27 Sept 2015

देव रंजिनी गुटिका.

देव रंजिनी गुटिका दुर्लभ एवं चमत्कारिक है,ऋषि नागर्जुन ने स्वयम इस गुटिका की तारिफ की है. एक दिव्य पारद गुटिका जोकि देवताओं को भी दुर्लभ है.ये गुटिका कभी काली नहीं पड़ती मतलब हमेशा इसकी चमक एक जैसी बनी रहती है.ये
गुटिका शक्ति का पावरहाउस है.ये गुटिका इतनी दुर्लभ है कि देवता इसको उठा के ले जाते हैं.इस गुटिका के माध्यम से कुंडलिनी जागरण बहुत आसानी से संभव है.हमारा तृतीय नेत्र को ये जागृत कर देती है.हमारे शरीर की उर्जा को ये एक दम से बढ़ा देती है.अगर इस गुटिका को साथ में रख कर
साधना की जाये तो साधना में सफलता मिलने के अवसर बहुत ज्यादा बढ़ जाते हैं और ये देव प्रत्यक्षीकरण करवा देती है. साधना में आने वाले विघ्नों का नाश करती है ये गुटिका.इसको बनाना भी इतना आसान नहीं है.45 दिन की कड़ी मेहनत के बाद ये गुटिका तैयार होती है | इस गुटिका को अगर पानी में डाल के वो पानी पिया जाये तो शरीर की बीमारियाँ भी ठीक होने लगती है इसे मै दूसरा नाम कायाकल्प गुटिका दुगा और कुंडलिनी जागरण होने लगता है.इस गुटिका को सामने रख कर अगर इस पर त्राटक किया जाए तो सम्मोहन की शक्ति प्राप्त होती है.इस गुटिका को अगर हाथ में रख कर ध्यान किया जाए तो ध्यान की असीम गहराई में उतरा जा सकता है.
ज्योतिषी अगर इस गुटिका को साथ में रख कर अपनी प्रैक्टिस करे तो उसकी की हुई भविष्यवाणी सही उतरती है | सभी प्रकार की नेगेटिव उर्जा या शक्ति को ये दूर रखती है.यहाँ तक की अगर इसको लेकर शमशान में साधना करने चले जाए तो ये इतर योनियों के दुष्प्रभाव से भी रक्षा करती है.इसके अनगिनत प्रभाव हैं जोकि लिखना संभव नहीं है जोकि केवल स्वयं उपयोग करके ही सामने आयेंगे.इस प्रकार से यह एक बहुत ही दुर्लभ गुटिका है जोकि
अभी हमने बहुत ही कम मात्रा में तैयार की है.यह गुटिका तन्त्रोत्क मंत्रो से सिद्ध की जाती है.

Dev Ranjini-Mercury Ball.
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Very rare, and inaccessible to Devtas too. This is a small Sphere and made of purified Mercury after 10 sanskaars and after that some rituals. This Gutika never loose its brightness and if keeper of this Gutika drink the Milk after dipping
this Gutika into Milk for half an hour, than it will be helpful to awekan the Kundlini power.His/her body will Rejuvenate and if any disease in body,than this Gutika will heal that problem.All the planets will be aligned by this Gutika.no need to
wear any astrological stone if you have this Gutika in your possession. it rectifies the problems in your JanamKundali(Astrological birth
chart).No bad or negative energy can affect you.Your Aura field will be expand.If you use Reiki healing than the Healing power will be very strong. even it can grant healing power to anybody.If you gaze upon this Gutika on regular basis, you can get Hypnosis power in your eyes. Third eye also can be awaken by this Gutika.If astrologers keep this Gutika with him while doing predictions, than their predictions will be correct.Keeper of this Gutika can get deeper state of Meditation easily. This is very rare Gutika and
made by myself.Very few peoples on this Earth know about this Gutika. it can be worn in Ring also or can be kept in pocket.I can not write all
the benefits here. but if you are psychic than you can see and feel the power of this Gutika immediately.
This Gutika is nowhere available. Nobody knows making of this Gutika. This Gutika comes under Parad Vigyan (Alchemy science).
This Gutika is helpful in some benefits as:

-Psychic Development
-Healing power
-Protection from Bed energy and entities.
-Curse Removal
-Kundalini Awakening
-Astrological Solution
-Strong Aura
-Hypnotic powers
-Amazing Luck
-Bad Karma removal
-endless wealth
-Guidance
-astral travel
-meditation
-Love
-Astral work
-third eye
-psychic intuition
-Balance
-growth
-spiritually
-peace
-cleansing
-Amazing beauty
-Chakra work
-End Anxiety
-Remove Depression
-happiness
-health
-grounding and centering
-Levitation also can be possible
communication with spirits AND so much more......


Contact for Gutika:-amannikhil011@gmail.com


आदेश.....

पारद विग्रह.

