिक मात्रा में शराब का सेवन करते हैं। लिवर में बीमारी होते ही यह सिरोसिस का रूप ले लेती है जिस वजह से लिवर टाइट,गांठ या भूरा जैसे होने लगता है।

लिवर को खराब करने वाले महत्वपूर्ण कारण:-
1. दूषित मांस खाना, गंदा पानी पीना, मिर्च मसालेदार और चटपटे खाने का अधिक सेवन करना।
2. पीने वाले पानी में क्लोरीन की मात्रा का अधिक होना।
3. शरीर में विटामिन बी की कमी होना।
4. एंटीबायोटिक दवाईयों का अधिक मात्रा में सेवन करना।
5. घर की सफाई पर उचित ध्यान न देना।
6. मलेरिया, टायफायड से पीडित होना।
7. रंग लगी हुई मिठाइयों और कोल्डड्रिंक्स का प्रयोग करना।
8. सौंदर्य वाले कास्मेटिक्स का अधिक इस्तेमाल करना।
9. चाय, काफी, जंक फूड आदि का प्रयोग अधिक करना।

लिवर प्रत्यारोपण-
लिवर जब पूरी तरह से खराब हो जाता है तब इसका एक ही इलाज बचता है वह है लिवर प्रत्यारोपण। यह एक कठिन और खतरनाक आॅपरेशन होता है। इस अवस्था में पीड़ित इंसान के लिवर को हटा के नए लीवर को लगाया जाता है। इसलिए यह जरूरी है कि लीवर की समस्या का शुरूआती दौर में पता चलते ही अपने खान.पान पर विशेष ध्यान देना चाहिए।

मुझसे एक 68 वर्ष की महिलाके बेटे ने संपर्क किया था,महिला का लिवर 90% खराब हो चुका था और उनका परिवार उनके बीमारी पर 40 लाख खर्च कर चुके थे परंतु उनके जिंदा रहने का कोई ज्यादा समय उनके पास नही बचा था । ऐसे समय मे उनको बेटे की आपबीती सुनकर उन्हें आयुर्वेदिक दवाओं के माध्यम से 16 दिनों में पूर्ण तरह से ठीक कर दिया । आज उनके मेडिकल रिपोर्ट देखकर विश्वास करना भी डॉक्टर लोगो के लिये कठिन हो रहा है परंतु एक बात लिखना चाहुगा के आयुर्वेद में सभी बीमारियों के इलाज है और दुनिया कोई भी बीमारी 7 दिनों से लेकर 90 दिनों में खत्म की जा सकती है । मैं पिछले 15 वर्षों से लिवर का दवाई रोगियों को दे रहा हूँ और आज तक ऐसा नही हुआ के आयुर्वेदिक दवाओं से लिवर ठीक नही हुआ होगा । लिवर कम से कम 7 दिन और ज्यादा से ज्यादा 30 दिनों में ठीक किया जा सकता है,बड़े बड़े हॉस्पिटल में लाखों रुपए खर्च करने पर भी लिवर ठीक नही होता है,ये मैने बहोत सारे रोगियों से सुना है । मैं रोगियों का सबसे पहले मेडिकल टेस्ट रिपोर्ट देखता हूं जिसमे लिवर के खराब होने के बारे में लिखा होता है,उसके बाद ही लिवर का दवा उन्हें देता हूँ और उन्हें चुनौती के साथ बोलता हूँ "अगर तुम्हारा लिवर आयुर्वेदिक दवाओं से ठीक नही हुआ तो 95% पैसा रिफंड मेरे से ले लेना " । लोगो को लाखों रुपए खर्च करके भी आराम नही मिलता और यहां हम लोग सिर्फ 5 हजार रुपए लेते है,जिसमे रोगी को आराम नही मिला तो 4500 रुपया वापिस भी कर देते है ।
कौनसा हॉस्पिटल या डॉक्टर लाखो रुपये लेने के बाद 1 रुपया भी वापिस नही देता है परंतु हम लोग रिफंड दे देते है क्योंकि हमें आयुर्वेद पर 100% विश्वास है के रोगी का रोग ठीक हो सकता है । मुझे मेरे इस कार्य के वजेसे से एक संस्थान के तरफ से 10 वर्ष का सम्मानजनक अनुभव प्रमाणपत्र भी प्राप्त हुआ है और मातारानी के कृपा से लिवर के साथ किडनी का इलाज भी कर लेता हूँ । अभी तो आज सिर्फ इन दो विषय पर ही लिखा है और भविष्य में बाकी रोगों के विषय पर भी लिखूंगा जिसमे हार्ट ब्लॉकेज, कैंसर, डाईबेटिज,ब्लड प्रेशर जैसे गंभीर बीमारियों पर आवश्यकता नुसार लिखेंगे ।

लिवर और किडनी के रोगी जिन्हें अभी तक ईलाज करने पर भी आराम ना मिला हो वह लोग अवश्य संपर्क करे,डरने की कोई बात नही है । आपको सही तरह से ठीक करना और आपको स्वास्थ्य रहने हेतु सभी प्रकार के प्रयास अवश्य करूँगा ।

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Curing the Liver

If the Liver is damaged, the body loses its capacity to function and if it is not treated well on time it can become seriously threatening to the body. Bad habits lead to Liver damage. For example, excessive drinking, excessive smoking, eating very salty food etc.

Firstly, it is important to recognise the signs of Liver damage. So that we can diagnose ourselves and get us treated on time. Every year 2 lakh people die of diseases related to Liver. According to new researchs almost 32% of Indians are afflicted by some sort of Liver disease. Most of these people are excessive drinkers. Liver damage takes the form of cirosis which can turn the Liver tight, brown or even have hard knots in it.
Main reasons for Liver diseases-

1. Having contaminated meat, drinking dirty water, eating very salty or spicy food.
2. Drinking water with excessive chlorine on it.
3. Deficiency of vitamin b
4. Having a lot of antibiotics
5. Not keeping the house clean
6. Having malaria or typhoid
7. Having coloured sweets or soda
8. Using a lot of beauty cosmetics
9. Drinking excessive coffee, tea or having too much junk food.


Liver transplant

When the Liver is damaged beyond repair, only one thing can be done. Liver transplant. It is a difficult and dangerous operation. The old Liver is removed and a new one is added. That is why if one comes to know about his Liver disease at an early stage he should keep a strict control over his diet.
I was contacted by the son of a 68 year old woman whose Liver had been damaged completely. The family hd spent 40 lakh on her treatment but it seemed nothing was working. After hearing about this from her son i treated her with ayurvedic medicines and cured her in 16 days. Even doctors find it hard to believe that she is completely cured. I would like to add that all the world's diseases can be cured with ayurveda, within 7-90 days. The Liver diseases can be cured within 7-30 days at the best. I always see my patients test report and then give them the medicine along with the challenge that if it doesn't work I'll refund 95% of your money. We take only 5000 rs for the treatment, unlike hospitals that charge lakhs of rupees, and 4500 is refunded if the patient does not feel better. No hospitals offer refund, but we do, because we have 100% faith on ayurvedic medicine. Because of this work, I have received a respectful certificate from an institute validating my 10 years of experience and by the grace of the goddess i can even treat kidneys
I've written only on two topics today, but I'll write more, including heart blockage, cancer, diabetes, blood pressure, etc.

