8 Dec 2015

पहला सुख-आरोग्य (Health).

मुंगा गणपति स्थापन प्रयोग से जीवन में धन, ऐश्वर्य, मान-पद और प्रतिष्ठा हो परन्तु यदि जीवन में बीमारी है, रोग है, तो वह सब कुछ धन, ऐश्वर्य व्यर्थ हो जाता है, न तो वह सही ढंग से स्वादिष्ट भोजन कर सकता है, न वह घूम फिर सकता है और न परिवार का सुख ले सकता है इसीलिए शास्त्रों में निरोगी शरीर को जीवन का पहला और उत्तम कोटि का सुख माना है।

मनुष्य प्रयत्न करता है, परन्तु फिर भी वह इन रोगों से मुक्त नहीं हो पाता, कोई न कोई बीमारी या कष्ट उसे घेरे ही रहते हैं, इसके लिए विश्वामित्र संहिता में एक उत्तम कोटि की मुंगा गणपति साधना दी गई है, जिससे साधक सभी प्रकार के रोगों से मुक्त होकर पूर्ण सुख प्राप्त कर सकता है।

शास्त्रों में गणपति के मुंगा स्वरूप को आरोग्यता, बल वृद्धि, प्राण ऊर्जा प्रदायक बताया गया है। गणपति के इस विशिष्ट स्वरूप का विधि विधान सहित पूजन सम्पन्न करने से ऊर्जा, चेतना एवं आरोग्यता प्राप्त होती है।





साधना विधान:-

मुंगा गणपति के प्राणप्रतिष्ठित विग्रह पर किसी भी बुधवार अथवा चतुर्थी को यह साधना सम्पन्न कर सकते हैं। यह साधना प्रातः 7 बजे से पूर्व सम्पन्न करें।साधना के प्रारम्भ में सर्वप्रथम गुरुदेव का ध्यान करें।इसके पश्चात् अपने सामने एक बाजोट पर लाल वस्त्र बिछाकर उस पर पुष्पों का आसन देकर मुंगा गणपति को स्थापित करें। भगवान गणपति के समक्ष घी का दीपक प्रज्वलित कर दें। फिर ‘ गं गणपतयै नमः’ मंत्र का उच्चारण करते हुए गणपति विग्रह पर तीन आचमनी जल अर्पित करें।

इसके पश्चात मुंगा गणपति को सिन्दूर से तिलक कर, लाल चन्दन, अक्षत एवं दूर्वादल अर्पित करें। पूजन में सम्मिलित सभी व्यक्ति हाथ जोड़कर भगवान गणपति के मुंगा स्वरूप से प्रार्थना करें कि –

‘हे! मुंगा स्वरूप गणपति आप हमारे जीवन में आरोग्यता बनाएं रखें एवं हमें बीमारियों, विपदाओं से बचाएं।’

इसके पश्चात साधक को किसी भी माला (स्वयं की) से निम्न मंत्र की 11 माला मंत्र जप करना है। परिवार के सदस्य भी अपनी स्वयं की माला अथवा जिनके पास माला नहीं है वे बिना माला के भी इस मंत्र का निरन्तर जप करें।



मंत्र:-

॥ ॐ ह्रीं गीं ह्रीं रोगनाशाय फट् ॥

Om hreem geem hreem roganaashaay phat



आरोग्यता प्राप्ति की यह बहुत छोटी लेकिन बहुत ही शक्तिशाली साधना है। इस साधना को तीन बुधवार अथवा तीन चतुर्थी तक निरन्तर सम्पन्न करना है, तीन बार साधना सम्पन्न करने के पश्चात् लाल वस्त्र में सम्पूर्ण साधना सामग्री को बांधकर जल में विसर्जित कर दें।


विशेष – इस साधना को परिवार के सभी सदस्य एक साथ भी सम्पन्न कर सकते हैं।


किसी व्यक्ति विशेष के आरोग्य के लिये भी मुंगा गणपति साधना सम्पन्न की जा सकती है, उस व्यक्ति के नाम से संकल्प लेकर पूजन सम्पन्न करें, मंत्र जप करें। मंत्र जप के पश्चात् मुंगा गणपति पर अर्पित किए हुए सिन्दूर से रोगी को तिलक करें। इस साधना से शीघ्र ही रोगी व्यक्ति को स्वास्थ्य लाभ होने लगता है। पुराने कोइ भी रोग में मुंगा गणपति की पूजा से शीघ्र ही फल प्राप्त होता है।



वैदिक ज्योतिष के अनुसार मुंगा रत्न मंगल ग्रह का प्रतिनिधित्व करता है। यदि जन्म कुंडली में मंगल अच्छे प्रभाव दे रहा हो तो मुंगा अवश्य धारण करना चाहिए या फिर मुंगा गणपति जी का पुजन अवश्य करे।कुंडली में मंगल कमज़ोर होने की स्थिति में मुंगा धारण करने से उसे बल दिया जा सकता है । मुंगा धारण करने से हमारे पराक्रम में वृद्धि होती है आलस्य में कमी आती है । मुंगा कुंडली में स्थित मांगलिक योग की अशुभता में भी कमी लता है तथा इस योग के द्वारा होने वाली हानियों को ख़त्म करता है, स्त्रियों में रक्त की कमी और मासिक धर्म, और रक्तचाप जैसी परेशानियो को नियंत्रित करने में भी मुंगा अत्यंत लाभकारी होता है ।अदि आप में साहस की कमी और शत्रुओं से सामना करने की हिम्मत नहीं है तो इसमें मुंगा आपकी सहायता कर सकता है क्योकि इसके पहने से हमारे मनको बल प्राप्त होता है और फल स्वरूप हमारे भीतर निडरता आ जाती है और शत्रुओं का सामना करने की हिम्मत आ जाती है । जिन बच्चों में आत्मविश्वास की कमी और दब्बूपन मोजूद होता है उन्हें मुंगा गणपति जी का पुजन रोज करना चाहिए ताकि वे दुनिया के सामने खुल कर आ सके । पुलिस, या फोज के अधिकारिओं को मुंगा अवश्य धारण करना चाहिए । आभूषण और रेस्तरांट के व्यवसाय से जुड़े लोगो के लिए मुंगा अति आवश्यक है यह इन व्यवसायों में सफलता प्रदान करता है । मंगल के अच्छे प्रभावों को प्राप्त करने के लिए मुंगा गणपति स्थापना आवश्यक है। इसका रंग सिंदूरी लाल और बिना दाग का होना चाहिए । लेकिन सभी जातक को मुंगा धारण करने से पहले किसी अच्छे और अनुभवी ज्योतिष आचार्य की सलाह अवश्य लेनी चाहिए परंतु मुंगा गणपति पुजन करने हेतु सिर्फ आस्था जरुरी है और विश्वास जरुरी है।

मुंगा गणपति –1150/- रुपये.






आदेश.....