पारद की महत्ता

रसतंत्र मे कहते हैं की वे लोग धन्य हैं जिन्होंने जीवन में पारद के दर्शन किए हो और जो पारदेश्वर की साधना में रत हो. क्यूंकि पारदेश्वर और पारद लक्ष्मी के माध्यम से ही जीवन की वे उचाइया हमें
प्राप्त होती हैं जिनकी चाहत हमें होती है.
पारद शिवलिंग संसार का दुर्लभ शिवलिंग होता है यदि उस दिव्य व शुभ्र प्रवाहित पारद को स्वर्ण ग्रास देकर भव्य व आबद्ध बनाया जाए और यह ग्रास देने की क्रिया ३२ बार होनी चाहिए.क्यूंकि ऐसा स्वर्ण ग्रास दिया पारद ही जीवन में भौतिकता और आध्यात्मिकता का समावेश करता
है. यहाँ पर रसतंत्र मे बहुत ही विशेष बात कही है की स्वर्ण ग्रास के बगैर पारद पूर्णता दे ही नही सकता.फिर चाहे उस निर्बीज (बिना ग्रास लिए हुए) का आप शिवलिंग या पार्देश्वरी बनाओ या फिर उसे भस्म करो क्यूंकि शास्त्र कहता है की निर्बीज पारद को भस्म करने वाला नरक गामी होता है वो शिव हत्या का दोषी होता है और यह ग्रास देने की क्रिया विजय काल से प्रारम्भ होनी चाहिए. तथा जहा पर पारद शिवलिंग स्थापित हो या निर्माणित हो रहा हो वह पर आग्नेय कोण में पार्देश्वरी स्थापित होना चाहिए.भगवान् शिव के दिव्य ३२ रूपों को तभी आबधिकरण किया जा सकता है जब उनके प्रत्येक रूप के जप द्वारा ग्रास दिया जाए. इसी प्रकार हीरक ग्रास भी ३२ बार लक्ष्मी के ३२ रूपों की स्थापना के लिए दिया जाता है और यह पूर्ण प्रक्रिया १६ घंटो में होती है प्रत्येक घंटे में २ बार शिव चैतन्य होते हैं और दो बार लक्ष्मी. इस प्रकार जो पारद प्राप्त होता है उससे
निर्माणित विग्रह अद्विय्तीय होता है पूर्णता
दायक होता है और ऐसे ही शिवलिंग और लक्ष्मी पर की गयी साधना फलीभूत होती ही है.वैसे भी जो लोग दूकान से पारद के विग्रह खरीद कर स्थापित करते हैं उन्हें कोई अनुकूलता इसी लिए नही मिलती
क्यूंकि जब पारद अष्ट संस्कार के बाद बुभुक्षित होता है तो उसे भोजन देना अनिवार्य है और आजकल पारद कम शिवलिंग मे रांगा नामक धातु का प्रमाण ज्यादा होता है.जिस पर चढाया हुआ जल ग्रहण करने से रोगो की उत्पत्ती होती ही है.आप ख़ुद ही सोचिये की जो ख़ुद भूखा हो वो आप को तृप्ति कैसे दे सकता है. और दूसरी बात दुकानों पर मिलने वाले विग्रह पारद से नही बल्कि सीसे से या जस्ते से निर्मित होते हैं जिनमे नाम मात्र का पारद
होता है , न उनमे चेतना होती है न ही कोई संस्कार.अब वो आपको पूर्णता कैसे दे सकते हैं.यह जीवन का सौभाग्य होता है की जीवित इन विग्रहों को प्राप्त कर अपने घर में स्थापित करें और ऐश्वर्य व
साधनात्मक स्तर की उच्चता की प्राप्ति करे जो होती ही है. इन ६४ दिव्य लक्ष्मी- शिव रूपों के आलावा उनमे ४ और विशिष्ट शिव रूपों की भी स्थापना होती है. इस प्रकार ६४ तंत्रों की दिव्व्य शक्तियों से यह विग्रह संयुक्त हो जाते हैं. यदि इन
प्रक्रियाओं से युक्त पारदेश्वर और पार्देश्वरी घर में स्थापित हो तब कैसा भी बुरा ग्रह प्रभाव, तंत्र प्रभाव, पूर्व जन्मकृत दोषों से साधक को मुक्ति मिलती है और ऐसा विग्रह ही आपको वो अनुकूलता और पूर्णता देता है जैसा की आप चाहते हैं. ऐसी पार्देश्वरी ही आग्नेय कोण में स्वर्णावती बनकर स्थापित होती है और खुशियों की बारिश करती हैं. ऐसे पारद शिवलिंग पर ही शैव गुरु साधना , पूर्व जन्म दर्शन साधना ,तथा सप्त लोक भेदन साधना होती है.
एक महत्वपूर्ण बात याद रखिये , ऐसे विग्रह पूर्ण शुभ्र और दैदीप्यमान होते हैं जो सम्मोहन क्षमता और दिव्व्य तेज से आपको आप्लावित कर देते हैं.
इस आर्टिकल से पहिले आर्टिकल मे मैंने अष्ट संस्कारो के बारे मे समजाया था.
आप जब भी किसिसे पारद शिवलिंग,लक्ष्मी,काली,हनुमान,गणपती,श्रीयंत्र या कुबेर यंत्र के विग्रह खरिदे तो उनसे पूछिये की इस विग्रह की क्या गारंटी है के ये काले नही पडेगे or कही इन विग्रह को चमकाने हेतु कहि नींबू तो नही रगडना पडेगा?
इस बात पर पारद विग्रह विक्रेता आपको सही जवाब नही देगा.सीधी सी बात है पारद मे रांगा मिलाया जाये तो वह विग्रह अवश्य ही कुछ महीने मे काला पडेगा.
परंतु जो विग्रह मै बनाता हु उसका गारंटी मै लेता हू "मेरे द्वारा निर्मित कोई भी पारद विग्रह काला नही पडेगा",क्युके मै शुद्ध पारद से विग्रह निर्माण करता हु और गर्व के साथ कहेता हू "मेरे द्वारा निर्माण किया हुआ पारद विग्रह काला पडे तो दस गुना विग्रह की न्यौच्छावर राशीनुसार मै राशी वापीस दे दुगा".यह है सही पारद विग्रह निर्माण क्रिया का प्रमाण,जो हर कोई नही देता.आज के समय मे पारद के नाम पर सिर्फ लुटा जाता है क्युके यह अग्यानता के कारण होता है.जिन्हे अष्ट संस्कार क्रिया के नाम भी पता नही होते है वह भी आज कल पारद विग्रह बेचकर अपना स्वार्थ पूर्ण कर रहा है.
जो साधक अष्ट-संस्कार और अठराह-संस्कार युक्त स्वर्ण ग्रास से निर्मित पारद विग्रह चाहता है वो हमसे सम्पर्क करे.

amannikhil011@gmail.com

shabarmantrascience@gmail.com

पर ई-मेल करे.शीघ्र ही आपको रिप्लाइ दिया जायेगा.


आदेश.

लक्ष्मी साधना प्रयोग.

अगर आपको अचानक पैसे रुपए की ज़रुरत पड़ जाए तो आप क्या करेंगे?
नहीं समझ आया तो हम बताते हैं।
दीपावली पर लक्ष्मीजी की पूजा गणेश
जी के साथ की  जाती है.लेकिन अगर अचानक रूपये पैसे की तंगी हो जाये
तो लक्ष्मी माता को नहीं, बल्कि उनके पुत्रों को पुकारिये.जब लक्ष्मी जी के पुत्रों का नाम लेंगे, तो मां दौड़ी चली आयेंगी.ये ममता ही तो है, जो मां को बच्चों से जोड़ती है.गणेश जी लक्ष्मी जी के मानस पुत्र हैं. वैसे तो लक्ष्मी जी चंचला हैं, एक स्थान पर
नहीं टिकतीं,लेकिन दो स्थानों पर लक्ष्मी जी सदा निवास करती हैं.पहला वह स्थान जहां विष्णु जी का अभिषेक दक्षिणावर्ती शंख से किया जाये.दूसरा वह स्थान, जहां गणपति की आराधना की जाये और यह तीसरा उपाय है लक्ष्मी जी के 18 पुत्रों का नाम जपना.वैसे तो लक्ष्मी जी वहां सदा
निवास करती हैं,जहां गणपति पूजे जाते हैं, लेकिन अचानक रुपये चाहिये तो एक नहीं, बल्कि लक्ष्मी जी के अनेक पुत्रों के नाम लेना होगा.

ऋग्वेद में लक्ष्मी जी के 4 पुत्रों का नाम इस श्लोक में आये है
-आनंद: कर्दम: श्रीदश्चिकलीत इति विश्रुता:
-ऋषय: श्रिय: पुत्राश्व मयि श्रीर्देवी
देवता (4/5/4/6)

लेकिन आकस्मिक धन पाने के लिये आपको लक्ष्मी जी के 18 वर्ग पुत्रों के नाम लेने होंगे,इसके बाद धन की व्यवस्था
स्वयं लक्ष्मी जी आकर करती हैं.

कैसे मिलेगा आकस्मिक धन?
अगर अचानक कारोबार में घाटा हो जाये, शेयर बाज़ार में पैसे डूब जायें,अच्छी भली
नौकरी चली जाये या फिर कोई प्राकृतिक आपदा आ जाये,ऐसे में धन की आवश्यकता सबको पड़ सकती है.बस ऐसी ही परिस्थिति में, लक्ष्मी जी के 18 पुत्रों का नाम,शुक्रवार से जपना शुरू कर
दें और साथ मे उन्हे गुलाब का कम-से-कम एक पुष्प अर्पित करे.

