फैटी लीवर की बीमारी तब शुरू होती है, जब वसा (फैट्स) के अणु लीवर की कोशिकाओं में जमा हो जाते हैं , ऐसा मोटापे और मधुमेह के कारण होता है । रिसर्च से पता चलता है कि मोटापे और डायबिटीज से पीडि़त 70 से 90 फीसदी लोग इस बीमारी से ग्रस्त होते हैं , फैटी लीवर की बीमारी वर्षों तक खामोश रहती है । एक बार जब यह उस व्यक्ति को हो जाती है, जो शराब नहीं पीता या प्रति दिन 20 मिलीग्राम से भी कम शराब पीता है तो डॉक्टर इसे नॉन अल्कोहलिक स्टियोहेपेटाइटिस (स्टियो का मतलब वसा (फैट्स) और हेपेटाइटिस का मतलब सूजन है) या एनएएसएच कहते हैं ।
जीवन की प्रत्येक क्रिया तन्त्रोक्त क्रिया है॰यह प्रकृति,यह तारा मण्डल,मनुष्य का संबंध,चरित्र,विचार,भावनाये सब कुछ तो तंत्र से ही चल रहा है;जिसे हम जीवन तंत्र कहेते है॰जीवन मे कोई घटना आपको सूचना देकर नहीं आता है,क्योके सामान्य व्यक्ति मे इतना अधिक सामर्थ्य नहीं होता है के वह काल के गति को पहेचान सके,भविष्य का उसको ज्ञान हो,समय चक्र उसके अधीन हो ये बाते संभव ही नहीं,इसलिये हमे तंत्र की शक्ति को समजना आवश्यक है यही इस ब्लॉग का उद्देश्य है.
22 Jun 2018
100% Fatty Liver Treatment
फैटी लीवर की बीमारी तब शुरू होती है, जब वसा (फैट्स) के अणु लीवर की कोशिकाओं में जमा हो जाते हैं , ऐसा मोटापे और मधुमेह के कारण होता है । रिसर्च से पता चलता है कि मोटापे और डायबिटीज से पीडि़त 70 से 90 फीसदी लोग इस बीमारी से ग्रस्त होते हैं , फैटी लीवर की बीमारी वर्षों तक खामोश रहती है । एक बार जब यह उस व्यक्ति को हो जाती है, जो शराब नहीं पीता या प्रति दिन 20 मिलीग्राम से भी कम शराब पीता है तो डॉक्टर इसे नॉन अल्कोहलिक स्टियोहेपेटाइटिस (स्टियो का मतलब वसा (फैट्स) और हेपेटाइटिस का मतलब सूजन है) या एनएएसएच कहते हैं ।
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17 May 2018
बाबा वीर बुलाकी प्रत्यक्ष दर्शन साधना
थोड़ी शराब भी सिकोरै में डाल दें फिर वह सिकोरा घर से बाहर कहीं आक के पौधे की जड में रख आए सिकोरा रखने के बाद कुछ उडद के दाने मन्त्र बोलते हुए आक के पौधे पर फेंके ।
मंत्र:-
7 Apr 2018
साधना ही अमूल्य है ।
यह संसार एक विचार है अगर आपने विज्ञान में छलांग लगा दी तो उसका एक अलग महत्व है अगर आपने धर्म के क्षेत्र में छलांग लगा दी उसका अपना एक अलग क्षेत्र है यह संसार रहस्यों से भरा पड़ा है। आप एक रहस्य से पदा हटाते है फिर आपके सामने दूसरे रहस्य खड़े हो जाते है जिस प्रकार आपके मन मस्तिष्क में निरंतर विचार चलते रहते है।
हम जो शब्द सुनेगे वह शाश्वत है जब हम बिल्कुल चुप होंगे तब उनके शब्द सुनाई पड़ेगें। पराम्बा से बोलना नहीं है उन्हें सिर्फ सुनना है।