All those Liver and kidney patients who haven't had relief anywhere else feel free to contact me, don't worry. I will do my best to treat you and make you healthy again.

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20 Mar 2018

बाबा अघोरी साधना



आप सभी को मैं एक बाबा अघोरी की साधना दे रहा हूं, बाबा अघोरी वह है जो "जूनागढ़ में अघोरियों के बाबा कहलाते हैं" । जैसे हमने सुना है देवाधिदेव महादेव वैसे ही अघोरियों के अघोरी जिनका नाम बाबा अघोरी है , बाबा अघोरी वहा एक शक्ति के पुत्र माने जाते हैं और काल भैरव के भक्त माने जाते हैं,जो किसी भी हाल में अपने भक्तों पर अन्याय नहीं होने देते और जब भी उनके भक्तों पर अन्याय होता है तो वह अपना सोटा निकालते हैं,सोटा मतलब चाबुक (हंटर) और जब यह सोटा किसी पर पड़ता है तो अच्छे-अच्छे टूट जाते हैं सुधर जाते हैं,आज के समय में बहुत ऐसे लोग हैं जो तांत्रिक क्रियाओं की वजह से तांत्रिक बाधाओं की वजह से परेशान हैं और आज कल के कुछ बेकार तांत्रिक लोग कुछ पैसों के लिए किसी का भी बुरा कर देते हैं । हम हमारे जीवन में क्या-क्या संभाल सकते हैं? घर संभाले? परिवार को संभाले? या इन तांत्रिकों से लड़े? या दुनिया से लडे? जीवन बड़ा व्यस्त होता है और ऐसे समय में हमें ऐसे शक्ति की आवश्यकता है,जो हमारे जीवन में हमारे शत्रुओं से लड़ सके क्योंकि हमारे बहुत सारे ऐसे शत्रु होते हैं जिन्हें हम नहीं समझ पाते हैं,जिन्हें हम नहीं जान सकते हैं और जिन शत्रु को हम नहीं जान सकते हैं जिनको हम देख नहीं सकते हैं , तो ऐसे शत्रु को निपटने के लिए बाबा अघोरी साधना अत्यंत आवश्यक है । ऐसा साधना प्राप्त होना ही एक अद्वितीय बात है,जीवन में जब भी कुछ बनने की इच्छा रखो तो अद्वितीय बनने की इच्छा रखो । जितने भी आपके शत्रु है उन पर ऐसे वार करो कि उनकी अकल ठिकाने आ जाए । जिस दिन उनकी अकल ठिकाने आ जाएगी तो वह आपको बिना किसी वजह के परेशान करना छोड़ देंगे परंतु एक बात मैं बताना चाहूंगा बाबा अघोरी उसी को दंड देते हैं जो आपको बिना वजह से परेशान कर रहा है और आप किसी अच्छे इंसान को बिना वजह से परेशान करना चाहते हो तो गलती से भी बाबा अघोरी से मदत नही माँगे,नहीं तो लेने के देने पड़ जाएंगे । आप पर अन्याय हो रहा है और आप अन्याय से लड़ने के लिए तत्पर नहीं है,तो ऐसे ही समय पर बाबा अघोरी की साधना के माध्यम से आपको अपने शत्रुओं से लड़ना चाहिए। जीवन में सभी तो जी रहें और एक समय आएगा सभी की मृत्यु भी हो जाएगी परंतु अन्याय से डरना यह जिंदगी जीते हुए मृत्यु के समान होता है और ऐसा जीवन किस काम का कि हमारे शत्रु हम पर बुरी क्रियाये कर रहे हैं और हम उन क्रियाओं से निपटने के लिए कुछ भी नहीं कर पा रहे हैं । हमें हमारे शत्रु को सबक सिखाना चाहिए हमें अन्याय से लढना चाहिए, हमारे देश में जितने भी महान बने हैं या जितने भी संत महात्मा ऋषि-मुनि आए हैं,उन सभी ने हमें अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने के लिए पुकार लगाइ,वह हर बार हमें समझाते हैं कि अन्याय के खिलाफ लड़ो । इसी अन्याय के खिलाफ ही एक बहुत बड़ा युद्ध हुआ था,युद्ध का नाम है महाभारत और हमे कोई महाभारत तो नहीं करना है परंतु हमें हमारे शत्रु को हमें परेशान करने से भी रोकना है और इसके लिए हमें बाबा अघोरी से सहायता प्राप्त करनी है । यह साधना किसी भी कृष्ण पक्ष की अष्टमी से प्रारंभ कर सकते हैं। 


साधना 11 दिन की है , दक्षिण दिशा में मुख होना चाहिए,साधना रात्रि में 9 बजे के बाद करना है, काला आसन होना चाहिए , काले वस्त्र पहनना आवश्यक है , सिर के बाल काले वस्त्र से छुपाने हैं, जैसे हम गुरुद्वारे में जाते हैं तो हम सर पर जैसे बांधते हैं उसी तरह से बांधना है । अगर कोई महिला साधना कर रही है तो उन्हें भी काली साड़ी पहननी पड़ेगी । सामने सरसों के तेल का दीपक जलाना है , दीपक मिट्टी होना चाहिए, दीपक की ओर देखते हुए ही यह मंत्र का जाप करना है । साधना में आपको ढेर सारे अनुभव हो सकते हैं , दीपक की लौ में बाबा अघोरी का दर्शन देना भी एक अनुभव हो सकता है , बाबा जी के कृपा से आपको जीवन में धन धान्य ऐश्वर्य सुख समृद्धि मिल सकती है,हो सकता है कि आपको प्रत्यक्ष दर्शन दें और पूछें बेटा बोलो आपकी क्या कामनाएं है? आप क्या चाहते हो? ऐसे वक्त आपको आपकी कामना बोलनी है । एक काम कीजिए कि जैसे बाबा जी का दर्शन हो तो अपनी तुच्छ इच्छाओं को मत मांगे ।


मंत्र:-
।। अघोरीयो का अघोरी बाबा अघोरी,कालभैरव का भगत  दिखाओ रे अपना सोटा,जहा-जहा तेरा सोटा पड़े वहां-वहां मेरा दुश्मन टूटे,दुश्मन मेरा कौन तू ही जाने,ना जाने तो कैसा  अघोरीयो का बाबा अघोरी कहलाए ।।



साधना में बाबा अघोरी को सात्विक भोग चढ़ाए, वैसे इनको तामसिक भोग चढ़ाया जाता है परंतु यह जरूरी नही है । आप चाहे तो पाँच प्रकार का मिठाई चढ़ा सकते है,चढ़ाया हुआ भोग दूसरे दिन बच्चो में बाट दे और भोग रोज 11 दिनों तक चढ़ाना है । मंत्र जाप रुद्राक्ष माला से ही करे,नित्य कम से कम 3 माला जाप रोज करे । साधना के 11 दिन के समय मे नित्य शिव मंदिर दर्शन हेतु जाना जरूरी है और शिव जी से नित्य साधना सफलता हेतु प्रार्थना अवश्य करे ।


इस साधना को वर्ष में दो-तीन बार अवश्य किया करे ताकि आपके जीवन मे शत्रु बाधा ना रहे और आप बाबा की कृपा से जीवन मे उन्नति करते रहे,साधना से किसी भी प्रकार का कोई नुकसान नही होता है इसलिए दिमाग से डर को निकाल भगाए ।



आदेश.......