लक्ष्मी जी के 18 पुत्रों के नाम,
- ॐ देवसखाय नम:
- ॐ चिक्लीताय नम:
- ॐ आनन्दाय नम:
- ॐ कर्दमाय नम:
- ॐ श्रीप्रदाय नम:
- ॐ जातवेदाय नम:
- ॐ अनुरागाय नम:
- ॐ सम्वादाय नम:
- ॐ विजयाय नम:
- ॐ वल्लभाय नम:
- ॐ मदाय नम:
- ॐ हर्षाय नम:
- ॐ बलाय नम:
- ॐ तेजसे नम:
- ॐ दमकाय नम
- ॐ सलिलाय नम:
- ॐ गुग्गुलाय नम:
- ॐ कुरूण्टकाय नम:

तो अगर आप भी किसी ऐसी परिस्थिति के शिकार हैं, जिसमें अचानक से पैसे रूपये चाहिये, तो यह उपाय शुक्रवार से आज़मायें.मां तो मां है,फिर लक्ष्मी ही क्यों न हों, बेटों के नाम पुकारेंगे तो मां दौड़ी चली
आयेगी.

अगर आपसे संभव हो तो मंत्र का जाप भी करे,"ओम नम:कमलवासिन्यै स्वाहा".
इस मंत्र का जाप आप रोजाना कर सकते है,सिर्फ मंत्र जाप हेतु शुद्धता का ध्यान रखिये.माँ आप पर कृपा बरसाये यही कामना करता हू.

आदेश.....

26 Sept 2015

मृगाक्षी अप्सरा (किन्नरी साधना)

"शरीर निरोग हो साथ ही यौवन से छलकता हुआ देह का कायाकल्प संभव है महान ऋषि "धन्वन्तरी" रचित साधना से".
धन्वन्तरी महान,ऋषि,योग विद्या से परिपूर्ण,सब प्रकार के रोगो का निदान करने मे समर्थ,लेकिन एक चिंता उन्हे खायी जा रही थी,अवस्था के साथ-साथ जीवन आगे बढ रहा था.यौवन बीत गया था और वृद्धावस्था अपनी दस्तक दे रही थी.इसलिये जीवन मे रस नही आ रहा था,वे रसायन शास्त्री औषध शास्त्री बन गये लेकिन "रस-शास्त्री" नही बने एक दिन निराश होकर निढाल बैठे थे चिंता मे ही मगन थे,थके शरीर मे तन्द्रा आ गइ और निंद मे स्वप्न मे भगवान सदाशिव का आदेश आया.मै रसेश्वर हू तुम्हे रस से परिपूर्ण होना है और तुम्हे रस से परिपूर्ण कर सकती है "मृगाक्षी रुप गर्विता किन्नरी" अचानक नींद खुली और सब कुछ स्पष्ट हो गया,संपन्न अद्वितीय साधना बस प्रारंभ हो गयी चिर यौवन प्राप्ति यात्रा.
यह साधना पूर्ण होते-होते कमरे मे सुगंध बढती दिख सकती है या मानो प्रकाश बढता दिख सकता है या नुपुर ध्वनी आरंभ हो जाती है और ठिक यही समय है मृगाक्षी से वचन लेने का,उसे जीवन भर अपनी प्रेमिका और अपनी सहचरी बना रखने का.
इस प्रकार यह जीवन की परीवर्तनकारी साधना संपन्न होती है और आधार बन जाती है पूर्ण सम्मोहन एवं सौन्दर्य प्राप्ति का.इस साधना से जहा शरीर का सौन्दर्य बढता है वही चेहरे पर विशेष आकर्षण शक्ती निर्मित होती है जिसे देखकर कोई भी पुरुष/स्त्री आकर्षित होते है.
इस साधना मे "अष्ट किन्नरी यंत्र" और "मृगाक्षी गुटिका" की जरुरत होती है.
अद्वितीय आचार्य धन्वन्तरी द्वारा रचित एवं अनुभूत यह पद्धती सौ टंच खरी तथा प्रामानिक है ही.
आप इस अद्वितीय साधना का लाभ उठाये और जीवन मे खुश रहे यही कामना करता हू.

आदेश.

बिर कंगन.


बहोत सारे लोग है जो सिर्फ बाते करते है बिर कंगन के बारे मे परंतु यहा मै आपको इसका प्रामानीक महत्व बता रहा हू क्युके मेरे पास बिर कंगन है.बिर कंगन क्या है?
अगर ये बात सुशील नरोले आपको नही
बतायेगा तो कौन बतायेगा,सही है ना. बिर कंगन 3 प्रकार के होते है.

1-52 बिर-64 जोगिनी.
2-51 बिर 52 जोगिनी.
3-21 बिर 24 जोगिनी.

