इन्सानी वजूद मिट जायेगा मगर " जिन्नात " कायनात के दिन तक अस्तित्व में रहेंगे।
जीवन की प्रत्येक क्रिया तन्त्रोक्त क्रिया है॰यह प्रकृति,यह तारा मण्डल,मनुष्य का संबंध,चरित्र,विचार,भावनाये सब कुछ तो तंत्र से ही चल रहा है;जिसे हम जीवन तंत्र कहेते है॰जीवन मे कोई घटना आपको सूचना देकर नहीं आता है,क्योके सामान्य व्यक्ति मे इतना अधिक सामर्थ्य नहीं होता है के वह काल के गति को पहेचान सके,भविष्य का उसको ज्ञान हो,समय चक्र उसके अधीन हो ये बाते संभव ही नहीं,इसलिये हमे तंत्र की शक्ति को समजना आवश्यक है यही इस ब्लॉग का उद्देश्य है.
7 Sept 2018
जिन्न मंत्र साधना ( jin mantra sadhna)
इन्सानी वजूद मिट जायेगा मगर " जिन्नात " कायनात के दिन तक अस्तित्व में रहेंगे।
18 Aug 2018
ज्ञान उत्कीलन साधना
गुरु दीक्षा प्राप्त व्यक्ति के जीवन मे एक ऐसा समय आता है जिसमे वह गुरु के उपदेश को भूलते जाता है । शिष्य अपने गुरुमुख से प्राप्त मंत्रो पर संदेह करने लगता है, तो कभी कभी उसे गुरु पर अविश्वास भी होने लगता है । ऐसे स्थिति में शिष्य को गुरुमंत्र की महिमा भी गलत लगने लगती है और एक अच्छा शिष्य पतन के रास्ते पर चलने लगता है ।
"सात चक्रो का सफर है
एक को पार करो तो जानो
दूजा तो रास्ता खोल देगा
पाँचवे से आगे ही गुरु शिव रूप में दर्शन देगे
और छठवे पर पुर्णत्व देगे"।
यह शब्द मैने एक सन्यासी से सुने थे,जो सप्तचक्र जाग्रत करने के लिए सब कुछ त्याग कर बैठा था और गृहस्थ जीवन जीने वाले साधको पर हस रहा था । उसे सफलता तो नही मिली थी परंतु वह कई साधनात्मक रहस्यों से अवगत था, पहिले तो मैंने मान लिया था के वह मूर्ख है,एक ऐसा मूर्ख जो ज्ञानी होकर भी साधनात्मक जीवन से दूर रहकर यादों में खोया रहेता है । उसने एक बात बताई जो जीवन मे मृत्यु के आखरी क्षणों तक याद रहेगी "सबसे बड़ा गुरु और गुरु से बड़ा गुरु का ध्यास",ये शब्द सुनकर मैंने मान लिया के वह मूर्ख नही अपितु इस संसार का सबसे बड़ा ज्ञानी है । जिसने गुरुदीक्षा प्राप्त कर जीवन मे गुरु को प्राप्त करने का संकल्प लिया था,उसके पास साधनात्मक ज्ञान होकर भी वह सिर्फ गुरुतत्व को समजने के लिए वह कठिन उपासना में लगा हुआ था ।
आज मैं एक ऐसे विषय को आपके सामने रखने की कोशिश कर रहा हु जो शायद आप सभी के लिए आवश्यक है । "ज्ञान का उत्कीलन" शायद यह बात सुनने में नही आता है परंतु "ज्ञान के उत्कीलन" की आवश्यकता सभी को है,चाहे वह कोई भी हो । इस संसार मे जितनी भी चैतन्य शक्तियाँ अवतरित हुई है वह "ज्ञान के उत्कीलन" को समझकर ही अवतरित होती आरही है । भगवान राम सिर्फ रावण के वध हेतु धरती पर नही आये थे,उन्होंने भी इसी धराह पर गुरु से ज्ञान प्राप्त किया और अपने अद्भुत ज्ञान का उत्कीलन किया । उत्कीलन का अर्थ सिर्फ इतना ही है ‘परस्पर दो और लो’,कीलित मंत्रो का उत्कीलन एक अलग क्रिया है परंतु ज्ञान के उत्कीलन को समझना कठिन है । आप सभी ज्ञानी हो परंतु माया का एक जाल जो आपको ज्ञानी होते हुए भी गलतियां करने पर मजबूर कर देता है । आप जानते हो शराब पीने से जीवन बर्बाद होता है परंतु पीने वाला शराब पीना छोडता नही है और उसे पीते हुए देखने वाला उसे शराब पीने से रोकने के लिए ज्यादा प्रयास करता नही है ।