19 Mar 2018

डाईन सिद्धि और रक्षा कवच


प्राय: सभी गांव में अभिचार कर्म करने वाली चार या पांच औरतें या मर्द होते हैं जो अपनी ईर्ष्या के वश मे आकर दूसरों के ऊपर षट्कर्म करती हैं, ये डाईन कहलाती हैं इनके ईष्ट "दरहा भूत" या शक्तिशाली भूत होते हैं,ये हमेशा दूसरों अपनी तंत्र क्रिया द्वारा दुख ही देती हैं,इनके कर्म को गांव मे प्रत्यक्ष रूप मे कोई नहीं जानता है । इनके कर्म का कोई सबूत नहीं होता,न ही इनके पूजा पाठ का कोई सबूत मिलता है । इनका तंत्र अत्यंत शक्तिशाली होता है, इनके परिवार वाले भी इनकी क्रियाओं को नही जानते,जैसे जैसे ये बूढ़े होते जाते हैं इनकी शक्ति बढ़ती जाती है । इनका मंत्र सिर्फ दो तीन शब्दों का होता है जिस परिवार को अत्यअधिक दुख देना हो उनके यहां अपने माहवारी कपड़े से जुक्ति बनाकर मंत्र शक्ति से उनके घर के दरवाजे मे गाड़ देती हैं जिससे वहां किसी भी देवी देवता का प्रवेश निषेध हो जाता है और उनके द्वारा लगाया गया भूत लंबे समय तक दुख देता रहता है ।

इनकी साधना बड़ी ही गोपनीय तरीके से होती है ये दीपावली के दिन अपने गांव को मंत्र से बांध कर शमसान में 8-10 के ग्रूप मे एकत्र होकर अपने गुरू डाईन के समक्ष नग्न होकर कमर में झाड़ू लपेटकर अपने मल मूत्र से जमीन को लीपकर गोल घेरे बनाकर रातभर नाचती हैं और अपनी शक्ति बढ़ाती हैं ।

पहली बार ये अनजाने में या जानबूझकर इस विद्या को सीखती हैंं,तब इनके गुरू मंत्र सिखाने के बाद सिद्धी के लिए बलि मांगती हैं वो भी इनके पति या प्रिय पुत्र की बलि,इंकार करने पर ये पागल हो जाती हैं और हां कहने पर बलि के लिए नियुक्त व्यक्ति अपने आप मर जाता है और गांव मे या परिवार मे किसी को कुछ पता भी नही चलता है इनकी सिद्धी होने के बाद ये पेड़ पौधों,पालतू जानवर,पक्षीआदि पर प्रयोग करना प्रारंभ कर देते हैं बाद मे मनुष्यों पर प्रयोग करते हैं ।

बहुत सी ( 99%) डाईन इस विद्या को सीखना नहीं चाहती हैं क्योंकि इनका भविष्य अत्यंत दुखदायी कष्टप्रद होती है ये बात गांव के सभी लोग जानते हैं किंतु जो सीनियर या बुजुर्ग डाईन होते हैं उन्हेंअपना चेला बनाना अति आवश्यक होता है स्वयं की मृत्यु से पहले चार या पांच चेला बनाना उनकी मजबूरी होती है,नहीं तो उनके ईष्ट भूत स्वयंको बहुत तंग करता है इसलिए वो ऐसे स्त्री या पुरूष को चुनती हैं जिनके अंदर ईर्ष्या की भावना बहुत ज्यादा हो या अपने ही परिवार के किसी सदस्य को चुनती हैं उन्हें अपने वश मे करके अपने साथ घुमाती फिराती हैं और चार पांच मंत्र सिखा देती हैं इस तरह से चेला बनाने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है । इसके अलावा वो कम उम्र की अपने ही परिवार की एक या दो लड़की के ऊपर शक्तिपात कर देती हैं ताकि उस लड़की जितने साल बाद भी विवाह हो उसके बाद लड़की के उपर अपने आप की गुन (विद्या) जागृत होने लगते हैं सपने में मंत्र और विधि मिलने लगती है इस तरह से डाईन बनने की प्रक्रिया होती है ।

डाईन लोगों के गुन को परमानेंट भ्रष्ट नहीं किया जा सकता है इनसे हर व्यक्ति डरता है और नफरत करता हैं इनकी मौत अत्यधिक दर्दनाक और कष्टदायी होती है इनकी आयु अत्यधिक लंबी होती है इसके अलावा ये दूसरों की उम्र चुराकर बहुत लंबी उम्र तक जीते हैं जैसे जैसे ये बूढ़ी होती है वैसे वैसे इनकी शक्ति बढ़ती जाती है इस तरह के कार्य करने वा मर्द को डईया कहा जाता है किंतु डाईन की संख्या डईया से तीगुना तक होती है डाईन अत्यधिक चालाक और शातिर होती हैं ।

एक वरिष्ठ डाईन के ऊपर मारण क्रिया करना बहुत ही कठिन है कोई उच्च कोटि का अघोरी ही कर सकता है क्योंकि क्योंकि इनका ईष्ट भूत चौबीस घंटा इनकी सुरक्षा करता है और इनका पिण्ड चौबीस घंटा बंधा रहता है उसपर भी ये हर पल ये सतर्क रहते हैं इसके अलावा इनके परिवार के किसी सदस्य पर भी कोई तांत्रिक क्रिया या मारण क्रिया नहीं कर सकता, चाहे कहीं भी रहें,क्योंकि इनका पिण्ड भी हमेशा बंधा रहता है इनके हर पल की खबर डाईन को ईष्ट भूत देता रहता है वह एक कर्ण पिशाचिनी की तरह कार्य करता है इसी कारण डाईन के परिवार बेफिक्र और खुशी खुशी रहते हैं उनकी खेती बाड़ी और गाय बैल सभी पूरी तरह सुरक्षित रहते हैं एक डाईन दूसरे डाईन के परिवार वालों को भी दुख नहीं पहुंचा सकती,और किसी साधारण परिवार के ऊपर किया गया तांत्रिक क्रिया को बिल्कुल ठीक नहीं कर सकती है,ये सिर्फ दुख देने का काम कर सकती है ठीक करने का काम नही कर सकती है किंतु हां स्वयं के द्वारा किये गये तांत्रिक क्रिया को स्वयं अपनी इच्छा से जब चाहे तब ठीक कर सकता है किंतु ऐसा वो जब तक स्वयं पर बहुत ज्यादा दबाव न पड़े तब तक बिल्कुल नहीं करती हैं । ये उन्हीं परिवार वालों को दुख देती हैं जो धार्मिक,आध्यात्मिक और सीधे साधे हों,उनपरिवार वालों सेडरती हैं जो क्रिमनल प्रवृत्ति के हों,एक डाईन के पास परिवार को बर्बाद करने के लिए हजारों तरीके होते हैं ।