मुख्यता इन तीनो कंगन मे सबसे अच्छा कंगन 51 बिर-52 जोगिनी वाला माना जाता है क्युके एक पर एक भारी शक्ती वाला कंगन अच्छे-बुरे काम कर सकता है. बिर कंगन के माध्यम से बिरो से जो चाहो वह कार्य उनसे करवा सकते है परंतु बात येसा है के बिरो से वही काम करवाने कहो जो हम नही कर सकते है क्युके प्रत्येक कार्य को करने के बाद बिर बदलेमे कुछ ना कुछ तो माँगता ही है और अगर हमने उसकी डिमांन्ड पुरी नही की तो जब बिरो को अगला काम दे तो वह उस कार्य को पुरा नही करता है.या आसान भाषा मे कहा जाये तो बिर कार्य करने के बाद उर्जाहीन होने लगता है और उसके पसंद का चिज
उसको मिलतेही वह फिर से शक्तीशाली बन जाता है.बिर कंगन के माध्यम से षटकर्म कार्य आसानी से किये जाते है और
आजकल लोग बिरो से काम करवाते है और मोटा पैसा कमाते है जब के बिरो से येसे काम नही करवाने चाहिये जिससे सिर्फ धनार्जन हो बल्की कुछ जनकल्याण करके पिडित व्यक्ती का साहय्यता करके उनसे
आशीर्वाद भी प्राप्त करना चाहिये.बिर कंगन का आसान सा अर्थ है कंगन मे बिरो का स्थापना और साथ मे जोगिनी का स्थापना.जैसे बराटी का अर्थ है बिर और बराटी विद्या का अर्थ है "बिरो का विद्या" और जिसने बिरो का जागरण कर दिया समझलो उसने बराटी विद्या को सिद्ध कर लिया. मेरे पास 150 साल से भी ज्यादा पुराना बिर कंगन है जो मुझे मेरे दादाजी से प्राप्त हुआ,इससे मुझे एक फायदा हुआ के कोई भी नया कंगन मै जागरत कर सकता हू परंतु मै सर्वप्रथम जिनके लिये कंगन बनाता हू उनको ही साधना विधि विधान संपन्न करने के निर्देश देता हू,कुछ लोगो ने प्रैक्टिकल अनुभुतिया की है.बिरो से कोई भी काम करवाना संभव है परंतु बिरो को
खुश रखना भी जरुरी है अन्यथा बिर समय पर कार्य नही करते है,बिरो को कैसे खुश रखना है यही इसमे मुख्य सुत्र होता है.जैसे मैने बताया बिर कंगन तीन प्रकार होते है और उन्हे बनाने मे पंचधातु,अष्टधातु,नवधातु का इस्तेमाल होता है.पंचधातु मे स्वर्ण,रजत,कास्य,तांबा और पित्तल होता है,इनको स्थिर लग्न
शुभ मुहूर्त मे खरिदकर कंगन बनाने से अधिक लाभ प्राप्त होते है और स्वर्ण को गुरुवार रजत को शुक्रवार कास्य को
शनीवार तांबा को रविवार पित्तल को सोमवार को खरिदना चाहिये.कंगन बनाते समय शरीर पर कोई भी वस्त्र नही होना चाहिये और कंगन बनाते समय वहा से उठकर अन्य कोई भी कार्य करना वर्जित माना जाता है.यह सब कुछ होने के बाद मंत्र साधना 7,11 या 21 दिनो तक की जाति है परंतु साधना मे योग्य सफलता प्राप्ति के लिये प्रामानीक विधि विधान का ग्यान होना आवश्यक है जो किताबो से नही मिलता है इसके लिये योग्य व्यक्ती का मार्गदर्शन प्राप्त होना चाहिये.जो व्यक्ती बिर कंगन बनाना चाहता है वह मुझसे सम्पर्क करे,मै आपको वचन देता हू आपको प्रामानिक मार्गदर्शन करुगा और आपके लिये योग्य बिर कंगन का निर्माण करके दुगा क्युके प्रत्येक तांत्रिक का एक स्वप्न होता है "उसको बिर कंगन जैसा दुर्लभ वस्तु प्राप्त हो.सिद्ध नवनाथ भगवान
भगवान को बिर कंगन बहोत प्रिय है यह बात सभी जानते है और समजते है.आपके कल्याण हेतु मै यह संकल्प ले रहा हू बिर कंगन के माध्यम से आप श्रेश्ट तांत्रिक बने,समाज मे जनकल्याण करके अपने नाम को रोशन करे और साथ थोडा बहोत धनार्जन भी करे.मुख्य बात यह है की पाखन्ड़ से बचे जैसे जब भी आपको किसी से बिर कंगन लेना हो तो सर्वप्रथम उसको बिर कंगन का फोटो दिखाने का आग्राह करे अन्यथा वह आपको बिर कंगन के नाम पर कोई भी कंगन दे देगा.
मेरा सम्पर्क:-
amannikhil011@gmail.com
पर मुझे आप इमेल करे और बिर कंगन को प्राप्त करे.

आदेश......

19 Sept 2015

हाजरात मंत्र सिद्धी

हाजरात सिद्धी हिंदू धर्म मे भी है और लोग सोचते है के मुस्लिम धर्म मे है.
हाजरात एक क्रिया है,जिसके माध्यम से हम भूत भविष्य की घटना देख सकते है और अदृश्य शक्तियोको भी देख सकते है. बहोत से ऐसे कार्य होते है जिनमे हमे
भूतकाल और भविषयकाल मे होनेवाली घटना का ज्ञान होना आवश्यक होता है परंतु हम नही जान सकते है.इसलिये हाजरात साधना से हमे मदत प्राप्त हो सकती है.यह साधना 7 दिन मे सिद्ध होता है और इसमे ज्यादा समय नही लगता.
आज कल लोगो ने हाजरात के नाम पर लूटना शुरू कर दिया है, और जिनको सिद्ध हुवा है उनकी तो रोजी रोटी बन गया है.यह विधान यह विषय उत्तम है इसे अन्य भाषा मे " कजली लगाना " कहते है, कुछ लोग " अंजन " भी बोलते है.पर यह विधान हाजरात नाम से प्रचलित है,इस क्रिया से आप स्वयम अपने आँखों मे या अंगूठे पर काजल लगाकर देख सकते है और देवता का आवाहन भी कर सकते है,ताकि आपकी परेशानिया दूर हो.
मैने स्वयम हाजरात सिद्धी प्राप्त की है जिसमे मुझे 7 दिन मे सफलता प्राप्त हुयी.मै किसी भी 12 वर्ष से कम उम्र के बालक के अँगूठे मे हाजरत लगाता हू तो मुझे हर बार सफलता प्राप्त हुयी.
मै यहा पर जो गोपनिय विधान दे रहा हु उससे हाजरात सिद्धी मे सफलता मिलती है क्युके यह हाजरात मेरू मंत्र विद्या है.जिससे किसी भी प्रकार के हाजरात सिद्धी मे पूर्ण सफलता प्राप्त होती है
हाजरात मेरु मंत्र :-
॥ ओम ह्रीं श्रीं क्लीं हाजरात
सिद्धि कुरू कुरू स्वाहा ॥
किसी भी शुक्ल पक्ष के पंचमी तिथि मे 11 माला जाप करने से यह मंत्र सिद्ध होता है और इस मंत्र को सिद्ध करने के बाद "हाजरात सिद्धी" मे सफलता प्राप्त होता है.
"www.ssd-sadhnaye.blogspot.com"
blogger को अपने page,desktop Or shortcuts मे कृपया save रखिये.
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मै आप लोगो को वह विधान दे सकता हू जिससे आप किसी भी 12 वर्ष से कम उम्र के बालक के अँगूठे मे हाजरात लगा सकते,जिससे उस बालक को सब कुछ साफ-साफ दिखायी देगा और आप जो भी प्रश्न पुछेगे उसका जवाब बालक को हाजरात से प्राप्त होगा.इस तरहा से आप अपने जीवन मे आनेवाले दुखो से राहत पा सकते है.
इस मंत्र को सिद्ध करने हेतु "जिन्दा काजल" और "हाजरत सिद्धी यंत्र" की जरुरत होती है.जिन्दा काजल विशेष प्रकार के जडि-बुटियो से बनता है.
हाजरत सिद्धी यंत्र शुक्रवार के दिन जो भी चंद्र का शुभ मुहूर्त हो उसमे ही बनाया जाता है,जिससे सफलता जल्दी मिलती है.
इस साधना को मैने बहोत वर्षो से गोपनिय रखा हुआ है ताकी गलत हाथ मे ना लगे.इस साधना की सामग्री और उसका पूर्ण विधि-विधान आपको मुझसे प्राप्त होगा.जब तक आप साधना पूर्ण सफल नही होते है तब तक मै आपका मार्गदर्शन करता रहुगा.
आपको आश्वासन देता हू "आपको इस साधना मे पूर्ण सफलता प्राप्त होगी"
सामग्री और मंत्र विधान हेतु सम्पर्क करे,इसके लिये आपको मुझे ई-मेल amannikhil011@gmail.com पर करना होगा.
आदेश......

9 Sept 2015

वचन सिद्धी प्रयोग.

