2 Jul 2013

भुवनेश्वरी युक्त लक्ष्मी साधना






यह धन प्राप्ति की सबसे महत्वपूर्ण साधना है,जिनके पास नौकरी नहीं,जिन्हे प्रमोशन नहीं मिल रहा है,जिंका व्यापार नहीं चलता,जिनके घर मे आर्थिक बाधाये कुछ ज्यादा ही है,ज्यो व्यक्ति जीवन मे सिर्फ मेहनत करते है परंतु धन नहीं मिल रहा है॰तो अब चिंता करने का कोई बात नहीं,येसा हो ही नहीं सकता है के आप यह साधना करो और आपके जीवन मे किसी भी प्रकार का आर्थिक समस्या रहे,मै तो कहेता हु भगादो आप अब इस समस्या को.........
साधना विधान:-
यह साधना संकष्ठ शुभ अवसर पे करनी है, आपके पास भुवनेश्वरी यंत्र हो तो अच्छी बात है,अगर नहीं हो तो हमे इस यंत्र को भोजपत्र पे बनाना पड़ेगा,भोजपत्र नहीं मिला तो फिर क्या करेगे,चलो कोई बात नहीं,सफ़ेद रंग के कागज पे यह यंत्र हम अनार की कलम और केसर की स्याही से तो अंकित कर लेगे॰ अब हमे चाहिए रुद्राक्ष माला और रुद्राक्ष माला को गुरुवार के दिन श्याम को शिवजी के मंदिर ले जाना है,हा पे शिवजी को माला चढानी है और फिर शिवजी के सँग माला का भी अभिषेक करना है ह्रीं शिवाय तेजसे नम: 108 बार बोलते हुये,अब तो शिवजी की कृपा और आज्ञा भी मिल गयी मतलब अब सफलता जरूर मिलेगी,हम्म............
अब वही पे माला का पूजन करे और दूसरे दिन फिर एक बार माला का पूजन करके मंत्र जाप रात्री मे १० बजे शुरू करना है,इतनी तेजस्वी माला से हम कम से कम ११ माला मंत्र जाप तो रोज कर सकते है,ये साधना ७ दिन की है और निच्छित ही हमे सफलता तो मिलेगी ही,सिर्फ ७ दिन की साधना से,८ वे दिन आप सभी सामग्री रखकर जल मे विसर्जित करदे और माला से नित्य 1 माला गुरुमंत्र का जाप किया करो,
भुवनेश्वरी महामंत्र साधना





विनियोग:-

ॐ अस्य श्री भुवनेश्वरी हृदय महामंत्रस्य श्री शत्तील: ऋषी : । गायत्री छन्दा:। श्री भुवनेश्वरी देवता हं बीजं । ईं शक्ति:। रं कीलकं । सकल-मनोवांछित सिद्यर्थे जपे विनियोग: ।  



ऋष्यादी न्यास


श्री शक्ति ऋषये नम: शिरसी ।
गायत्री छन्दसे नम: मुखे ।
श्री भुवनेश्वरी देवतायै नम हृदयी ।
हं बीजाय नम: गुहये।
ईं शक्तये नम: नाभौ ।
रं किलकाय नम: पादयौ: ।
सकल-मनोवांछित सिद्यर्थे जपे विनियोगाय नम: सर्वागे ।

ध्यान

सरोजनयनां चलत कनक कुंडलां शैशवीं ,
धनुर्जप वटी करामुदित सूर्य कोटी प्रभाम ।
शशांक कृत शेखरां शव शरीर संस्था शिवाम,
प्रात: स्मरामी भुवनेश्वरी शत्रु गति स्तम्भनीम ॥


महामंत्र:-




॥ ॐ श्रीं ॐ श्रीं ह्रीं ऐं ह्रीं ऐं क्लीं सौ: क्लीं सौ: क्रीं क्रीं ह्रीं भुवनेश्वर्यै नम: ॥