एक डाईन के तांत्रिक क्रिया का आजीवन कोई सबूत नहीं मिलता,ना ही प्रत्यक्ष कोई प्रमाण मिलता है यदि कोई किसी को डायरेक्ट डाईन कह दे तो वो बना गवाह के भी पुलिस थाने मे रिपोर्ट लिखा सकती है और कहने वाले के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्यवाही हो जाती है गांव के लोग चाहकर भी इनका कुछ नहीं बिगाड़ सकते,हां निरंतर किसी न किसी से चपके चुपके इनपर मारण क्रिया करवाते रहते हैं इसी उम्मीद से कि शायद किसी का कोई असर हो जाए ,कभी कभी किसी किसी का किस्मत भूले भटके साथ दे भी देता है और डाईन की मृत्यू हो जाती है ।
साधारणतया हम लोग सोंचते हैं कि डायन एक अत्यंत खतरनाक,कालीऔर कुरूप दिखने वाली बुढ़िया होगी,जैसा कि टी वी सीरियल मे हम देखते हैं जबकि हकीकत मे ऐसा कुछ नही है । डाईन तो अत्यंत सुन्दर,बदसूरत,गोरी, काली,18-20 साल की या 50-100 साल की भी हो सकती है,बी.ए. या एम.ए.पढ़ी लिखी या अनपढ़ भी हो सकती है नौकरी पेशा वाली या गृहणी भी सकती है किसी बहन, माँ, भाभी, पत्नी कोई भी हो सकती है,इनकी कोई विशेष पहचान नही होती,आज जो साधारण स्त्री है एक साल बाद डाईन बन जाएऔर किसी को पता भी न चले ऐसा भी होता है ।

डाईनों के पास मुठ मारण,भूत लगाने की विधी और सबसे खतरनाक विद्या "बान मारण" होती है बान 32 प्रकार का होता है जैसे:-चाऊर बान,सुई बान,लोहा बान सरसों बान इत्यादि । सभी एक से बान एक से बढ़कर एक खतरनाक होता है,किसी से एक पल मे लकवा मार देता है किसी से एक पल में फड़फड़ाकर वहीं पर मृत्यु हो जाती है जिसे डॉ. लोग हार्ट अटैक से मौत बता देते हैं ।

इसीलिए डईनों से उलझने से हर कोई डरता है,ये लोग कुछ भी करने में सक्षम होते हैं,जब मन किया कुत्ता या बिल्ली बनकर दूसरों के यहां सेंध मारने जाते हैं,या भूत को सांप बनाकर जिसे चाहे उसे कटवा देते हैं और उनकी मृत्यू होना निश्चत है बड़े स बड़े पेड़ को मरवा देना बाद मे जिंदा करना सामान्यतः इनका शक्ति परीक्षण होता है,विवाह के दौरान दूल्हा दूल्हन पर विशेष तौर पर भूत लगाया जाता है और पहले बच्चे के जन्म पर भी भूत लगाया जाता है कई बच्चों बचपन मे ही भूत लगाया जाता है जिसका लक्षण जवान होने पर पढ़ ना पाना,बार बार बिमार पड़ना,नौकरी न लगना,शादी न हो पाना या पागल हो जाना आदि के रूप मे दिखाई देता है कई बार डाईन लोग दूसरे डाईन के नाम से भूत लगा देते हैं ताकि स्वयं पकड़ मे नही आती और दूसरी डाईन व्यर्थ मे बदनाम होती है इस तरह ये हजारों प्रकार से दुख देते हैं जिसे पूरी तरह से फेस बुक मे व्याख्या कर पाना संभव नहीं | मेरी तरफ से संक्षेप मे ये सामान्य जानकारी है और डाईन से बचने हेतु अवश्य ही रक्षा कवच धारण करे,डाईन रक्षा कवच का निर्माण गोपनीय विधि-विधान से किया जाता है जिसमे जड़ी-बूटियों का इस्तेमाल होता है ।

जो साधक डाईन को सिद्ध करना चाहते है उनके लिए विशेष प्रकार के सामग्री का निर्माण किया जाएगा और साधक यह साधना किसी भी अमावस्या से घर पर बैठकर ही कर सकते है ।

अधिक जानकारी हेतू ईमेल से संपर्क करे-
snpts1984@gmail.com


आदेश....

14 Mar 2018

कूलदेवी/कुलदेवता पूजन पद्धती ।



समस्त ब्रह्माण्ड जिससे चालयमान है वह है शिव , और जो स्वयं शिव को चालयमान बनाती है वह है  उनकी शक्ति, आदिशक्ति । बिना आदिशक्ति के शिव भी अचल है। वह शक्ति ही है जो शिव परिपूर्ण करती है । यह आदिशक्ति भिन्न भिन्न रूपों में ब्रह्माण्ड की समस्त सजीव और निर्जीव वस्तुओं में विद्यमान है। यही शक्ति देवताओं में, असुरों में , यक्षों में , मनुष्यों में, वनस्पतियों में, जल में थल में , संसार के प्रत्येक पदार्थ में भिन्न भिन्न मात्रा में उपस्थित है। और देवताओं की शक्ति को हम उन देवो के नामों से जानते है जैसे – महेश्वर की शक्ति माहेश्वरी , विष्णु की शक्ति वैष्णवी , ब्रह्मा की शक्ति ब्रह्माणी , इंद्र की इंद्राणी , कुमार कार्तिकेय की कौमारी , इसी प्रकार हम देवों की शक्तियों को उन्ही के नाम से पूजते हैं।
कुल देवता या देवी हमारे वह सुरक्षा आवरण हैं जो किसी भी बाहरी बाधा, नकारात्मक ऊर्जा के परिवार में अथवा व्यक्ति पर प्रवेश से पहले सर्वप्रथम उससे संघर्ष करते हैं और उसे रोकते हैं, यह पारिवारिक संस्कारो और नैतिक आचरण के प्रति भी समय समय पर सचेत करते रहते हैं, यही किसी भी ईष्ट की आराधना करे वह उस ईष्ट तक नहीं पहुँचता, क्योकि सेतु कार्य करना बंद कर देता है, बाहरी बाधाये,अभिचार आदि, नकारात्मक ऊर्जा बिना बाधा व्यक्ति तक पहुँचने लगती है, कभी कभी व्यक्ति या परिवारों द्वारा दी जा रही ईष्ट की पूजा कोई अन्य बाहरी वायव्य शक्ति लेने लगती है, अर्थात पूजा न ईष्ट तक जाती है न उसका लाभ मिलता है, ऐसा कुलदेवता की निर्लिप्तता अथवा उनके कम सशक्त होने से होता है।