कोई अल्लाह हूँ, बोल रहा है तो कोई लाहू बोल रहा है, कोई क्लींग बोल रहा है तो कोई क्लीम बोल रहा है, कोई काली बोल रहा है, कोई पराम्बा बोल रहा है ठीक उच्चारण क्या है। मुझे पता नहीं है मैं क्या करता हूँ या मैं क्या करती हूँ, तुम ही मुझे बताओ। हम ठीक उच्चारण, व्याकरण में लगे रहते है? बाल्मिकी राम-राम जपते जपते मरा-मरा कहने लगे और वह सिद्ध हो गए।
तुम्हारा मंत्र नाभि तक पहुँच जाना चाहिए जब मंत्र नाभि तक पहुँचता है। तब हम जो भी बोलते है तब वह कुछ और मंत्र होता है। और जब हम सुनते है तो वह कुछ और हो जाता है मंत्र का सीधा संबंध आपकी प्राण चेतना से है वहाँ से निकलने वाला मंत्र सीधा ईश्वर तक पहुँचता है यहीं मंत्र रहस्य है।
साधना का अर्थ यह नहीं है कि बुराई को छोड़ो और भलाई को पकड़ो, साधना का वास्तविक अर्थ है बुराई से सत्य की तरफ आगे बढ़ो उस पर विजय प्राप्त करो भलाई में भी सत्य की तरफ आगे बढ़ो दोनो के अनुभव का निचोड़ निकालो ताकि आपकी समझ गहरी हो जाए। क्योंकि बुराई और भलाई दोनो से साधक का हृदय विस्तीर्ण हो जाए, दोनो के बीच तुम्हें अपना सामजस्य बैठाना पड़ेगा तुम अपनी नाव को बहने दो और ताकि वह अपनी सही मंजिल सागर तक पहुँच सके। पाप और पुण्य तुम्हारे किनारे बन जाएँ तुम किसी को मत चुनना न पाप को और न ही पुण्य को अगर तुम पुण्य को चुनोगे तो भी किनारे पर ही रह जाओगे और अगत तुम पाप को चुनोगे तो भी किनारे पर ही रहोगेे सागर तक नहीं पहुँच पाओगे जो दोनो का सही उपयोग कर लेगा उसमें सामंजस्य स्थापित कर लेगा तुम अपनी बुराई से भी भयभीत मत होना ।
मंत्र तंत्र यंत्र यह कोई भयभीत करने हेतु नही है अपितु यह तो जीवन का वह सच है जिसे सामान्य व्यक्ति सहजता से स्वीकृति नहीं दे पाता हसि ।आप अपने जीवन को सामान्य जीवन ना बनाये और किसी भी प्रकार का मतभेद दिमाग मे नही पाले,किसी भी मंत्र तंत्र साधना हेतु जाती धर्म समाज का कोई पाबंदी नहीं है । इस संसार मे दो जातीया है "स्त्री और पुरूष" जाती,धर्म एक ही है "मानवता",जब यह सच्चाई है तो क्यो साधना से भागना,क्यों बुराई के रास्ते पर चलना? अभी समय है एकता से सब कुछ संभव करके दिखाने के लिए ।
एक छोटासा मंत्र दे रहा हु जो जीवन मे समस्त साधना में पूर्ण सफलता देने हेतू तत्पर है,मंत्र है "ॐ ऐं ह्रीं क्लीं ॐ" इसका मन ही मन उठते बैठते चलते फिरते शुद्ध अवस्था मे जाप करे तो अवश्य ही आपका रुझान तंत्र साधना के लिए बढ़ेगा ।
हमने अभी कुछ दिनों पहिले अपना youtube चैनल बनाया है और वहां पर भी आप अन्य साधनाये देख सकते है ।
https://www.youtube.com/channel/UCNkYEFtLD7KzQzqiXd6QOkg
आदेश.....