जो बोलेगे वह सत्य होगा क्युके वचन सिद्धी एक प्रकार की वाणी सिद्धी हि
है.13 तारिख से साधना प्रारंभ करना है,माला रुद्राक्ष का हो,आसन वस्त्र कोई भी चलेगे परंतु लाल रंग के रहे तो ठिक
है,दिशा उत्तर के तरफ़ मुख हो जाप के समय.साधना की शुरूवात ग्रहण से करे और उसके बाद रात्री मे 9 बजे के बाद करे.साधना सूर्यग्रहण से चंद्रग्रहण तक करिये तो यह सिद्धी पूर्ण जीवन काल तक रहेगी.


मंत्र:-
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ll काली काली महाकाली,इंद्र की बेटी ब्रम्हा की साली,तीन सौ पैसठ काम
श्रीराजा रामचंद्र के,लंका नाशय के मेरी बाचा सिद्ध करके लावे तो सच्ची काली
महाकाली कहावे,मेरी भक्ति गुरू की
शक्ती,फुरो मंत्र ईश्वरीय वाचा ll


विधि:-
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एक पान का बिडा सिर्फ सूर्यग्रहण मे महाकाली जी को चढाये बाकी दिन नही
और साथ मे एक नारियल,चढाइ हुयी
सामग्री दूसरे दिन सुबह निर्जन स्थान पर रखे.मंत्र को 108 बार सिर्फ ग्रहण काल मे
पढीये,बाकी दिन मंत्र 21 बार पढके एक
ग्लास पानी मे 3 फुंक लगाकर 16 दिन पिये.यह साधना महत्वपूर्ण है.
आदेश

8 Sept 2015

अप्सरा सिद्धी (Apsara Siddhi).

अप्सरा सिद्धी के बारे मे कई ग्रंथो मे बहोत कुछ प्रामनिकता के साथ लिखा हुआ है परंतु उसके सिद्धी के बारे मे ज्यादा कुछ लिखा नही गया.
आज मै आपको बता दू के अप्सरा को सिर्फ नक्षत्र,चंद्र बल,ताराबल और कुंडली मे शुक्र ग्रह के स्थिति को देखकर ही सिद्ध किया जा सकता है.
नक्षत्र-इससे अप्सरा सिद्धी का पूर्ण आधार माना जा सकता है क्युके अप्सरा नक्षत्र के हिसाब से साधक पर कृपा करती है और प्रत्यक्ष होती है.प्रत्येक अप्सरा का एक विशेष नक्षत्र है जिस पर उसे आकर्षित किया जा सकता है और अगर उसी नक्षत्र पर साधना पूर्ण किया जाये तो अप्सरा का प्रत्यक्षीकरन असंभव नही है.नक्षत्र और अप्सरा का संबंध एक दूसरे को जोडता है जिससे साधक सफल होता है.
चंद्र बल-इससे साधक मे उस्ताह निर्मित होता है जिससे साधक चैतन्यता के साथ साधना मे सफल होता ही है और उसकी मानसिकता साधना मे योग्य निर्देश प्रदान करती है.बिना उस्ताह और उमंग के कोई भी साधक सफलता प्राप्त नही कर सकता है येसा साधना सुत्र है.
तारा बल-यह भी आवश्यक माना जाता है जिससे आप स्वयम को उर्जावान बनाने मे सक्षम रहेते है.
शुक्र ग्रह-जिससे साधक मे आकर्षण और सम्मोहन होता है.भोग और विलास के ग्रह की कृपा से आज इंद्र देव सकल समृद्ध माने जाते है,येसी दिव्य कृपा उन्हे महालक्ष्मी जी के कृपा से प्राप्त हुयी और आज भी वह देवराज इंद्र कहेलाते है.उनकी तपस्या से उन्होने यह वैभव प्राप्त किया और दैत्यगुरू शुक्राचार्य जी की भी कृपा प्राप्त करके सभी प्रकार के आनंद को प्राप्त करने का लाभ उठाया.देवगुरू बृहस्पती के मार्गदर्शन मे उन्होने सभी देवताओ को अपने कार्यो हेतु अपने दरबार मे स्थान दिया हुआ है.
इसी तराहा अप्सराओ के नृत्य से उन्हे आनंद मिलता है और अप्सरा का कार्य ही यह है की "आनंद प्रदान करना",जिसके लिये वह श्रुन्गार करती है नृत्य करती है और इंद्र सभा को खुश रखती है.अप्सरा मे येसी क्षमता है जिससे वह समस्त प्रकार के दुखो का नाश करदे.
अब कुछ लोग कहेते है भगवान कृष्ण जी ने कहा है "जिसको पुजोगे उसिको प्राप्त हो जाओगे,जैसे भुतो को पुजोगे तो भुतयोनी मे ही जाओगे"तो क्या यह गलत है के आप अप्सरा को प्राप्त करे और अप्सरा मे जाओगे.यह तो अच्छा है आप भी दूसरो के दुख*दर्द को समाप्त करने की क्षमता प्राप्त करोगे.कोई ये क्यू नही कहेता भगवान कृष्ण ने ये भी कहा है "तुम चाहे जिसकी भी पुजा करो अंत: वो मुझे ही प्राप्त होती है",एक बात समझ लो "चाहे जल कैसे भी बहे अंत: वह समुद्र मे ही मिलता है.जब सब कुछ भगवान कृष्ण मे ही समाहित होगा और उन्हे ही प्राप्त होगा तो वही आपको फल देगे.अब इसमे डरने जैसी कोई बात नही है की "अप्सरा साधना करोगे तो अप्सरा योनी को प्राप्त हो जाओगे".
सबसे पहिले अपने विकारो को दुर करो और गुरूकृपा से अप्सरा साधना करो,साथ मे किसी भी अप्सरा साधना से पूर्व गुरूमंत्र का अनुश्ठान जरुर किजिये.आपको सफलता प्राप्त होगी और जीवन मे खुश रहेने का मार्ग मिलेगा.यह साधना कोई भी कर सकता है.
आदेश.

17 Aug 2015

बंगाल मोहिनी महाविद्या (प्रत्यक्षिकरण साधना).


जीवन मे आकर्षण है तो सब कुछ है

जीवन मे सौन्दर्य है तो सब कुछ है

जीवन मे सम्मोहन है तो सब कुछ है

जीवन मे वशीकरण है तो सब कुछ है

इसलिये महत्व है इस विशेष विद्या का जिसे कहा गया है

"मोहिनी माहाविद्या".