कुलदेवी कभी भी अपने उपासकों का अनिष्ट नहीं करती।
कुलदेवियों की पूजा ना करने पर उत्पन्न बाधाओं का कारण कुलदेवी नहीं अपितु हमारे सुरक्षा चक्र का टूटना है। देवी अथवा देवता तब शक्ति संपन्न होते हैं जब हम समय-समय पर उन्हें हवियाँ प्रदान करते हैं व नियमित रूप से उनकी उपासना करते हैं। जब हम इनकी उपासना बंद कर देते हैं तब कुलदेवी तब कुछ वर्षों तक तो कोई प्रभाव ज्ञात नहीं होता, किन्तु उसके बाद जब सुरक्षा चक्र हटता है तो परिवार में दुर्घटनाओं, नकारात्मकता ऊर्जा “वायव्य” बाधाओं का बेरोक-टोक प्रवेश शुरू हो जाता है, उन्नति रुकने लगती है, पीढ़िया अपेक्षित उन्नति नहीं कर पाती, संस्कारों का भय, नैतिक पतन, कलह, उपद्रव, अशांति शुरू हो जाती हैं, व्यक्ति कारण खोजने का प्रयास करता है कारण जल्दी नहीं पता चलता क्योंकि व्यक्ति की ग्रह स्थितियों से इनका बहुत मतलब नहीं होता है, अतः ज्योतिष आदि से इन्हें पकड़ना मुश्किल होता है, भाग्य कुछ कहता है और व्यक्ति के साथ कुछ और घटता है। कुलदेवता या देवी सम्बन्धित व्यक्ति के पारिवारिक संस्कारों के प्रति संवेदनशील होते हैं और पूजा पद्धति, उलटफेर, विधर्मीय क्रियाओं अथवा पूजाओं से रुष्ट हो सकते हैं, सामान्यतया इनकी पूजा वर्ष में एक बार अथवा दो बार निश्चित समय पर होती है।

यदि अपने कुलदेवता के स्थान पर किसी अन्य देवता का नामजप किया जाए, तो केवल उस देवता द्वारा प्रतिनिधित्व किए जानेवाले तत्त्वों का संवर्धन होगा किन्तु वह आध्यात्मिक उन्नति में प्रभावी रूप से सहायक नहीं होगा । जिस प्रकार माता-पिता से भिन्न व्यक्ति हम पर माता-पिता के समान कृपा नहीं करता उसी प्रकार अन्य देवता हम पर कृपा तो करते हैं किन्तु वह कृपा केवल उन्हीं तत्त्वों की होगी जिनका वह देवता प्रतिनिधि है। अतएव यह अपने कुलदेवता के नामजप की भांति अथवा जन्मगत धर्मानुसार देवता के नामजप की भांति प्रभावी नहीं होता । अतः किसी अन्य देवता अथवा अपने इष्ट देव की उपासना करना गलत नहीं है। परंतु इसके लिए हमें हमारी कुलदेवी की उपेक्षा नहीं करना चाहिये और नियमित रूप से पूर्ण श्रद्धा से कुलदेवी की उपासना अवश्य करते रहना चाहिए और हर समय इनका ध्यान करना चाहिए। यदि आप नहीं जानते कि आपकी कुलदेवी कौन है तो पूजा के लिए यह विधि कर सकते हैं "जिन्हें कुलदेवी की जानकारी नहीं है उनके लिए पूजा विधि"।

ऐसे लोगों के लिए हम एक पूजा-साधना प्रस्तुत कर रहे हैं। जिसके माध्यम से आप अपनी कुलदेवी की कमी को पूरा कर सकते हैं और एक सुरक्षा चक्र का निर्माण आपके परिवार के आसपास हो जाएगा | घर में क्लेश, बार-बार होने वाली बिमारियों, उन्नति में होने बलि बाधाओं इत्यादि  सभी समस्याओ के लिये कुलदेवी /कुल देवता साधना ही सर्वश्रेष्ठसाधना है। चूंकि अधिकतर कुलदेवता /कुलदेवी शिव कुल से सम्बंधित होते हैं ,अतः इस पूजा साधना में इसी प्रकार की ऊर्जा को दृष्टिगत रखते हुए साधना पद्धती अपनाई गयी है |



सामग्री :-

४ पानी वाले नारियल,लाल वस्त्र ,१० सुपारिया ,८ या १६ शृंगार कि वस्तुये ,पान के १० पत्ते , घी का दीपक,कुंकुम ,हल्दी ,सिंदूर ,मौली ,पांच प्रकार कि मिठाई ,पूरी ,हलवा ,खीर ,भिगोया चना ,बताशा ,कपूर ,जनेऊ ,पंचमेवा ।



साधना विधि :-

सर्वप्रथम एक लकड़ी के बाजोट या चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं |उस पर चार जगह रोली और हल्दी के मिश्रण से अष्टदल कमल बनाएं |अब उत्तर की ओर किनारे के अष्टदल पर सफ़ेद अक्षत बिछाएं उसके बाद दक्षिण की ओर क्रमशः पीला ,सिन्दूरी और लाल रंग से रंग हुआ चावल बिछाएं |चार नारियल में मौली लपेटें |एक नारियल को एक तरफ किनारे सफ़ेद चावल के अष्टदल पर स्थापित करें |अब तीन नारियल में से एक नारियल को पूर्ण सिंदूर से रंग दे दूसरे को हल्दी और तीसरे नारियल को कुंकुम से,फिर ३ नारियल को मौली बांधे |इस तीन नारियल को पहले वाले नारियल के बायीं और क्रमशः अष्टदल पर स्थापित करें |प्रथम बिना रंगे नारियल के सामने एक पान का पत्ता और अन्य तीन नारियल के सामने तीन तीन पान के पत्ते रखें ,इस प्रकार कुल १० पान के पत्ते रखे जायेंगे |अब सभी पत्तों पर एक एक सिक्का रखें ,फिर सिक्कों पर एक एक सुपारियाँ रखें |प्रथम नारियल के सामने के एक पत्ते पर की सुपारी पर मौली लपेट कर रखें इस प्रकार की सुपारी दिखती रहे ,यह आपके कुल देवता होंगे ऐसी भावना रखें |अन्य तीन नारियल और उनके सामने के ९ पत्तों पर आपकी कुल देवी की स्थापना है | इनके सामने की सुपारियों को पूरी तरह मौली से लपेट दें |अब इनके सामने एक दीपक स्थापित कर दीजिये |