आज जो साधना दे रहा हु,वह आपके जीवन मे ज्ञान को उत्कीलन कर देगा,जो ज्ञान आपने प्राप्त किया है उसीको आपके जीवन मे उतार देगा,जैसे अच्छे विचार सभी पढ़ते है परंतु उसको जीवन मे उतारते नही है । गुरु से बहोत ज्ञान प्राप्त कर लेते है परंतु जीवन मे उस ज्ञान के महत्व को समजते नही है ।
इस साधना के माध्यम से आप जो भी किताब पढोगे उसमे आपको आपके अंदर के गुरु से पूर्ण सहाय्यता प्राप्त होगी,इसीसे आपको साधनात्मक दुर्लभ ज्ञान प्राप्त होगा और आप कई सारे रहस्यों को समझ सकेंगे ।"यथा पिंडे,तथा ब्रम्हांडे" का अर्थ अगर समजना चाहते हो तो यही साधना आपको इस दुर्लभ ज्ञान को प्राप्त करने में मार्गदर्शक है । इस साधना के बाद गुरु स्वयं सुष्म रूप में आकर आपको ज्ञान और आशीर्वाद प्रदान करेंगे ।
मंत्र-
।। ॐ श्रीं क्लीं ह्रीं सप्तचक्र गुरु रहस्यम उत्कीलनं कुरु कुरु स्वाहा ।।
Om shreem kleem hreem saptachakra guru rahasyam utkilanam kuru kuru swaha
साधना किसी भी गुरुवार से प्रातः 5 बजे प्रारंभ करे,11 दिन की साधना है,रोज 11 माला जाप करे,आसन वस्त्र पिले रंग के हो और मुख उत्तर दिशा में हो,धूप-दीप नित्य किया करे,दीपक घी का लगाए,मंत्र जाप स्फटिक माला से करना अनिवार्य है,माला आपको पंसारी के दुकान से मिल जाएगा ।
संसार के समस्त साधनाओ के दुर्लभ रहस्य को समजने हेतु यह साधना करना अनिवार्य है,इसीसे आपको अन्य साधनाओ में भी सफलता प्राप्त होगी ।
आदेश.........
6 Aug 2018
रोग निवारण के उपाय
जिस घर में जब कोई रोग आ जाता है तो उस रोगी के साथ साथ उस घर के सभी व्यक्ति भी मानसिक रूप से चिंता और आशांति का अनुभव करने लगते है , लेकिन कुछ छोटी छोटी बातो को ध्यान में रखकर हम हालत पर काबू पा सकते है , शीघ्र स्वास्थ्य लाभ प्राप्त कर सकते है ।
5 Jul 2018
त्रिया बंगालन-भैंसासुर वीर साधना.
त्रिया बंगालन जिनके दुहाई से कई सारी मशानी शक्तियां काम करती है और भैंसासुर वीर तो बहोत खतरनाक शक्ति है । भैंसासुर वीर को दिया हुआ कोई भी काम वह करता है,इनके लिए षट्कर्म तो बहोत मामूली काम है । यह मंत्र साधना षट्कर्म में पूर्ण सिद्धिदायक है,इसी साधना से मयांग (आसाम का तांत्रिक क्षेत्र ) के तांत्रिक आज के समय मे प्रसिद्ध हुए है ।
रक्षा कवच को काले धागे में पहनना है और भैंसासुर वीर प्रत्यक्षीकरण यंत्र को काले चावल पर स्थापित करना है,मंत्र याद किये बिना जाप नही किया जा सकता है,इसलिए मंत्र को याद करना जरूरी है और भैंसासुर वीर प्रत्यक्षीकरण यंत्र को देखते हुए जाप करना है । इस साधना में रुद्राक्ष के माला का इस्तेमाल होता है,अन्य किसी भी माला से जाप नही किया जा सकता है ।