मोहिनी जो पत्थर को भी मोहित करने मे समर्थ हो,वह है "बंगाल मोहिनी" जिसे प्रत्यक्ष करना संभव है.जिसके प्रत्यक्षीकरण से तीन वचन प्राप्त किये जा सकते है.मोहिनी भगवान विष्नु जी का एक सुंदर एवं मोहित करने वाला रुप है जो समुद्र मंथन के समय मे उन्होने धारण किया था.मोहिनी ने भगवान शिव जी को इस तराहा से मोहित कर दिया था की उन्हे मोहिनी से प्रेम हो गया.शाबर मंत्रो मे "बंगाल मोहिनी" मंत्र का बडा महत्व है और मोहिनी को प्रत्यक्ष करके जो लाभ मिलते है वह सिर्फ साधना करने से नही मिलते.मोहिनी सिद्धी से किसी को भी वश किया जा सकता है और इसके लिये कुछ खाने-पीने मे मंत्र अभीमंत्रीत करने की आवश्यकता नही है.जब साधक की मोहिनी सिद्ध हो जाये तो वह बैठे जगहा से ही व्यक्ती विशेष को अपने वश मे कर सकता है.मोहिनी को प्रत्यक्ष करने से वह जीवन भर साथ देती है और प्रत्येक कार्य को स्ययं संभव कर देती है.मोहिनी ही संपूर्ण जीवन का आधार है,मोहिनी सिद्धी से देवि/देवता तक वश मे हो जाते है तो सामान्य व्यक्ती को वश मे करना कोई कठिन कार्य नही है.स्वयम अनुभव करे और चिंतन करने का प्रयास करे फिर सोचिये "जीवन मे मोहिनी सिद्धी की कितनी आवश्यकता है".यह आर्टिकल पढने के बाद बहोत सारे लोग चुराकर अपने सोशल नेटवर्किंग साईट पर डाल देगे या अन्य वेबसाईट पर डालेगे परंतु वह लोग आपको "बंगाल मोहिनी का प्रत्यक्षीकरण मंत्र" बताने मे असमर्थ है.हमारे साइट पर दीये गये सभी आर्टिकल का अपना एक अलग महत्व है.यहा सिर्फ प्रामानिक मंत्र साधना दी जाती है ताकी जनकल्याण हो सके. मै यह साधना कभी देना नही चाहता था परंतु आज हमारे महाराष्ट्र के किसान भाइ आत्महत्या के मार्ग पर चल रहे है जिसका मुख्य कारण है कर्ज और खराब फसल,तो उनके मदत हेतु हमारी संस्था कार्य कर रहि है.हम चाहते है आप भी उनकी कुछ मदत करे और पुण्य के भागी बने क्युके जब अन्नदाता ही नही रहेगा तो कोई भी व्यक्ती जीवन नही जी पायेगा.इसलिये हमने इस साधना के "मंत्र विधि-विधान" न्यौच्छावर राशी रखी हुयी है और न्यौच्छावर राशी आपके तरफ से मिलते ही आपको हमारी संस्था की और से उसकी रसीद भी प्राप्त होगी.यह रसीद आपको income tax मे छुट प्राप्त करने हेतु काम मे आयेगी और मोहिनी महाविद्या भी आपको प्रत्यक्ष सिद्ध होगी परंतु यह सब कुछ आपके विश्वास पर आधारित है.सफलता मिलना आसान उनके लिये होता है जिनमे धैर्य हो,साहस हो,जिद हो,मेहनत करने की तय्यारी हो और पूर्ण विश्वास हो तो येसे साधक के लिये कुछ भी असंभव नही है.जो व्यक्ती दान स्वरुप न्यौच्छावर राशी देगा उन्हेही "बंगाल मोहिनी" का मंत्र एवं गोपनिय विधान उपहार स्वरुप प्राप्त होगा.साधना आसान है परंतु किसिका अहित करने हेतु साधना ना करे,हा जीवन की आवश्यकताये पूर्ण करने हेतु साधना अवश्य करे.

हो सके तो कृपया लिंक शेयर करे परंतु आर्टिकल अपने स्वार्थ हेतु चोरी ना करे क्युकी यह गरीब किसानो के साथ धोका होगा.

मंत्र साधना हेतु हमसे सम्पर्क करिये और  मार्गदर्शन प्राप्त करे.मोहिनी विद्या अत्यन्त प्राचीन विद्या मे से एक है.प्रत्येक देवि/देवता,साधू-सन्यासी ने मोहिनी विद्या को सिद्ध किया है ताकी सबका आकर्षण तत्व बना रहे और अपने भक्तो के साथ वह सम्पर्क मे रहे.नवनाथ भत्कीसार नामक प्राचीन ग्रंथ मे एक किस्सा है जो मै यहा लिखना चाहुगा. एक बार गोरखनाथ जी और कानिफनाथ जी किसी वन प्रदेश मे बैठे थे,उस समय दोनो मे एक-दूसरे के ग्यान को जानने की जिग्यासा हुयी तो उस समय कानिफनाथ जी ने मोहिनी शक्ती का आवाहन किया और आकर्षण अस्त्र के प्रयोग से कुछ दूरी पर आम का पेड था,तो उसके आम आकर्षण शक्ती से तोडकर गोरखनाथ जी के सामने रख दिये,वो भी बिना आम को स्पर्श किये उन्होने यह कार्य किया था.

तो इस प्रकार से मोहिनी शक्ती से कई महान सिद्धो ने कार्य संपन्न किये है.
मोहिनी विद्या सिखने से आकर्षण,मोहन और वशीकरण जैसे कार्य संपन्न कर सकते है.
जो साधक मोहिनी विद्या सिखना चाहते है वह व्यक्ति मुझे इमेल से सम्पर्क किजिये.

इस विद्या मे पूर्ण सफलता मिलता है,सिर्फ आवश्यकता है तो अचुक मार्गदर्शन का जो मै आपको अवश्य ही करुगा.जीवन मे कई कठीनायिया आती है जिसमे आकर्षण शक्ती से आपको सहाय्यता मिल सकती है.
मै जानता हु मेरे सारे आर्टिकल आप अच्छेसे पढते है परंतु इस बार यह आर्टिकल आपके जीवन को बदलने मे पूर्ण सहाय्यक है.यह आर्टिकल सिर्फ इसी ब्लोग पर आपको पढने मिलेगा और किसी अन्य जगह यह पोस्ट होता है तो इसका कोई महत्व नही है क्युके मै सिर्फ ब्लोग पर लिखता हु फेसबुक पर नही.
इसिके साथ यह कामना करता हु,आप सभी को मोहिनी विद्या सिद्ध हो और आपका प्रत्येक कार्य सफल हो जाये.




आदेश.