अब गुरुपूजन और गणपति पूजन संपन्न कीजिये | अब सभी नारियल और सुपारियों की चावल, कुंकुम, हल्दी ,सिंदूर, जल ,पुष्प, धुप और दीप से पूजा कीजिये | जहा सिन्दूर वाला नारियल है वहां सिर्फ सिंदूर ही चढ़े बाकि हल्दी कुंकुम नहीं |जहाँ कुमकुम से रंग नारियल है वहां सिर्फ कुमकुम चढ़े सिन्दूर नहीं |बिना रंगे नारियल पर सिन्दूर न चढ़ाएं ,हल्दी -रोली चढ़ा सकते हैं ,यहाँ जनेऊ चढ़ाएं ,जबकि अन्य जगह जनेऊ न चढ़ाए | इस प्रकार से पूजा करनी है | अब पांच प्रकार की मिठाई इनके सामने अर्पित करें | घर में बनी पूरी -हलवा -खीर इन्हें अर्पित करें |चना ,बताशा केवल रंगे नारियल के सामने अर्थात देवी को चढ़ाएं और आरती करें |साधना समाप्ति के बाद प्रसाद परिवार मे ही बाटना है,श्रृंगार पूजा मे कुलदेवी कि उपस्थिति कि भावना करते हुये श्रृंगार सामग्री तीन रंगे हुए नारियल के सामने चढा दे और माँ को स्वीकार करने की विनती कीजिये ।

इसके बाद हाथ जोड़कर इनसे अपने परिवार से हुई भूलों आदि के लिए क्षमा मांगें और प्राथना करें की हे प्रभु ,हे देवी ,हे मेरे कुलदेवता या कुल देवी आप जो भी हों हम आपको भूल चुके हैं ,किन्तु हम पुनः आपको आमंत्रित कर रहे हैं और पूजा दे रहें हैं आप इसे स्वीकार करें | हमारे कुल -परिवार की रक्षा करें |हम स्थान ,समय ,पद्धति आदि भूल चुके हैं ,अतः जितना समझ आता है उस अनुसार आपको पूजा प्रदान कर रहे हैं ,इसे स्वीकार कर हमारे कुल पर कृपा करें |

यह पूजा नवरात्र की सप्तमी -अष्टमी और नवमी तीन तिथियों में करें |इन तीन दिनों तक रोज इन्हें पूजा दें ,जबकि स्थापना एक ही दिन होगी | प्रतिदिन आरती करें ,प्रसाद घर में ही वितरित करें ,बाहरी को न दें |सामान्यतय पारंपरिक रूप से कुलदेवता /कुलदेवी की पूजा में घर की कुँवारी कन्याओं को शामिल नहीं किया जाता और उन्हें दीपक देखने तक की मनाही होती है ,किन्तु इस पद्धति में जबकि पूजा तीन दिन चलेगी कन्याएं शामिल हो सकती हैं ,अथवा इस हेतु अपने कुलगुरु अथवा किसी विद्वान् से सलाह लेना बेहतर होगा |कन्या अपने ससुराल जाकर वहां की रीती का पालन करे |इस पूजा में चाहें तो दुर्गा अथवा काली का मंत्र जप भी कर सकते हैं ,किन्तु साथ में तब शिव मंत्र का जप भी अवश्य करें |वैसे यह आवश्यक नहीं है ,क्योकि सभी लोग पढ़े लिखे हों और सही ढंग से मंत्र जप कर सकें यह जरुरी नहीं |

साधना समाप्ति के बाद सपरिवार आरती करे | इसके बाद क्षमा प्राथना करें |तत्पश्चात कुलदेवता /कुलदेवी से प्राथना करें की आप हमारे कुल की रक्षा करें हम अगले वर्ष पुनः आपको पूजा देंगे ,हमारी और परिवार की गलतियों को क्षमा करें हम आपके बच्चे हैं |तीन दिन की साधना /पूजा पूर्ण होने पर प्रथम बिना रंगे नारियल के सामने के सिक्के सुपारी को जनेऊ समेत किसी डिब्बी में सुरक्षित रख ले |तीन रंगे नारियल के सामने की नौ सुपारियों में से बीच वाली एक सुपारी और सिक्के को अलग डिब्बी में सुरक्षित करें ,जिस पर लिख लें कुलदेवी |अगले साल यही रखे जायेंगे कुलदेवी /कुलदेवता के स्थान पर |अन्य वस्तुओं में से सिक्के और पैसे रुपये किसी सात्विक ब्राह्मण को दान कर दें |प्रसाद घर वालों में बाँट दें तथा अन्य सामग्रियां बहते जल अथवा जलाशय में प्रवाहित कर दें |

                                                                  सादर आभार,
                                                           - श्री संजय शर्मा जी.
                                     


आदेश.......

12 Mar 2018

महाकाल स्तोत्र एवं मंत्र साधना ।







आकाशे तारकं लिंगं पाताले हाटकेश्वरम् । भूलोके च महाकालो लिंड्गत्रय नमोस्तु ते ॥

अर्थात:आकाश में तारक लिंग, पाताल में हाटकेश्वर लिंग तथा पृथ्वी पर महाकालेश्वर ही मान्य शिवलिंग है।


इस स्तोत्र को भगवान् महाकाल ने खुद भैरवी को बताया था  । इसकी महिमा का जितना वर्णन किया जाये कम है। इसमें भगवान् महाकाल के विभिन्न नामों का वर्णन करते हुए उनकी स्तुति की गयी है । शिव भक्तों के लिए यह स्तोत्र वरदान स्वरुप है । नित्य एक बार जप भी साधक के अन्दर शक्ति तत्त्व और वीर तत्त्व जाग्रत कर देता है । मन में प्रफुल्लता आ जाती है । भगवान् शिव की साधना में यदि इसका एक बार जप कर लिया जाये तो सफलता की सम्भावना बड जाती है ।