23 Mar 2018
लिवर का ईलाज (Curing the Liver)
2. पीने वाले पानी में क्लोरीन की मात्रा का अधिक होना।
3. शरीर में विटामिन बी की कमी होना।
4. एंटीबायोटिक दवाईयों का अधिक मात्रा में सेवन करना।
5. घर की सफाई पर उचित ध्यान न देना।
6. मलेरिया, टायफायड से पीडित होना।
7. रंग लगी हुई मिठाइयों और कोल्डड्रिंक्स का प्रयोग करना।
8. सौंदर्य वाले कास्मेटिक्स का अधिक इस्तेमाल करना।
9. चाय, काफी, जंक फूड आदि का प्रयोग अधिक करना।
लिवर जब पूरी तरह से खराब हो जाता है तब इसका एक ही इलाज बचता है वह है लिवर प्रत्यारोपण। यह एक कठिन और खतरनाक आॅपरेशन होता है। इस अवस्था में पीड़ित इंसान के लिवर को हटा के नए लीवर को लगाया जाता है। इसलिए यह जरूरी है कि लीवर की समस्या का शुरूआती दौर में पता चलते ही अपने खान.पान पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
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20 Mar 2018
बाबा अघोरी साधना
मंत्र:-
।। अघोरीयो का अघोरी बाबा अघोरी,कालभैरव का भगत दिखाओ रे अपना सोटा,जहा-जहा तेरा सोटा पड़े वहां-वहां मेरा दुश्मन टूटे,दुश्मन मेरा कौन तू ही जाने,ना जाने तो कैसा अघोरीयो का बाबा अघोरी कहलाए ।।
19 Mar 2018
डाईन सिद्धि और रक्षा कवच
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14 Mar 2018
कूलदेवी/कुलदेवता पूजन पद्धती ।
कुलदेवियों की पूजा ना करने पर उत्पन्न बाधाओं का कारण कुलदेवी नहीं अपितु हमारे सुरक्षा चक्र का टूटना है। देवी अथवा देवता तब शक्ति संपन्न होते हैं जब हम समय-समय पर उन्हें हवियाँ प्रदान करते हैं व नियमित रूप से उनकी उपासना करते हैं। जब हम इनकी उपासना बंद कर देते हैं तब कुलदेवी तब कुछ वर्षों तक तो कोई प्रभाव ज्ञात नहीं होता, किन्तु उसके बाद जब सुरक्षा चक्र हटता है तो परिवार में दुर्घटनाओं, नकारात्मकता ऊर्जा “वायव्य” बाधाओं का बेरोक-टोक प्रवेश शुरू हो जाता है, उन्नति रुकने लगती है, पीढ़िया अपेक्षित उन्नति नहीं कर पाती, संस्कारों का भय, नैतिक पतन, कलह, उपद्रव, अशांति शुरू हो जाती हैं, व्यक्ति कारण खोजने का प्रयास करता है कारण जल्दी नहीं पता चलता क्योंकि व्यक्ति की ग्रह स्थितियों से इनका बहुत मतलब नहीं होता है, अतः ज्योतिष आदि से इन्हें पकड़ना मुश्किल होता है, भाग्य कुछ कहता है और व्यक्ति के साथ कुछ और घटता है। कुलदेवता या देवी सम्बन्धित व्यक्ति के पारिवारिक संस्कारों के प्रति संवेदनशील होते हैं और पूजा पद्धति, उलटफेर, विधर्मीय क्रियाओं अथवा पूजाओं से रुष्ट हो सकते हैं, सामान्यतया इनकी पूजा वर्ष में एक बार अथवा दो बार निश्चित समय पर होती है।
- श्री संजय शर्मा जी.