11 Feb 2015

बिर मुद्रिका

   
बहोत दिनो से इस विशय पर खोज चल रहा है कुछ ने तो मंत्र तक छाप दीये किताबो मे परंतु जब उनको पूछो इसको जगाने का विधि क्या है तो फोन काट देगे.जब पता नही कुछ तो क्यू छाप देना मंत्रो को सिर्फ खुद का नाम चलाने के लिये? बिर मुद्रिका बिर कंगन जैसे कार्य करता है सिर्फ फर्क इतना है बिर कंगन मे 52 बिर 64 जोगिनी बाँध सकते है तो कुछ कंगन 51-52 बाँध सकते है और बिर मुद्रिका मे 1-2 या सिर्फ 1 बिर बाँध सकते है.बिर कंगन साथ मे लेकर घूमना खतरे से खाली नही और मुद्रिका पहेन कर घुम सकते है.बिर कंगन मे अष्ट या नव धातु और बिर मुद्रिका सिर्फ एक धातु से बनता है.कंगन कई से काम ले सकते है मुद्रिका से
सीमित कार्य होते है.मैने कुछ ज्योतिषी देखे जो बिर मुद्रिका पहेनकर बिना कुंडली देखे सारी बाते
बता देते है परंतु उन्होने मेहनत नही की है मुद्रिका बनाने मे ये बात वो मानते है.जैसे "कान्होर्या बिर" इसको कुछ भी पूछो ये हर खबर बताता है और ये आज तक चाँनल से भी आगे है,ये भूत भविश्य भी बता देता है और बदलेमे कुछ नही माँगता.जब फूंक लगाओ तब जागता है और बाकी समय भगवान जाने कहा होता है.इस
मुद्रिका को पूर्वषाढा नक्षत्र मे बना सकते है क्युके यह नक्षत्र अद्रुश्य शक्ती को वश करने मे साहाय्यक
है.काले घोडे के नाल को शनी अमवस्या के दिन प्राप्त करे और इस नाल को 7 बार शंख की ध्वनि सुनाये.जब अच्छे योग हो तो चन्द्र बल देखकर नाल से मुद्रिका निर्माण करे.जिस दिन मुद्रिका बनाओ उसी दिन उतरण और आपटा के पौधे को निमंत्रण देकर आये,निमंत्रण देते समय ये कहेना है "मि आलो तुया कामासाठी,तू चाल
माया कामासाठी" और येसा कहेकर दूसरे दिन दोनो पौधो को उखाड़कर लाये.दोनो पौधो के जड
को घर लाने के बाद छाव मे सुखाये और सुखाने के बाद शनिवार को रात्री मे पंचाम्रुत से स्नान कराये और
हनुमानजी के मंदिर जाकर उनके चरणो मे रख दे,दूसरे दिन सवेरे सूर्य निकलने से पहिले उन्हे घर पर लाकर
सम्भाल कर रखे.जब पूर्वषाढा नक्षत्र हो उस रात मे दोनो जड से (एक हाथ से जल निकाले कुवे से
या हैंडपम्प से) जल डालते रहे मुद्रिका पर और मंत्र जाप करते रहे,जाप करते समय गुर्र गुर्र
गुर्र....येसा ध्वनि सुनायी देगा तो डरना नही मंत्र जाप करते रहे कुछ समय बाद आवाज
आयेगा "क्या चाहते हो मुझसे"तब मंत्र जाप बंद करदे और कान्होर्या बिर को मुद्रिका मे स्थापित होने
का प्रार्थना करे और उसे वचन माँगे "जब मै तुम्हेजगाउन्गा तब बिना शर्त तुम मुझे साहय्यता करना",तब
वो वचन देकर चला जायेगा. यह बिर मुद्रिका जिन्हे प्राप्त करना हो वह साधक मुझसे सम्पर्क करे.
amannikhil011@gmail.com

आदेश.



2 Jan 2015

अप्सरा मंत्र साधना.


अप्सरा सिद्धी प्राप्त करना किसी भी नजर से अमान्य और अनैतिक नही है क्युके जब विश्वामित्र जैसे महान योगी अप्सरा साधना से अपने जीवन की कमिया दुर करके आनंद की अनुभुतिया कर सकते है तो सामान्य साधक क्यू ना लाभ ऊठाये?महान योगी,सन्यासी,ऋशी और देवताओ तक ने अप्सरा साधना की है यह प्रमाण इस बात का के अप्सरा साधना जीवन मे जरुरी है.शाबर साधनाये कलयुग मे शीघ्र फलदायी है और येसा हो नही सकता आप शाबर अप्सरा मंत्र करो और अप्सरा सिद्ध ना हो?
वैसे तो "मंत्र महोदधी" आदी अन्य तांत्रिक ग्रंथो मे 108 विभिन्न अप्सराओ की प्रामानिक साधनाए दी हुयी है और उनमेसे कई अप्सराओ की साधनाए साधको ने सिद्ध की है और उसका लाभ भी उठाया है परंतु शाबर मंत्र से अप्सरा के माध्यम से मनचाहा कार्य करवाया जा सकता है.बहोत से लोगो का कहेना है "अप्सरा सिद्ध नही होती है" क्युके कलयुग मे अप्सरा धरती पर आनही सकती है?येसे लोगो को मेरा प्रणाम और येसे लोग कृपया एक बात दिमाग मे डाल दे जब कलयुग मे अन्य साधना मे सफलता पा सकते है तो अप्सरा मे क्यू नही?आज भी इस धरा पर स्मशान सिद्धी,महाविद्द्या सिद्धी और अन्य कठीन साधना साधको ने सिद्ध की है तो अप्सरा सिद्धी कोनसी बडि बात है.
अप्सरा साधना से प्रत्येक कार्य पूर्ण होता है,अप्सरा दिखने मे अत्यन्त सौंदर्य से युक्त,आकर्षक,सम्मोहन­ से पूर्ण और वशीकरण से भरपूर होती है.अप्सरा को सहेली और प्रेमिका के रूप मे सिद्ध कर सकते है जो आज भी सम्भव है.यह साधना नाथपंथ मे गोपनीय मानी जाती है और शाबर मंत्रो मे एक येसा मंत्र है जिसके माध्यम से किसी भी अप्सरा को सिद्ध किया जाता है,एक ही मंत्र के जाप से सभी अप्सराये सिद्ध होती है.अप्सरा जब सहेली के स्वरुप मे सिद्ध की जाये तो साधक के जीवन का हर दुख मिटा देती है और जब प्रेमिका स्वरुप मे सिद्ध की जाये तो हर प्रकार के भोग प्रदान करती है और स्वर्ग के सारे सुख प्रदान करती है.लक्ष्मी साधना से धन प्राप्ति मे समय लगता है परंतु अप्सरा नित्य धन प्रदान करती है 


जिसने अप्सरा साधना संपन्न कर ली उसके जीवन मे आनंद ही आनंद है,मस्ती ही मस्ती है,जोश है,जवानी है,चैतन्यता है,पवित्रता है और पूर्णता है.उंचे से उंचे महान संन्यस्त व्यक्ती भी अप्सरा साधना करता है तथा प्रत्यक्ष हर क्षण वह आनंद व खुमारी मे दुबा रहता है.अन्य साधनाए तो सभी करते है परंतु अप्सरा साधना वही करता है जिसे जीवन मे सभी सुखो की ख्वाइश हो और जिनके विचार जीवन मे सिर्फ और सिर्फ आगे बढकर सफल होने के हो.मस्ती तो सभी करते है परंतु पूर्ण जोश के साथ नही कर पाते है और इसका कारण है शारीरिक कमजोरी,जब शरीर कमजोर हो रोगी हो तो ना दिन होता है और नाही रात होती है येसे व्यक्ती के लिये परंतु अप्सरा शरीर का कायाकल्प कर देती है.
साधना विधान:-