।। ॐ नमो आदेश गुरु का,अड़हुल फुल फुले फुफनर ऊपर बामत योगनी करे सिंणगर,माँस खाए हाड़ जोगवे तब तु बामत जोगनी कहांवे,आदि देवता वीर बजरंगबली भैसासुर को पकड़ बांध लाए और वचनबद्ध कराएं,मेरा इतना काम इसी क्षण आदि देवता वीर बजरंगबली करके नहीं बताए तो (*****यहां मंत्र को गोपनीय रखा जा रहा है****) आदेश गुरु का शब्द सांचा पिंड काचा चले मंत्र ईश्वर वाचा ।।
न्यौछावर राशि: 2150/-रुपये ।
22 Jun 2018
100% Fatty Liver Treatment
फैटी लीवर की बीमारी तब शुरू होती है, जब वसा (फैट्स) के अणु लीवर की कोशिकाओं में जमा हो जाते हैं , ऐसा मोटापे और मधुमेह के कारण होता है । रिसर्च से पता चलता है कि मोटापे और डायबिटीज से पीडि़त 70 से 90 फीसदी लोग इस बीमारी से ग्रस्त होते हैं , फैटी लीवर की बीमारी वर्षों तक खामोश रहती है । एक बार जब यह उस व्यक्ति को हो जाती है, जो शराब नहीं पीता या प्रति दिन 20 मिलीग्राम से भी कम शराब पीता है तो डॉक्टर इसे नॉन अल्कोहलिक स्टियोहेपेटाइटिस (स्टियो का मतलब वसा (फैट्स) और हेपेटाइटिस का मतलब सूजन है) या एनएएसएच कहते हैं ।
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17 May 2018
बाबा वीर बुलाकी प्रत्यक्ष दर्शन साधना
थोड़ी शराब भी सिकोरै में डाल दें फिर वह सिकोरा घर से बाहर कहीं आक के पौधे की जड में रख आए सिकोरा रखने के बाद कुछ उडद के दाने मन्त्र बोलते हुए आक के पौधे पर फेंके ।
मंत्र:-
7 Apr 2018
साधना ही अमूल्य है ।
यह संसार एक विचार है अगर आपने विज्ञान में छलांग लगा दी तो उसका एक अलग महत्व है अगर आपने धर्म के क्षेत्र में छलांग लगा दी उसका अपना एक अलग क्षेत्र है यह संसार रहस्यों से भरा पड़ा है। आप एक रहस्य से पदा हटाते है फिर आपके सामने दूसरे रहस्य खड़े हो जाते है जिस प्रकार आपके मन मस्तिष्क में निरंतर विचार चलते रहते है।
हम जो शब्द सुनेगे वह शाश्वत है जब हम बिल्कुल चुप होंगे तब उनके शब्द सुनाई पड़ेगें। पराम्बा से बोलना नहीं है उन्हें सिर्फ सुनना है।
कोई अल्लाह हूँ, बोल रहा है तो कोई लाहू बोल रहा है, कोई क्लींग बोल रहा है तो कोई क्लीम बोल रहा है, कोई काली बोल रहा है, कोई पराम्बा बोल रहा है ठीक उच्चारण क्या है। मुझे पता नहीं है मैं क्या करता हूँ या मैं क्या करती हूँ, तुम ही मुझे बताओ। हम ठीक उच्चारण, व्याकरण में लगे रहते है? बाल्मिकी राम-राम जपते जपते मरा-मरा कहने लगे और वह सिद्ध हो गए।
तुम्हारा मंत्र नाभि तक पहुँच जाना चाहिए जब मंत्र नाभि तक पहुँचता है। तब हम जो भी बोलते है तब वह कुछ और मंत्र होता है। और जब हम सुनते है तो वह कुछ और हो जाता है मंत्र का सीधा संबंध आपकी प्राण चेतना से है वहाँ से निकलने वाला मंत्र सीधा ईश्वर तक पहुँचता है यहीं मंत्र रहस्य है।