12 Mar 2018
महाकाल स्तोत्र एवं मंत्र साधना ।
मंत्र-
।।हूं हूं महाकाल प्रसीद प्रसीद ह्रीं ह्रीं स्वाहा ।।
स्तोत्र-
ॐ महाकाल महाकाय महाकाल जगत्पत
महाकाल महायोगिन महाकाल नमोस्तुते
महाकाल महादेव महाकाल महा प्रभो
महाकाल महारुद्र महाकाल नमोस्तुते
महाकाल महाज्ञान महाकाल तमोपहन
महाकाल महाकाल महाकाल नमोस्तुते
भवाय च नमस्तुभ्यं शर्वाय च नमो नमः
रुद्राय च नमस्तुभ्यं पशुना पतये नमः
उग्राय च नमस्तुभ्यं महादेवाय वै नमः
भीमाय च नमस्तुभ्यं मिशानाया नमो नमः
ईश्वराय नमस्तुभ्यं तत्पुरुषाय वै नमः
सघोजात नमस्तुभ्यं शुक्ल वर्ण नमो नमः
अधः काल अग्नि रुद्राय रूद्र रूप आय वै नमः
स्थितुपति लयानाम च हेतु रूपआय वै नमः
परमेश्वर रूप स्तवं नील कंठ नमोस्तुते
पवनाय नमतुभ्यम हुताशन नमोस्तुते
सोम रूप नमस्तुभ्यं सूर्य रूप नमोस्तुते
यजमान नमस्तुभ्यं अकाशाया नमो नमः
सर्व रूप नमस्तुभ्यं विश्व रूप नमोस्तुते
ब्रहम रूप नमस्तुभ्यं विष्णु रूप नमोस्तुते
रूद्र रूप नमस्तुभ्यं महाकाल नमोस्तुते
स्थावराय नमस्तुभ्यं जंघमाय नमो नमः
नमः उभय रूपा भ्याम शाश्वताय नमो नमः
हुं हुंकार नमस्तुभ्यं निष्कलाय नमो नमः
सचिदानंद रूपआय महाकालाय ते नमः
प्रसीद में नमो नित्यं मेघ वर्ण नमोस्तुते
प्रसीद में महेशान दिग्वासाया नमो नमः
ॐ ह्रीं माया – स्वरूपाय सच्चिदानंद तेजसे
स्वः सम्पूर्ण मन्त्राय सोऽहं हंसाय ते नमः ।।
फल श्रुति
इत्येवं देव देवस्य मह्कालासय भैरवी
कीर्तितम पूजनं सम्यक सधाकानाम सुखावहम।।
मंत्र-
।।हूं हूं महाकाल प्रसीद प्रसीद ह्रीं ह्रीं स्वाहा ।।
काल उसका क्या करे जो भक्त हो महाकाल का'
25 Feb 2018
तंत्र दोष निवारण प्रयोग (Black Magic Removel)
11 Feb 2018
शिव दर्शन अघोरी मंत्र साधना
हे मेरे प्रिय भोलेनाथ, आपके कृपा से मैं जीवित हु ।
हर सांस भी आपको दे दु तो,वो भी आपकी ही है,अब आपही बताए आपको क्या अर्पित कर सकता हूँ ?
यही बात है जो हर शिव भक्त अपने दिल मे रखता है,करे तो क्या करे अपने प्रिय ईष्ट भगवान शिव जी के लिए,बहोत कुछ करने की चाह होती है और मन मे एक ही स्वप्न होता है के मैं शिव जी का आशिर्वाद प्राप्त करु ।
13 फरवरी को महाशिवरात्रि का दिव्य पावन अवसर है जिसे खोना नही चाहिए अपितु अपने ईष्ट के कृपा को प्राप्त करने के लिए भक्ति, सेवा या मंत्र जाप अवश्य करना चाहिए । कोई एक बुरा आदत छोड़ ही दो इस महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर जैसे शराब पीना,सिगरेट पीना,मास खाना,घुटका खाना या फिर तंबाकू,जो भी इसमें से किसी भी शिव भक्त को बुरा आदत हो वह अब छोड़ ही दो । शिव भक्त को त्याग करना आना चाहिए और बुरे से बुरे आदतों को त्याग कर जो भी शिव भक्त भक्तिमार्ग पर आगे बढ़ता है उसे शिव कृपा अवश्य ही प्राप्त होती है ।
अघोरी बड़े नशे में धुत होते है और उनका दिमाग सातवे आसमान पर बैठकर बाते करता है के "मैं ये हु-मैं वो हु,मैं ये कर सकता हु-मैं वो कर सकता हु" । हमेशा याद रखो ऐसे लोग अघोरी नही अपितु चप्पल चोर होते है और इन्हें नशा करने के अलावा कुछ नही आता है । मैंने अपने जीवन मे ऐसे अघोरी देखे है जिनको नशे की आदत नही है और कुछ तो ऐसे भी देखे के वह चाहे कितना भी शराब पिये उनको नशा होता ही नही था । सच्चा अघोरी हो या फिर सच्चा शिव भक्त हो वह सिर्फ एक ही बात समझता हैं, शिवभक्ती से बड़ा नशा इस संसार में है ही नही ।