यह मंत्र रंक को भी राजा बनाने युक्त क्षमतावान है,कृपया इस साधना को किसी भी प्रकार से मज़ाक मे ना ले,एक बार साधना सम्पन्न कर लीजिये,नौकरी भी मिलेगा,पैसा भी खूप कमाओगे,जितना भी कर्जा हो आप कर्ज से मुक्त भी हो जाओगे.......
अभी तक जितनी भी लक्ष्मी साधना आपने की है,उन्हे भूल जाओ क्यूकी यह साधना अत्याधिक तीव्र है,साधना कराते समय पायल खनक ने की आवाज आ सकती है


ये साधना मै एक बार फेसबूक पे दे चुका हु और इसका रिज़ल्ट साधकोको 100% मिला है



श्री सदगुरुचरनार्पनमस्तु.................................

प्रत्यक्ष भूत सिद्धि-1.



भूत बहोत ज्यादा विश्वसनीय होते है,इनपे विश्वास रखने से कोई हानी  नहीं होती,ना भूत हानिकारक होते है ना भयप्रद सिर्फ आवश्यकता है सही मार्गदर्शन का,जो आपको हर समय मिलता रहे॰साधक भूत सिद्धि के उपरांत निच्छितं हो जाते है,उनमे किसी प्रकार का भय और चिंता नहीं होती,साधक का हर प्रकार से रक्षा होता रहेता है,हर क्षण भूत साधक का आज्ञा पालन करता है,भूत सिद्धि का दो प्रकार है 1) दृश्य और 2) अदृश्य
यह साधना किसी एक भूत का नहीं बल्कि ६ भूतो का है,एक ही समय मे इस साधना मे ६ भूत सिद्ध होता है,भूत बलशाली होने के कारण साधक का प्रत्येक कार्य कम समय मे सम्पन्न करते है,इस साधना मे जब भी आपको भूतो से कार्य करवाना हो तो वह उनके नाम का स्मरण करने से आंखो के सामने प्रकट होते है और कार्य को सिद्ध करने के लिये सहाय्यता करते है॰
इस साधना की आवश्यक बाते-
जब आप अपने शहर का समाचार पत्र (न्यूज़-पेपर) पढ़ोगे तो उसमे एक बात का खयाल रखिये जैसे कुछ दिन पहिले कितने व्यक्ति का आकस्मिक मृत्यु हुआ है,उनमेसे ६ व्यक्ति यो के नाम लिखकर अपने पास सुरक्षित रखिये क्यूके हमे उन ६ व्यक्तियोको प्रत्यक्ष करना है,नाम हमे पता होगा तो उनको सिद्धि करने के बाद प्रत्यक्ष करने मे सहाय्यता मिलेगा नहीं तो आप नाम के चक्कर मे दुविधा मे प जायेगे,एक भूत का बात होता तो नाम का कोई आवश्यकता नहीं था परंतु यहा बात है ६ भूतो का इसलिये और हमे तो नाम से भूत सिद्ध करने है,मजा आजायेगा यार.............
यह एक साबर साधना है जो निष्फल नहीं होती,साधना कोई भी कर सकता है आवश्यकता है तो सिर्फ धैर्य का बाकी बाते साधना मे कोई मायने नहीं रखती



साधना विधि:-





बिना दाग के नींबू लीजिये और किसी भी अमावस्या से पहिले आनेवाले शुक्रवार के दिन निम्बू को ६ गड्डे खोदकर गाड दे,भी गड्डे पास-पास ही खोदने है,यह क्रिया सूर्य-अस्त होने के बाद करना है,प्रत्येक नींबू जिनका आकस्मिक मृत्यु हुआ है और आपने उनके नाम लिखकर रखे थे उनका ही नाम ७ बार पढ़कर गाड़ने है,जब ६ नींबू गड जायेगे तब एक गोल बनाना है लोहे के खील्ले से,गोलाकार बड़ा होना चाहिए जिसमे सभी गड्डे आजाये,गोलाकार बनाते समय मंत्र को २१ या १०८ बार बोलना है हूं हूं बंधय बंधय हूं हूं फट,यह सारा क्रिया स्मशान मे करना है॰फिर घर पे आकर स्नान करले और शांत भाव से साधना हेतु मन को पक्का कीजिये मै किसि भी हालात मे साधना को पूर्ण करुगा और किसि भी प्रकार से मन मे डर को जगह नहीं दुगा