भगवान शंकर के अनेकों नाम है। भक्त भिन्न-भिन्न नामों से इनका गुणगान करते हैं, कोई महादेव तो कोई भोलेनाथ, कोई अघोरी तो कोई शंभु। भोलेनाथ के अलग-अलग रूपों के कारण ही उनके इतने नाम हैं। इन्हें तंत्र साधना का जनक भी कहा जाता है, इसलिए कोई भी तंत्र साधना उनके बिना पूरी नहीं होती। जो व्यक्ति सच्ची श्रद्धा से इनकी अराधना करता है, उसके जीवन से बड़े-बड़े कष्ट दूर हो जाते हैं। भगवान शिव का एक स्वरूप महाकाल का भी है, यानि वे मृत्यु को भी अपने वश में रखते हैं। महामृत्युंजय मंत्र के विषय में तो यह भी माना जाता है कि वह आसन्न मृत्यु को भी टाल सकता है। लेकिन बहुत ही कम महाकाल स्तोत्रं के बारे में जानते हैं, जिसे स्वयं भगवान शिव ने भैरवी को बताया था। इस स्तोत्रं में भगवान शिव के विभिन्न स्वरूपों की स्तुति की गई है। धार्मिक ग्रंथों की मानें तो यह स्तोत्रं भगवान शिव के भक्तों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है।

प्रतिदिन बस एक बार इस स्तोत्रं का जाप भक्त के भीतर नई ऊर्जा और शक्ति का संचार कर सकता है। इस स्तोत्रं का जाप आपको सफलता के बहुत निकट लेकर जा सकता है।

स्तोत्र को महाकाल मंत्र से संपुटित करके पढ़िए तो इसका आपको शीघ्र परिणाम प्राप्त होगा । इस स्तोत्र के साथ भगवान महाकाल जी के प्रिय मंत्र का जाप 11 बार करना है, यह एक ऋषियो का भक्तों के लिए वरदान है ।



सर्वप्रथम मंत्र 11,21 या 108 बार पढ़े,फिर स्तोत्र का 1,5,7,9,11 या 108 बार पाठ करे-

मंत्र-
।।हूं हूं महाकाल प्रसीद प्रसीद ह्रीं ह्रीं स्वाहा ।।






स्तोत्र-

ॐ महाकाल महाकाय महाकाल जगत्पत
महाकाल महायोगिन महाकाल नमोस्तुते
महाकाल महादेव महाकाल महा प्रभो
महाकाल महारुद्र महाकाल नमोस्तुते
महाकाल महाज्ञान महाकाल तमोपहन
महाकाल महाकाल महाकाल नमोस्तुते
भवाय च नमस्तुभ्यं शर्वाय च नमो नमः
रुद्राय च नमस्तुभ्यं पशुना पतये नमः
उग्राय च नमस्तुभ्यं महादेवाय वै नमः
भीमाय च नमस्तुभ्यं मिशानाया नमो नमः
ईश्वराय नमस्तुभ्यं तत्पुरुषाय वै नमः
सघोजात नमस्तुभ्यं शुक्ल वर्ण नमो नमः
अधः काल अग्नि रुद्राय रूद्र रूप आय वै नमः
स्थितुपति लयानाम च हेतु रूपआय वै नमः
परमेश्वर रूप स्तवं नील कंठ नमोस्तुते
पवनाय नमतुभ्यम हुताशन नमोस्तुते
सोम रूप नमस्तुभ्यं सूर्य रूप नमोस्तुते
यजमान नमस्तुभ्यं अकाशाया नमो नमः
सर्व रूप नमस्तुभ्यं विश्व रूप नमोस्तुते
ब्रहम रूप नमस्तुभ्यं विष्णु रूप नमोस्तुते
रूद्र रूप नमस्तुभ्यं महाकाल नमोस्तुते
स्थावराय नमस्तुभ्यं जंघमाय नमो नमः
नमः उभय रूपा भ्याम शाश्वताय नमो नमः
हुं हुंकार नमस्तुभ्यं निष्कलाय नमो नमः
सचिदानंद रूपआय महाकालाय ते नमः
प्रसीद में नमो नित्यं मेघ वर्ण नमोस्तुते
प्रसीद में महेशान दिग्वासाया नमो नमः
ॐ ह्रीं माया – स्वरूपाय सच्चिदानंद तेजसे
स्वः सम्पूर्ण मन्त्राय सोऽहं हंसाय ते नमः ।।


फल श्रुति
इत्येवं देव देवस्य मह्कालासय भैरवी
कीर्तितम पूजनं सम्यक सधाकानाम सुखावहम।।


मंत्र-
।।हूं हूं महाकाल प्रसीद प्रसीद ह्रीं ह्रीं स्वाहा ।।




स्तोत्र पठन के बाद फिर से मंत्र का जाप करे,मंत्र का जाप उतना ही करे जितना स्तोत्र पठन से पूर्व शुरुआत में किया था ।
यह स्तोत्र तो कई पर भी किसी भी शुद्ध स्थान पर पढ़ सकते है,स्नान करने के बाद किसी भी प्रकार के वस्त्र,आसन और किसी भी दिशा में मुख करके पढ़ सकते है । जो व्यक्ति असाध्य बीमारियों से ग्रसित हो वह बेड पर या खुर्ची पर बैठकर भी कर सकते है ।

अंततः इतना ही कहूंगा के महाकाल सब जानते है,कब किसको किस समय पर क्या देना उचित है । महाकालि साधना में यह साधना प्रयोग करने से विशेष सफलता प्राप्त होती है ।

‘अकाल मृत्यु वो मरे जो काम करे चांडाल का,
काल उसका क्या करे जो भक्त हो महाकाल का'


आदेश......

25 Feb 2018

तंत्र दोष निवारण प्रयोग (Black Magic Removel)




होली हिंदु धर्म का सबसे मुख्य त्योंहार माना जाता है जिसका शास्त्रों और ज्योतिष में भी विशेष महत्व बताया गया है। ज्योतिष की दृष्टि से होलिका दहन विशेष सिद्धीदायी मानी जाती है .. मान्यता है कि होलिका दहन की रात्रि में किए गए सभी धार्मिक अनुष्ठान सिद्ध होते हैं और इनका उचित फल मिलता है। साथ ही ये भी मान्यता है कि होली की पवित्र अग्नि में सभी तरह के परेशानी, व्याधि और रोग-भय आदी को नाश करने की क्षमता होती है। ऐसे में आज आपको होलिका दहन के किए जाने वाले एक ऐसे ही विशेष प्रयोग के बारे में बता रहा हु,जिसके जरिए आप जीवन की सारी परेशानियों और चिंताओं से मुक्ति पा सकते हैं।

तंत्र शास्त्रों के अनुसार होली की रात्रि का विशेष महत्व होता है। इस दिन किए गए टोने-टोटके, पूजा पाठ या साधना अचूक होते हैं तथा उनका फल तुरंत मिलता है। इस दिन किसी दूसरे के द्वारा किए गए काले जादू को भी तुरंत ही समाप्त किया जा सकता है।