भक्त ही समझे भक्ति का नशा,
और कौन जाने क्या होता है नशा ।
इसलिए कह रहा हु के इस महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर शिवभक्ती के नशे में डूब जाओ परंतु बेकार के चीजो से नशा मत करो और अब तक नशा करते आये हो तो उसको अब त्याग दो,तो ही आप सच्चे शिवभक्त कहलाओगे अन्यथा ढोंगी भक्तों को हर बार भगवान से भिक मांगते रहना पड़ता है और सच्चे भक्तों को भगवान कुछ भी मांगने से पहिले ही आशीर्वाद के रूप में जो चाहे वह दे देते है ।
शिव जी पर तो शिवपुराण के साथ साथ कई ग्रंथ लिखे हुए है परंतु भोले बाबा को कैसे प्रसन्न करे यह तो रावण ने इस दुनिया को सिखाया था । माँ सती में स्वयं के जीवन को त्याग दिया तब जाकर कहा माँ पार्वती के रूप में आज भी वह भोले बाबा के साथ विराजमान है,यही बात रावण ने समझ ली और दशानन रावण अपने मुण्ड को काट कर चढ़ा रहा था,वह भी अपने जीवन को त्याग रहा था परंतू शिव जी ने उसको रोक लिया और आत्मलिंग प्रदान कर दिया ।
अब रावण तो दूसरा कोई बनना है ही नही परंतु कुछ तो त्याग करके देख ही लो और नशे का त्याग करोगे तो गारंटी के साथ बोल रहा हु मरोगे नही ।
मेरा काम था समझाना,जिसे समझना है वो समझ लेगा और इसी विश्वास के साथ आज का यह अद्वितीय मंत्र साधना दे रहा हु ।
यह मंत्र मुझे एक विचित्र अघोरी बाबा ने दिया था,इस मंत्र से बहोत सारे काम होते है परंतु मैं सिर्फ आपको शिव जी के कृपा को प्राप्त करने हेतु साधना विधान बता रहा हु,बाकी इस मंत्र से काम कैसे करने है वह गोपनीय रखना आवश्यक है ।
महाशिवरात्रि के रात्रि में अन्नग्रहण ना करे,जो भी खाना हो वह सूर्यास्त से पहिले ही खाना है । शिवलिंग या शिव जी के चित्र के सामने एक गाय के घी का दीपक जलाएं और उस दीपक के लौ में देखते हुये 3 घंटे तक जाप करे तो अवश्य ही शिव जी का दर्शन संभव है । साधना रात्रि में 9.30 बजे के बाद कभी भी शुरू करे सिर्फ 12 बजे से पहिले शुरू करे । आसन वस्त्र किसी भी रंग का चलेगा और मंत्र जाप के समय उत्तर दिशा में मुख करके बैठना है । जलते हुए दीपक के लौ में भोले बाबा के दर्शन संभव है,ऐसा मत सोचो के सामने आकर प्रत्यक्ष होंगे क्योंके प्रत्यक्ष दर्शन हेतु कठिन तपस्या की आवश्यकता होती है । साधना में धूपबत्ति जला सकते हो परंतु साधना कक्ष में ज्यादा धुवा मत करो नही तो आंखों में जलन होगा । दीपक के लौ में त्राटक करना है इसलिए ज्यादा से ज्यादा आंखों को खुला रखो ।
अघोर मंत्र
।। बम बम भोले,अघोर गौरा पारबती,शिवजी कुँवारा संग रहे ।।
इसमें सिर्फ शब्द है,नाही ॐ है और नाही आदेश है और नाही कोई दूहाई है फिर भी यह एक अद्वितीय अघोर मंत्र है । मंत्र जाप के समय ज्यादा गर्मी महसूस हो तो साधना में से उठ जाना उचित रहेगा क्योंके साधना जबरदस्ती संपन्न मत करो ।
आदेश
।।ॐ नमः शिवाय ।।
Shiv Darshan Aghori Mantra Saadhna
"My Dear Lord, I am alive by your grace. Every breath that I take belongs to you. What can I offer to you when everything that is mine has been given by you "
These are the thoughts of every Shiv bhakt. Every Shiv bhakt wants to do a lot for his Lord and carries the dream that one day He or She will receive the Lord's blessing.