क्रिया होने के बाद काली हकीक माला जो प्राण-प्रतिष्ठित हो उससे ही रात्रि मे १० बजे से मंत्र जाप का शुरुवात करना है,साधना से पूर्व ही गुरुमंत्र जाप एवं गुरुजी से आज्ञा मांग लीजिये और कोई भी रक्षा कवच का कम से कम एक बार पाठ करना आवश्यक है.


आगे का विधि प्रतीक्षारत है.......


                                                           कृपया इंतेजार करे........

27 Jun 2013

अभिचार-कर्म नाशक :साबर साधना



आजकल छोटी-मोटी तंत्र का क्रिया लोग शत्रुत्व के हिसाब से कराते रहेते है,थोडासा भी क्या मनमुटाव हो गया तो समजो एक तो खुद करेगे या किसी तांत्रिक को पैसा देकर दूसरों को परेशान करने का काम करेगे,ये साधना करने के बाद न अब तांत्रिक सो पाएगा ना ही प्रयोग करने वाला छोटा डॉन चैन से सो पायेगा हा हा हा.................अब तो मजा आजायेगा..........क्यूकी इस प्रयोग से तंत्र बाधा जहा समाप्त होती है वही आप पर किए जाने वाले तंत्र-मंत्र इत्यादि वापस लौट जाते है,आप पर प्रयोग करने वाले की पुंगी बज जाती है..............हर लड़की ने तो यह प्रयोग करना ही चाहिए ताकि उन्हे पता चले उनपर किसिने वशीकरण तो नहीं किया है???समस्याये अनेक परंतु उपाय एक साबर मंत्र साधना.......

साधना तो बेहद आसान है,साधना काल मे ब्रम्हचैर्यत्व आवश्यक है,माला रुद्राक्ष का हो,धोती और आसन भगवे एवं लाल रंग का हो,दीपक मे सिर्फ देशी घी होना चाहिये,लोबान का धूप जलाओ,साधना से पूर्व गणेश जी ,गुरुजी और दत्त-महाप्रभुजी का पूजन आवश्यक है॰

निम्न मंत्र का जाप किसि भी शनिवार से करे,यह साधना 11 दिन का है,साधना शाम के समय करना अनुकूल है,साधना मे नित्य 108 बार मंत्र जाप आवश्यक है,मंत्र का जब भी स्वयं के लिए प्रयोग करना हो तो 7 बार मंत्र बोलकर जल पे 3 बार फुक मारे और जल को ग्रहण करले दूसरे व्यक्ति के लिये भि यही विधान है,अगर प्रयोग आपके सामने किया जा रहा हो तो तुरंत ही ७ बार मंत्र बोलकर अपने सिने पे ३ फुक मारले........तो तंत्र-मंत्र का असर नष्ट होता है और किया गया तंत्र-मंत्र करनेवाले पे वापस लौट जाता है......



मंत्र-





जल बाँधो,जलाजल बाँधो । जल के बाँधो कीरा,नौ नगर के राजा बाँधो,टोना के बाँधो जंजीरा । धरमदास कबीर, चकमक धुरी धर के काटे जाम के जूरी । काकर फूँके, मोर फूँके । मोर गुरु धरमदास के फूँके, जिहा से आय हस, वही चले जा, सत गुरु,सत कबीर ।




आपको मातारानी सफलता प्रदान करे॰




आदेश...........

