8 Dec 2015

पांचवां सुख-श्रेष्ठ गृहस्थ जीवन.

श्रेष्ठ गृहस्थ जीवन,गृहस्ख सुख में वृद्धि,प्रेम में निरन्तर वृद्धि । यदि घर में सभी सुख हों परन्तु पति-पत्नी में आपस में संदेह, कलह का वातावरण हो या आपस में सामंजस्य न हो तो ऐसा घर नरक के समान बन जाता है।

लड़का या लड़की का विवाह समय पर नहीं हो पा रहा हो या उसमें बाधाएं आ रही हों या बहू घर में लड़ाई-झगड़े करती हो, कलह करती हो, उसका व्यवहार ठीक नहीं हो अथवा तलाक की नौबत आ गई ऐसी सारी स्थितियों में यह एकाक्षी नारियल घर में स्थापित करने से अनुकूलता प्राप्त होती है।

एकाक्षी नारियल-

व्यक्ति का जीवन चाहे कितना ही कलुषित हो, उसका भाग्य चाहे कितना ही मन्द हो परन्तु यदि उसके घर में एकाक्षी नारियल स्थापित हो जाए तो उसके जीवन में अनायास ही वैभव, सुख, समृद्धि, आनन्द का वास होने लग जाता है।

जिस घर में एकाक्षी नारियल होता है वहां स्वयं विष्णु भगवान वास करते हैं और विष्णु के साथ उनकी अर्द्धांगिनी भगवती लक्ष्मी भी आती हैं और घर परिवार से रोग, शोक का नाश होने लगता है। दाम्पत्य जीवन में सौहार्द्र बढ़ने लगता है, अनुकूलता आने लगती है और एक चिर स्थायी आनन्द का अनुभव होने लगता है।
ब्रह्माण्ड में भगवान विष्णु तथा लक्ष्मी का दाम्पत्य जीवन पूर्णता का प्रतीक है। जिस प्रकार भगवान विष्णु की अर्धांगिनी भगवती लक्ष्मी अपने सम्पूर्ण गुणों के साथ विष्णु के साथ रमण कर पूरे संसार लोक का पालन करती हैं। उसी प्रकार प्रत्येक नर-नारी का दाम्पत्य जीवन आनन्दमय होना चाहिए और पूरे परिवार का पालन-पोषण होना चाहिए। विष्णु और लक्ष्मी की कृपा से घर-परिवार में आनन्दप्रदायक वातावरण बना रहता है तथा दाम्पत्य जीवन में आ रही बाधाओं की समाप्ति होती है।

एकाक्षी नारियल स्थापन विधान:-

गृहस्थ सुख में पूर्णता हेतु एकाक्षी नारियल का उपयोग होता है, यह एकाक्षी नारियल चैतन्य हो और शिव-गौरी मंत्र से सिद्ध हो, साथ ही साथ एकाक्षी नारियल पर पूर्ण प्राणप्रतिष्ठिा युक्त प्राण-संजीवनी क्रिया की हुई हो।

किसी भी शुक्रवार के दिन सफेद वस्त्र पहन कर पूर्व की ओर मुंह कर बैठ जाएं और अपने सामने लकड़ी के बाजोट पर सफेद कपड़ा बिछा दें। गृहस्थ सुख हेतु एकाक्षी नारियल स्थापन की इस साधना को सम्पन्न करने हेतु गणपति और गुरु का ध्यान करें तथा मानसिक आशीर्वाद प्राप्त करें।

इसके पश्चात् दाहिने हाथ में जल लेकर संकल्प करें कि

‘मैं अपने गृहस्थ जीवन को सुखमय और आनन्द पूर्वक व्यतीत करने के लिए भगवान विष्णु और लक्ष्मी को साक्षी रखकर अपने घर में एकाक्षी नारियल स्थापित कर रहा हूं। भगवान विष्णु और लक्ष्मी की कृपा से मेरा गृहस्थ जीवन आनन्दमय हो।’

इसके पश्चात् एक स्टील की प्लेट में कुंकुम से स्वस्तिक चिन्ह बनाकर उस पर एकाक्षी नारियल को स्थापित कर दें।

इसके बाद एकाक्षी नारियल पर दो आचमनी जल चढ़ाएं और अष्टगंध का तिलक करें। इसके पश्चात् एकाक्षी नारियल का पूजन अक्षत पुष्प, कुंकुम, धूप, दीप, नैवेद्य से करें। इसके बाद सफेद हकीक माला से निम्न मंत्र की 3 माला मंत्र जप करें।

मंत्र:-

।। ॐ एकाक्षी नारिकेल सर्व दोषान् त्याज्य मम् मनोवांछित कार्य सिद्धय सिद्धय ह्रीं ऐं ॐ फट्।।

इस साधना में प्रयुक्त सफेद हकीक माला भी एकाक्षी नारियल मंत्र से सिद्ध हो और गजलक्ष्मी देवी चेतना मंत्र से प्राण प्रतिष्ठिा युक्त होनी चाहिए।

यह प्रयोग आठ दिन का है और नित्य प्रातःकाल ही मंत्र जप किया जाना चाहिए, आठ दिन पश्चात् एकाक्षी नारियल को सफेद वस्त्र में बांध कर अपने शयन कक्ष में रख दें, तीन माह पश्चात् एकाक्षी नारियल को दक्षिणा सहित विष्णु या लक्ष्मी मंदिर में अर्पित कर दें। इस साधना को पति-पत्नी दोनों अथवा दोनों में से कोई एक भी सम्पन्न कर सकता है।

साधना सामग्री-₹.1150/-, ₹. 3600/-.





आदेश....