This year, Mahashivratri is falling on 13th February, and it is a very auspicious time to get Lord Shiva's blessings through bhakti ( devotion), seva ( servitude) or Mantra jap. This Mahashivratri, leave some of the bad habits that you've been carrying uptill now, like drinking alcohol, smoking cigarettes, eating meat, or even chewing tobacco. Every Shiv bhakt should learn to sacrifice, and anyone who leaves his bad habits and follows the bhakti path of Shiva always receives His blessings.
A lot of aghoris stay intoxicated and say things like " I'm this - I'm that- I can do this- I can do that". You should know that these people are not real aghoris, they are fakes and they don't know anything except staying intoxicated. I've seen aghoris that do not take intoxicants and I've also seen aghoris who can drink huge quantities of alcohol and still not get drunk. A real shiv bhakt only knows one thing -
Only a devotee can understand the intoxicantation of devotion,
No one else can understand intoxication.
That's why I'm saying, this year get intoxicated with the love of lord but leave other intoxicants like alcohol and cigarettes. And if you've been doing so uptill now, stop. Only then you will be seen as a true shiv bhakt. If you, then you are no different from the fake bhakts of God who have to beg Him for everything while the real ones get everything from Him without asking.
There have been a lot of Granths written about Lord Shiva, including the Shiv puran, but it was Ravana who taught people how to impress Him. He understood that Maa Sati had to give up her life before she could get a permanent place beside the Lord. So even he was ready to cut off his head and tribute it to Him, but he was stopped by Shiva who rewarded him with the Atma-lingam.
Learn how to sacrifice from ravana, and leave intoxicants. You won't die, I assure you.
My work was to advise, and that is done. Those who have wisdom will follow what has been said. Keeping that in mind, I'm giving a mantra has no double. This was given to be by an aghori baba, it is used for a lot of purposes, but only giving the vidhi to get blessing of the lord, nothing else.
Don't eat at night on mahashivratri, eat before the sunset. Light a cow ghee lamp/diya in front of a Shivling or a photo of Lord Shiva, and stare into its flame continously while chanting the mantra for 3 hours. If done with diligence, then Darshan of the lord is definitely possible. Begin after 9:30 pm anytime but before 12 am. The asan and clothes can be of any colour but the direction has to be North. Darshan of lord Shiv is definitely possible inside the flame of the lamp. Don't think there will be a pratyaksh darshan, that is only possible through very difficult austerities. You can light Dhoop batti but take care that the room does not get filled with smoke or your eyes will start to tear. Keep your eyes open as much as you can as you need to do tratak while staring into the flame.
Mantra
" ।। बम बम भोले,अघोर गौरा पारबती,शिवजी कुँवारा संग रहे ।।
" Bum Bum Bhole, Aghor Goura Parbati, Shivji Kunwara Sang Rahe"
There are only words in this mantra, but it is very powerful. If you feel hot during the chant, it would be better to get up rather than forcefully trying to complete the saadhna.
Aadhesh...
4 Feb 2018
सूर्यग्रहण मंत्र साधना
लकानां संजीवन सिद्धर्थे जपे विनियोगः।
अपने दाहिने हाथ से नारियल को स्पर्श करते हुए निम्न मंत्रों का उच्चारण करें –
Om hreem hreem hreem shat panchaaksharaanaam utkilay utkilay swaahaa,om jum sarvmantra yantra tantranaam sanjivanam kuru kuru swaahaa
Hasaim hasakareem hasaim
अन्य किसी मुहूर्त पर साधना प्रारम्भ करने पर सात दिन तक नित्य साधना सम्पन्न करने के पश्चात् आठवें दिन समस्त साधना सामग्री को किसी निर्जन स्थान पर जमीन में गाड़ दें। यह विशेष तांत्रोक्त प्रयोग सूर्यग्रहण और होली पर करे तो निच्छित ही सफलता मिलते हुए देखा गया है ।