साधना का अर्थ यह नहीं है कि बुराई को छोड़ो और भलाई को पकड़ो, साधना का वास्तविक अर्थ है बुराई से सत्य की तरफ आगे बढ़ो उस पर विजय प्राप्त करो भलाई में भी सत्य की तरफ आगे बढ़ो दोनो के अनुभव का निचोड़ निकालो ताकि आपकी समझ गहरी हो जाए। क्योंकि बुराई और भलाई दोनो से साधक का हृदय विस्तीर्ण हो जाए, दोनो के बीच तुम्हें अपना सामजस्य बैठाना पड़ेगा तुम अपनी नाव को बहने दो और ताकि वह अपनी सही मंजिल सागर तक पहुँच सके। पाप और पुण्य तुम्हारे किनारे बन जाएँ तुम किसी को मत चुनना न पाप को और न ही पुण्य को अगर तुम पुण्य को चुनोगे तो भी किनारे पर ही रह जाओगे और अगत तुम पाप को चुनोगे तो भी किनारे पर ही रहोगेे सागर तक नहीं पहुँच पाओगे जो दोनो का सही उपयोग कर लेगा उसमें सामंजस्य स्थापित कर लेगा तुम अपनी बुराई से भी भयभीत मत होना ।
मंत्र तंत्र यंत्र यह कोई भयभीत करने हेतु नही है अपितु यह तो जीवन का वह सच है जिसे सामान्य व्यक्ति सहजता से स्वीकृति नहीं दे पाता हसि ।आप अपने जीवन को सामान्य जीवन ना बनाये और किसी भी प्रकार का मतभेद दिमाग मे नही पाले,किसी भी मंत्र तंत्र साधना हेतु जाती धर्म समाज का कोई पाबंदी नहीं है । इस संसार मे दो जातीया है "स्त्री और पुरूष" जाती,धर्म एक ही है "मानवता",जब यह सच्चाई है तो क्यो साधना से भागना,क्यों बुराई के रास्ते पर चलना? अभी समय है एकता से सब कुछ संभव करके दिखाने के लिए ।
एक छोटासा मंत्र दे रहा हु जो जीवन मे समस्त साधना में पूर्ण सफलता देने हेतू तत्पर है,मंत्र है "ॐ ऐं ह्रीं क्लीं ॐ" इसका मन ही मन उठते बैठते चलते फिरते शुद्ध अवस्था मे जाप करे तो अवश्य ही आपका रुझान तंत्र साधना के लिए बढ़ेगा ।
हमने अभी कुछ दिनों पहिले अपना youtube चैनल बनाया है और वहां पर भी आप अन्य साधनाये देख सकते है ।
https://www.youtube.com/channel/UCNkYEFtLD7KzQzqiXd6QOkg
आदेश.....
23 Mar 2018
लिवर का ईलाज (Curing the Liver)
2. पीने वाले पानी में क्लोरीन की मात्रा का अधिक होना।
3. शरीर में विटामिन बी की कमी होना।
4. एंटीबायोटिक दवाईयों का अधिक मात्रा में सेवन करना।
5. घर की सफाई पर उचित ध्यान न देना।
6. मलेरिया, टायफायड से पीडित होना।
7. रंग लगी हुई मिठाइयों और कोल्डड्रिंक्स का प्रयोग करना।
8. सौंदर्य वाले कास्मेटिक्स का अधिक इस्तेमाल करना।
9. चाय, काफी, जंक फूड आदि का प्रयोग अधिक करना।
लिवर जब पूरी तरह से खराब हो जाता है तब इसका एक ही इलाज बचता है वह है लिवर प्रत्यारोपण। यह एक कठिन और खतरनाक आॅपरेशन होता है। इस अवस्था में पीड़ित इंसान के लिवर को हटा के नए लीवर को लगाया जाता है। इसलिए यह जरूरी है कि लीवर की समस्या का शुरूआती दौर में पता चलते ही अपने खान.पान पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
snpts1984@gmail.com
20 Mar 2018
बाबा अघोरी साधना
मंत्र:-
।। अघोरीयो का अघोरी बाबा अघोरी,कालभैरव का भगत दिखाओ रे अपना सोटा,जहा-जहा तेरा सोटा पड़े वहां-वहां मेरा दुश्मन टूटे,दुश्मन मेरा कौन तू ही जाने,ना जाने तो कैसा अघोरीयो का बाबा अघोरी कहलाए ।।
19 Mar 2018
डाईन सिद्धि और रक्षा कवच
snpts1984@gmail.com
14 Mar 2018