 साधना किसी भी शुक्रवार से कर सकते है,इस साधना का महत्वपूर्ण भाग है "पारद अप्सरा बेहड" जो गोल होता है गोलक के तराहा जिसे सिर्फ पूर्णिमा के रात मे ही बनाया जाता है.कम से कम 15 दीन लगते है इसके निर्माण मे,इस गोलक मे सबसे ज्यादा अंकोल के तेल का इस्तेमाल होता है जो दुर्लभ है,वैसे यहा पर निर्माण विधि के बारे मे लिखना ज्यादा उचित नही है.मुज़े 3-4 महीने लग गये "पारद अप्सरा बेहड" निर्माण विधि सीखने मे क्युके यह जटिल क्रिया है.इसी गोलक पर यह साधना का विधि-विधान संपन्न होता है और साथ मे अप्सरा माला का जरुरत पडेगा.मंत्र ज्यादा बडा नही है क्युके हमारी सोच होती है जैसे शाबर मंत्र लंबे-चौडे होते है परंतु प्रत्येक शाबर मंत्र बडा नही होता है.शाबर मंत्र अचूक होते है और इनका प्रभाव बहोत शीघ्र फल देता है,शाबर मंत्रो से सिद्धी प्राप्त करना बहोत आसान होता है और Guarantee होती है सिद्धी मिलेगी इसमे कोई किंतु-परंतु नही है नाही कोई संशय है.मै जो मंत्र बता रहा हू यह एक अप्रकाक्षित मंत्र है जो किसी भी पुस्तक मे आज तक छपा हुआ नही है और नाही किसी तांत्रिक ग्रंथो मे पढने मिलेगा.मै यह साधना सिर्फ अच्छे साधको को देना चाहता हू इसलिये यहा पर मंत्र-विधि नही दे रहा हु,इसके लिये क्षमा चाहता हु.
जो साधक "पारद अप्सरा बेहड"प्राप्त करना चाहते है और साथ मे गोपनीय अप्सरा सिद्धी का विधान भी,वह सम्पर्क करे,मेरा ईमेल आईडि:-
amannikhil011@gmail.­com




Mantra meditation nymph.

Siddhi nymph from receiving any noticeable invalid and is not immoral when Vishwamitra Kyuke nymph the great Yogi practice Anubhutia to enjoy your life and eliminate the Kmia can not benefit the general practitioner Utaye Q? Great yogi, ascetic, Hrishi and Dewatao By the nymph nymph practice of meditation is the proof of that early on in life requires a modern Hakshabr Sadnaie can not be fruitful and Yesa do you spell Shabr nymph and nymph is not proven?

By the way "mantra Mahoddhi" hooked on other Tantric texts were received and Unmese Sadnaa Pramanik of 108 different Apsrao Sadnaa of several Apsrao devotees and the advantage of the proven but Shabr desired function can be made through spells nymph The logo is now saying Hakbhot "nymph has not proven" in a modern fairy Kyuke Anhi on earth could? Yese logo Yese people my regards and please put a thing in the mind can find success in other schools in the Kali Q In the nymph was not even on the earth 'cemetery Siddhi, and other difficult Mhowiddya Siddhi meditation devotees is proven by the nymph is Bdi Konsi Siddhi.
Each practice is done nymph, nymph in appearance with a very aesthetic, charming, full of hypnosis and to captivate Halapsra rich as the friend and girlfriend have proven in practice is still possible Nathpnth is considered confidential in the Yesa in enchantments and spells Shabr which is realized through any fairy, chanting the same mantra all Apsraye Halapsra the friend's nature proves to be proven in the life of the seeker erases all the suffering of the beloved nature and must be proven in every type provides enjoyment and pleasures of paradise that offers all the time on the receipt of funds from Haklkshmi practice but provides nymph continual funding

Silence nymph who took the greatest joy in her life, the fun is the fun, the excitement, the youth, is consciousness, purity and perfection higher than Hakunche great sannyasin and direct every moment that person is the nymph practice Duba hangover lives in bliss and so do all the other Sadnaa nymph but the practice is the same in life and wishes of all Sukho whose views on life and only further increased Holmsti succeed is all but complete


Silence legislation: -

Anyone can practice by Friday, this practice is an important part of "transparency nymph Behd" which is round eyeball Traha the only moon in the night made it seem oppressed least 15 in its construction, the In the sphere of the oil is used most ankola is rare, it is more appropriate to write here about the construction method not Hakmujhe took 3-4 months "mercury nymph Behd" construction method in learning the complex actions Kyuke Likewise, the practice of the ritual takes place on the sphere and in the nymph with rosary Kyuke our thinking is not big, there is a need Pdegakmntr much as Shabr spells are longer-wide is not large, but each Shabr mantra Hakshabr spells and their effects are unmistakable fruit is extremely quick, very easy to get Siddhi by Shabr Mantras and have Guarantee Siddhi It will not have any ifs and buts, no doubt annoying spells am telling a Aprkakshit mantra in any book to date is not printed and not read out any Tantric texts Milegakma it's just good practice to give devotees chant-law on here so I can not Hu Hu, Hu sorry for it.

The seeker "Behd mercury nymph" and want to get on with privacy legislation Siddhi nymph, she Info, My email ID-
amannikhil011@gmail.com







Aadesh.......



2 Jul 2014

कर्ण पिशाचिनी साधना




यह अत्यंत उग्र साधना है और शीघ्र फलप्रद है,इस साधना से सिद्धि ना मिले यह तो सम्भव ही नहीं है इसलिये यह साधना संपन्न करना योग्य है.यह साधना ऐसे व्यक्तिओ को सिद्ध है जिनके पास कोई भी जाये तो वह साधक बहुत-भविष्य-वर्तमान काल सहज ही बता देते है.
यह साधना मै भी करना चाहता हु और यह साधना संपन्न करने का योग्य समय श्रावन माह है जो अभी आनेवाला है,यह माह हर तांत्रिक साधना के लिए उत्तम माना जाता है.श्रावन माह में सभी तांत्रिक शिव साधना और इतर योनि साधना ही करते है,महत्वपूर्ण बात यह है की इस साधना में किसी भी प्रकार का कोई खतरा नहीं है और साधना सिद्ध होने के बाद साधक के परिवार को भी डरने का जरुरत नहीं है क्युकी इस मन्त्र के प्रभाव से साधक का सदैव रक्षा होता है.






मंत्र-

।। ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं नृम ठं ठं नमो देव पुत्री स्वर्ग निवासिनी,सर्व नर नारी मुख वार्ताली,वार्ता कथय,सप्त समुद्रान दर्शय दर्शय,ॐ  ह्रीं श्रीं क्लीं नृम ठं ठं फट स्वाहा ।।


साधना विधि-
एक वाराह (जंगली सूअर/शूकर दंत) दन्त अपने आसन के निचे रखे और साथ में सेई का काटा रखिये,आसन लाल रंग का हो माला रुद्राक्ष या लाल हकीक का हो,वस्त्र भी लाल रंग के हो,दिशा दक्षिण हो,सामने तेल का दिया सुगन्धित इत्र डालकर जलाये और धुप भी जलाये,साधना शुक्रवार से प्रारम्भ करे,नित्य २१ माला मन्त्र जाप करना आवश्यक है.वाराह दन्त वाराह के नैसर्गिक मृत्यु से प्राप्त हो यह इस साधना का गोपनीय सूत्र है.






 ।। इती श्री सदगुरु चरणार्पनमस्तु ।। 

 

 

 

 

 

वशीकरण साधना
मैंने एक विधान ढूंढा है जो शत प्रतिशत प्रभावशाली है,जिसका प्रभाव १००% होता ही है और नसीब से इसका सामग्री भी मिल गया है जो आज तक मेरे लिये असंभव था,इसलिये जो भी व्यक्ति यह विधान प्राप्त करना चाहते है वह संपर्क कीजिए.

amannikhil011@gmail.com