होलिका दहन की रात को तंत्र साधना के लिए बढि़या माना जाता है। इस दिन लोग कई समस्याओं से निजात पाने के लिए तंत्र मंत्र का सहारा लेते हैं। 1 मार्च को शाम में 7 बजकर 37 मिनट पर भद्रा समाप्त हो जाएगा इसके बाद से होलिका दहन किया जाना शुभ रहेगा। वैसे शास्त्रों में बताए गए नियमों के अनुसार इस साल होलिका दहन के लिए बहुत ही शुभ स्थिति बनी हुई है। पूर्णिमा तिथि हो, प्रदोष काल हो और भद्रा ना लगा हो। इस वर्ष होलिका दहन पर ये तीनों संयोग बन रहे हैं। धार्मिक ग्रंथ और शास्त्रों के अनुसार होलाष्टक के दिनों में किए गए व्रत और किए गए दान से जीवन के कष्टों से मुक्ति मिलती है और ईश्वर का आशीर्वाद मिलता है। इस दिन वस्त्र, अनाज और अपने इच्छानुसार धन का दान करना चाहिए।

आज आपको तीव्र तंत्र बाधा दोष के निवारण हेतु एक गोपनीय तांत्रिक प्रयोग बता रहा हू, जिससे भयंकर से भयंकर तांत्रिक बाधा दोष (काला जादू) समाप्त किया जा सकता है । यह एक आसान सा साधना प्रयोग है और इस प्रयोग के बाद इसका अनुभव किया जा सकता है,यह एक शीघ्र फलदायी साधना है । ऐसा प्रयोग प्राप्त होना ही जीवन मे सौभाग्य माना जाता है,आपके साथ-साथ यह प्रयोग मैं स्वयं भी संपन्न करने वाला हूँ । यह प्रयोग प्रत्येक व्यक्ति को करना चाहिए, बड़े से बड़े तांत्रिकों से लेकर एक सामान्य व्यक्ति को भी यह प्रयोग करना आवश्यक है । इससे तांत्रिक बाधा के साथ साथ जीवन मे सफलता प्राप्ति हेतु आनेवाले बाधा का भी नाश होता है ।

साधना सामग्री-पीली सरसों  5-10 ग्राम ।

एक व्यक्ति के लिए 5-10 ग्राम पीली सरसों ठीक है परंतु अगर पुरा परिवार यह साधना करना चाहता है तो ज्यादा पीली सरसों खरीदे,पंसारी के दुकान में आपको पीली सरसों आसानी से मिल जाएगा और यह सस्ता होता है इसलिए चिंता ना करे । एक व्यक्ति का तंत्र बाधा दोष निवारण का खर्च 3-5 रुपये आता है जो ज्यादा नही है ।

साधना विधि-दाहिने हाथ मे पीली सरसों रखे,जितना आप हाथ मे ले सकते हो उतना ही लीजिए,ज्यादा लेने की आवश्यकता नही है वर्णा सरसो हाथ से मंत्र जाप के समय गिरता रहेगा ।

दाहिने हाथ मे पीली सरसों लेकर,उस पर त्राटक करते हुए मंत्र का 36 मिनट तक जाप करे । मंत्र जाप के बाद (सरसो को मुठ्ठी में बंद करे ) अपने सर से लेकर पैरो तक 7 बार मुठ्ठी में बंद पीली सरसों को उतारे और उतारने के बाद सरसो को किसी प्लेट में रख दे । फिर घर से बाहर जाकर प्लेट में रखे हुए सरसो को होलिका में डाल दे,यह प्रयोग रात्रि में 9 बजे के बाद कभी भी कर सकते है । मंत्र जाप के समय जमीन पर आसन डालकर बैठ जाये और जाप करे परंतु सरसो को उतारने के व्यक्त खड़े होकर उतारना है । दिशा,आसन, वस्त्र का कोई बंधन नही है,आपके पास किसी भी रंग की धोती या वस्त्र हो काम चल जाएगा,आसन कोई भी चलेगा और किसी भी दिशा में मुख करके साधना कर सकते हो ।



मंत्र-
।।ह्रीं ह्लीं दुं दुर्गम्च्छेदिन्यै दुं ह्लीं ह्रीं फट ।।

Hreem hleem doom durgamcchedinyai doom hleem hreem phat



मंत्र का उच्चारण साफ-साफ होना जरूरी है और इस प्रयोग के बाद इसका असर पीली सरसों को होलिका में दहन करते ही देखने मिलता है ।


आप सभी को होली के पावन अवसर की हार्दिक शुभकामनाएं



आदेश.......


Holi is considered to be one of the most important festivals of the Hindus and it also has an important place in our scriptures and astrology. According to astrology Holika dahan is considered to be an important day when one can receive Siddhis, it is believed that any saadhna done on this day becomes successful and we receive ample benefits from them. It is also believed that the pure fire of holika pyre has the power to burn away any problem or disease. Keeping this in mnd, I'm revealing a specific prayog through which you can remove all problems and obstacles in your life.

According to tantra scriptures,the night of  holi has a lot of importance. Any tona-totka, pooja or saadhna work without fail and we receive the benefits immediately. We can even remove any kind of black magic that has been done by others.
This day is used by a lot of people to free themselves of their problems through tantra mantra. On 1st March after 7:37 pm Bhadra will end and then it would be an auspicious time to burn the holika pyre. According to tantra scriptures, this year holika is going to be very auspicious. The date is a Purnima, there's Pradosh kaal, and no Bhadra. According to scriptures,  fasting done during holashtak and even donations helps to relive our life's problems and bring us closer to God. You should donate food, clothes and money according to your own capability.

Today I'm going to tell you a very strong tantra prayog, which can remove the effects of even the most powerful black magic. It is a very easy prayog, and you will experience the benefits of this very soon. Along with you even I'm going to do this prayog. Everyone, including the biggest tantriks and even the commonest of people should do this as it helps to remove the obstacles in your tantra saadhnas as well as any obstacles in your success.

What you need - yellow Mustard - 5-10 grams.

This should be enough for one person. If the whole family wants to do this saadhna, then you will have to buy more accordingly. You can get it from any local shopkeeper and it is not very costly. Only 3-5 Rs have to be spent for each person.




Saadhna vidhi

Take a fistful of yellow Mustard, don't take more than what you can handle or else it will keep falling during the mantra chant.
Take the mustard seeds in your right hand, and while doing tratak on it ( gazing without blinking your eyes), do the mantra chant. After the chant, fold your hand into a fist with the mustard inside, stand up, and then place your fist near your head, take it down to your feet and then bring it back up to your head. Do this 7 times. Place the seeds in a plate. Next, go out and throw these seeds into the holika pyre. Do this after 9 pm in the night. During the japa, sit and do the chant and also place an aasan, but, do the next step standing up. There are no rules for clothes, aasan or direction.



मंत्र-
।।ह्रीं ह्लीं दुं दुर्गम्च्छेदिन्यै दुं ह्लीं ह्रीं फट ।।

Hreem hleem doom durgamcchedinyai doom hleem hreem phat



The mantra should be pronounced clearly and this effects of this prayog are  seen the instant you throw the seeds in the pyre.
Wishing you all a happy and prosperous Holi!


Aadhesh..