कूलदेवी/कुलदेवता पूजन पद्धती ।
कुलदेवियों की पूजा ना करने पर उत्पन्न बाधाओं का कारण कुलदेवी नहीं अपितु हमारे सुरक्षा चक्र का टूटना है। देवी अथवा देवता तब शक्ति संपन्न होते हैं जब हम समय-समय पर उन्हें हवियाँ प्रदान करते हैं व नियमित रूप से उनकी उपासना करते हैं। जब हम इनकी उपासना बंद कर देते हैं तब कुलदेवी तब कुछ वर्षों तक तो कोई प्रभाव ज्ञात नहीं होता, किन्तु उसके बाद जब सुरक्षा चक्र हटता है तो परिवार में दुर्घटनाओं, नकारात्मकता ऊर्जा “वायव्य” बाधाओं का बेरोक-टोक प्रवेश शुरू हो जाता है, उन्नति रुकने लगती है, पीढ़िया अपेक्षित उन्नति नहीं कर पाती, संस्कारों का भय, नैतिक पतन, कलह, उपद्रव, अशांति शुरू हो जाती हैं, व्यक्ति कारण खोजने का प्रयास करता है कारण जल्दी नहीं पता चलता क्योंकि व्यक्ति की ग्रह स्थितियों से इनका बहुत मतलब नहीं होता है, अतः ज्योतिष आदि से इन्हें पकड़ना मुश्किल होता है, भाग्य कुछ कहता है और व्यक्ति के साथ कुछ और घटता है। कुलदेवता या देवी सम्बन्धित व्यक्ति के पारिवारिक संस्कारों के प्रति संवेदनशील होते हैं और पूजा पद्धति, उलटफेर, विधर्मीय क्रियाओं अथवा पूजाओं से रुष्ट हो सकते हैं, सामान्यतया इनकी पूजा वर्ष में एक बार अथवा दो बार निश्चित समय पर होती है।
- श्री संजय शर्मा जी.
12 Mar 2018
महाकाल स्तोत्र एवं मंत्र साधना ।
मंत्र-
।।हूं हूं महाकाल प्रसीद प्रसीद ह्रीं ह्रीं स्वाहा ।।
स्तोत्र-
ॐ महाकाल महाकाय महाकाल जगत्पत
महाकाल महायोगिन महाकाल नमोस्तुते
महाकाल महादेव महाकाल महा प्रभो
महाकाल महारुद्र महाकाल नमोस्तुते
महाकाल महाज्ञान महाकाल तमोपहन
महाकाल महाकाल महाकाल नमोस्तुते
भवाय च नमस्तुभ्यं शर्वाय च नमो नमः
रुद्राय च नमस्तुभ्यं पशुना पतये नमः
उग्राय च नमस्तुभ्यं महादेवाय वै नमः
भीमाय च नमस्तुभ्यं मिशानाया नमो नमः
ईश्वराय नमस्तुभ्यं तत्पुरुषाय वै नमः
सघोजात नमस्तुभ्यं शुक्ल वर्ण नमो नमः
अधः काल अग्नि रुद्राय रूद्र रूप आय वै नमः
स्थितुपति लयानाम च हेतु रूपआय वै नमः
परमेश्वर रूप स्तवं नील कंठ नमोस्तुते
पवनाय नमतुभ्यम हुताशन नमोस्तुते
सोम रूप नमस्तुभ्यं सूर्य रूप नमोस्तुते
यजमान नमस्तुभ्यं अकाशाया नमो नमः
सर्व रूप नमस्तुभ्यं विश्व रूप नमोस्तुते
ब्रहम रूप नमस्तुभ्यं विष्णु रूप नमोस्तुते
रूद्र रूप नमस्तुभ्यं महाकाल नमोस्तुते
स्थावराय नमस्तुभ्यं जंघमाय नमो नमः
नमः उभय रूपा भ्याम शाश्वताय नमो नमः
हुं हुंकार नमस्तुभ्यं निष्कलाय नमो नमः
सचिदानंद रूपआय महाकालाय ते नमः
प्रसीद में नमो नित्यं मेघ वर्ण नमोस्तुते
प्रसीद में महेशान दिग्वासाया नमो नमः
ॐ ह्रीं माया – स्वरूपाय सच्चिदानंद तेजसे
स्वः सम्पूर्ण मन्त्राय सोऽहं हंसाय ते नमः ।।
फल श्रुति
इत्येवं देव देवस्य मह्कालासय भैरवी
कीर्तितम पूजनं सम्यक सधाकानाम सुखावहम।।
मंत्र-
।।हूं हूं महाकाल प्रसीद प्रसीद ह्रीं ह्रीं स्वाहा ।।
काल उसका क्या करे जो भक्त हो महाकाल का'