23 Jun 2013

तन्त्रोक्त माला प्राण-प्रतिष्ठा विधि




बहोत कम ही येसी साधनाये है जिसमे माला का जरूरत न हो?इसलिये माला प्राण-प्रतिष्ठा विधि-विधान अत्यंत आवश्यक है,साभिकों येसा लगता है मेरे पास दुर्लभ माला रहे जिससे मेरा हर कामना पूर्ण हो परंतु आजकल मार्केट मे येसा माला नहीं मिलता,अगर पत्थर मे जान डालकर उनका पूजन हो सकता है तो फिर माला का हर मनका भी जीवित किया जा सकता है॰

मुख शोधन करे


क्रीं क्रीं क्रीं ॐ ॐ ॐ क्लीं क्लीं क्लीं



इस मंत्र का १० बार जाप करने से मुख शोधन होगा॰

स्व-गुरु पूजन


श्रीगुरुनाथ श्री पादुकां पुजयामी ।

परमगुरु श्री पादुकां पुजयामी ।

परापरगुरु श्री पादुकां पुजयामी ।

परमेष्टिगुरुनाथ श्री पादुकां पुजयामी ।



गुरुमंत्र का कम से कम एक माला जाप करे और गुरुजी से सफलता हेतु प्रार्थना करे

निम्न मंत्र बोलकर गुरुचरनोमे भक्ति-भाव से पुष्प समर्पित कीजिये



अभीष्ट सिद्धिम मे देही शरनागतवस्तले ।

भक्त्या समर्पये तुभ्यं गुरुपंक्तिप्रपूजनम ॥



२४ बार गायत्री मंत्र बोलकर माला पर जल चढ़ाये,जिससे माला का शुद्धिकरण हो जाये और मंत्र जाप मे किसी भी प्रकार का दोष नहीं लगे॰
माला का गन्ध अक्षत और पुष्प से पूजन करके प्रार्थना करे


ॐ माले माले महामाले ,सर्वशक्तिस्वरूपिणी ।

चतुर्वर्गस्त्वयिन्यस्तस्तस्मात्वं सिद्धिदा भव ॥



माला को चैतन्य करने के लिये चेतना बीज मंत्रोसे माला के हर मणि को कुंकुम का बिंदी लगाये

चेतना बीज मंत्र-


क्लीं श्रीं ह्रीं फट




अब माला का स्तुति करते हुये माला को दहीने हाथ से ग्रहण करे


ॐ अविघ्नंकुरु माले त्वं जपकाले सदा मम ।

त्वं माले सर्वमन्त्रानामभीष्टसिद्धिकरी भव ॥



आप जिस प्रकार का माला चाहते है जैसे गुरुमंत्र जाप माला,दशमहाविद्या,महामृत्युंजय,नवग्रह.............माला,तो इस के लिये आप संबन्धित देवी/देवता का आवाहन माला मे करे या इष्ट से प्रार्थना करे के उनके प्रसन्नता प्राप्त करने हेतु अमुक मंत्र जाप हेतु माला मे अमुक शक्ति की स्थापना हो और अपने इष्ट का  आज्ञा चक्र मे ध्यान करे॰

कुल्लुका मंत्र का करमाला (उंगली से) से शिर पर १० बार जाप करे


क्रीं हुं स्त्रीं ह्रीं फट




अब माला को हाथ मे लेकर निम्न मंत्र का आवश्यक संख्या मे जाप प्रारम्भ करे



तान्त्रोक्त माला मंत्र




ॐ ऐं श्रीं सर्व माला मणि माला सिद्धिप्रदायत्री शक्तिरूपीन्यै श्रीं ऐं नम:





मंत्र जाप के बाद माला को शिर पर रखे और प्रार्थना करे॰


माले त्वं सर्वदेवानां प्रीतिदा शुभदा भव ।

शुभं कुरुष्व मे देवी यशोवीर्य ददस्व मे ॥




माला को शिर से उतारकर पुष्प समर्पित कर दे॰

सदगुरुजी भगवान को सर्व विधि-विधान हाथ मे जल लेकर जल के रूप मे समर्पित कर दीजिये और क्षमा प्रार्थना भी करनी है॰




श्रीसदगुरुजीचरनाश्रयह:...............